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भारत में गर्भ का चिकित्सीय समापन (MTP अधिनियम): यूपीएससी मार्गदर्शिका

गर्भ-समापन पर यूपीएससी गाइड — MTP अधिनियम 1971, 2021 संशोधन, उच्चतम न्यायालय के निर्णय, प्रजनन अधिकार और 2024-26 की प्रमुख घटनाएँ।

Termination of Pregnancy in India (MTP Act): UPSC Guide — UPSC featured image

चिकित्सीय गर्भ समापन अधिनियम (Medical Termination of Pregnancy Act), 1971 अपने अधिनियमन के समय विश्व के सर्वाधिक प्रगतिशील गर्भपात कानूनों में से एक था। MTP (संशोधन) अधिनियम, 2021 ने प्रजनन स्वायत्तता को और विस्तृत किया। 2022 के एक ऐतिहासिक निर्णय में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने कहा कि विवाहित अथवा अविवाहित — सभी महिलाओं को सुरक्षित गर्भपात का समान अधिकार है, जिसने प्रजनन अधिकारों के विस्तार में युगांतकारी मोड़ दर्ज किया। यूपीएससी GS-I (महिलाएँ, समाज) और GS-II (विधान, अधिकार) के अभ्यर्थियों के लिए MTP कानून लैंगिक न्याय की बहसों के केंद्र में है।

भारत हर वर्ष लगभग 1.56 करोड़ गर्भपातों का दृश्य प्रस्तुत करता है, जिनमें से दो-तिहाई असुरक्षित दशाओं में होते हैं। इसी कारण कानून के अक्षरों और जमीनी पहुँच के बीच का अंतराल यूपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए सबसे अधिक प्रासंगिक प्रश्न बनकर उभरता है — कानून प्रगतिशील है, परंतु क्या उसकी सेवा प्रत्येक महिला तक पहुँच पाती है?

अवधारणात्मक ढाँचा

वैश्विक संदर्भ

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): सुरक्षित गर्भपात एक मौलिक स्वास्थ्य अधिकार है।
  • संयुक्त राष्ट्र SDG 3.7 तथा 5.6: प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच।
  • गटमाकर इंस्टिट्यूट के अनुमान: असुरक्षित गर्भपात से वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष 35,000 से अधिक महिलाओं की मृत्यु होती है।
  • डॉब्स बनाम जैक्सन (Dobbs v. Jackson, 2022): संयुक्त राज्य अमेरिका में रो बनाम वेड का पलटाव — वैश्विक स्तर पर गर्भपात अधिकारों के पीछे हटने का प्रतीक, जिसके विपरीत भारत का अनुभव विस्तार का है।

भारतीय संदर्भ

  • भारत में प्रतिवर्ष 1.56 करोड़ गर्भपात दर्ज किए जाते हैं (लांसेट, 2015)।
  • लगभग 67% गर्भपात गैर-अस्पताल परिवेश में, अर्थात असुरक्षित होते हैं।
  • असुरक्षित गर्भपात भारत में मातृ-मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण है।
  • पहुँच का अंतराल विशेष रूप से अविवाहित महिलाओं, ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों के लिए तीव्र है।

यह आँकड़े बताते हैं कि भारत में गर्भपात केवल चिकित्सीय प्रश्न नहीं — यह सामाजिक कलंक, ग्रामीण-शहरी असमानता और स्वास्थ्य अधोसंरचना का प्रश्न भी है। NFHS-5 के अनुसार 62% महिलाएँ कानूनी गर्भपात सेवाओं के बारे में अनभिज्ञ हैं — कानून के पीछे जागरूकता की कमी सबसे बड़ी बाधा है।

चिकित्सीय गर्भ समापन अधिनियम, 1971

मूल प्रावधान

  • निर्दिष्ट विशेषज्ञता वाले चिकित्सकों द्वारा गर्भपात की अनुमति।
  • 12 सप्ताह तक: एक चिकित्सक की राय।
  • 12 से 20 सप्ताह: दो चिकित्सकों की राय।
  • गर्भ-समापन की अनुमति यदि गर्भावस्था में निम्न स्थितियाँ हों:
  • गर्भवती स्त्री के जीवन को खतरा।
  • मानसिक या शारीरिक स्वास्थ्य को गंभीर क्षति।
  • भ्रूण की पर्याप्त असामान्यताएँ।
  • बलात्कार या गर्भनिरोधक विफलता से उत्पन्न गर्भ (केवल विवाहित महिलाओं के लिए)।
  • गर्भावस्था के किसी भी समय: यदि महिला के जीवन को बचाने हेतु तत्काल आवश्यक हो।

