UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

भारत में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज: बाधाएँ और रणनीतियाँ (UPSC अर्थव्यवस्था)

भारत में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC), आयुष्मान भारत, स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय, जेब से भुगतान की समस्या और 2024-26 के नवीनतम घटनाक्रमों पर UPSC अर्थव्यवस्था गाइड।

Universal Health Coverage in India: Constraints and Strategies (UPSC Economy) — UPSC featured image

COVID-19 महामारी ने दशकों से सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की उस चेतावनी को रेखांकित किया — एक स्वास्थ्य संकट जल्दी ही आर्थिक और सामाजिक संकट में बदल सकता है। भारत की सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) की तलाश में प्रमुख आयुष्मान भारत कार्यक्रम, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों (HWC) का नेटवर्क, डिजिटल स्वास्थ्य मिशन और सुदृढ़ राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 शामिल हैं। लेकिन तीव्र प्रगति के बावजूद, जेब से भुगतान (OOPE), कम सार्वजनिक व्यय और असमान पहुँच सभी के लिए स्वास्थ्य के लक्ष्य को बाधित करती रहती हैं।

पृष्ठभूमि: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की परिभाषा

UHC का अर्थ है सभी भारतीय नागरिकों को बिना वित्तीय कठिनाई के गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं — प्रोत्साहक, निवारक, उपचारात्मक, पुनर्वास और उपशामक देखभाल — तक समान पहुँच सुनिश्चित करना। यह 4 ‘A’ सिद्धांतों पर आधारित है:

  • उपलब्धता (Availability): पर्याप्त बुनियादी ढाँचा और मानव संसाधन।
  • पहुँच (Accessibility): भौतिक और डिजिटल पहुँच।
  • सामर्थ्य (Affordability): विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय न हो।
  • जवाबदेही (Accountability): गुणवत्ता, पारदर्शिता, शिकायत निवारण।

भारत में UHC सुनिश्चित करने में समस्याएँ

1. स्वास्थ्य पर कम सार्वजनिक व्यय

केंद्र और राज्य का संयुक्त व्यय GDP का लगभग 1.9-2.1% (2023-24) है, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के 2025 तक 2.5% के लक्ष्य से कम है। भूटान (~2.5%), श्रीलंका (~2%) और वियतनाम (~3.7%) जैसे देश अनुपात में अधिक व्यय करते हैं।

2. बीमा पहुँच की कमी (PMJAY से पूर्व)

आयुष्मान भारत से पहले लगभग 86% ग्रामीण और 82% शहरी परिवारों के पास बीमा नहीं था। बढ़ती स्वास्थ्य लागत ने परिवारों को बचत खर्च करने, उधार लेने या उपचार स्थगित करने पर मजबूर किया। अनुमान था कि 5.5-6 करोड़ भारतीय प्रतिवर्ष स्वास्थ्य व्यय के कारण गरीबी में धकेले जाते हैं।

3. जेब से उच्च भुगतान (OOPE)

भारत में OOPE विश्व में सर्वाधिक में से एक रही है — कुल स्वास्थ्य व्यय का लगभग 48-55% (पहले के 62% से कम)। वैश्विक औसत ~18% है।

4. पहुँच की कमियाँ

माध्यमिक और तृतीयक अस्पताल टियर-1 और टियर-2 शहरों में केंद्रित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों, विशेषज्ञों, नैदानिक सुविधाओं और आपातकालीन परिवहन की कमी है।

5. निजी क्षेत्र में सामर्थ्य की कमी

निजी क्षेत्र ~70% बाह्य रोगी देखभाल और ~60% आंतरिक रोगी देखभाल प्रदान करता है, परंतु लाभ के उद्देश्य से संचालित होता है। उच्च शुल्क गरीब मरीज़ों को बाहर रखता है।

6. मानव संसाधन की कमी

भारत में प्रति 1,000 पर लगभग 0.9 डॉक्टर हैं बनाम WHO का 1 प्रति 1,000 का मानक। विशेषज्ञ और भी दुर्लभ हैं। नर्सें और ASHA कार्यकर्ता प्राथमिक देखभाल का अधिकांश बोझ वहन करती हैं।

आयुष्मान भारत का आलोचनात्मक विश्लेषण

योजना की संरचना

आयुष्मान भारत के दो स्तंभ हैं:

  1. स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWC) — 1.6 लाख उन्नत उप-केंद्र/PHC व्यापक प्राथमिक देखभाल प्रदान करते हैं।
  2. प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) — माध्यमिक/तृतीयक अस्पताल भर्ती के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख, लगभग ~55 करोड़ लाभार्थियों को कवर करते हुए।

उपलब्धियाँ

  • PMJAY राज्यों में बीमा कवरेज में 54% वृद्धि।
  • IMR, MMR, संस्थागत प्रसव, परिवार नियोजन में PMJAY राज्यों में बेहतर सुधार।
  • PMJAY के तहत संचयी अस्पताल भर्ती: 7.5 करोड़ से अधिक।
  • अधिकृत उपचार मूल्य: ₹1 लाख करोड़ से अधिक।

