वैश्वीकरण (Globalisation) और शहरीकरण (Urbanisation) भारतीय समाज के दो सबसे शक्तिशाली रूपांतरकारी बल हैं। 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद से दोनों प्रक्रियाओं ने भारत के सामाजिक ढाँचे, पारिवारिक संरचना, जीवनशैली और सांस्कृतिक मूल्यों को गहराई से बदला है।
वैश्वीकरण के सामाजिक परिणाम
सकारात्मक प्रभाव
- आर्थिक विकास: GDP वृद्धि, रोज़गार, जीवन स्तर में सुधार।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: बेहतर सुविधाएँ, विदेशी संस्थानों तक पहुँच।
- महिला सशक्तीकरण: कार्यस्थल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी।
- सांस्कृतिक विविधता: वैश्विक विचारों और मूल्यों का प्रवेश।
- सूचना क्रांति: इंटरनेट से लोकतंत्र और पारदर्शिता।
नकारात्मक प्रभाव
- असमानता: धनी-निर्धन के बीच अंतर बढ़ा।
- सांस्कृतिक समरूपता: पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव, स्थानीय परंपराओं का क्षरण।
- अनौपचारिक श्रम का शोषण: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में सस्ते श्रम का दोहन।
- कृषि संकट: सब्सिडी कम होने से किसानों की कठिनाई।
- सामाजिक विघटन: संयुक्त परिवार टूटना, एकाकीपन।
शहरीकरण के सामाजिक परिणाम
2011 में भारत की 31.16% जनसंख्या शहरी थी। 2050 तक 50%+ होने का अनुमान। शहरीकरण की दर 2.3% वार्षिक है।
सकारात्मक प्रभाव
- जाति-आधारित भेदभाव में कमी — शहर में पहचान गुमनाम।
- शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार के बेहतर अवसर।
- सामाजिक गतिशीलता।
नकारात्मक प्रभाव
- झुग्गी-झोपड़ी: भारत में 6 करोड़ से अधिक झुग्गी निवासी।
- प्रवासन का दबाव: गाँवों का पलायन, कृषि श्रमिकों की कमी।
- अवसंरचना संकट: जल, बिजली, सीवेज की कमी।
- अपराध और असुरक्षा।
- पर्यावरण प्रदूषण।
स्मार्ट सिटी मिशन
100 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने की योजना। ICT, नागरिक सुविधाएँ, सतत विकास पर ध्यान। AMRUT (Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation) और PM Awas Yojana पूरक योजनाएँ हैं।
यूपीएससी के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु
- वैश्वीकरण: लाभ (GDP, शिक्षा) + हानि (असमानता, सांस्कृतिक क्षरण)।
- शहरीकरण: 31% (2011) → 50%+ (2050 अनुमान)।
- झुग्गी: 6 करोड़+ शहरी गरीब।
- स्मार्ट सिटी: 100 शहर।
- AMRUT: शहरी नवीकरण।