1971 का अधिनियम अपने समय में अत्यंत साहसिक था। उस समय जब अमेरिका में रो बनाम वेड (Roe v. Wade) का निर्णय अभी दो वर्ष दूर था (1973), भारत ने गर्भपात को अपराध की श्रेणी से बाहर निकाल कर स्वास्थ्य सेवा का विषय घोषित कर दिया था। शांतिलाल शाह समिति (1964) की अनुशंसाएँ इस कानून का आधार बनीं।

1971 अधिनियम की सीमाएँ

  • 20 सप्ताह की ऊपरी सीमा — देर से पकड़ी गई असामान्यताओं के लिए अपर्याप्त।
  • 12-20 सप्ताह के लिए दो-चिकित्सक की अनिवार्यता — प्रायः नौकरशाही विलंब।
  • गर्भनिरोधक विफलता का खंड केवल विवाहित महिलाओं तक सीमित — अविवाहित महिलाओं के साथ भेदभाव।
  • 20 सप्ताह से आगे बलात्कार पीड़िताओं के लिए कोई प्रावधान नहीं।
  • लिंग-चयनात्मक गर्भपात (sex-selective abortion) का दुरुपयोग — 1994 के PCPNDT अधिनियम द्वारा अलग से नियंत्रित करना पड़ा।

MTP (संशोधन) अधिनियम, 2021

मार्च 2021 में पारित; सितंबर 2021 से प्रभावी। यह संशोधन पाँच दशकों में पहली बड़ी पुनर्विचार था और इसने चिकित्सा प्रौद्योगिकी में हुई प्रगति को कानूनी ढाँचे में समाहित किया।

मुख्य संशोधन

गर्भधारण से समय1971 अधिनियम2021 संशोधन
12 सप्ताह तकएक चिकित्सक की सलाहएक चिकित्सक की सलाह
12 से 20 सप्ताहदो चिकित्सकों की सलाहएक चिकित्सक की सलाह
20 से 24 सप्ताहअनुमत नहींदो चिकित्सक (निर्दिष्ट श्रेणी की महिलाओं के लिए)
24 सप्ताह से अधिकअनुमत नहींभ्रूण की पर्याप्त असामान्यता की स्थिति में मेडिकल बोर्ड
गर्भावस्था के किसी भी समयजीवन रक्षा हेतु तत्काल आवश्यक होने पर एक चिकित्सकजीवन रक्षा हेतु तत्काल आवश्यक होने पर एक चिकित्सक

20-24 सप्ताह गर्भपात की श्रेणियाँ

MTP नियम, 2003 (2021 में संशोधित) के अनुसार "निर्दिष्ट श्रेणियों" में सम्मिलित हैं:

  • बलात्कार पीड़िताएँ एवं यौन हिंसा की शिकार महिलाएँ।
  • नाबालिग।
  • वैवाहिक स्थिति में परिवर्तन (विधवापन, तलाक)।
  • शारीरिक रूप से दिव्यांग महिलाएँ।
  • मानसिक रूप से बीमार महिलाएँ।
  • मानवीय आपात स्थितियों में महिलाएँ।
  • भ्रूण की ऐसी विकृति जो जीवन के साथ असंगत होने या गंभीर अपंगता का पर्याप्त जोखिम रखती हो।

मेडिकल बोर्ड

  • 24 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्थाओं के लिए राज्य-स्तरीय मेडिकल बोर्ड गठित।
  • स्त्री-रोग विशेषज्ञ, बाल-रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट/सोनोलॉजिस्ट तथा अन्य विशेषज्ञों से संगठित।
  • निर्णय के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं — व्यवहार में इससे विलंब उत्पन्न होता है।

गर्भनिरोधक विफलता

  • किसी भी महिला और उसके साथी तक विस्तारित (केवल विवाहित महिलाओं तक सीमित नहीं) — संबंधों के सभी स्वरूपों में गर्भनिरोधक विफलता को मान्यता।

भारत की स्थिति

सकारात्मक विशेषताएँ

  • पर्याप्त भ्रूण असामान्यताओं को 24-सप्ताह की सीमा से मुक्त रखा गया।
  • निर्दिष्ट श्रेणियों के लिए 20 से 24 सप्ताह तक विस्तार।
  • गर्भनिरोधक विफलता के लिए विवाह की शर्त हटाई गई।
  • 12-20 सप्ताह के लिए चिकित्सक की अनिवार्यता दो से घटाकर एक की गई।
  • तुलनात्मक रूप से अमेरिका, ब्राज़ील, फिलीपींस की तुलना में भारतीय कानून कहीं अधिक उदार।

