UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

INS तमाल: भारतीय नौसेना का नया स्टेल्थ फ़्रिगेट — पूरी जानकारी

INS तमाल पर पूरी UPSC गाइड: भारतीय नौसेना का तलवार क्लास स्टेल्थ फ़्रिगेट, प्रोजेक्ट 1135.6, ब्रह्मोस से लैस, जुलाई 2025 में रूस के यंतर शिपयार्ड में नौसेना में शामिल।

INS Tamal: Indian Navy's Newest Stealth Frigate — Complete Guide - featured image for UPSC preparation

INS तमाल (F71) एक स्टेल्थ गाइडेड-मिसाइल फ़्रिगेट है, जिसे 1 जुलाई 2025 को कालिनिनग्राद, रूस में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। यह तलवार क्लास (प्रोजेक्ट 1135.6) का आठवाँ और आख़िरी विदेश में बना फ़्रिगेट है और उस दो जहाज़ों वाले अतिरिक्त बैच का हिस्सा है, जो 2018 में दोनों सरकारों के बीच हुए समझौते के तहत रूस के यंतर शिपयार्ड से मँगाया गया था। इसका सहोदर जहाज़ INS तुशील 9 दिसंबर 2024 को नौसेना में शामिल हुआ था।

क़रीब 125 मीटर लंबा और लगभग 3,900 टन डिस्प्लेसमेंट वाला INS तमाल दुनिया के किसी भी मध्यम आकार के फ़्रिगेट के मुक़ाबले सबसे तगड़े हथियारों में से एक ढोता है। इनमें सबसे आगे है ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल। ऐसे वक़्त में जब भारत प्रोजेक्ट 17A के तहत तेज़ी से अपने युद्धपोत बना रहा है, यह जहाज़ भारत-रूस रक्षा साझेदारी को भी मज़बूती देता है।

तलवार क्लास (प्रोजेक्ट 1135.6) — पूरा सिलसिला

तलवार क्लास असल में रूस के क्रिवाक III / बुरेवेस्तनिक परिवार के फ़्रिगेटों में भारत के लिए किए गए बदलाव हैं। अब तक का पूरा ऑर्डर कुल दस जहाज़ों का है, जो तीन खेपों में बँटा है:

खेपजहाज़बनाने वालाकब शामिल हुए
पहली खेप (3)तलवार, त्रिशूल, तबरबाल्तीस्की, रूस2003–2004
दूसरी खेप (3)तेग, तरकश, त्रिकंडयंतर, रूस2012–2013
तीसरी खेप (2)तुशील, तमालयंतर, रूस2024, 2025
स्वदेशी खेप (2)त्रिपुट, तवस्यागोवा शिपयार्ड, भारत2026–27 में उम्मीद

पहले छह फ़्रिगेट पूरी तरह बाहर से आए थे। बाक़ी चार मिली-जुली व्यवस्था के तहत लिए गए, जिसमें दो रूस में बने पर उनमें भारतीय हिस्सा काफ़ी ज़्यादा रखा गया, और दो भारत में गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में रूसी तकनीक के सहारे बन रहे हैं।

INS तमाल की मुख्य ख़ूबियाँ

ब्यौराजानकारी
पेनेंट नंबरF71
क्लासतलवार क्लास (प्रोजेक्ट 1135.6)
बनाने वालायंतर शिपयार्ड, कालिनिनग्राद, रूस
निर्माण शुरूनवंबर 2021
पानी में उतारा गया29 अक्टूबर 2022
नौसेना में शामिल1 जुलाई 2025
शामिल करने की जगहकालिनिनग्राद, रूस
डिस्प्लेसमेंट~3,900 टन (पूरा भार)
लंबाई~124.8 मीटर
चौड़ाई~15.2 मीटर
इंजनCOGAG — 4 गैस टरबाइन, ~56,000 hp
रफ़्तार~30 नॉट (~55 किमी/घंटा)
रेंज14 नॉट पर ~4,850 समुद्री मील
चालक दल~180 (18 अफ़सरों समेत)
मुख्य बंदरगाहकारवार, पश्चिमी नौसेना कमान

स्टेल्थ वाली ख़ूबियाँ

INS तमाल में ये चीज़ें हैं:

