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भारत में कोल बेड मीथेन (CBM): संसाधन, उपयोग और UPSC नोट्स (UPSC पर्यावरण)

भारत में कोल बेड मीथेन (CBM) — संसाधन, निष्कर्षण, उपयोग, चुनौतियाँ, स्वच्छ कोयला विकल्प और उभरते नियमन — UPSC GS III ऊर्जा एवं पर्यावरण के लिए विस्तृत मार्गदर्शिका।

Coal Bed Methane (CBM) in India: Resources, Uses and UPSC Notes (UPSC Environment) — UPSC featured image

कोल बेड मीथेन (Coal Bed Methane, CBM) एक अपरम्परागत प्राकृतिक गैस है, जो कोयले की सीमों (coal seams) के भीतर बंद रहती है। भारत — जो विश्व का पाँचवाँ सबसे बड़ा कोयला भंडार रखता है — में CBM के संसाधन लगभग 92 ट्रिलियन क्यूबिक फ़ीट (TCF) या 2,600 अरब घन मीटर (BCM) अनुमानित हैं। यदि व्यवस्थित रूप से निष्कर्षित किया जाए, तो CBM भारत की प्राकृतिक गैस आयात-निर्भरता को घटा सकता है, ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत कर सकता है और कोयला खनन से होने वाले मीथेन उत्सर्जन (fugitive emissions) को कम कर सकता है। यह विषय UPSC GS पेपर III में ऊर्जा संसाधनों, पर्यावरण और विज्ञान-प्रौद्योगिकी का स्थायी प्रश्न है।

UPSC के लिए CBM की समझ तीन कोणों से अनिवार्य है — पहला, यह “स्वच्छ कोयला (clean coal)” बहस का हिस्सा है; दूसरा, यह वैश्विक मीथेन प्रतिज्ञा (Global Methane Pledge) से जुड़ा है; तीसरा, यह जस्ट ट्रांज़िशन (Just Transition) और SDG 7 (सस्ती स्वच्छ ऊर्जा) के संदर्भ में नीति-निर्माण का परीक्षण है।

कोल बेड मीथेन क्या है

CBM कोयला निक्षेपों या कोयला सीमों में पाई जाने वाली प्राकृतिक गैस है (मुख्यतः मीथेन)। यह कोलिफ़िकेशन (coalification) के दौरान बनती है — पादप-पदार्थ के कोयले में लम्बे भूवैज्ञानिक रूपान्तरण की प्रक्रिया। दबाव में मीथेन कोयले की आंतरिक सतहों पर अधिशोषित (adsorbed) हो जाती है। जब दबाव घटाया जाता है — आम तौर पर कोयला सीम से पानी पंप करके (dewatering) — तो मीथेन छूटती है (desorbs) और कुओं के माध्यम से सतह तक प्रवाहित होती है।

परम्परागत प्राकृतिक गैस के विपरीत — जो छिद्रिल बलुआ-पत्थर भंडारों (porous sandstone reservoirs) में रहती है — CBM कोयले के सूक्ष्म-छिद्रों (micropores) में बैठी होती है। निष्कर्षण तकनीकें भिन्न हैं — CBM कुएँ आम तौर पर उथले होते हैं और प्रारंभिक वर्षों में निरंतर जल-उत्पादन की आवश्यकता रखते हैं।

भारत के CBM संसाधन

  • कुल संसाधन — लगभग 92 TCF या 2,600 BCM।
  • भौगोलिक संकेन्द्रण — भंडार 12 राज्यों में, मुख्यतः पूर्वी भारत के गोंडवाना अवसादों (Gondwana sediments) में।
  • प्रमुख प्रत्याशी क्षेत्र — दामोदर-कोएल घाटी (झारखंड, बिहार) और सोन घाटी (मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश)।
  • उत्पादक ब्लॉक — रानीगंज दक्षिण (पश्चिम बंगाल), झरिया (झारखंड), बोकारो (झारखंड) और सोहागपुर (मध्य प्रदेश)।
  • नोडल मंत्रालय — पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय।
  • नियामक — हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (Directorate General of Hydrocarbons, DGH)।

CBM ब्लॉकों की नीलामी 2001 से कई दौरों में हो रही है। 2017 और 2022 के नीतिगत सुधारों ने अनुमोदन और राजस्व-साझेदारी को सरल किया है।