सतत चुनौतियाँ

  • पहुँच का अंतराल: 62% महिलाएँ कानूनी गर्भपात सेवाओं से अनभिज्ञ (NFHS-5)।
  • स्वास्थ्य अधोसंरचना: भारत में प्रति 10,000 जनसंख्या पर मात्र 6 चिकित्सक।
  • कलंक और शर्म: गर्भपात सेवाएँ कम उपयोग में, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • मेडिकल बोर्ड में देरी: 24+ सप्ताह की गर्भावस्थाओं के लिए लंबी अनुमोदन प्रक्रिया।
  • असुरक्षित गर्भपात: पहुँच, लागत और कलंक के कारण अब भी महत्वपूर्ण।
  • PNDT अधिनियम के साथ अंतःक्रिया: लिंग-चयनात्मक गर्भपात के लिए दुरुपयोग एक चिंता।

उच्चतम न्यायालय: 2022 का ऐतिहासिक निर्णय

X बनाम प्रधान सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, GNCT दिल्ली (सितंबर 2022):

  • एकल, अविवाहित महिलाओं को 24 सप्ताह तक गर्भपात का अधिकार (विवाहित महिलाओं के समकक्ष)।
  • शारीरिक स्वायत्तता और प्रजनन अधिकारों को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मान्यता।
  • निर्णय में कहा गया: "विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच कृत्रिम भेद संवैधानिक रूप से धारणीय नहीं है।"
  • MTP अधिनियम की धारा 3(2)(b)(ii) के लाभ वैवाहिक स्थिति की परवाह किए बिना सभी महिलाओं तक विस्तारित।
  • न्यायालय ने पहली बार वैवाहिक बलात्कार (marital rape) को भी MTP अधिनियम के प्रयोजन हेतु "बलात्कार" के रूप में मान्यता दी।

यह निर्णय न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ (D.Y. Chandrachud) की पीठ का था और इसमें न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रजनन स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त गरिमा, निजता और शारीरिक स्वायत्तता का अनिवार्य अंग है। पुट्टस्वामी निर्णय (2017) में स्थापित निजता के अधिकार से यह तार्किक रूप से जुड़ा है।

विस्तार के पीछे का तर्क

  • चिकित्सा प्रौद्योगिकी ने प्रगति की — 24 सप्ताह तक सुरक्षित गर्भपात संभव।
  • देर से पकड़ी जाने वाली असामान्यताओं के लिए लचीलापन आवश्यक।
  • उच्चतम और उच्च न्यायालयों में रिट याचिकाएँ देर से गर्भपात की अनुमति माँगती रहीं — व्यवस्थित समाधान आवश्यक।
  • मातृ-मृत्यु में कमी — सुरक्षित कानूनी गर्भपात असुरक्षित गली-कूचे की प्रक्रियाओं को कम करते हैं।
  • प्रजनन स्वायत्तता — अनुच्छेद 21 की स्वतंत्रता, गरिमा, निजता।

सरकारी योजनाएँ एवं संस्थागत ढाँचा

उपकरणउद्देश्य
MTP अधिनियम, 1971गर्भपात के लिए कानूनी ढाँचा
MTP (संशोधन) अधिनियम, 2021गर्भकालीन सीमाओं का विस्तार
PCPNDT अधिनियम, 1994गर्भधारण-पूर्व/प्रसव-पूर्व निदान तकनीक (लिंग-चयनात्मक गर्भपात की रोकथाम)
प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमव्यापक प्रजनन स्वास्थ्य
जननी सुरक्षा योजनासुरक्षित प्रसव
जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रमनिःशुल्क प्रसव सेवा
आयुष्मान भारत HWCsयौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य सहित प्राथमिक देखभाल
परिवार नियोजन योजनाएँगर्भनिरोधन तक पहुँच
मिशन परिवार विकास145 उच्च प्रजनन-दर वाले जिलों में गर्भनिरोधन

