2021 में सरकार ने महिलाओं की विवाह की न्यूनतम आयु 18 से 21 वर्ष करने का प्रस्ताव किया — पुरुषों की आयु के बराबर। जया जेटली समिति (2020) की सिफारिशों पर आधारित यह प्रस्ताव न केवल बाल विवाह रोकने की कोशिश है, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, महिला शिक्षा और जनसांख्यिकी पर व्यापक प्रभाव डालेगा। UPSC GS I और GS II के लिए यह विषय महिला सशक्तीकरण, जनसंख्या और समाजशास्त्र से जुड़ता है।
वर्तमान कानूनी स्थिति
- बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006: लड़कियों के लिए 18 वर्ष, लड़कों के लिए 21 वर्ष।
- बाल विवाह शून्यकरणीय (voidable), शून्य (void) नहीं।
- कुछ व्यक्तिगत कानून (मुस्लिम विधि) कम आयु अनुमति देते हैं — संघर्ष।
जया जेटली समिति की सिफारिशें
- महिलाओं की विवाह आयु 21 वर्ष करना।
- मातृ मृत्यु दर (MMR), शिशु मृत्यु दर (IMR), कुपोषण में कमी के लिए।
- शिक्षा और रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए।
आलोचनाएँ
- मूल कारणों को संबोधित नहीं: गरीबी, शिक्षा की कमी बाल विवाह के असली कारण।
- उम्र बढ़ाने से प्रवर्तन कठिन।
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सवाल।
UPSC प्रासंगिकता
GS I (भारतीय समाज), GS II (कल्याण योजनाएँ) के लिए: बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, जया जेटली समिति, विवाह आयु विधेयक 2021, MMR-IMR से संबंध।
सामान्य प्रश्न
जया जेटली समिति ने क्या सिफारिश की?
जया जेटली समिति (2020) ने महिलाओं की विवाह की न्यूनतम आयु 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने की सिफारिश की।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 में न्यूनतम आयु क्या है?
लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष।