लैंगिक बजटिंग (Gender Budgeting) सम्पूर्ण नीति चक्र पर लैंगिक दृष्टिकोण लागू करती है — निर्माण और आवंटन से लेकर क्रियान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन तक। यह कोई अलग “महिला बजट” नहीं है, बल्कि सामान्य राजकोषीय निर्णय-प्रक्रिया में लिंग-संवेदनशीलता को मुख्यधारा में लाने की एक पद्धति है। भारत ने 2005-06 में लैंगिक बजटिंग अपनाई और तब से Gender Budget Statement प्रत्येक केंद्रीय बजट का अनिवार्य अंग बन चुका है, जिसका दायरा और महत्त्वाकांक्षा निरंतर बढ़ी है। ऐसी अर्थव्यवस्था में जहाँ महिला श्रम-बल भागीदारी और अवैतनिक देखभाल कार्य लंबे समय से नीति की अनदेखी का शिकार रहे, लैंगिक बजटिंग केंद्र तथा कई राज्यों में राजकोषीय नारीवाद का प्रमुख उपकरण है।
लैंगिक बजटिंग क्या है
लैंगिक बजटिंग सरकारी व्ययों, कर नीतियों और कार्यक्रमों का विश्लेषण इस दृष्टि से करती है कि इनका महिलाओं और पुरुषों पर भिन्न प्रभाव क्या है। यह इस मान्यता पर टिकी है कि:
- महिलाओं और पुरुषों की आवश्यकताएँ, संसाधन-संपन्नता तथा अवरोध अलग-अलग हैं।
- लिंग-तटस्थ बजट वस्तुतः लिंग-अंध हो सकते हैं और मौजूदा असमानताओं को दोहराते हैं।
- सकारात्मक आवंटन शिक्षा, स्वास्थ्य, काम और परिसंपत्तियों में परिणामों की खाई को पाट सकता है।
पाँच-चरणीय ढाँचा
- स्थिति विश्लेषण — महिलाओं और पुरुषों की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, मज़दूरी, परिसंपत्तियाँ।
- नीति समीक्षा — मौजूदा योजनाओं की लैंगिक प्रासंगिकता और डिज़ाइन का आकलन।
- बजट पर्याप्तता का आकलन — आवंटन घोषित उद्देश्यों से मेल खाते हैं या नहीं।
- व्यय निगरानी — धनराशि इच्छित लाभार्थियों तक पहुँच रही है या नहीं।
- प्रभाव मूल्यांकन — लैंगिक खाई सिकुड़ी है या नहीं।
भारत का लैंगिक बजटिंग ढाँचा
- 2005-06: Gender Budget Statement की शुरुआत।
- Part A: 100% महिला-समर्पित योजनाएँ (women-specific) — SSY, PM मातृ वंदना योजना, कामकाजी महिला छात्रावास, निर्भया कोष, उज्ज्वला 2.0।
- Part B: कम से कम 30% महिला-लक्षित आवंटन वाली योजनाएँ (pro-women) — PMAY, NRLM, MGNREGS, मध्याह्न भोजन।
- Part C (2024-25 में जोड़ा गया): 30% से कम महिला-लक्षित व्यय परंतु स्पष्ट लैंगिक परिणामों वाली योजनाएँ।
- Gender Budgeting Cells (GBCs): प्रत्येक केंद्रीय मंत्रालय और कई राज्य सरकारों में समर्पित प्रकोष्ठ।
- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय: पुस्तिकाएँ, प्रशिक्षण सामग्री और वार्षिक GBS प्रकाशित करता है।
प्रक्रिया प्रवाह
वित्त मंत्रालय का बजट परिपत्र प्रत्येक मंत्रालय को निर्देश देता है कि वह चालू योजनाओं की समीक्षा करे, गतिविधियों को प्राथमिकता दे और लिंग-पृथक्कृत अनुमान GBS में दे। यह विवरण केंद्रीय बजट के साथ पटल पर रखा जाता है और अनुदान माँगों में भी आता है। CAG अनुपालन की लेखा-परीक्षा करता है।
राज्य स्तर पर व्यवहार