चुनौतियाँ

  • प्रशिक्षित प्रदाताओं की कमी: 1.56 करोड़ गर्भपातों के लिए लगभग 50,000 MTP-योग्य चिकित्सक।
  • ग्रामीण पहुँच: अधिकांश गर्भपात शहरी केंद्रों में।
  • मिफेप्रिस्टोन एवं मिसोप्रोस्टोल की उपलब्धता: ओटीसी (OTC) बिक्री प्रतिबंधित।
  • मेडिकल बोर्ड की संरचना: दूरस्थ राज्यों में निर्णय में देरी।
  • कलंक: विशेष रूप से अविवाहित महिलाओं के लिए।
  • PCPNDT के साथ टकराव: लिंग-चयनात्मक गर्भपात की रोकथाम बनाम सुरक्षित गर्भपात तक पहुँच।
  • लागत: निजी क्षेत्र के गर्भपात महँगे।
  • POCSO के साथ अंतःक्रिया: नाबालिग शामिल होने पर चिकित्सकों को सूचित करना अनिवार्य; प्रायः पहुँच को हतोत्साहित करता है।

आगे का मार्ग

  • प्रशिक्षित प्रदाताओं का विस्तार: ASHA, नर्सों को आरंभिक गर्भपात के लिए सशक्त करना।
  • टेलीमेडिसिन: आरंभिक गर्भपात के लिए दूरस्थ परामर्श।
  • सामुदायिक जागरूकता: मिशन शक्ति, महिला मंडल के माध्यम से।
  • मेडिकल बोर्ड का डिजिटलीकरण: ऑनलाइन प्रस्तुतियाँ, समय-बद्ध निर्णय।
  • स्कूलों में व्यापक यौन शिक्षा (Comprehensive Sexuality Education)।
  • सुरक्षित गर्भपात दवाओं की उपलब्धता उपयुक्त सुरक्षा-उपायों के साथ।
  • कलंक का निवारण: सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों के माध्यम से।
  • PM-JAY के साथ एकीकरण: निःशुल्क गर्भपात सेवाएँ।

नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)

  • वैवाहिक बलात्कार अपवाद और गर्भपात पर उच्चतम न्यायालय (2024): इस पर सुनवाई जारी कि क्या वैवाहिक बलात्कार अपवाद आपराधिक-निर्धारण को रोकता है, जिसका गर्भपात निर्णयों पर प्रभाव पड़ता है।
  • X बनाम राज्य (2024): उच्चतम न्यायालय ने 14-वर्षीय बलात्कार पीड़िता के लिए 24 सप्ताह से आगे गर्भ-समापन की अनुमति दी — मेडिकल बोर्ड के लचीलेपन की पुष्टि।
  • सुरक्षित गर्भपात प्रशिक्षण: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने प्रशिक्षण का विस्तार किया।
  • MTP अधिनियम 2021 नियम: नियम 3B द्वारा निर्दिष्ट "श्रेणियाँ" — लागू हैं।
  • महिला आरक्षण अधिनियम, 2023: लागू होने पर प्रजनन अधिकार नीति को प्राथमिकता मिलने की संभावना।
  • 2024 लोकसभा चुनाव: महिला स्वास्थ्य प्रमुख विषय; विभिन्न दलों ने स्वास्थ्य कवरेज के विस्तार का प्रस्ताव दिया।
  • NFHS-6 आँकड़ा संग्रह: गर्भपात पहुँच के आँकड़ों को अद्यतन करेगा; 2025-26 में अपेक्षित।
  • जाति जनगणना (बिहार 2023): जातियों के बीच स्वास्थ्य असमानताएँ उजागर।
  • वैश्विक लैंगिक अंतर सूचकांक 2024 (WEF): भारत 146 में 129वें स्थान पर।
  • MPI 2024 (नीति आयोग): मातृ स्वास्थ्य में सुधार।
  • SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24: SDG 3 (अच्छा स्वास्थ्य) और SDG 5 (लैंगिक समानता) में सुधार।
  • आयुष्मान आरोग्य मंदिर का विस्तार: 1.76 लाख केंद्र प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कर रहे।
  • SAFE (Safe Abortion for Everyone) अभियान CEHAT, WRA-I द्वारा सघन।
  • PCPNDT अधिनियम का प्रवर्तन: लिंग-चयनात्मक गर्भपात पर निरंतर कार्रवाई।

तुलनात्मक दृष्टि: भारत बनाम अन्य न्यायक्षेत्र

देशगर्भपात की कानूनी सीमाआधार
भारत24 सप्ताह तक (विशेष श्रेणियाँ); भ्रूण असामान्यता पर असीमितMTP अधिनियम + 2022 SC निर्णय
संयुक्त राज्य अमेरिकाराज्यवार भिन्न; कई राज्यों में पूर्ण प्रतिबंधडॉब्स के बाद रो बनाम वेड पलट गया
यूनाइटेड किंगडम24 सप्ताह तकगर्भपात अधिनियम 1967
ब्राज़ीलकेवल बलात्कार/जीवन-संकट/अनएन्सेफलीदंड संहिता
आयरलैंड12 सप्ताह तक माँग पर2018 का जनमत संग्रह
पोलैंडकेवल बलात्कार/जीवन-संकट2020 के बाद कठोर