कोल बेड मीथेन के उपयोग

  • विद्युत उत्पादन — CBM-आधारित बिजली संयंत्र।
  • वाहन ईंधन — परिवहन के लिए संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG)।
  • उर्वरक के लिए फ़ीडस्टॉक — LNG-आधारित यूरिया निर्माण का विकल्प।
  • औद्योगिक उपयोग — सीमेंट उत्पादन, रोलिंग मिल, इस्पात संयंत्र, मेथनॉल उत्पादन।
  • घरेलू खाना पकाना — पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) — LPG का विकल्प।

CBM की रासायनिक संरचना परम्परागत प्राकृतिक गैस के समान है (90% से अधिक मीथेन), इसलिए यह मौजूदा गैस अवसंरचना में विनिमेय (interchangeable) है।

चुनौतियाँ और चिंताएँ

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन

मीथेन एक ग्रीनहाउस गैस है — 20-वर्षीय अवधि में CO2 की तुलना में लगभग 80 गुना अधिक प्रबल। कोयला खदानों से वैश्विक मीथेन उत्सर्जन कुल वैश्विक मीथेन उत्सर्जन का लगभग 8% है। निष्कर्षण और संचरण के दौरान फ़्यूजिटिव उत्सर्जन CBM के कोयले से बेहतर होने के जलवायु लाभ को निरस्त कर सकते हैं।

भूमि और आवास का व्यवधान

ड्रिलिंग, सड़क-पहुँच और सतह सुविधाएँ वन्यजीव आवासों को प्रभावित करती हैं। कोयला-खनन क्षेत्र अक्सर वनाच्छादित होते हैं — वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम 2023 के अनुपालन से जुड़े प्रश्न उठाते हैं।

उत्पादन की जटिलता

CBM उत्पादन का व्यवहार जटिल है और प्रारंभिक चरणों में अनुमान लगाना कठिन है — जल-निकासी की गतिकी, सीम विषमता और तनाव-स्थितियों के कारण।

उत्पादित जल (Produced Water)

CBM कुएँ अत्यधिक मात्रा में अति-लवणीय निर्माण-जल (highly salinised formation water) उत्पन्न करते हैं — मीथेन छोड़ने के लिए इसे पंप करना पड़ता है। इस लवणीय जल का निपटान मीठे-पानी की पारिस्थितिकी को दूषित कर सकता है, मिट्टी की लवणीयता बढ़ा सकता है और कृषि भूमि को क्षति पहुँचा सकता है।

सतह-भूजल अंतःक्रिया

जल-निकासी (dewatering) स्थानीय जल-स्तर को नीचे ला सकती है — समुदाय के पेयजल और कृषि को प्रभावित करते हुए।

आर्थिक व्यवहार्यता

CBM परियोजनाओं को लम्बी लीड-टाइम, बड़ी अग्रिम पूँजी और अनुकूल गैस-मूल्य निर्धारण की आवश्यकता होती है। भारत के कई CBM ब्लॉक भंडार-जटिलता के कारण अपेक्षाओं से कम प्रदर्शन कर रहे हैं।

अन्य प्रस्तावित स्वच्छ कोयला उपयोग

कोयला गैसीकरण (Coal Gasification)

एक रासायनिक प्रक्रिया जो कोयले को संश्लेषण गैस (syngas) या अन्य रसायनों में बदलती है, जो पर्यावरण की दृष्टि से कम हानिकारक हैं। भारत ने 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य रखा है। राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन (2020) इस संक्रमण का समर्थन करता है।

कार्बन कैप्चर एवं भंडारण (CCS) के साथ कोयला

कोयला दहन से CO2 कैप्चर कर भूगर्भीय संरचनाओं में इंजेक्ट करना। अब भी महँगा है, परन्तु नेट-ज़ीरो पथ के तहत कोयला उपयोग को सम्भव बना सकता है। NTPC ने अपने थर्मल संयंत्रों में पायलट CCS परियोजना शुरू की है।

भूमिगत कोयला गैसीकरण (UCG)

उन कोयला सीमों का स्थान-बद्ध (in-situ) गैसीकरण जो खनन के लिए बहुत गहरी या अनुपयुक्त हैं — कोयले को भूमिगत स्तर पर ही syngas में बदलना। भारत के विशाल अनुपयोगी गहरे कोयले के लिए सम्भावना।

कोयला धुलाई और श्रेणीकरण

तार और राख की मात्रा घटाता है, दहन-दक्षता सुधारता है और प्रति इकाई ऊर्जा उत्सर्जन कम करता है।

खदान पुनर्वास और नवीकरणीय एकीकरण

जीवन-चक्र समाप्ति के बाद खदान-स्थलों का सौर, पवन और पंप्ड स्टोरेज के साथ टिकाऊ पुनर्वास। Coal India ने पूर्व खदान-स्थलों पर 3 GW सौर क्षमता की घोषणा की है।

