मिलेट्स (Millets) — ज्वार, बाजरा, रागी और छोटे मोटे अनाज — ने अप्रत्याशित वापसी की है। कभी भारत की आधी आबादी का मुख्य अनाज रहे ये फ़सलें 1990 के दशक तक हरित क्रांति के चावल-गेहूँ एकल कृषि-तंत्र के तहत सिमटकर सीमांत फ़सलें रह गईं। अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023 (International Year of Millets), जिसे भारत में श्रीअन्न (Shree Anna) के रूप में ब्रांड किया गया, ने इन्हें जलवायु-अनुकूल कृषि, पोषण सुरक्षा और निर्यात प्रोत्साहन के केंद्र में पुनः स्थापित किया है। यह मार्गदर्शिका इनकी प्रासंगिकता, चुनौतियाँ और नीति-प्रयासों को सिलसिलेवार बताती है।
मिलेट्स क्यों महत्त्वपूर्ण हैं
मिलेट्स दोहरे-उपयोग वाले (खाद्य एवं चारा), पोषक-घनत्व से भरपूर, सुदृढ़ और कम-लागत वाली फ़सलें हैं, जो एक साथ कुपोषण, जलवायु परिवर्तन और सतत कृषि को संबोधित करती हैं। भारत में मिलेट्स लगभग 17 मिलियन हेक्टेयर में बोए जाते हैं और वार्षिक उत्पादन 18 मिलियन टन है, जो भारत की खाद्यान्न टोकरी में लगभग 10% योगदान देते हैं।
सरकारी पहलें
- अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023 — भारत के प्रस्ताव को UNGA ने स्वीकार किया; इसी ने देश में श्रीअन्न री-ब्रांडिंग को जन्म दिया।
- राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष 2018 — जो IYM 2023 से पहले आया।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) के अंतर्गत पोषक-अनाज उप-मिशन — मोटे अनाजों/मिलेट्स पर केंद्रित योजना।
- बजट 2023-24 ने मिलेट्स को श्रीअन्न के रूप में मान्यता दी और भारतीय मिलेट अनुसंधान संस्थान (IIMR), हैदराबाद को वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र बनाने हेतु बढ़ाया हुआ समर्थन दिया।
- MSP — बाजरा, ज्वार, रागी MSP के अंतर्गत हैं; वार्षिक संशोधन होते हैं।
- PDS समावेशन — कई राज्य (कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश) PDS में मिलेट्स शामिल करते हैं।
- ICDS और मिड-डे मील — मिलेट्स परिचय हेतु पायलट कार्यक्रम।
- 10,000 FPO योजना के अंतर्गत मिलेट्स FPO को बढ़ावा।
- निर्यात प्रोत्साहन — APEDA का समर्पित मिलेट्स निर्यात संवर्धन मंच।
स्वास्थ्य लाभ
- मिलेट्स प्रोटीन, खनिजों और विटामिनों में चावल और गेहूँ से तीन से पाँच गुना अधिक पौष्टिक हैं।
- बी विटामिन, कैल्शियम, लौह, पोटैशियम, मैग्नीशियम, जिंक से भरपूर।
- ग्लूटेन-मुक्त और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स — ग्लूटेन एलर्जी या मधुमेह वालों के लिए उपयुक्त।
- कोलेस्ट्रॉल और रक्त-शर्करा को घटाते हैं।
- FAO ने SDG 2 (शून्य भूख), 3 (अच्छा स्वास्थ्य), 12 (ज़िम्मेदार उपभोग) और 13 (जलवायु कार्रवाई) के लिए मिलेट्स के महत्त्व को मान्यता दी है।
जलवायु सहिष्णुता
- अजैविक तनाव सहिष्णु — सूखा, उच्च तापमान और मृदा लवणता।
