UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

भूमि पूलिंग प्रणाली (LPS): लाभ और चुनौतियाँ (यूपीएससी अर्थव्यवस्था)

भूमि पूलिंग प्रणाली भूमि अधिग्रहण का एक वैकल्पिक और सहमति-आधारित तरीका है जिसमें किसान स्वेच्छा से भूमि देते हैं और बदले में विकसित भूखंड प्राप्त करते हैं। आंध्र प्रदेश का अमरावती इसका प्रमुख उदाहरण है।

Land Pooling System (LPS): Benefits and Challenges (UPSC Economy) — UPSC featured image

भारत में तीव्र शहरीकरण के साथ भूमि की माँग बढ़ रही है। पारंपरिक भूमि अधिग्रहण (जिसमें सरकार ज़बरदस्ती भूमि लेती है) से किसानों में असंतोष और विवाद पैदा होते हैं। इसके विकल्प के रूप में भूमि पूलिंग प्रणाली (Land Pooling System — LPS) एक नई अवधारणा है।

LPS क्या है?

LPS एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें किसान और भूस्वामी स्वेच्छा से अपनी भूमि एक “पूल” में डालते हैं। सरकार या विकास प्राधिकरण इस भूमि का विकास करता है — सड़क, बिजली, पानी, स्कूल आदि। विकास के बाद भूस्वामियों को उनके अंशदान के अनुपात में विकसित भूखंड वापस किए जाते हैं।

LPS के लाभ

  • सहमति-आधारित — ज़बरदस्ती अधिग्रहण से बचाव।
  • भूस्वामियों को लाभ — विकसित भूखंड का मूल्य कच्ची भूमि से अधिक।
  • तेज़ विकास — भूमि विवाद कम।
  • बुनियादी ढाँचे में सुधार
  • किसानों की भागीदारी — वे विकास के हिस्सेदार बनते हैं।

LPS की चुनौतियाँ

  • भूस्वामियों का विश्वास — वादे पूरे होंगे या नहीं?
  • सर्वसम्मति की कठिनाई — सभी भूस्वामियों की सहमति कठिन।
  • देरी का जोखिम — विकास में देरी से भूस्वामियों को नुकसान।
  • मुआवज़े की गणना — उचित अनुपात निर्धारित करना जटिल।
  • कमज़ोर भूस्वामी — बड़े खिलाड़ियों के सामने छोटे किसान कमज़ोर।

अमरावती का उदाहरण

आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती के निर्माण में LPS का उपयोग किया गया। लगभग 33,000 एकड़ भूमि 29,000 से अधिक किसानों से पूल की गई। किंतु राजनीतिक परिवर्तनों और धन की कमी के कारण परियोजना अधूरी रह गई।

दिल्ली में LPS

DDA ने दिल्ली में भी LPS नीति बनाई है जिसमें किसानों को भूमि का 60% विकसित रूप में वापस मिलेगा।

यूपीएससी प्रासंगिकता

यूपीएससी GS III में भूमि सुधार, शहरीकरण और बुनियादी ढाँचे के विकास के प्रश्नों में LPS महत्त्वपूर्ण है। LARR अधिनियम 2013 से तुलना करके उत्तर दें।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

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