भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है और सबसे तेज़ी से बढ़ते प्रमुख ऊर्जा बाज़ारों में से एक है। शहरीकरण में तेज़ी, विनिर्माण का विस्तार और परिवारों के विद्युतीकरण के साथ ऊर्जा माँग के प्रतिवर्ष लगभग 3-5% की दर से बढ़ते रहने की अपेक्षा है। फिर भी भारत अपनी 85% से अधिक कच्चे तेल और 50% प्राकृतिक गैस की आवश्यकता आयात पर निर्भर है — जो भू-राजनीति और क़ीमत-झटकों के प्रति एक संरचनात्मक भेद्यता है। जीवाश्म ईंधन, नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु, हाइड्रोजन, भंडारण और माँग-पक्ष दक्षता को एक सुसंगत ढाँचे में जोड़ने वाली दीर्घकालिक, एकीकृत ऊर्जा नीति की आवश्यकता प्रबल है। यूपीएससी GS-III के लिए यह विषय ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु नीति, अर्थशास्त्र और भू-राजनीति को एक साथ लाता है।
एकीकृत ऊर्जा नीति क्यों आवश्यक है
- ऊर्जा सुरक्षा। भारत के कच्चे तेल का 40% से अधिक अस्थिर पश्चिम एशिया क्षेत्र से आता है। 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध और 2024 के लाल सागर हमलों जैसी किसी भी आपूर्ति बाधा या क़ीमत-उछाल का सीधा असर चालू खाते और महँगाई पर पड़ता है।
- माँग वृद्धि। India Energy Outlook का अनुमान है कि उद्योग, भवन व परिवहन से प्रेरित भारत की ऊर्जा माँग 2040 तक तेज़ी से बढ़ेगी।
- घरेलू संसाधन-क्षमता। भारत में विश्व-स्तरीय सौर व पवन संसाधन, अप्रयुक्त जल-विद्युत, बड़े कोयला भंडार, उभरती परमाणु क्षमता और बढ़ती जैव-ऊर्जा क्षमता है। एक सुसंगत नीति इन सबका उपयोग कर सकती है।
- जलवायु प्रतिबद्धताएँ। भारत के पंचामृत लक्ष्य (ग्लासगो, 2021) में 2030 तक 500 गीगावॉट ग़ैर-जीवाश्म क्षमता, 2030 तक 50% बिजली ग़ैर-जीवाश्म स्रोतों से, 2030 तक 1 अरब टन संचयी उत्सर्जन में कमी, 2030 तक (2005 की तुलना में) GDP की उत्सर्जन-गहनता में 45% कमी, तथा 2070 तक नेट ज़ीरो शामिल हैं। इन्हें कम से कम लागत पर पूरा करने के लिए एकीकृत नीति आवश्यक है।
- न्यायसंगत संक्रमण (Just transition)। कोयले पर निर्भर लाखों श्रमिक, समुदाय और राज्य-अर्थव्यवस्थाएँ हैं — नीति को केवल तकनीकी ही नहीं, सामाजिक संक्रमण भी संभालना चाहिए।
दीर्घकालिक एकीकृत नीति में क्या शामिल होना चाहिए
ऊर्जा-मिश्रण विविधीकरण
- किसी एक स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम पैदा करती है। नीति में जीवाश्म ईंधन (बेस-लोड व पुरानी ज़रूरतों के लिए), नवीकरणीय (जलवायु व लागत के लिए), परमाणु (फ़र्म कम-कार्बन बिजली के लिए), हाइड्रोजन (कठिन-डीकार्बन क्षेत्रों के लिए) तथा जैव-ऊर्जा (ग्रामीण के लिए) का संतुलन होना चाहिए।
- भारत के मसौदा राष्ट्रीय ऊर्जा नीति (2017) ने यह दिशा तय की थी पर इसे अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है। अद्यतन संस्करण को 2030 और 2070 के जलवायु मील-पत्थरों को प्रतिबिंबित करना होगा।
नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा
- भारत ने 2024 में स्थापित नवीकरणीय क्षमता (बड़े जल-विद्युत सहित) 200 गीगावॉट पार की — सौर व पवन सबसे तेज़ी से बढ़े।
- योजनाएँ। छत पर सौर के लिए पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना (1 करोड़ घरों का लक्ष्य, 2024 में शुरू), कृषि सौर के लिए PM-KUSUM, सोलर पार्क योजना, अपतटीय पवन कार्यक्रम तथा ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर।
- सौर मॉड्यूलों के लिए PLI विशेष रूप से चीन पर आयात-निर्भरता घटा रहा है।
ग्रिड और भंडारण अवसंरचना
- नवीकरणीय परिवर्तनशील हैं, इसलिए ग्रिड आधुनिकीकरण, अंतर-राज्यीय पारेषण (ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-II) और ऊर्जा भंडारण आवश्यक हैं।