तुलना से स्पष्ट है कि भारत वैश्विक पटल पर सबसे उदार न्यायक्षेत्रों में आता है — कानून के स्तर पर। समस्या "कानून" की नहीं, "कार्यान्वयन" की है।

यूपीएससी प्रासंगिकता

  • प्रीलिम्स: MTP अधिनियम 1971, MTP संशोधन अधिनियम 2021, X बनाम GNCT दिल्ली 2022, PCPNDT अधिनियम 1994।
  • GS-I: महिलाओं की भूमिका; महिला मुद्दे।
  • GS-II: प्रजनन अधिकार, विधान।
  • GS-III: स्वास्थ्य नीति।
  • निबंध: "प्रजनन अधिकार: नियमन से मान्यता तक।"

प्रीलिम्स बिंदु

  • MTP अधिनियम 1971 — शांतिलाल शाह समिति की अनुशंसाओं पर आधारित।
  • 2021 संशोधन: 12-20 सप्ताह में एक चिकित्सक; 20-24 सप्ताह में दो चिकित्सक; 24+ सप्ताह में मेडिकल बोर्ड।
  • X बनाम GNCT दिल्ली (2022) — अविवाहित महिलाओं को 24 सप्ताह तक अधिकार।
  • PCPNDT 1994 — लिंग चयन रोकथाम; MTP से अलग कानून।
  • अनुच्छेद 21 — प्रजनन स्वायत्तता का संवैधानिक आधार।

मेन्स अभ्यास प्रश्न

  • "MTP (संशोधन) अधिनियम, 2021 और 2022 का X बनाम GNCT दिल्ली निर्णय भारत में प्रजनन न्याय के दो स्तंभ हैं।" विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  • भारत में सुरक्षित गर्भपात तक पहुँच के मार्ग में आने वाली बाधाओं की चर्चा कीजिए और सुधार के उपाय सुझाइए। (10 अंक)
  • प्रजनन स्वायत्तता और लिंग-चयनात्मक गर्भपात की रोकथाम के बीच संतुलन कैसे साधा जाए? (15 अंक)

आपका उत्तर इन तत्वों को समेटे:

  1. 1971 से 2021 से 2022 के उच्चतम न्यायालय निर्णय तक विकास-यात्रा का चित्रण।
  2. गर्भकालीन सीमाओं और शर्तों की सारणीबद्ध प्रस्तुति।
  3. प्रजनन स्वायत्तता और PCPNDT (लिंग-चयनात्मक गर्भपात रोकथाम) के बीच संतुलन।
  4. क्रियान्वयन की कमियाँ स्वीकारना — ग्रामीण पहुँच, प्रदाताओं की कमी।
  5. अनुच्छेद 21 के न्यायशास्त्र और 2022 के निर्णय का उद्धरण।
  6. गर्भपात तक पहुँच को सार्वजनिक स्वास्थ्य + महिला अधिकारों के रूप में चित्रित करना — विवादित नैतिक मुद्दे के रूप में नहीं।

भारत का गर्भपात कानून कई पश्चिमी न्यायक्षेत्रों — डॉब्स बनाम जैक्सन (Dobbs v. Jackson, 2022) के बाद के संयुक्त राज्य अमेरिका सहित — से कहीं अधिक उदार है। चुनौती कानून की नहीं, बल्कि पहुँच, जागरूकता और गरिमा की है। भारत में हर असुरक्षित गर्भपात हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता है — और प्रजनन-विकल्प से इनकार हर बार एक संवैधानिक उल्लंघन है। MTP अधिनियम और इसके वंशजों ने भारत को इस ओर अग्रसर किया है कि महिलाओं के शरीर पर उनका अपना अधिकार माना जाए; अगला अध्याय सार्वभौमिक पहुँच का है।

सामान्य प्रश्न

MTP अधिनियम, 1971 क्या है?

चिकित्सीय गर्भ समापन अधिनियम, 1971 भारत का वह कानून है जो निर्दिष्ट चिकित्सकों द्वारा कुछ शर्तों के अधीन गर्भपात को कानूनी मान्यता देता है। यह शांतिलाल शाह समिति की अनुशंसाओं पर आधारित था।

MTP संशोधन अधिनियम, 2021 के मुख्य परिवर्तन क्या हैं?

