UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

भारत में अनुसूचित जनजातियाँ — पाँचवीं और छठी अनुसूचियाँ, PESA, FRA और PVTG ढाँचा (यूपीएससी भारतीय समाज)

भारत में अनुसूचित जनजातियों की सुरक्षा के लिए पाँचवीं-छठी अनुसूचियाँ, PESA 1996, वन अधिकार अधिनियम और PVTG नीति जानें।

Scheduled Tribes in India — Fifth and Sixth Schedules, PESA, FRA and PVTG Framework (UPSC Indian Society) — UPSC featured image

भारत में अनुसूचित जनजातियाँ (Scheduled Tribes — ST) जनसंख्या का ~8.6% (2011 जनगणना) हैं — लगभग 10.4 करोड़ लोग। इनमें से कई अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में रहते हैं। संविधान ने इनकी सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए हैं।

संवैधानिक प्रावधान

पाँचवीं अनुसूची (Fifth Schedule)

  • 10 राज्यों में जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन।
  • राज्यपाल जनजाति सलाहकार परिषद (TAC) की सिफारिश पर नियम बना सकते हैं।
  • जनजातीय भूमि हस्तांतरण पर प्रतिबंध।

छठी अनुसूची (Sixth Schedule)

  • असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम में स्वायत्त जिला परिषदें (ADC)।
  • ADC को अपने क्षेत्र में कानून बनाने का अधिकार।

PESA अधिनियम, 1996

पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 — पाँचवीं अनुसूची क्षेत्रों में पंचायती राज का विस्तार। ग्राम सभा को विशेष अधिकार:

  • प्राकृतिक संसाधनों पर अनुमोदन।
  • विकास योजनाओं को मंजूरी।
  • लघु वन उपज, भूमि अधिग्रहण पर अधिकार।

वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006

अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006:

  • जनजातियों को पारंपरिक वन भूमि पर अधिकार।
  • आजीविका अधिकार — वन उपज संग्रह।
  • सामुदायिक वन संसाधन अधिकार।
  • 2024 तक 24+ लाख पट्टे वितरित।

विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG)

  • 75 PVTG — पूर्व-कृषि स्तर, जनसंख्या घट रही, साक्षरता बहुत कम।
  • बजट 2023-24 में PM-JANMAN योजना — ₹24,104 करोड़; PVTG के लिए आवास, बिजली, पानी।

जनजातियों की चुनौतियाँ

  • भूमि विस्थापन — खनन, बाँध परियोजनाएँ।
  • गरीबी और कुपोषण।
  • वाम उग्रवाद — माओवादी प्रभाव क्षेत्र।
  • FRA का अधूरा कार्यान्वयन।

यूपीएससी प्रासंगिकता

  • GS-I: भारतीय समाज, जनजातीय मुद्दे।
  • GS-II: संविधान की पाँचवीं-छठी अनुसूचियाँ, FRA, PESA।
  • मुख्य: “FRA के कार्यान्वयन में चुनौतियाँ और जनजातीय अधिकार।”

जनजातीय समाज का संवैधानिक संरक्षण, PESA और FRA का प्रभावी कार्यान्वयन, और PVTG के लिए लक्षित PM-JANMAN — ये सब मिलकर भारत की विविधता और समानता की प्रतिबद्धता दर्शाते हैं।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

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