- पंप्ड हाइड्रो और बैटरी भंडारण प्रणालियों का विस्तार हो रहा है; उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरियों के लिए PLI योजना 50 GWh घरेलू विनिर्माण का लक्ष्य रखती है।
- स्मार्ट ग्रिड, पूर्वानुमान और स्वचालित उत्पादन नियंत्रण उभरती प्राथमिकताएँ हैं।
ऊर्जा संरक्षण
- भारत की Perform, Achieve and Trade (PAT) योजना औद्योगिक ऊर्जा-दक्षता को प्रोत्साहन देती है। भवन ऊर्जा कोड, उपकरणों की स्टार रेटिंग और परिवहन विद्युतीकरण सभी इसमें योगदान देते हैं।
- ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 ने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना को सक्षम किया — जो 2025 में क्रियाशील हुई।
अनुसंधान और विकास
- हरित हाइड्रोजन, उन्नत परमाणु (स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर), अगली पीढ़ी की सौर, बैटरी रसायन और CCUS प्रौद्योगिकियों में निवेश अत्यावश्यक है।
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (2023) — 19,744 करोड़ रुपये परिव्यय — 2030 तक 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य।
पहले से क्रियाशील प्रमुख उपाय
- राष्ट्रीय सौर मिशन और मॉड्यूल, सेल व वेफ़र के लिए PLI।
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन — बजट 2025-26 का प्रमुख कार्यक्रम।
- बजट 2025-26 में परमाणु ऊर्जा मिशन की घोषणा — 2047 तक 100 गीगावॉट का लक्ष्य।
- भारत ऊर्जा भंडारण प्रणाली।
- अपतटीय पवन ऊर्जा नीति।
- रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व — विशाखापत्तनम, मंगलुरु, पडुर — चरण-II में विस्तार नियोजित।
- लगभग सभी ज़िलों तक सिटी गैस वितरण का विस्तार।
नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)
- नवीकरणीय की गति। FY25 में भारत ने रिकॉर्ड नवीकरणीय क्षमता जोड़ी; स्थापित RE (बड़े जल-विद्युत सहित) 220 GW पार; 2030 तक 500 GW ग़ैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य पटरी पर।
- पीएम सूर्य घर — शुरुआत के पहले ही वर्ष में 1 करोड़ से अधिक आवेदन।
- परमाणु ऊर्जा मिशन — बजट 2025-26 ने परमाणु ऊर्जा में निजी क्षेत्र की भागीदारी हेतु परमाणु ऊर्जा अधिनियम (Atomic Energy Act) और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम (CLNDA) में संशोधनों का प्रस्ताव किया।
- क्रिटिकल खनिज। बैटरियों, सौर सेलों व EV के लिए आपूर्ति सुनिश्चित करने को भारत ने 2025 में क्रिटिकल मिनरल्स मिशन शुरू किया।
- कार्बन बाज़ार। भारतीय कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना 2025 में क्रियाशील हुई।
- नेट ज़ीरो रोडमैप। भारत ने 2024 में UNFCCC को अद्यतन NDC सौंपा और दीर्घकालिक न्यून-उत्सर्जन विकास रणनीति (LT-LEDS) पर काम शुरू किया।
- जीवाश्म ईंधन। कोयला अभी भी विद्युत उत्पादन का ~55% है; HELP/OALP के तहत घरेलू अन्वेषण बढ़ाने के प्रयासों के बावजूद तेल आयात निर्भरता 85% से ऊपर बनी है।
यूपीएससी प्रासंगिकता
ऊर्जा नीति GS-III (अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, पर्यावरण) और GS-II (अंतर्राष्ट्रीय संबंध, जलवायु कूटनीति) दोनों को जोड़ती है। अभ्यर्थियों को ऊर्जा-मिश्रण का वर्णन करना, पंचामृत लक्ष्य जानना और विशिष्ट प्रमुख मिशनों का उल्लेख करना आना चाहिए। सशक्त मेन्स उत्तर ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु प्रतिबद्धताओं और आर्थिक विकास को एकीकृत करेंगे, और संक्रमण की लागत तथा कोयला-क्षेत्रों के लिए न्यायसंगत संक्रमण जैसे व्यापार-निर्णय (trade-offs) पर चर्चा करेंगे। प्रीलिम्स विशिष्ट योजनाओं (हरित हाइड्रोजन मिशन, पीएम सूर्य घर, PAT), संस्थाओं (BEE, CEA, CERC) तथा आँकड़ों (2030 तक 500 GW ग़ैर-जीवाश्म, 2070 तक नेट ज़ीरो) की जाँच करता है।