स्थानीय सामाजिक-आर्थिक एकीकरण

स्थानीय लोगों को रोज़गार, स्थानीय विकास के लिए रॉयल्टी, और कोयला-खनन क्षेत्रों में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR)। झारखंड और छत्तीसगढ़ में जस्ट ट्रांज़िशन पायलट चल रहे हैं।

नीति और नियामक ढाँचा

  • CBM नीति 1997 — CBM को परम्परागत तेल-गैस से अलग व्यवस्था के रूप में स्थापित किया।
  • नई अन्वेषण लाइसेंसिंग नीति (NELP) — CBM के लिए दौर।
  • हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (HELP) 2016 — राजस्व-साझेदारी और ओपन एकरिज लाइसेंसिंग; 2022 में CBM तक विस्तारित।
  • हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH) CBM ठेकों को नियंत्रित करता है।
  • वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम 2023 — CBM कुओं और सुविधाओं के लिए वन-भूमि स्थानांतरण को नियंत्रित करता है।

CBM बनाम अन्य अपरम्परागत गैसें — एक तुलना

विशेषताCBMशेल गैस (Shale Gas)परम्परागत गैस
स्रोत-शिलाकोयला सीमशेल फ़ॉर्मेशनबलुआ-पत्थर भंडार
निष्कर्षणजल-निकासीहाइड्रोलिक फ़्रैक्चरिंगपरम्परागत ड्रिलिंग
गहराईउथली से मध्यमगहरीविभिन्न
जल खपतउत्पादित जल अधिकउच्च (फ़्रैकिंग)कम
भारत में स्थितिनीति 1997 सेशुरुआती चरणस्थापित
UPSC प्रासंगिकताउच्च (पर्यावरण/ऊर्जा)मध्यमस्थापित

हालिया घटनाक्रम (2024-26)

  • HELP सुधार विस्तार — सुव्यवस्थित HELP ढाँचे के तहत प्रस्तुत CBM ब्लॉकों में 2024 में बोलीदाता-रुचि बढ़ी।
  • मीथेन कैप्चर और मुद्रीकरण — भारत की राष्ट्रीय मीथेन कार्य योजना (विचाराधीन) कोयला खदान मीथेन (CMM) को वायुमंडल में जाने से पहले मुद्रीकृत करने की परिकल्पना करती है।
  • COP29 बाकू (2024) — भारत के अद्यतन NDCs में कोयला खदान मीथेन कमी एक न्यून-कारी सह-लाभ के रूप में शामिल।
  • भारतीय कार्बन बाज़ार (2025) — कोयला खदान मीथेन कैप्चर और CBM उत्पादन से कार्बन क्रेडिट अर्जित होने की उम्मीद, जिससे परियोजना अर्थशास्त्र सुधरेगा।
  • वैश्विक मीथेन प्रतिज्ञा (Global Methane Pledge) — भारत शामिल नहीं है, परन्तु कोयला खदान मीथेन पर घरेलू कार्रवाई आगे बढ़ रही है।
  • राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन — तालचर (ओडिशा) और झारखंड में पायलट प्रगति पर; गैसीकरण-से-रसायन संयंत्र योजनाधीन।
  • CIL जस्ट ट्रांज़िशन पायलट — 2024 में जर्मनी के द्विपक्षीय समर्थन से चार खदान-क्षेत्र चयनित।
  • क्रिटिकल मिनरल्स ओवरलैप — कुछ CBM-वाहक सीम दुर्लभ मृदा (rare earths) में भी समृद्ध हैं — क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के साथ तालमेल।

UPSC प्रासंगिकता

प्रीलिम्स बिंदु

  • CBM भंडार — 92 TCF या 2,600 BCM।
  • पूर्वी भारत के गोंडवाना अवसाद।
  • दामोदर-कोएल और सोन घाटियाँ।
  • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, DGH।
  • HELP 2016, CBM नीति 1997।
  • कोयले से वैश्विक मीथेन उत्सर्जन का हिस्सा — 8%।
  • कोयला गैसीकरण लक्ष्य — 2030 तक 100 MT।

मेन्स कोण (GS III)

विशिष्ट प्रश्न — CBM की ऊर्जा सुरक्षा में भूमिका, CBM निष्कर्षण की पर्यावरणीय चुनौतियाँ, स्वच्छ कोयला विकल्प, राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन और जस्ट ट्रांज़िशन की समीक्षा करते हैं। मज़बूत उत्तर नियामक ढाँचे, ग्रीनहाउस गैस विचार, उत्पादित जल प्रबंधन और जलवायु प्रतिबद्धताओं को एकीकृत करते हैं।