चिंताएँ और चुनौतियाँ

  • कम पैकेज दरें: अस्पताल दरों को मनमाना और कम बताते हैं — गुणवत्ता में कमी या निजी क्षेत्र के बाहर निकलने का जोखिम।
  • धोखाधड़ी: फर्जी नामांकन, गलत पात्रता दावे।
  • राजनीतिकरण: कुछ राज्यों ने पहले PM-JAY लागू नहीं किया।
  • बजट स्थिरता: PM-JAY आवंटन ₹7,500-8,000 करोड़ रहा है जबकि माँग ₹25,000 करोड़ से अधिक हो सकती है।

भारत में UHC सुनिश्चित करने की रणनीतियाँ

समकक्षों से सीखना

दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, थाईलैंड, स्विट्ज़रलैंड, श्रीलंका ने UHC प्राप्त की है:

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में स्थिर वृद्धि।
  • मजबूत प्राथमिक देखभाल और रेफरल प्रणाली।
  • गरीबों के लिए सरकारी सब्सिडी के साथ अनिवार्य बीमा।
  • कड़ा अस्पताल विनियमन और मूल्य पारदर्शिता।

भारत-विशिष्ट कार्रवाइयाँ

  • स्वास्थ्य के अधिकार की घोषणा: स्वास्थ्य को मूल अधिकार बनाना। राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम 2023 राज्य स्तरीय उदाहरण है।
  • Srinath Reddy समिति (2010) के अनुसार सार्वजनिक व्यय को GDP का 3% तक बढ़ाना।
  • निःशुल्क आवश्यक दवाएँ और नैदानिक सेवाएँ
  • डिजिटल स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) — ABHA IDs, डिजिटल रिकॉर्ड, टेलीमेडिसिन।
  • निवारक और प्रोत्साहक स्वास्थ्य: मिशन पोषण 2.0, फिट इंडिया, ईट राइट, खेलो इंडिया।

नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)

सितंबर 2024 में आयुष्मान भारत PM-JAY को 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों तक, आय की परवाह किए बिना, विस्तारित किया गया, जिससे 6 करोड़ और लाभार्थी जुड़े। कुल कवरेज अब 60 करोड़ भारतीयों से अधिक है।

केंद्रीय बजट 2025-26 में स्वास्थ्य के लिए लगभग ₹98,311 करोड़ आवंटित किए गए (वार्षिक रूप से ~13% अधिक)। इसमें घोषणाएँ शामिल थीं:

  • सभी जिला अस्पतालों में डे केयर कैंसर केंद्र
  • जन औषधि केंद्रों का 25,000 आउटलेट तक विस्तार।
  • प्रत्येक PHC और विद्यालय में ब्रॉडबैंड

राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा 2021-22 (2024 में जारी) के अनुसार जेब से भुगतान कुल स्वास्थ्य व्यय के 39-42% तक घट गया — महत्वपूर्ण प्रगति।

UPSC प्रासंगिकता

GS प्रश्नपत्र III से प्रत्यक्ष संबंध: समावेशी विकास; निवेश मॉडल; सामाजिक क्षेत्रों के विकास और प्रबंधन से जुड़े मुद्दे। GS प्रश्नपत्र II से: स्वास्थ्य, कल्याण योजनाएँ, शिक्षा। संभावित प्रश्न: UHC प्राप्त करने में आयुष्मान भारत का आलोचनात्मक मूल्यांकन; “भारत की स्वास्थ्य प्रणाली तिहरे बोझ से ग्रस्त है — कम सार्वजनिक व्यय, उच्च OOPE, और असमान पहुँच” — चर्चा करें।

सामान्य प्रश्न

UHC के 4 ‘A’ सिद्धांत क्या हैं?

उपलब्धता (Availability), पहुँच (Accessibility), सामर्थ्य (Affordability) और जवाबदेही (Accountability) — ये चार सिद्धांत UHC की नींव हैं।

आयुष्मान भारत के दो स्तंभ कौन से हैं?

पहला: स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWC) — व्यापक प्राथमिक देखभाल; दूसरा: PM-JAY — ₹5 लाख प्रति परिवार अस्पताल भर्ती बीमा।

भारत में स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय कितना है?

2023-24 में केंद्र और राज्य का संयुक्त व्यय GDP का लगभग 1.9-2.1% है, जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 का लक्ष्य 2025 तक 2.5% था।

OOPE में क्या सुधार हुआ है?

राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा 2021-22 के अनुसार OOPE कुल स्वास्थ्य व्यय का लगभग 39-42% तक घट गया, जो पहले 62% और हाल तक 48-55% था।

2024 में PM-JAY में क्या नई घोषणा हुई?

सितंबर 2024 में PM-JAY को 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों तक, आय की परवाह किए बिना, विस्तारित किया गया, जिससे 6 करोड़ और लाभार्थी जुड़े।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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