भारत में अनुसूचित जनजातियाँ (Scheduled Tribes — ST) जनसंख्या का ~8.6% (2011 जनगणना) हैं — लगभग 10.4 करोड़ लोग। इनमें से कई अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में रहते हैं। संविधान ने इनकी सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए हैं।
संवैधानिक प्रावधान
पाँचवीं अनुसूची (Fifth Schedule)
- 10 राज्यों में जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन।
- राज्यपाल जनजाति सलाहकार परिषद (TAC) की सिफारिश पर नियम बना सकते हैं।
- जनजातीय भूमि हस्तांतरण पर प्रतिबंध।
छठी अनुसूची (Sixth Schedule)
- असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम में स्वायत्त जिला परिषदें (ADC)।
- ADC को अपने क्षेत्र में कानून बनाने का अधिकार।
PESA अधिनियम, 1996
पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 — पाँचवीं अनुसूची क्षेत्रों में पंचायती राज का विस्तार। ग्राम सभा को विशेष अधिकार:
- प्राकृतिक संसाधनों पर अनुमोदन।
- विकास योजनाओं को मंजूरी।
- लघु वन उपज, भूमि अधिग्रहण पर अधिकार।
वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006
अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006:
- जनजातियों को पारंपरिक वन भूमि पर अधिकार।
- आजीविका अधिकार — वन उपज संग्रह।
- सामुदायिक वन संसाधन अधिकार।
- 2024 तक 24+ लाख पट्टे वितरित।
विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG)
- 75 PVTG — पूर्व-कृषि स्तर, जनसंख्या घट रही, साक्षरता बहुत कम।
- बजट 2023-24 में PM-JANMAN योजना — ₹24,104 करोड़; PVTG के लिए आवास, बिजली, पानी।
जनजातियों की चुनौतियाँ
- भूमि विस्थापन — खनन, बाँध परियोजनाएँ।
- गरीबी और कुपोषण।
- वाम उग्रवाद — माओवादी प्रभाव क्षेत्र।
- FRA का अधूरा कार्यान्वयन।
यूपीएससी प्रासंगिकता
- GS-I: भारतीय समाज, जनजातीय मुद्दे।
- GS-II: संविधान की पाँचवीं-छठी अनुसूचियाँ, FRA, PESA।
- मुख्य: “FRA के कार्यान्वयन में चुनौतियाँ और जनजातीय अधिकार।”
जनजातीय समाज का संवैधानिक संरक्षण, PESA और FRA का प्रभावी कार्यान्वयन, और PVTG के लिए लक्षित PM-JANMAN — ये सब मिलकर भारत की विविधता और समानता की प्रतिबद्धता दर्शाते हैं।