अभ्यास प्रश्न — “कोल बेड मीथेन भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत कर सकता है, परन्तु पर्यावरणीय जोखिम भी रखता है। चर्चा कीजिए कि नीति इन चुनौतियों को कैसे संतुलित करती है।” (250 शब्द)

लिंकेज

CBM SDG 7 (सस्ती स्वच्छ ऊर्जा), SDG 13 (जलवायु क्रिया), COP29 के बाद भारत के अद्यतन NDCs, वैश्विक मीथेन प्रतिज्ञा, ऊर्जा संरक्षण संशोधन अधिनियम 2022, वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम 2023, राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन और भारतीय कार्बन बाज़ार से जुड़ता है।

सामान्य प्रश्न

कोल बेड मीथेन (CBM) क्या है?

CBM कोयला सीमों के भीतर पाई जाने वाली प्राकृतिक गैस है, जिसमें मुख्यतः मीथेन होती है। यह कोयले की आंतरिक सतहों पर अधिशोषित रहती है और पानी पंप कर दबाव कम करने पर सतह तक प्रवाहित होती है।

भारत में CBM के कुल अनुमानित भंडार कितने हैं?

भारत के CBM संसाधन लगभग 92 ट्रिलियन क्यूबिक फ़ीट (TCF) या 2,600 अरब घन मीटर (BCM) अनुमानित हैं — जो विश्व में पाँचवें सबसे बड़े कोयला भंडार के अनुरूप हैं।

भारत में CBM के प्रमुख क्षेत्र कौन-से हैं?

दामोदर-कोएल घाटी (झारखंड, बिहार) और सोन घाटी (मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश) मुख्य प्रत्याशी क्षेत्र हैं। उत्पादक ब्लॉक रानीगंज दक्षिण, झरिया, बोकारो और सोहागपुर हैं।

CBM और शेल गैस में क्या अंतर है?

CBM कोयला सीमों में रहती है और जल-निकासी से निकाली जाती है। शेल गैस शेल चट्टानों में बंद रहती है और हाइड्रोलिक फ़्रैक्चरिंग (‘फ़्रैकिंग’) से निकाली जाती है। दोनों अपरम्परागत गैसें हैं, परन्तु तकनीक और पर्यावरणीय चिंताएँ भिन्न हैं।

HELP नीति क्या है?

हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (HELP) 2016 — एक एकीकृत लाइसेंसिंग ढाँचा जो परम्परागत और अपरम्परागत हाइड्रोकार्बन (तेल, गैस, CBM, शेल) को एक ही अनुबंध के तहत लाता है। 2022 में CBM तक विस्तारित किया गया।

CBM निष्कर्षण की मुख्य पर्यावरणीय चुनौती क्या है?

तीन प्रमुख चुनौतियाँ — (1) फ़्यूजिटिव मीथेन उत्सर्जन, (2) उत्पादित जल का निपटान (अति-लवणीय), और (3) जल-निकासी से स्थानीय जल-स्तर का गिरना। मीथेन CO2 से 80 गुना अधिक प्रबल ग्रीनहाउस गैस है।

राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन क्या है?

2020 में शुरू किया गया मिशन — 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य रखता है। तालचर (ओडिशा) और झारखंड में पायलट परियोजनाएँ चल रही हैं।

क्या भारत वैश्विक मीथेन प्रतिज्ञा (Global Methane Pledge) में शामिल है?

नहीं। भारत ने वैश्विक मीथेन प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, परन्तु कोयला खदान मीथेन कैप्चर और भारतीय कार्बन बाज़ार के माध्यम से घरेलू कार्रवाई जारी है। COP29 (2024) के बाद यह प्रतिबद्धता मज़बूत हुई है।

CBM UPSC के लिए क्यों प्रासंगिक है?

यह GS III में पाँच विषयों को जोड़ता है — ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, संसाधन प्रबंधन और स्वच्छ प्रौद्योगिकी। प्रीलिम्स में आँकड़े पूछे जाते हैं; मेन्स में नीति-संतुलन के प्रश्न।

‘जस्ट ट्रांज़िशन’ का क्या अर्थ है, और CBM से इसका क्या संबंध है?

जस्ट ट्रांज़िशन का अर्थ — कोयला से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बदलाव करते समय श्रमिकों, समुदायों और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं की रक्षा। CBM और कोयला गैसीकरण कोयला खदान-क्षेत्रों को नई आजीविका दे सकते हैं — झारखंड और छत्तीसगढ़ में जस्ट ट्रांज़िशन पायलट जारी हैं।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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