- जैविक तनाव सहिष्णु — कई मिलेट्स कीट एवं रोग प्रतिरोधी हैं।
- संरक्षण कृषि का अभिन्न अंग।
- कार्बन पृथक्करण क्षमता जलवायु शमन में सहायक।
- चावल या गेहूँ के लिए अनुपयुक्त सीमांत भूमि में भी उगाई जा सकती हैं।
सतत उत्पादन प्रणाली
- चावल की तुलना में 2.5 गुना कम पानी की आवश्यकता।
- प्राकृतिक मृदा संवर्धक — सशक्त जड़ तंत्र मृदा संरचना को सुधारते हैं।
- बहुउद्देशीय — भोजन, दाना, चारा, जैव-ईंधन, शराब-उद्योग।
- वर्षा आधारित क्षेत्रों और शुष्क-भूमि कृषि में आय बढ़ाने की संभावना।
- कम आदान लागत — सीमित उर्वरक और कीटनाशक निर्भरता।
पोषक अनाजों को बढ़ावा देने की रणनीतियाँ
मिलेट्स हेतु विशेष कृषि-व्यवसाय क्षेत्र (SABZ)
- मिलेट-विशिष्ट क्षेत्रों पर ध्यान:
- तेलंगाना, महाराष्ट्र में ज्वार।
- कर्नाटक में रागी (फिंगर मिलेट)।
- गुजरात, राजस्थान में बाजरा।
- मध्य प्रदेश, ओडिशा में छोटे मिलेट्स।
- SABZ को FPOs, फ़ार्म-गेट प्राथमिक प्रसंस्करण, भंडारण और मूल्य-संवर्धित खाद्य उत्पादों के इर्द-गिर्द निर्मित करना।
जैविक और प्राकृतिक मिलेट्स
- जैविक भोजन की बढ़ती उपभोक्ता माँग।
- मिलेट-प्राकृतिक खेती का मेल: कम आदान-उपयोग जैविक/प्राकृतिक खेती से संगत।
- मिलेट किसानों हेतु प्रमाणन (PGS-India, NPOP) का प्रोत्साहन।
व्यापार के अवसर
- मिलेट्स का निर्यात संभावना के अनुरूप नहीं रहा है; गुणवत्ता मानक (एकसमान श्रेणी, स्वच्छता, पैकेजिंग) सख़्त करने की आवश्यकता।
- किसानों को फ़सल-उत्तर गुणवत्ता — सुखाना, झटकना, सफ़ाई — सिखाना।
- बाज़ार-संपर्क हेतु APEDA का मिलेट निर्यात संवर्धन मंच।
मिलेट किसानों को FPO में संगठित करना
- उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, भंडारण और विपणन का संयोजन।
- FPO-नेतृत्व वाली ब्रांडिंग और सीधे-उपभोक्ता चैनल (जैसे तेलंगाना की “Millet Magic” पहल)।
MSP कवरेज का विस्तार
- छोटे मिलेट्स (कोदो, कंगनी, सांवा, कुटकी) को सक्षम जगहों पर MSP के अंतर्गत लाना।
- FCI, NAFED और राज्य एजेंसियों के माध्यम से प्रत्यक्ष क्रय।
अनुबंध खेती
- संस्थागत ख़रीदार (ITC, पतंजलि, ब्रेकफ़ास्ट सीरियल निर्माता) सीधे FPOs से अनुबंध कर रहे हैं।
माँग-पक्ष हस्तक्षेप
- ICDS, मिड-डे मील और PDS में समावेशन।
- मूल्य-संवर्धन — मिलेट नूडल्स, बिस्कुट, आटा, रेडी-टू-ईट उत्पाद।
- जागरूकता अभियान — श्रीअन्न ब्रांडिंग।
- लेबलिंग — पोषण लाभ, GI टैग (जैसे डिंडोरी का कोदो मिलेट)।
मूल्य-श्रृंखला की चुनौतियाँ
| चरण | चुनौती | रणनीति |
|---|---|---|
| उत्पादन | कम उपज, कम बीज-प्रतिस्थापन दर | HYV बीज, ICAR/IIMR प्रजनन; पोषक-तत्त्व प्रबंधन |
| फ़सल-उत्तर | खेत-किनारे प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों का अभाव | SABZ, FPO-आधारित प्रसंस्करण इकाइयाँ |