केरल, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा ने लैंगिक बजटिंग को संस्थागत रूप दिया है। केरल का लैंगिक बजटिंग दस्तावेज़ सर्वाधिक विस्तृत है, जिसमें स्थानीय निकाय स्तर तक परिणाम संकेतक दर्ज हैं। तेलंगाना और तमिलनाडु ने हाल में अपने GBS की परिधि बढ़ाई है।
औचित्य एवं लाभ
- लैंगिक समानता: सकारात्मक पक्षपात (positive discrimination) संरचनात्मक असंतुलन को सुधारता है।
- दक्षता: लक्षित आवंटन से रिटर्न अधिक होता है — महिला शिक्षा की खाई भरने से पारिवारिक कल्याण असमान रूप से बढ़ता है।
- समावेशी विकास: महिला-नेतृत्व वाला विकास माँग, बचत और मानव पूँजी को कई गुना बढ़ाता है।
- जवाबदेही: संसद, CAG और नागरिक समाज GBS की क्रियान्वयन खामियों की जाँच कर सकते हैं।
- राजकोषीय नारीवाद: कर नीति लैंगिक खाई को लक्षित कर सकती है — सुकन्या समृद्धि का वरीयता रिटर्न, महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीकरण पर स्टाम्प शुल्क रियायत, पति-पत्नी के बीच कर-रहित उपहार।
- आँकड़ा अनुशासन: लिंग-पृथक्कृत बजटिंग से मंत्रालयों को लाभार्थियों का लैंगिक ट्रैक रखना पड़ता है।
चुनौतियाँ
- Part B की दोहरी गिनती: किसी योजना को 30% pro-women अधिकांशतः अनुमान के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, सत्यापित परिणामों के आधार पर नहीं।
- आवंटन बनाम परिणाम: आवंटन स्वतः परिणाम नहीं देते; अंतिम छोर की डिलीवरी में खामियाँ बनी रहती हैं।
- सीमित दायरा: स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस जैसे राज्य विषय केंद्रीय GBS में कम दिखते हैं।
- अवैतनिक देखभाल कार्य: बजटिंग अब भी देखभाल अर्थव्यवस्था को मूल्यांकित कर पुनर्वितरित करने में संघर्ष करती है, जिसे आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 ने मुद्रीकृत करने पर GDP का 15-17% आँका।
- घटती FLFPR: वर्षों की लैंगिक बजटिंग के बावजूद महिला श्रम-बल भागीदारी दर हाल ही में PLFS 2023-24 में 41.7% पर पहुँची है।
- उप-राष्ट्रीय क्षमता: सभी राज्यों में कार्यशील GBCs नहीं हैं।
नवीनतम विकास (2024-26)
- बजट 2025-26: लैंगिक बजट आवंटन 4.5 लाख करोड़ रुपये के पार; कुल केंद्रीय व्यय का 8.8% — अब तक का सर्वोच्च हिस्सा। Part A 1.5 लाख करोड़ रुपये के पार।
- नारी शक्ति पहल: नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वाँ संविधान संशोधन, 2023) लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है; यह अगले परिसीमन के बाद लागू होगा। बजट ने इस राजनीतिक पहल को पूरक राजकोषीय आवंटनों से सुदृढ़ किया है।
- महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र: केवल महिलाओं के लिए लघु बचत उपकरण, बजट 2023 में आरंभ, 2028 तक विस्तारित।
- PM आवास योजना 2.0: अनिवार्य संयुक्त या केवल महिला स्वामित्व बरकरार।
- MPI 2024: नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2024 ने दिखाया कि 2013-14 से 2022-23 के बीच महिला-प्रधान परिवारों में गरीबी तेज़ी से घटी, जो लैंगिक बजटिंग दृष्टिकोण को मान्य ठहराता है।
- 16वाँ वित्त आयोग: संदर्भ शर्तों में उन राज्यों के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं जो अपने बजटों में लैंगिक एवं जलवायु-संवेदनशील व्यय शामिल करते हैं।
