बाल विवाह — अर्थात 18 वर्ष से कम आयु की लड़की या 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह — भारत में लैंगिक असमानता का कारण भी है और लक्षण भी। यूनिसेफ का अनुमान है कि विश्व में बाल वधुओं की सबसे बड़ी निरपेक्ष संख्या भारत में है। NFHS-5 (2019-21) दर्शाता है कि 20-24 आयु वर्ग की लगभग 23.3% महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से पहले हुआ था — दशक भर पहले के 47.4% की तुलना में बड़ी गिरावट, परंतु निरपेक्ष आँकड़े अब भी विशाल हैं। राजस्थान का वह कानून जो नाबालिगों सहित सभी विवाहों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है, इस बहस को पुनः जीवित कर गया कि क्या मान्यता ही वैधीकरण है।
कानूनी ढाँचा
- बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 (Prohibition of Child Marriage Act — PCMA) 18 वर्ष से कम आयु की लड़की या 21 वर्ष से कम आयु के लड़के के विवाह को अनुबंधित नाबालिग के विकल्प पर शून्यकरणीय (voidable) बनाता है, और संपन्न करने, बढ़ावा देने व उसमें भाग लेने को अपराध घोषित करता है।
- बाल विवाह प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2021 महिलाओं हेतु विवाह की कानूनी आयु 18 से बढ़ाकर 21 करने का प्रस्ताव करता है।
- IPC तथा अब BNS के दंड प्रावधान सांविधिक बलात्कार, अपहरण और क्रूरता को कवर करते हैं।
- लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO) 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों के साथ यौन गतिविधि को, बाल विवाह सहित, अपराध मानता है।
| कानून | मुख्य प्रावधान |
|---|---|
| PCMA 2006 | नाबालिगों के विवाह शून्यकरणीय हैं, शून्य नहीं |
| 2021 संशोधन विधेयक | महिलाओं हेतु न्यूनतम आयु बढ़ाकर 21 |
| POCSO 2012 | 18 वर्ष से कम आयु में यौन गतिविधि अपराध |
| BNS 2023 | उकसाने और संपन्न करने हेतु दंड बरकरार |
एक स्थायी आलोचना यह है कि PCMA बाल विवाहों को शून्यकरणीय बनाता है, शून्य नहीं — जिससे विवाह रद्द कराने का बोझ नाबालिग पर ही आ जाता है।
बाल विवाह कहाँ बना हुआ है
- निचली जातियों एवं निम्न-आय वाले परिवारों में प्रचलन अधिक है।
- संयुक्त परिवार संरचनाएँ इस प्रथा को सुदृढ़ करती हैं।
- NFHS-5 के अनुसार बिहार, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, झारखंड और आंध्र प्रदेश में दरें राष्ट्रीय औसत से ऊपर हैं।
- केरल जैसे अन्यथा प्रगतिशील राज्यों में भी क्षेत्रीय जेबें मौजूद हैं; केरल की 6.3% महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से पहले हुआ बताया गया।
सामाजिक-सांस्कृतिक एवं आर्थिक कारण
- परंपरा एवं प्रथा। जातीय, सामुदायिक और धार्मिक मानक आरंभिक विवाह को पुण्य मानते हैं; "गौना" तथा समान संस्कार इसे और दृढ़ करते हैं।
- दहेज का अर्थशास्त्र। कम उम्र की वधुओं पर कम दहेज लगता है, जिससे परिवार बेटियों का विवाह जल्दी कर देते हैं।
- सुरक्षा एवं यौनिकता संबंधी चिंताएँ। माता-पिता विवाह को विवाह-पूर्व संबंधों, अंतर-जातीय प्रेम और उत्पीड़न के विरुद्ध ढाल के रूप में देखते हैं।
- निर्धनता। बेटियों को आर्थिक बोझ माना जाता है; विवाह उस बोझ का स्थानांतरण है।
- पुत्र-वरीयता। परिवार बेटियों का विवाह जल्दी कर देना चाहते हैं ताकि संसाधन बेटों पर केंद्रित किए जा सकें।
- ऐतिहासिक मान्यता कि विवाह यौवनारंभ से पहले होना चाहिए।
बाल विवाह का प्रभाव
| आयाम | प्रभाव |
|---|---|
| शिक्षा | समय-पूर्व विद्यालय छोड़ना, उच्च शिक्षा तक सीमित पहुँच |
| स्वास्थ्य | किशोर गर्भावस्था, उच्च मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, रक्ताल्पता |
| स्वायत्तता | सीमित गतिशीलता, साथी-नेटवर्क का ह्रास, मीडिया तक सीमित पहुँच |
