भारत ऐतिहासिक रूप से दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश रहा है। SIPRI के अनुसार 2019-23 में भारत की वैश्विक हथियार आयात में 9.8% हिस्सेदारी थी। इस निर्भरता को कम करने के लिए भारत ने रक्षा विनिर्माण को एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया है।
प्रमुख नीतिगत पहलें
- मेक इन इंडिया (Make in India) — 2014 में शुरू; रक्षा क्षेत्र में FDI सीमा 74% (FDI route) और 100% (सरकारी मार्ग)।
- रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 — “Atmanirbhar Bharat” के तहत स्वदेशी खरीद को प्राथमिकता।
- रक्षा उत्पादन नीति 2018 — 2025 तक 1.75 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन लक्ष्य।
- iDEX (Innovation for Defence Excellence) — स्टार्टअप के लिए रक्षा नवाचार मंच।
- रक्षा औद्योगिक गलियारे — UP और तमिलनाडु में।
DRDO और DPSU
- DRDO (Defence Research and Development Organisation) — स्वदेशी हथियार प्रणालियों का विकास।
- DPSUs (Defence Public Sector Undertakings) — HAL, BEL, BEML, BDL, MDL आदि।
- OFB का निगमीकरण — 2021 में आयुध निर्माणी बोर्ड को 7 PSU में बदला।
प्रमुख स्वदेशी उपलब्धियाँ
- तेजस लड़ाकू विमान।
- INS विक्रांत — स्वदेशी विमानवाहक पोत।
- आकाश मिसाइल प्रणाली।
- अर्जुन टैंक।
- ब्रह्मोस मिसाइल (भारत-रूस संयुक्त उद्यम)।
चुनौतियाँ
- निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी।
- R&D में कम निवेश।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की कठिनाइयाँ।
- DRDO की लंबी विकास समयरेखा।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता।
यूपीएससी प्रासंगिकता
GS III में रक्षा प्रौद्योगिकी, Atmanirbhar Bharat, Make in India और भारत की रक्षा नीति पर प्रश्न पूछे जाते हैं।