भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की गणना एक जटिल प्रक्रिया है। 2015 में आधार वर्ष को 2004-05 से बदलकर 2011-12 करने के बाद, GDP वृद्धि के आँकड़ों पर अधिकअनुमान (Overestimation) के आरोप लगे। यह विषय UPSC के लिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह आँकड़ों की विश्वसनीयता, नीति-निर्माण और भारत के आर्थिक प्रदर्शन के मूल्यांकन से जुड़ा है।
GDP गणना की नई पद्धति (2015 के बाद)
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) ने 2015 में कई बदलाव किए:
- आधार वर्ष: 2004-05 से 2011-12।
- मापन पद्धति: उत्पादन-आधारित (Output) से व्यय-आधारित (Expenditure) की ओर आंशिक बदलाव।
- निजी क्षेत्र के उत्पादन के लिए MCA-21 (कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय) डेटाबेस का उपयोग।
अधिकअनुमान के आरोप
अर्थशास्त्री अरविंद सुब्रमण्यम (पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार) ने 2019 में एक शोधपत्र में तर्क दिया कि 2011-17 की अवधि में भारत की GDP वृद्धि संभवतः आधिकारिक आँकड़ों के 7% के बजाय केवल 4.5% थी। उनके तर्क:
- MCA-21 में अनिबंधित कंपनियाँ: नई पद्धति में बड़ी संख्या में निष्क्रिय या फर्जी कंपनियाँ शामिल हो गईं।
- अर्थव्यवस्था के अन्य संकेतकों से असंगति: बिजली उत्पादन, ऋण वृद्धि, निर्यात और रेलवे माल ढुलाई जैसे संकेतक GDP के उच्च वृद्धि से मेल नहीं खाते।
- पुराने आँकड़ों का पिछलगामी संशोधन: पुराने वर्षों की GDP वृद्धि नाटकीय रूप से ऊपर संशोधित की गई।
सरकार का पक्ष
CSO और नीति आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया:
- नई पद्धति अंतर्राष्ट्रीय मानकों (SNA 2008) के अनुरूप है।
- MCA-21 डेटाबेस में निष्क्रिय कंपनियों को छोड़ा गया था।
- अकेले बिजली खपत से GDP नहीं मापी जा सकती।
GDP गणना की सीमाएँ
| समस्या | विवरण |
|---|---|
| अनौपचारिक क्षेत्र का कम-अनुमान | श्रम शक्ति सर्वेक्षण डेटा अपूर्ण |
| कृषि मूल्य-वृद्धि की माप | मौसमी और कीमत उतार-चढ़ाव से प्रभावित |
| सेवा क्षेत्र की विविधता | अनेक सेवाएँ प्रत्यक्ष रूप से मापनीय नहीं |
| प्रारंभिक अनुमान की अनिश्चितता | अग्रिम अनुमान बाद में बड़े बदलाव होते हैं |
UPSC के लिए प्रासंगिकता
यह विषय GS III (भारतीय अर्थव्यवस्था, GDP गणना, आँकड़ा प्रणाली) के लिए महत्त्वपूर्ण है। मुख्य परीक्षा में पूछा जाता है: GDP मापन की सीमाओं का परीक्षण करें; GDP के विकल्प (HDI, MPI, GNH) पर चर्चा करें; अनौपचारिक अर्थव्यवस्था की माप की चुनौतियाँ बताएँ।