अफ़ग़ानिस्तान में भारत के सभ्यतागत और रणनीतिक हित गहरे हैं — यह देश चीन, ईरान, पाकिस्तान और मध्य एशियाई गणराज्यों से सटा हुआ है। 15 अगस्त 2021 को तालिबान के सत्ता पर क़ब्ज़े ने भारत के 20 वर्षों के राजनयिक एवं विकास निवेश को एक झटके में मिटा दिया। तब से भारत व्यावहारिक रवैये पर क़ायम है: औपचारिक मान्यता नहीं, परंतु काबुल में एक तकनीकी मिशन, मानवीय सहायता और तालिबान प्रतिनिधियों के साथ शांत-संवाद। UPSC GS II के लिए यह विषय भारत के विस्तारित पड़ोस, चाबहार के माध्यम से कनेक्टिविटी, पाकिस्तान-चीन-तालिबान धुरी और मूल्य-आधारित मानदंडों को न मानने वाली सरकार से जुड़ने की चुनौतियों की परीक्षा लेता है।
भारत के लिए अफ़ग़ानिस्तान का महत्व
रणनीतिक
- मध्य एशिया का प्रवेशद्वार — पाकिस्तान को बायपास करते हुए।
- पाकिस्तानी रणनीतिक गहराई के विरुद्ध संतुलन।
- चीन की BRI और CPEC महत्वाकांक्षाओं में महत्वपूर्ण कारक।
ऊर्जा
- TAPI पाइपलाइन — तुर्कमेनिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान-भारत — केवल अफ़ग़ान स्थिरता पर ही साकार हो सकती है।
संसाधन
- अफ़ग़ानिस्तान में अनुमानित USD 1-3 ट्रिलियन मूल्य की खनिज संपदा है — ताँबा, लोहा, लिथियम, दुर्लभ मृदा तत्व।
- हाजीगक लौह अयस्क खदान को ग़नी सरकार के दौर में एक भारतीय कंसोर्टियम विकसित करने वाला था।
सुरक्षा
- आतंकवाद का फैलाव — अफ़ग़ान धरती पर ऐतिहासिक रूप से भारत-केंद्रित समूह (LeT, JeM, हक़्क़ानी नेटवर्क) सक्रिय रहे हैं।
- मादक पदार्थ — 2022-23 तक अफ़ग़ानिस्तान विश्व का सबसे बड़ा अफ़ीम उत्पादक देश था।
चीन कारक
- अफ़ग़ानिस्तान में BRI विस्तार — चीनी खनन एवं बुनियादी ढाँचे की रुचि।
- दुर्लभ मृदा तत्व — चीन पहुँच चाहता है; भारत को प्रतिस्पर्धा करनी होगी।
- चीन-पाकिस्तान-तालिबान गठजोड़ भारत की स्थिति को जटिल बनाता है।
ऐतिहासिक संबंध
2001 से पहले
भारत के संबंध जटिल रहे हैं — 1990 के दशक में भारत ने तालिबान के विरुद्ध उत्तरी गठबंधन (Northern Alliance) का समर्थन किया।
2001-2021: 9/11 के बाद का निवेश
- USD 3 बिलियन से अधिक की विकास सहायता — भारत का सबसे बड़ा सहायता प्राप्तकर्ता।
- अफ़ग़ान संसद भवन का निर्माण (USD 90 मिलियन)।
- हेरात में सलमा बाँध (अफ़ग़ान-भारत मैत्री बाँध) का निर्माण — 42 मेगावाट, 2016 में उद्घाटन।
- ज़रंज-डेलाराम राजमार्ग, जो चाबहार मार्ग से आने वाले माल को अफ़ग़ान रिंग रोड से जोड़ता है।
- ICCR और ITEC के तहत हज़ारों छात्रवृत्तियाँ।
- इंदिरा गांधी बाल स्वास्थ्य संस्थान के माध्यम से चिकित्सा सहायता।
- अफ़ग़ान राष्ट्रीय सेना के अधिकारियों का प्रशिक्षण; राजदूत-स्तर की राजनयिक उपस्थिति।
अगस्त 2021 की निकासी
भारत ने ऑपरेशन देवी शक्ति के माध्यम से अपने राजनयिक कर्मचारियों को निकाला और 650 से अधिक भारतीयों तथा अफ़ग़ान हिंदू/सिखों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया।
तालिबान की वापसी: भारत के हितों पर प्रभाव
कनेक्टिविटी परियोजनाएँ
चाबहार बंदरगाह — अफ़ग़ानिस्तान में भारत का प्रमुख आधार — कम मात्रा में ही सही, संचालनयोग्य बना हुआ है। चाबहार के ज़रिए अफ़ग़ान आयात मार्ग छोटे पैमाने पर जारी है।
पाकिस्तान के लिए रणनीतिक गहराई
