वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global Multidimensional Poverty Index — MPI) UNDP और OPHI (Oxford Poverty & Human Development Initiative) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया जाता है। यह केवल आय-आधारित गरीबी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर — तीन आयामों में गरीबी को मापता है।
अलकायर-फोस्टर पद्धति
Sabina Alkire और James Foster ने 2007 में यह पद्धति विकसित की। इसकी विशेषता:
- तीन आयाम: स्वास्थ्य (Health), शिक्षा (Education), जीवन स्तर (Living Standards)।
- 10 सूचक: पोषण, बाल मृत्यु दर, स्कूली शिक्षा, उपस्थिति, खाना पकाने का ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति।
- यदि कोई व्यक्ति 10 में से कम-से-कम 3 सूचकों में वंचित है तो वह बहुआयामी गरीब माना जाता है।
MPI की संरचना
| आयाम | भार | सूचक |
|---|---|---|
| स्वास्थ्य | 1/3 | पोषण, बाल मृत्यु दर |
| शिक्षा | 1/3 | स्कूली शिक्षा के वर्ष, बच्चों की उपस्थिति |
| जीवन स्तर | 1/3 | खाना पकाने का ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति |
भारत का प्रदर्शन (2024)
UNDP-OPHI की 2024 वैश्विक MPI रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
- भारत ने 2005-06 से 2019-21 के बीच 41.5 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला।
- MPI में भारत का स्कोर 2005-06 के 0.283 से घटकर 2019-21 में 0.069 पर आया।
- बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान में अभी भी उच्च बहुआयामी गरीबी।
- पोषण और बाल मृत्यु दर अभी भी प्रमुख चुनौती।
MPI की सीमाएँ
- सर्वेक्षण डेटा पर निर्भरता — डेटा पुराना हो सकता है।
- भार और सूचकों का चयन व्यक्तिपरक।
- असमानता और भेदभाव को पर्याप्त रूप से नहीं मापता।
UPSC के लिए प्रासंगिकता
GS II और GS III में MPI गरीबी मापन, मानव विकास, UNDP रिपोर्ट के अंतर्गत महत्त्वपूर्ण है। अलकायर-फोस्टर पद्धति, MPI के तीन आयाम, भारत की प्रगति और सीमाएँ — ये सभी परीक्षा में पूछे जाते हैं।