डिजिटल परिवर्तन के युग में एज कंप्यूटिंग (Edge Computing) और सेमीकंडक्टर — ये दोनों प्रौद्योगिकियाँ राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और डिजिटल संप्रभुता के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन गई हैं। भारत इन दोनों क्षेत्रों में रणनीतिक निवेश कर रहा है।
एज कंप्यूटिंग क्या है?
| विशेषता | क्लाउड कंप्यूटिंग | एज कंप्यूटिंग |
|---|---|---|
| डेटा प्रसंस्करण स्थान | केंद्रीकृत डेटा सेंटर | स्रोत के निकट (डिवाइस/नेटवर्क एज) |
| विलंब (Latency) | अधिक | न्यूनतम |
| बैंडविड्थ उपयोग | अधिक | कम |
| गोपनीयता | केंद्रीय सर्वर पर निर्भर | स्थानीय डेटा प्रसंस्करण |
| अनुप्रयोग | बड़े डेटा विश्लेषण | IoT, स्वायत्त वाहन, स्मार्ट ग्रिड |
एज कंप्यूटिंग के अनुप्रयोग
- स्वायत्त वाहन: मिलीसेकंड में निर्णय लेने के लिए स्थानीय प्रसंस्करण।
- स्मार्ट कृषि: सेंसर डेटा का वास्तविक समय विश्लेषण।
- स्वास्थ्य देखभाल: अस्पतालों में IoT उपकरणों का स्थानीय डेटा प्रसंस्करण।
- रक्षा और सुरक्षा: युद्धक्षेत्र में डेटा विश्लेषण।
भारत का सेमीकंडक्टर मिशन
भारत सरकार ने भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission) के तहत ₹76,000 करोड़ की प्रोत्साहन योजना शुरू की है।
- Micron Technology (अमेरिका): गुजरात के साणंद में $2.75 बिलियन का सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट प्लांट।
- Tata Electronics: असम में ₹27,000 करोड़ का सेमीकंडक्टर फैब।
- CG Power + Renesas (जापान): सेमीकंडक्टर ATMP (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग, पैकेजिंग)।
भारत की चुनौतियाँ
- अत्याधुनिक फैब्रिकेशन (3nm, 5nm) — TSMC और Samsung जैसी तकनीक अभी भी दूर।
- पानी, बिजली और शुद्ध रसायनों की अत्यधिक जरूरत।
- विशेषज्ञ इंजीनियरों और तकनीशियनों की कमी।
UPSC के लिए प्रासंगिकता
GS III में सेमीकंडक्टर और एज कंप्यूटिंग प्रौद्योगिकी, राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत महत्त्वपूर्ण हैं। सेमीकंडक्टर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला भू-राजनीति (चीन-ताइवान-अमेरिका) के साथ जोड़कर उत्तर देने से अंक मिलते हैं।