तालिबान के पाकिस्तान की ISI से ऐतिहासिक रिश्ते इस्लामाबाद को लीवरेज देते हैं, हालाँकि 2022 के बाद से TTP-तालिबान तनाव ने इस मान्यता को जटिल बना दिया है।
नागरिक निवेश पर ख़तरा
भारतीय बुनियादी ढाँचे की संपत्तियाँ — संसद, बाँध, अस्पताल — आज भी मौजूद हैं, परंतु तालिबान-शासित क्षेत्र में।
चीन-पाकिस्तान-तालिबान धुरी
यह बीजिंग की पकड़ बढ़ाती है और भारत की मध्य एशिया तक पहुँच को कमज़ोर करती है।
मादक पदार्थ व्यापार
तालिबान ने 2022 में अफ़ीम पर प्रतिबंध लगाया, जिससे हेरोइन की आपूर्ति घटी — परंतु बामियान में एफेड्रा से मेथैम्फेटामाइन उत्पादन बढ़ा है, जिसने क्षेत्रीय तस्करी मार्गों को प्रभावित किया है।
बदलते क्षेत्रीय गठबंधन
रूस, चीन, ईरान और पाकिस्तान — सभी ने भारत से पहले और कहीं अधिक खुले रूप में तालिबान से संपर्क बनाया। भारत ने पिछले दरवाज़े से संवाद किया।
अफ़ग़ान धरती से सुरक्षा ख़तरा
ISKP (इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत) एक नई चिंता बनकर उभरा है — भारतीय दूतावास, रूसी और ईरानी हितों पर हमलों से।
भारत की राजनयिक प्रतिक्रिया
कोई औपचारिक मान्यता नहीं
भारत ने इस्लामिक अमीरात ऑफ़ अफ़ग़ानिस्तान को मान्यता नहीं दी है। भारत का रुख़: समावेशी सरकार, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के अधिकार, अफ़ग़ान धरती का आतंकवाद के लिए उपयोग न हो।
नई दिल्ली में अफ़ग़ान दूतावास
2023 के अंत तक यह ग़नी-काल के स्टाफ़ के तहत संचालित था, फिर औपचारिक रूप से बंद हो गया। जून 2022 से सहायता समन्वय हेतु भारत का काबुल में एक तकनीकी मिशन कार्यरत है।
तालिबान से जुड़ाव
- तालिबान के राजनयिकों के साथ कई बैठकें, जिनमें कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तकी शामिल हैं।
- वरिष्ठ संयुक्त सचिव (पहले जे.पी. सिंह, बाद में अन्य) की काबुल यात्राएँ।
- दिल्ली में अफ़ग़ान दूतावास पर तालिबान का झंडा या “इस्लामिक अमीरात” नाम स्वीकार न करना।
क्षेत्रीय आउटरीच
- भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन (आभासी, 2022) — अपने आप में पहला।
- SCO बैठकें — क्षेत्रीय शक्तियों से संवाद।
- अफ़ग़ानिस्तान पर मॉस्को फ़ॉर्मैट और ट्रोइका प्लस — भारत ने पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया।
- अफ़ग़ान मामलों पर अमेरिका के साथ संवाद।
मानवीय सहायता
| सहायता | मात्रा |
|---|---|
| गेहूँ | 50,000 मीट्रिक टन प्रतिबद्ध; 47,500+ मीट्रिक टन वितरित |
| वैक्सीन (COVID-19) | IGICH काबुल को 5,00,000 ख़ुराकें; ईरान में अफ़ग़ान शरणार्थियों के लिए COVAX के माध्यम से 10 लाख ख़ुराकें |
| पोलियो वैक्सीन | UNICEF को 6 करोड़ ख़ुराकें |
| दवाइयाँ | 200+ टन |
| शीतकालीन वस्त्र | कई खेप |
गेहूँ की आपूर्ति पाकिस्तान से होकर ज़मीनी मार्ग से (पाकिस्तानी अनुमति के साथ) हुई और इसे विश्व खाद्य कार्यक्रम (World Food Programme) को सौंपा गया।
हालिया घटनाक्रम (2024-26)
- तालिबान विदेश मंत्री और जे.पी. सिंह की बैठक (काबुल, जनवरी 2024) — भारत का सबसे प्रत्यक्ष जुड़ाव।
- चाबहार 10-वर्षीय समझौता (मई 2024) — भारत और ईरान के बीच, शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास और संचालन हेतु; USD 120 मिलियन निवेश और USD 250 मिलियन क्रेडिट लाइन।
