प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer — DBT) भारत की सबसे महत्त्वाकांक्षी सामाजिक नीति सुधारों में से एक है। इसके माध्यम से सरकारी सब्सिडी और लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में हस्तांतरित किए जाते हैं — बिचौलियों को हटाकर।
DBT क्या है?
DBT एक नीति है जिसमें:
- नकद या लाभ सीधे लाभार्थी के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में जाता है।
- भ्रष्टाचार और रिसाव (leakage) कम होता है।
- पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।
JAM त्रिनेत्र
DBT की सफलता JAM ट्रिनिटी पर निर्भर है:
- J — जन धन: बैंक खाते।
- A — आधार: पहचान प्रमाण।
- M — मोबाइल: डिजिटल संपर्क।
DBT के लाभ
- लीकेज में कमी: भूत लाभार्थियों और बिचौलियों का उन्मूलन। रिपोर्ट के अनुसार LPG सब्सिडी में ₹1.4 लाख करोड़ की बचत।
- वित्तीय समावेश: जन धन खातों के माध्यम से वंचितों को बैंकिंग से जोड़ा।
- महिला सशक्तीकरण: महिलाओं के नाम पर खाते — उन्हें वित्तीय स्वायत्तता।
- समय पर भुगतान: NREGA, PM-KISAN, छात्रवृत्ति में।
- लक्षित वितरण: सही लाभार्थियों की पहचान।
DBT की चुनौतियाँ
- डिजिटल विभाजन: ग्रामीण और वृद्ध आबादी में स्मार्टफोन और इंटरनेट की कमी।
- बैंकिंग अवसंरचना: दूरदराज़ क्षेत्रों में बैंक शाखाएँ कम।
- आधार त्रुटियाँ: बायोमेट्रिक विफलता से वंचित हो जाना।
- नकद का सीमित उपयोग: जहाँ वस्तु-सब्सिडी अधिक उपयुक्त।
- गोपनीयता चिंताएँ: आधार डेटा का दुरुपयोग।
प्रमुख DBT योजनाएँ
- PM-KISAN: किसानों को ₹6,000/वर्ष।
- PM Ujjwala Yojana: LPG सब्सिडी।
- NREGA: मज़दूरी।
- छात्रवृत्ति योजनाएँ।
- मातृत्व लाभ: PM Matru Vandana Yojana।
यूपीएससी के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु
- DBT = आधार + बैंक + डिजिटल भुगतान के माध्यम से प्रत्यक्ष हस्तांतरण।
- JAM त्रिनेत्र की भूमिका।
- लाभ: लीकेज कम, वित्तीय समावेश, महिला सशक्तीकरण।
- चुनौती: डिजिटल विभाजन, बैंकिंग अवसंरचना।
- LPG में ₹1.4 लाख करोड़ की बचत — महत्त्वपूर्ण आँकड़ा।
सामान्य प्रश्न
DBT क्या है और इसका क्या महत्त्व है?
DBT (प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण) एक नीति है जिसमें सरकारी सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जाती है। यह भ्रष्टाचार और रिसाव को कम करता है।
JAM त्रिनेत्र क्या है?
JAM = जन धन (बैंक खाते) + आधार (पहचान) + मोबाइल (संपर्क) — यह DBT की सफलता का तकनीकी आधार है।