भारत की स्वास्थ्य स्थिति एक विरोधाभास है — पिछले दशक में मातृ मृत्यु दर (MMR) में 50% की कमी, शिशु मृत्यु दर (IMR) में नाटकीय गिरावट, परंतु अभी भी उच्च कुपोषण, असमान पहुँच और बढ़ता हुआ NCDs का बोझ। NFHS-5 (2019-21) ने एक जटिल चित्र प्रस्तुत किया। UPSC GS I और GS II के लिए स्वास्थ्य संकेतक, कल्याण योजनाएँ और स्वास्थ्य नीति आवश्यक हैं।
NFHS-5 के प्रमुख निष्कर्ष (2019-21)
- MMR: 2014-16 में 130 से 2018-20 में 97/लाख जीवित जन्म (लक्ष्य: 70 by 2030)।
- IMR: 2011 में 44 से 2020 में 28/1000 जीवित जन्म।
- संस्थागत प्रसव: 79% से बढ़कर 89%।
- पूर्ण टीकाकरण: 62% से 76%।
- स्टंटिंग (बच्चों में): 38.4% से 35.5% — अभी भी उच्च।
- महिलाओं में एनीमिया: 53% से बढ़कर 57% — चिंताजनक वृद्धि।
रोग बोझ
- संचारी रोग: TB (भारत में ~27 लाख नए मामले/वर्ष — विश्व में सर्वाधिक), मलेरिया, डेंगू।
- गैर-संचारी रोग (NCDs): मृत्यु का ~63% — हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर, श्वसन रोग।
- मानसिक स्वास्थ्य: 15 करोड़+ को देखभाल की आवश्यकता (WHO अनुमान)।
नीति परिदृश्य
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017: 2025 तक स्वास्थ्य व्यय GDP का 2.5%।
- आयुष्मान भारत: PM-JAY + HWC।
- पोषण मिशन: स्टंटिंग, कुपोषण कम करना।
- ई-संजीवनी: 30 करोड़+ टेली-परामर्श।
UPSC प्रासंगिकता
GS I (भारतीय समाज) और GS II (स्वास्थ्य) के लिए NFHS-5 के प्रमुख आँकड़े (MMR 97, IMR 28, स्टंटिंग 35.5%, एनीमिया 57%) और NCD बोझ याद रखें।
सामान्य प्रश्न
NFHS-5 में MMR क्या है?
NFHS-5 / SRS 2018-20 के अनुसार MMR 97/लाख जीवित जन्म है।
महिलाओं में एनीमिया की स्थिति क्या है?
NFHS-5 में महिलाओं में एनीमिया बढ़कर 57% हो गई — NFHS-4 के 53% से अधिक।
NCDs का भारत में मृत्यु में योगदान क्या है?
भारत में लगभग 63% मृत्यु गैर-संचारी रोगों (हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर, श्वसन रोग) से होती है।