अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 — जिसे वन अधिकार अधिनियम (FRA) भी कहते हैं — ने वन भूमि पर रहने वाले लाखों आदिवासियों और वन-निर्भर समुदायों के ऐतिहासिक अन्याय को सुधारने का प्रयास किया।
FRA के अधिकारों के प्रकार
1. व्यक्तिगत वन अधिकार (IFR)
- अधिकतम 4 हेक्टेयर वन भूमि पर खेती का अधिकार।
- केवल वे व्यक्ति जो 13 दिसंबर 2005 से पहले से वन भूमि पर निर्भर हैं।
2. सामुदायिक वन अधिकार (CFR)
- सामुदायिक वन संसाधनों का उपयोग और प्रबंधन।
- चारागाह, मत्स्य पालन, जल निकाय, लघु वन उपज (MFP) पर अधिकार।
3. सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFRR)
धारा 3(1)(i) के तहत समुदाय को परंपरागत रूप से संरक्षित वन क्षेत्र का प्रबंधन और संरक्षण करने का अधिकार।
ग्राम सभा की केंद्रीय भूमिका
FRA में ग्राम सभा को अधिकारों की पहचान, सत्यापन और वन प्रबंधन में केंद्रीय भूमिका दी गई है। यह FRA को अन्य कानूनों से अलग बनाता है — यहाँ शक्ति नीचे से ऊपर की ओर जाती है।
FRA का कार्यान्वयन: आँकड़े
| श्रेणी | दाखिल दावे | मंजूर | खारिज |
|---|---|---|---|
| व्यक्तिगत (IFR) | ~42 लाख | ~21 लाख | ~20 लाख |
| सामुदायिक (CFR) | ~6 लाख | ~1 लाख | ~5 लाख |
चुनौतियाँ
- उच्च अस्वीकृति दर: लगभग 50% दावे खारिज — अक्सर उचित सुनवाई के बिना।
- वन अधिकारियों का प्रतिरोध: वन विभाग FRA को अपने अधिकार क्षेत्र के लिए खतरा मानता है।
- CFRR का कम उपयोग: सबसे शक्तिशाली प्रावधान, पर सबसे कम लागू।
- नक्शों और दस्तावेजों का अभाव: सत्यापन के लिए पर्याप्त साक्ष्य की कमी।
सर्वोच्च न्यायालय: Wildlife First बनाम भारत संघ (2019)
2019 में SC ने एक आदेश दिया था जिसमें उन लाखों आदिवासियों को हटाने का निर्देश था जिनके दावे खारिज हुए थे। बाद में मानवाधिकार संगठनों और सरकार के हस्तक्षेप से इस आदेश पर रोक लगी और पुनर्विचार हुआ।
UPSC के लिए प्रासंगिकता
GS II में FRA जनजातीय अधिकार, कल्याण, वन नीति और संवैधानिक नैतिकता के अंतर्गत महत्त्वपूर्ण है। IFR, CFR, CFRR, ग्राम सभा की भूमिका, लघु वन उपज और कार्यान्वयन की चुनौतियाँ — ये सभी परीक्षा में पूछे जाते हैं।