  • ऊपरी ढाँचा तिरछा रखा गया है, ताकि रडार पर दिखने वाला हिस्सा कम रहे
  • रडार की तरंगें सोख लेने वाली कोटिंग
  • गर्मी और आवाज़ की पहचान बहुत कम
  • इंजन का धुआँ अंदर से होकर निकाला जाता है
  • बाहर निकले हुए हिस्से और खुले तार कम से कम रखे गए हैं

हथियार

4,000 टन के जहाज़ के हिसाब से तलवार क्लास अपनी हैसियत से कहीं ज़्यादा मार करता है। INS तमाल पर ये हथियार हैं:

हमले के हथियार

  • ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल — 8 सेल वाला वर्टिकल लॉन्चर (UKSK), रफ़्तार मैक 2.8, वैरिएंट के हिसाब से मार 290–450 किमी। यह पहली खेप में लगी पुरानी क्लब-N मिसाइलों की भारतीय जगह है।
  • श्तिल-1 / श्तिल-U वर्टिकल लॉन्च सतह-से-हवा मिसाइल सिस्टम — 24 सेल वाला VLS, मध्यम दूरी की हवाई सुरक्षा (~70 किमी)
  • 100 मिमी A-190E नौसैनिक तोप — मुख्य तोप, सतह पर मार और तट पर गोलाबारी के लिए
  • 2 × AK-630M क्लोज़-इन वेपन सिस्टम (CIWS) — 30 मिमी गैटलिंग तोपें, पास आ चुके विमानों और मिसाइलों से बचाव के लिए
  • RBU-6000 पनडुब्बी-रोधी रॉकेट लॉन्चर
  • 2 × जुड़वाँ 533 मिमी टॉरपीडो ट्यूब — पनडुब्बियों पर भारी टॉरपीडो दागने के लिए

सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम

  • फ़्रेगात-M2EM 3D हवाई खोज रडार
  • तोप और मिसाइल सिस्टम के लिए लिगैंड फ़ायर-कंट्रोल रडार
  • MGK-335 हल-माउंटेड सोनार
  • आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफ़ेयर और डिकॉय सिस्टम
  • भारतीय नौसेना के नेटवर्क से जुड़ा कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम

हेलिकॉप्टर

INS तमाल पर एक कामोव Ka-28 पनडुब्बी-रोधी हेलिकॉप्टर या Ka-31 हवाई चेतावनी हेलिकॉप्टर रहता है, जिसके लिए पिछले हिस्से में हैंगर और फ़्लाइट डेक बना है। भारतीय नौसेना धीरे-धीरे स्वदेशी HAL ध्रुव NUH (नेवल यूटिलिटी हेलिकॉप्टर) भी शामिल कर रही है।

भारत-रूस रक्षा साझेदारी

INS तमाल दुनिया की सबसे लंबी चलने वाली रक्षा साझेदारियों में से एक का जीता-जागता उदाहरण है:

  • 1997 में हुए पहले प्रोजेक्ट 1135.6 समझौते से 28 साल में आठ जहाज़ बने
  • तीसरी खेप (तुशील + तमाल) की कुल लागत क़रीब 1 अरब अमेरिकी डॉलर आँकी गई है
  • तुशील और तमाल में क़रीब 26% हिस्सा स्वदेशी है, जो रूस में बने आठों जहाज़ों में सबसे ज़्यादा है
  • ब्रह्मोस एयरोस्पेस, BEL, लार्सन एंड टुब्रो, केल्ट्रॉन और नोवा इंटीग्रेटेड सिस्टम्स जैसी भारतीय कंपनियों ने बड़े सिस्टम दिए
  • तकनीक मिलने से गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) दो और फ़्रिगेट (INS त्रिपुट, INS तवस्या) भारत में बना रहा है

INS तमाल क्यों मायने रखता है

1. दूर समुद्र तक जाने की ताक़त बढ़ती है

तमाल से भारतीय नौसेना की वह क्षमता बढ़ती है जिससे वह अपने बंदरगाहों से बहुत दूर लगातार काम कर सके, जैसे हिंद महासागर क्षेत्र (IOR), फ़ारस की खाड़ी और उससे आगे।