- तालिबान का चाबहार में निवेश — लगभग USD 35 मिलियन की घोषणा, जो ईरान के साथ एक त्रिपक्षीय व्यावहारिक हित बनाता है।
- G20 नई दिल्ली (2023) — अफ़ग़ानिस्तान का प्रतिनिधित्व नहीं था।
- क्वाड शिखर सम्मेलन विलमिंगटन (2024) — अफ़ग़ान धरती के उपयोग पर आतंकवाद-विरोधी भाषा।
- BRICS विस्तार (2024) — ईरान की सदस्यता ने समीकरण बदले; अफ़ग़ानिस्तान सदस्य नहीं।
- लाल सागर संकट — शिपिंग को चाबहार/INSTC विकल्प की ओर मोड़ा, जिससे अफ़ग़ान कॉरिडोर की प्रासंगिकता बढ़ी।
- इज़राइल-हमास संघर्ष — वैश्विक ध्यान में अफ़ग़ान प्रश्न पीछे चला गया।
- रूस-यूक्रेन अद्यतन — रूस का तालिबान से जुड़ाव बढ़ा; अप्रैल 2025 में रूस ने तालिबान को आतंकी सूची से हटाया।
- AI एक्शन समिट पेरिस (2025) — डिजिटल अधिकारों के क्षरण (महिला शिक्षा) के उदाहरण के रूप में अफ़ग़ानिस्तान का उल्लेख।
- ऑपरेशन सिंधु ठाकुर जैसी NEO (Non-combatant Evacuation Operations) — टेम्पलेट परिष्कृत हुए; अफ़ग़ान हिंदुओं और सिखों का दीर्घकालिक वीज़ा पर भारत में स्वागत।
- अफ़ीम प्रतिबंध (2022) जारी — UN रिपोर्ट 2023-24 में 95% कमी।
- ISKP हमले — भारतीय दूतावास के पास (जनवरी 2022 बम विस्फोट) और ईरानी ठिकानों पर जारी रहे।
आगे का रास्ता
- सिद्धांत-आधारित संवाद — मान्यता न देने का रुख़ बनाए रखें, तकनीकी मिशन के माध्यम से जुड़ाव।
- मानवीय आपूर्ति — गेहूँ, दवाइयाँ, वैक्सीन निरंतर भेजें।
- लोग-से-लोग संपर्क — छात्र वीज़ा, अफ़ग़ान हिंदू/सिख बसावट, ICCR छात्रवृत्तियाँ पुनः शुरू।
- चाबहार-ज़रंज-डेलाराम मार्ग — बुनियादी ढाँचे का निवेश बनाए रखें।
- तालिबान पर शांत दबाव — महिला शिक्षा, अल्पसंख्यक अधिकार।
- क्षेत्रीय समन्वय — मध्य एशिया शिखर सम्मेलन प्रक्रिया, SCO, मॉस्को फ़ॉर्मैट।
- ISKP-विरोधी सहयोग — ईरान और रूस के साथ ख़ुफ़िया जानकारी साझा करना।
अफ़ग़ानिस्तान में भारत का विकास पदचिह्न
2001 से 2021 के बीच भारत अफ़ग़ानिस्तान का सबसे बड़ा क्षेत्रीय दाता और पाँचवाँ सबसे बड़ा वैश्विक दाता था — विकास सहायता में USD 3+ बिलियन, जिसमें शामिल हैं:
| परियोजना | मूल्य |
|---|---|
| अफ़ग़ान-भारत मैत्री बाँध (सलमा बाँध, हेरात) | USD 290 मिलियन |
| अफ़ग़ान संसद भवन | USD 90 मिलियन |
| ज़रंज-डेलाराम राजमार्ग | USD 150 मिलियन |
| ट्रॉमा अस्पताल — काबुल, क़ंधार | USD 40 मिलियन |
| पुल-ए-ख़ुमरी से काबुल पारेषण लाइन | USD 100 मिलियन |
| शाहतूत बाँध (काबुल जल आपूर्ति) | USD 250 मिलियन (प्रतिबद्ध) |
| 400+ लघु विकास परियोजनाएँ (SDPs) | क्षमता निर्माण |
| छात्रवृत्तियाँ — ICCR, ITEC | USD 80 मिलियन |
प्रमुख मंच
| मंच | स्थिति |
|---|---|
| SCO | 2017 से भारत पूर्ण सदस्य; अफ़ग़ानिस्तान पर सक्रिय |
| मॉस्को फ़ॉर्मैट | रूस-नेतृत्व; भारत ने पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया |
| इस्तांबुल प्रक्रिया / हार्ट ऑफ़ एशिया | भारत बारी-बारी से मेज़बान |
| भारत-मध्य एशिया संवाद | वार्षिक; अफ़ग़ानिस्तान एजेंडा शामिल |
| अफ़ग़ानिस्तान पर क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद | भारत ने 2021 में मेज़बानी की |
2001 के बाद भारतीय उपस्थिति
- 4 वाणिज्य दूतावास — क़ंधार, मज़ार-ए-शरीफ़, हेरात, जलालाबाद (अगस्त 2021 के बाद सभी बंद)।
- ICCR के तहत भारत में 20,000+ अफ़ग़ान छात्र।
