भारत की आर्थिक विकास गाथा में विनिर्माण क्षेत्र का अल्प योगदान एक लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। GDP में विनिर्माण की हिस्सेदारी 15-17% पर अटकी हुई है जबकि चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया में यह 25-35% है। भारत सेवा क्षेत्र की सफलता के बावजूद विनिर्माण आधारित रोजगार बनाने में पिछड़ा है।
विनिर्माण क्यों महत्त्वपूर्ण है?
- अर्ध-कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार।
- मूल्य-संवर्धन (Value Addition) और निर्यात आय।
- तकनीकी स्पिलओवर और नवाचार।
- कृषि से शहरी रोजगार की ओर संरचनात्मक परिवर्तन।
विफलता के कारण
संरचनात्मक कारण
- भूमि अधिग्रहण की कठिनाई: उद्योगों के लिए उचित मूल्य पर भूमि प्राप्त करना कठिन।
- अवसंरचना की कमी: बिजली आपूर्ति, सड़क, बंदरगाह और रेलवे में कमियाँ।
- ऊर्जा लागत: भारत में औद्योगिक बिजली दरें प्रतिस्पर्धियों से अधिक।
नीतिगत कारण
- जटिल श्रम कानून: 44 केंद्रीय श्रम कानून (अब 4 श्रम संहिताओं में समेटे गए)।
- MSME क्षेत्र की कमजोरी: छोटे उद्यम बड़े बनने से बचते हैं (आकार-आधारित नियामकीय बोझ)।
- उच्च आयात शुल्क नीति: आयातित कच्चे माल पर ऊँचे शुल्क से विनिर्माण लागत बढ़ती है।
सरकारी पहलें
| पहल | उद्देश्य |
|---|---|
| मेक इन इंडिया (2014) | भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना |
| PLI योजनाएँ (2020 से) | 14 क्षेत्रों में उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन |
| श्रम संहिताएँ 2020 | 44 श्रम कानूनों का 4 में समेकन |
| राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारे | DMIC, CBIC — बुनियादी ढाँचे के साथ विनिर्माण |
| MSME प्रोत्साहन | MSME परिभाषा विस्तार, ऋण सहायता |
UPSC के लिए प्रासंगिकता
GS III में यह विषय औद्योगिक नीति, विनिर्माण, रोजगार, PLI योजनाएँ और मेक इन इंडिया के अंतर्गत महत्त्वपूर्ण है। “भारत में विनिर्माण क्षेत्र का विकास अपेक्षित गति से क्यों नहीं हुआ?” — यह मुख्य परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।