2. कैरियर ग्रुप की सुरक्षा

कई काम करने वाला फ़्रिगेट होने के नाते यह भारत के विमानवाहक समूहों (INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत) के साथ चलता है और उन्हें हवा, सतह तथा पानी के नीचे के ख़तरों से बचाता है।

3. समुद्र में ब्रह्मोस की तैनाती

तलवार क्लास के जहाज़ों पर ब्रह्मोस लगने से एक ऐसा जहाज़, जो मुख्य रूप से पनडुब्बियों के ख़िलाफ़ था, अब ज़मीन और जहाज़ों पर भरोसेमंद हमला करने वाला हथियार बन जाता है और भारत की मार दूर तक पहुँचती है।

4. फ़ौरी कमी को भरता है

भारत के अपने फ़्रिगेट और डिस्ट्रॉयर कार्यक्रम (प्रोजेक्ट 17A — नीलगिरि क्लास, प्रोजेक्ट 15B — विशाखापत्तनम क्लास) आगे बढ़ रहे हैं, पर हर जहाज़ बनने में साल लग जाते हैं। जब तक स्वदेशी उत्पादन ज़रूरत के बराबर नहीं पहुँचता, रूस में बने ये फ़्रिगेट बीच का फ़ासला भरते हैं

5. भारत-रूस रिश्ते का संकेत

रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने दो जहाज़ों का ऑर्डर पूरा कराया और तय समय पर डिलीवरी ली। यह रक्षा ख़रीद में रणनीतिक स्वायत्तता का संकेत है।

बेड़े में INS तमाल की जगह

भारतीय नौसेना के मौजूदा बड़े लड़ाकू जहाज़ इस तरह हैं:

क्लासक़िस्मसंख्याबनाने वाला
विक्रांत, विक्रमादित्यविमानवाहक2CSL / रूस
कोलकाता क्लास (P15A)डिस्ट्रॉयर3MDL
विशाखापत्तनम क्लास (P15B)डिस्ट्रॉयर4MDL
दिल्ली क्लासडिस्ट्रॉयर3MDL
शिवालिक क्लास (P17)फ़्रिगेट3MDL
तलवार क्लास (P1135.6)फ़्रिगेट8रूस / GSL
नीलगिरि क्लास (P17A)फ़्रिगेट7 (बन रहे)MDL / GRSE

UPSC के लिहाज़ से

GS3 (रक्षा एवं सुरक्षा): नौसेना का आधुनिकीकरण, स्वदेशी जहाज़ निर्माण, भारत का रक्षा बजट, रक्षा में मेक इन इंडिया, भारत-रूस रक्षा साझेदारी।

GS2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध): भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी, प्रतिबंधों के बीच हथियारों का कारोबार, रणनीतिक स्वायत्तता।

GS3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी): ब्रह्मोस मिसाइल, स्टेल्थ डिज़ाइन, जुड़े हुए कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम।

प्रीलिम्स के लिए ज़रूरी तथ्य:

  • INS तमाल (F71) — 1 जुलाई 2025 को कालिनिनग्राद, रूस में शामिल
  • क्लास: तलवार क्लास, प्रोजेक्ट 1135.6
  • बनाने वाला: यंतर शिपयार्ड, रूस
  • सहोदर जहाज़: INS तुशील, दिसंबर 2024 में शामिल
  • डिस्प्लेसमेंट: ~3,900 टन; लंबाई: ~125 मीटर
  • मुख्य हथियार: ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल (8 सेल वाला VLS)
  • हवाई सुरक्षा: श्तिल-1 SAM; CIWS: AK-630; तोप: 100 मिमी A-190E
  • कामोव Ka-28/Ka-31 हेलिकॉप्टर रखता है
  • मुख्य बंदरगाह: कारवार, पश्चिमी नौसेना कमान
  • प्रोजेक्ट 1135.6 का आठवाँ और आख़िरी विदेश में बना फ़्रिगेट; अगले दो (त्रिपुट, तवस्या) गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में बनेंगे

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

Recognized as one of India’s best content marketers, Gaurav Tiwari is an SEO strategist, WordPress developer, and founder of Gatilab. He builds websites that load in under a second, creates content that ranks on Google’s first page, and develops WordPress plugins and tools used on thousands of live sites.

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