| जनसांख्यिकी | लंबी प्रजनन-अवधि से बड़े परिवार |
| निर्धनता का चक्र | अल्प-शिक्षित माताएँ कुपोषित बच्चों का पालन करती हैं, जो निर्धनता को बनाए रखता है |
सरकारी पहलें
- बालिका के जीवन एवं शिक्षा हेतु बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ।
- कन्याश्री प्रकल्प (पश्चिम बंगाल) तथा निरंतर विद्यालयी शिक्षा को पुरस्कृत करने वाली समान सशर्त नकद-अंतरण योजनाएँ।
- बेटियों हेतु दीर्घकालिक बचत को प्रोत्साहित करने वाली सुकन्या समृद्धि योजना।
- 14 वर्ष तक मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा हेतु RTE अधिनियम 2009, जिसे कई राज्यों ने 18 वर्ष तक विस्तारित किया है।
- हरियाणा की अपनी बेटी अपना धन और कर्नाटक की भाग्यलक्ष्मी जैसी राज्य-स्तरीय हस्तक्षेप।
आगे का रास्ता
- कानूनी खामियाँ बंद करें। बाल विवाह को शून्यकरणीय के बजाय आरंभ से ही शून्य (void ab initio) बनाएँ; सुनिश्चित करें कि POCSO और PCMA को एक साथ पढ़ा जाए।
- परामर्श के बाद महिलाओं के लिए न्यूनतम विवाह आयु बढ़ाकर 21 की जाए, ताकि यह पुरुषों की आयु के अनुरूप हो और महिलाओं को शिक्षा एवं कार्य हेतु अधिक समय मिले।
- आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायतों एवं NGO के माध्यम से सामुदायिक स्तर का हस्तक्षेप।
- केवल नामांकन नहीं, शिक्षा। लड़कियों के लिए विश्वविद्यालय तक मुफ्त शिक्षा, परिवहन भत्ता और संवेदनशील जिलों में आवासीय विद्यालय।
- NFHS द्वारा चिह्नित हॉटस्पॉट जिलों को केंद्रित संसाधनों के साथ लक्षित करें।
- राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम जैसे जीवन-कौशल कार्यक्रमों के माध्यम से किशोरों को सशक्त बनाएँ।
हालिया घटनाक्रम (2024-26)
- जाति-जनगणना आंदोलन ने यह उजागर किया है कि बाल विवाह विशिष्ट जाति एवं आय समूहों में केंद्रित है, जिससे लक्षित हस्तक्षेप संभव हो रहा है।
- MPI 2024 (नीति आयोग/UNDP) दर्शाता है कि जिन जिलों में 18 वर्ष से आगे लड़कियों की शिक्षा बेहतर हुई, वहाँ स्वास्थ्य-वंचना में अधिक तीव्र कमी आई — यह शिक्षा-विवाह की कड़ी की पुष्टि करता है।
- महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 ने राज्य सरकारों का ध्यान महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर खींचा है, जो बाल विवाह में तीव्र गिरावट से सहसंबंधित है।
- वैश्विक लिंग अंतर सूचकांक 2024 भारत को 146 में से 129वें स्थान पर रखता है; स्वास्थ्य एवं शिक्षा के उप-सूचकांक आरंभिक विवाह से नीचे खिंचते हैं।
- बाल विवाह प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक संसदीय समीक्षाधीन है, जिस पर 2024-25 में स्थायी समिति का विचार-विमर्श जारी है।
- उच्चतम न्यायालय ने Society for Enlightenment and Voluntary Action v. Union of India (2024) में राज्यों को PCMA के क्रियान्वयन की लेखापरीक्षा करने और समर्पित बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया।
यूपीएससी प्रासंगिकता
| जीएस पेपर | संबंध |
|---|---|
| जीएस I | महिलाएँ, परिवार, सामाजिक सशक्तिकरण |
| जीएस II | कल्याणकारी विधान, संवेदनशील समूह |
| जीएस III | मानव पूँजी, जनसांख्यिकीय लाभांश |
| निबंध | बालिका शिक्षा एवं राष्ट्र-निर्माण |
अभ्यास हेतु प्रश्न:
- "बाल विवाह जनसांख्यिकीय लाभांश का इनकार है।" चर्चा कीजिए।
- आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए कि क्या महिलाओं के लिए विवाह की कानूनी आयु बढ़ाकर 21 करने से भारत में बाल विवाह कम होगा।
एक अच्छे उत्तर में NFHS-5 के आँकड़े, शून्यकरणीय बनाम शून्य की बहस, 2024 में उच्चतम न्यायालय के निर्देश और शिक्षा, आजीविका एवं कानून प्रवर्तन के इर्द-गिर्द बना नीति-पैकेज समाहित होना चाहिए।