| प्रसंस्करण | दाना छीलने/पॉलिश करने की इकाइयाँ कुछ ही राज्यों में केंद्रित | MIDH और PMFME योजना का लाभ |
| विपणन | कुछ क्षेत्रों में उपभोक्ता जागरूकता कम | श्रीअन्न अभियान, खुदरा टाई-अप |
| निर्यात | गुणवत्ता और श्रेणीकरण संबंधी समस्याएँ | APEDA मंच, GI टैगिंग, पैकेजिंग मानक |
नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)
- श्रीअन्न ब्रांडिंग केंद्रीय और राज्य योजनाओं में दृढ़ता से अपनाई गई है।
- बजट 2023-24 के अंतर्गत IIMR हैदराबाद को मिलेट अनुसंधान का वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र घोषित किया गया।
- मिलेट निर्यात FY22 के 62 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर FY24 में 95 मिलियन डॉलर से ऊपर; सऊदी अरब, UAE, नेपाल और अमेरिका प्रमुख बाज़ार हैं।
- बजट 2025-26 ने PM धन-धान्य कृषि योजना और राष्ट्रीय खाद्य तेल एवं तिलहन मिशन (मिलेट तिलहन घटक) के माध्यम से मिलेट्स हेतु समर्थन को पुष्ट किया।
- PDS समावेशन — कई राज्यों (कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा) ने PDS अथवा प्रत्यक्ष कार्यक्रमों के ज़रिए मिलेट वितरण बढ़ाया।
- ICDS, सक्षम आँगनवाड़ी और पोषण 2.0 ने मिलेट-आधारित पूरक पोषण को एकीकृत किया।
- मिलेट-आधारित स्टार्ट-अप — 2022 से मिलेट प्रसंस्करण और ब्रांडेड उत्पादों में लगभग 6,000 करोड़ रुपये की वेंचर गतिविधि।
- भारत ने 2023 में वैश्विक मिलेट सम्मेलन की मेज़बानी की; Coalition for Millets पहल शुरू हुई।
- IYM 2023 की विरासत — FAO में बहु-वर्षीय कार्यक्रम जारी हैं।
यूपीएससी प्रासंगिकता
GS-III मैपिंग
- कृषि — फ़सल-पैटर्न विविधीकरण, जलवायु-सहिष्णु फ़सलें, MSP, FPOs।
- पोषण एवं खाद्य सुरक्षा — PDS, ICDS, पोषण 2.0।
- पर्यावरण — जलवायु परिवर्तन अनुकूलन, कार्बन पृथक्करण।
- भारतीय अर्थव्यवस्था — निर्यात प्रोत्साहन, मूल्य-संवर्धन।
प्रारंभिक (Prelims) बिंदु
- अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष — 2023; संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भारत का प्रस्ताव स्वीकार किया।
- श्रीअन्न — बजट 2023-24 की मिलेट्स री-ब्रांडिंग।
- IIMR हैदराबाद — मिलेट्स का उत्कृष्टता केंद्र।
- प्रमुख मिलेट्स: ज्वार (Sorghum), बाजरा (Pearl millet), रागी (Finger millet)।
- छोटे मिलेट्स: कोदो, कुटकी, कंगनी (Foxtail), सांवा (Barnyard), Little millet।
- जल आवश्यकता: मिलेट्स को चावल से ~2.5x कम पानी।
- NFSM का पोषक-अनाज घटक।
- FAO SDGs: 2, 3, 12, 13 समर्थित।
मुख्य परीक्षा (Mains) के कोण
- “मिलेट्स जलवायु-स्मार्ट, पोषण-स्मार्ट और आय-स्मार्ट फ़सल हैं। फिर भी ये एक विशिष्ट कोने तक क्यों सीमित रहे?” नीति व बाज़ार के कारणों की परख करें।
- “श्रीअन्न केवल री-ब्रांडिंग नहीं — यह भारत की फ़सल-पैटर्न में संरचनात्मक मोड़ है।” समालोचनात्मक चर्चा कीजिए।