संशोधन ने 12-20 सप्ताह के लिए दो-चिकित्सक की शर्त घटाकर एक की, निर्दिष्ट श्रेणियों की महिलाओं के लिए सीमा 20 से 24 सप्ताह तक बढ़ाई, भ्रूण असामान्यता की स्थिति में 24 सप्ताह से आगे मेडिकल बोर्ड का प्रावधान किया, और गर्भनिरोधक विफलता के खंड में "विवाहित महिला" की शर्त हटा दी।

X बनाम GNCT दिल्ली (2022) निर्णय का क्या महत्व है?

उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी कि अविवाहित महिलाओं को भी 24 सप्ताह तक गर्भपात का समान अधिकार है। न्यायालय ने प्रजनन स्वायत्तता को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार के रूप में पहचाना और वैवाहिक स्थिति के आधार पर भेद को असंवैधानिक माना।

क्या भारत में 24 सप्ताह से आगे गर्भपात संभव है?

हाँ — भ्रूण की पर्याप्त असामान्यताओं की स्थिति में राज्य-स्तरीय मेडिकल बोर्ड की मंज़ूरी से 24 सप्ताह से आगे गर्भ-समापन की अनुमति है। महिला के जीवन की रक्षा हेतु तत्काल आवश्यक होने पर किसी भी समय एक चिकित्सक की राय पर्याप्त है।

MTP अधिनियम और PCPNDT अधिनियम में क्या अंतर है?

MTP अधिनियम कानूनी गर्भपात को नियंत्रित करता है, जबकि PCPNDT अधिनियम, 1994 लिंग-चयनात्मक गर्भपात की रोकथाम के लिए प्रसव-पूर्व लिंग जाँच पर रोक लगाता है। दोनों अलग-अलग उद्देश्यों के लिए हैं — एक पहुँच का विस्तार करता है, दूसरा दुरुपयोग को रोकता है।

क्या भारत में गर्भपात अमेरिका की तुलना में अधिक उदार है?

हाँ। डॉब्स बनाम जैक्सन (2022) के बाद अमेरिका में रो बनाम वेड का संरक्षण समाप्त हो गया है और कई राज्यों में लगभग पूर्ण प्रतिबंध हैं। भारत में 24 सप्ताह तक कानूनी गर्भपात उपलब्ध है और भ्रूण असामान्यता पर कोई ऊपरी सीमा नहीं है।

भारत में असुरक्षित गर्भपात की दर इतनी ऊँची क्यों है?

67% गर्भपात गैर-अस्पताल परिवेश में होते हैं — मुख्य कारण हैं: 62% महिलाओं की कानूनी सेवाओं की अनभिज्ञता, ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित प्रदाताओं की कमी, सामाजिक कलंक, और निजी क्षेत्र की उच्च लागत।

क्या नाबालिग को गर्भपात के लिए माता-पिता की अनुमति चाहिए?

MTP अधिनियम के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों के गर्भपात के लिए अभिभावक की लिखित सहमति आवश्यक है। हालाँकि उच्चतम न्यायालय ने कई मामलों में नाबालिग पीड़िताओं की निजता और गरिमा की रक्षा हेतु इस आवश्यकता पर लचीली व्याख्या की है।

MTP अधिनियम का यूपीएससी पाठ्यक्रम में क्या स्थान है?

यह GS-I (महिलाओं से जुड़े मुद्दे), GS-II (विधि एवं अधिकार), और GS-III (स्वास्थ्य नीति) में प्रासंगिक है। निबंध पत्र में "प्रजनन अधिकार", "महिला अधिकार और कानून" जैसे विषय आए हैं। प्रीलिम्स में अधिनियम के विशिष्ट प्रावधान और हालिया SC निर्णय पूछे जा सकते हैं।

भारत में सुरक्षित गर्भपात तक पहुँच बढ़ाने के क्या उपाय हैं?

ASHA व नर्सों को आरंभिक गर्भपात के लिए प्रशिक्षण; टेलीमेडिसिन के माध्यम से दूरस्थ परामर्श; मेडिकल बोर्डों का डिजिटलीकरण और समय-सीमा; आयुष्मान भारत के अंतर्गत निःशुल्क सेवाएँ; और स्कूलों में व्यापक यौन शिक्षा प्रमुख हैं।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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