COVID-19 महामारी के बाद भारत की आर्थिक पुनर्प्राप्ति एक असमान पैटर्न दिखा रही है जिसे K-आकार की पुनर्प्राप्ति (K-Shaped Recovery) कहा जाता है। इसमें “K” की ऊपरी शाखा धनी और उच्च-आय वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है जो तेज़ी से उबर रहा है, जबकि निचली शाखा निम्न और मध्यम-आय वर्ग को दर्शाती है जो अभी भी संघर्ष कर रहा है।
K-आकार की पुनर्प्राप्ति क्या है?
जब किसी आर्थिक संकट के बाद पुनर्प्राप्ति अलग-अलग वर्गों या क्षेत्रों में अलग-अलग गति और दिशा में होती है, तो इसे K-आकार कहते हैं। यह V-आकार (त्वरित पुनर्प्राप्ति) या U-आकार (धीमी पुनर्प्राप्ति) से भिन्न है।
भारत में K-आकार के साक्ष्य
- शेयर बाज़ार — 2020-21 में तेज़ उछाल; धनी निवेशकों को लाभ।
- FMCG और लक्जरी वस्तुएँ — उच्च-आय वर्ग की खपत बढ़ी।
- असंगठित क्षेत्र — प्रवासी मज़दूर, छोटे व्यापारी सबसे अधिक प्रभावित।
- रोज़गार — सफेदपोश नौकरियाँ बचीं; दिहाड़ी मज़दूरों को भारी नुकसान।
- CMIE डेटा — 2020 में 12 करोड़ से अधिक लोग बेरोज़गार हुए।
K-आकार के कारण
- डिजिटल विभाजन — तकनीकी रूप से सक्षम वर्ग को घर से काम करने का अवसर।
- संगठित बनाम असंगठित क्षेत्र का अंतर।
- सामाजिक सुरक्षा जाल की कमज़ोरी।
- आर्थिक उत्तेजना उपायों का असमान लाभ।
K-आकार के परिणाम
- आय असमानता में वृद्धि — गिनी गुणांक बढ़ा।
- सामाजिक अशांति का जोखिम।
- मध्यम वर्ग का क्षरण।
- मानव पूँजी विनाश — गरीब परिवारों के बच्चे स्कूल छोड़े।
नीतिगत उपाय
- प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) का विस्तार।
- मनरेगा बजट में वृद्धि।
- असंगठित क्षेत्र के लिए सामाजिक सुरक्षा।
- कौशल विकास और पुनःप्रशिक्षण।
यूपीएससी प्रासंगिकता
यूपीएससी GS III में आर्थिक विकास, असमानता और COVID-19 के आर्थिक प्रभाव के प्रश्नों में K-आकार की पुनर्प्राप्ति महत्त्वपूर्ण है।