- देखभाल अर्थव्यवस्था की मान्यता: बजट 2025-26 में पालना 2.0 के अंतर्गत क्रेच और आंगनवाड़ी उन्नयन के तहत चाइल्डकेयर बुनियादी ढाँचे के लिए समर्पित आवंटन — अवैतनिक देखभाल कार्य के मुद्रीकरण की दिशा में आरंभिक कदम।
- GST और PLI कड़ियाँ: सैनिटरी नैपकिन पर GST छूट जारी; PLI योजनाओं में कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और खाद्य प्रसंस्करण में महिला रोज़गार के अंतर्निहित लक्ष्य।
आगे का रास्ता
- Part A और Part B योजनाओं के लिए लिंग-पृथक्कृत लक्ष्यों के साथ परिणाम बजटिंग (outcome budgeting) लागू की जाए।
- Part C वर्गीकरण का विस्तार किया जाए ताकि अवसंरचना, कर व्यय और सब्सिडियाँ भी आएँ।
- देखभाल अर्थव्यवस्था: समय-उपयोग सर्वेक्षण और क्रेच बुनियादी ढाँचे के माध्यम से अवैतनिक कार्य की पहचान और भुगतान हो।
- राज्यों में विस्तार: पिछड़े राज्यों में Gender Budgeting Cells को मज़बूत किया जाए।
- CAG द्वारा प्रदर्शन लेखा-परीक्षा केवल आवंटन पर नहीं, महिला-परिणामों पर केंद्रित हो।
UPSC प्रासंगिकता
लैंगिक बजटिंग GS I (महिला मुद्दे), GS II (कल्याण योजनाएँ) और GS III (सरकारी बजटिंग, समावेशी विकास) में फैली है। मेन्स में अक्सर अभ्यर्थियों से भारत के लैंगिक बजटिंग अनुभव का आलोचनात्मक मूल्यांकन या महिला श्रम-बल भागीदारी से इसके संबंध पर प्रश्न पूछा जाता है। प्रीलिम्स में Part A/B/C का अंतर, 2005 की आरंभ तिथि और योजना-स्तरीय निर्धारण नियमों की जाँच हो सकती है। अभ्यर्थियों को FY26 के आवंटन आँकड़े, Gender Budget Statement की संरचना तथा प्रत्येक Part की प्रमुख योजनाएँ याद रखनी चाहिए।
सामान्य प्रश्न
लैंगिक बजटिंग क्या है?
यह सरकारी बजट निर्माण, आवंटन, क्रियान्वयन और मूल्यांकन में लिंग-आधारित विश्लेषण लागू करने की पद्धति है, ताकि नीतियाँ महिलाओं और पुरुषों पर अपने भिन्न प्रभावों को पहचान सकें।
भारत ने लैंगिक बजटिंग कब अपनाई?
भारत ने वर्ष 2005-06 में Gender Budget Statement के साथ लैंगिक बजटिंग की औपचारिक शुरुआत की।
Part A और Part B में क्या अंतर है?
Part A में 100% महिलाओं के लिए समर्पित योजनाएँ हैं, जबकि Part B में कम से कम 30% आवंटन महिलाओं के लिए निर्धारित योजनाएँ आती हैं।
बजट 2025-26 में लैंगिक बजट कितना है?
बजट 2025-26 में लैंगिक बजट आवंटन 4.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुँच गया, जो कुल केंद्रीय व्यय का लगभग 8.8% है।
Gender Budgeting Cells का क्या काम है?
ये प्रत्येक केंद्रीय मंत्रालय और कई राज्य सरकारों में स्थापित प्रकोष्ठ हैं, जो लैंगिक बजटिंग के क्रियान्वयन, निगरानी और क्षमता निर्माण के लिए नोडल बिंदु का कार्य करते हैं।
लैंगिक बजटिंग की प्रमुख आलोचनाएँ क्या हैं?
Part B की दोहरी गिनती, आवंटन और परिणाम के बीच की खाई, राज्य विषयों का सीमित दायरा, अवैतनिक देखभाल कार्य की अनदेखी, और कई राज्यों में कमज़ोर क्रियान्वयन इसकी प्रमुख आलोचनाएँ हैं।