- भारतीय चिकित्सा मिशन — काबुल के इंदिरा गांधी बाल स्वास्थ्य संस्थान में।
- अफ़ग़ान व्यापार समुदाय का स्वागत।
ISKP: नई चिंता
इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) तालिबान शासन के अंतर्गत बढ़ा है — यह तालिबान को पर्याप्त रूप से कट्टर नहीं मानता। प्रमुख घटनाएँ:
- काबुल हवाई अड्डा हमला (अगस्त 2021) — 13 अमेरिकी सैनिक और 170+ अफ़ग़ान मारे गए।
- काबुल में सिख गुरुद्वारों पर हमले (2020, 2022)।
- काबुल में ईरान दूतावास पर हमला (2024)।
- मॉस्को कॉन्सर्ट हॉल हमला (मार्च 2024)।
भारत के लिए ISKP प्रत्यक्ष आतंकी ख़तरा है — अफ़ग़ान शरणार्थी, केरल-कश्मीर कट्टरपंथीकरण पाइपलाइन और क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क के माध्यम से।
UPSC प्रासंगिकता
भारत-अफ़ग़ानिस्तान संबंध GS II (भारत और उसका पड़ोस, द्विपक्षीय साझेदारी, क्षेत्रीय समूह) तथा GS III (सुरक्षा आयाम) में परीक्षित होते हैं। प्रीलिम्स में सलमा बाँध, चाबहार, TAPI पर प्रश्न आ चुके हैं। मेन्स प्रश्न तालिबान-पश्चात रणनीति, चाबहार और मानवीय कूटनीति पर केंद्रित होते हैं।
अभ्यास प्रश्न (मेन्स): “भारत की अफ़ग़ानिस्तान नीति विदेश नीति में मूल्यों और हितों के बीच तनाव को दर्शाती है।” अगस्त 2021 के बाद से तालिबान शासन के प्रति भारत के दृष्टिकोण की समीक्षा कीजिए। (250 शब्द)
सामान्य प्रश्न
तालिबान की वापसी के बाद भारत अफ़ग़ानिस्तान से कैसे जुड़ा है?
भारत ने तालिबान को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन जून 2022 से काबुल में एक तकनीकी मिशन के माध्यम से सहायता समन्वय और सीमित संवाद बनाए रखा है। मानवीय सहायता, गेहूँ, वैक्सीन और दवाइयाँ निरंतर भेजी गई हैं।
भारत-अफ़ग़ानिस्तान संबंधों में चाबहार की क्या भूमिका है?
चाबहार बंदरगाह भारत के लिए पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँचने का प्रमुख मार्ग है। मई 2024 में भारत ने ईरान के साथ शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के लिए 10-वर्षीय समझौता किया।
ऑपरेशन देवी शक्ति क्या था?
अगस्त 2021 में काबुल पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद भारत ने ऑपरेशन देवी शक्ति चलाकर अपने राजनयिक कर्मचारियों, 650 से अधिक भारतीयों और कई अफ़ग़ान हिंदुओं/सिखों को सुरक्षित निकाला।
ISKP भारत के लिए क्यों चिंताजनक है?
इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) तालिबान शासन के अंतर्गत मज़बूत हुआ है। यह काबुल में सिख गुरुद्वारों, भारतीय दूतावास के पास और मॉस्को कॉन्सर्ट हॉल जैसे हमले कर चुका है, जो भारत के लिए सीधा आतंकी ख़तरा बनाते हैं।
2001-2021 के दौरान भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में क्या निवेश किया?
भारत ने USD 3+ बिलियन की विकास सहायता दी — सलमा बाँध, अफ़ग़ान संसद भवन, ज़रंज-डेलाराम राजमार्ग, ट्रॉमा अस्पताल, पारेषण लाइनें और 20,000+ छात्रों को छात्रवृत्तियाँ।
TAPI पाइपलाइन भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
तुर्कमेनिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (TAPI) गैस पाइपलाइन भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, परंतु यह केवल अफ़ग़ान स्थिरता पर ही साकार हो सकती है।