लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (Small Satellite Launch Vehicle — SSLV) ISRO का सबसे नया रॉकेट है — 34 मीटर ऊँचा, तीन चरणीय ठोस-प्रणोदन प्रक्षेपक जिसमें एक तरल वेग-समायोजन मॉड्यूल (Velocity Trimming Module — VTM) भी है। यह निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में 500 किलोग्राम तक पेलोड स्थापित कर सकता है। SSLV, लघु-उपग्रह नक्षत्र (constellation) के बढ़ते बाज़ार में ISRO की रणनीतिक प्रतिक्रिया है — एक ऐसा रॉकेट जिसे महीनों नहीं, कुछ दिनों में तैयार किया जा सके और “माँग पर” प्रक्षेपित किया जा सके। UPSC के लिए SSLV सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का महत्त्वपूर्ण विषय है।
लघु उपग्रह प्रक्षेपक की आवश्यकता क्यों?
उपग्रह उद्योग अब कुछ बड़े, महँगे उपग्रहों से हटकर लघु उपग्रहों के विशाल नक्षत्रों (100-500 किग्रा) की ओर बढ़ रहा है, जो पृथ्वी अवलोकन, IoT और संचार के लिए उपयोग होते हैं।
- Starlink — 6,000+ उपग्रह (2025 तक)।
- OneWeb — 600+ उपग्रह।
- Amazon Kuiper — प्रथम उपग्रह 2024 में प्रक्षेपित।
- Planet Labs, BlackSky, Iceye, Spire — प्रतिदिन नवीनीकृत पृथ्वी अवलोकन।
- भारतीय निजी कंपनियाँ — Pixxel, Digantara, GalaxEye, Dhruva Space।
इन ग्राहकों के लिए PSLV “बहुत बड़ा” है; उन्हें विशिष्ट कक्षाओं में समर्पित प्रक्षेपण चाहिए — यही SSLV का बाज़ार-क्षेत्र है।
SSLV की डिज़ाइन
| पैरामीटर | मूल्य |
|---|---|
| ऊँचाई | 34 मीटर |
| व्यास | 2 मीटर |
| उड़ान-भार | ~120 टन |
| LEO (500 किमी) पेलोड | 500 किग्रा |
| सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा (SSO) पेलोड | ~300 किग्रा |
| चरण | 3 ठोस + तरल VTM |
| फ़ेयरिंग व्यास | 2 मीटर |
| एकीकरण समय | 72 घंटे (लक्ष्य) |
| प्रक्षेपण चक्र | 7-10 दिन |
| जनशक्ति | ~6 कर्मी (PSLV के लिए ~60) |
| प्रति प्रक्षेपण लागत | ~₹30-40 करोड़ |
चरण (Stages)
- SS1 — प्रथम चरण; 87 टन HTPB ठोस प्रणोदक।
- SS2 — द्वितीय चरण; 7.7 टन ठोस।
- SS3 — तृतीय चरण; 4.5 टन ठोस।
- VTM (वेग-समायोजन मॉड्यूल) — तरल ईंधन, सटीक कक्षा स्थापना के लिए।
विकास कालक्रम
- अवधारणा अनुमोदन — 2018 के आरम्भ में।
- विकास लागत — ₹169 करोड़।
- SSLV-D1 (अगस्त 2022) — EOS-02 + AzaadiSAT। त्वरणमापी (accelerometer) विसंगति के कारण पेलोड स्थिर कक्षा में स्थापित नहीं हो सका।
- SSLV-D2 (फरवरी 2023) — सफल; EOS-07, Janus-1 (अमेरिका), AzaadiSAT-2 LEO में स्थापित।
- SSLV-D3 (अगस्त 2024) — सफल; EOS-08, 475 किमी वृत्ताकार SSO में स्थापित।
- SSLV-D3 के बाद “परिचालन-योग्य” घोषित।
उद्योग को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
भारत के अंतरिक्ष निजीकरण में एक ऐतिहासिक पड़ाव।
- IN-SPACe और NSIL ने पारदर्शी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रक्रिया चलाई।
- 2024 में IN-SPACe ने तीन संघों को शॉर्टलिस्ट किया; 2025 के मध्य तक चुने गए लीड इंटीग्रेटर NSIL के ठेकों के तहत पूरी तरह SSLV का उत्पादन करेंगे।
- ISRO के पास प्रौद्योगिकी IP बनी रहती है; उत्पादन उद्योग के हाथ में।
अन्य लघु प्रक्षेपकों से तुलना
| प्रक्षेपक | SSO पेलोड | स्थिति |
|---|---|---|
| SSLV (भारत) | 300 किग्रा | परिचालन 2024 |
| Electron (Rocket Lab, अमेरिका) | 200 किग्रा | 40+ उड़ानें |
| Vega-C (ESA) | ~1,500 किग्रा (LEO) | बड़े लघु-उपग्रह वर्ग |
| Firefly Alpha | 600 किग्रा LEO | सीमित उड़ानें |
| Kairos (Space One, जापान) | 150 किग्रा LEO | 2024 विफलता |
| Zhuque-2 (चीन, LandSpace) | 4,000 किग्रा LEO | 2023 प्रथम सफलता |
भारतीय निजी प्रक्षेपक जो आने वाले हैं:
- Skyroot Vikram-I (~480 किग्रा SSO) — Vikram-S उपकक्षीय उड़ान नवंबर 2022।
- Agnikul Agnibaan SOrTeD — विश्व का प्रथम एकल-खंड 3D-मुद्रित इंजन, मई 2024 में उपकक्षीय उड़ान।
- Bellatrix — लघु उपग्रहों के लिए उच्च-विशिष्ट-आवेग थ्रस्टर।
भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था
- अंतरिक्ष नीति 2023 — निजी क्षेत्र को सम्पूर्ण अंतरिक्ष गतिविधि की अनुमति।
- FDI उदारीकरण (2024) — उपग्रह निर्माण में 100% स्वचालित मार्ग से, प्रक्षेपण यान में 74% स्वचालित।
- 200+ भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप; 2023-24 में ~₹2,200 करोड़ की पूँजी जुटाई।
- अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था लक्ष्य: आज USD 8 बिलियन → 2033 तक USD 44 बिलियन (~वैश्विक का 8%)।
SSLV के उपयोग-क्षेत्र
- पृथ्वी अवलोकन नक्षत्र — प्रतिदिन नवीनीकृत इमेजरी।
- IoT नक्षत्र — कम-बैंडविड्थ संपत्ति ट्रैकिंग।
- प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मिशन — विश्वविद्यालय क्यूबसेट।
- प्रतिस्थापन उपग्रह — LEO नक्षत्रों के लिए।
- रक्षा लघु-उपग्रह प्रक्षेपण — Defence Space Agency के लिए।
लाभ और चुनौतियाँ
| लाभ | प्रभाव |
|---|---|
| कम लागत | ~₹30-40 करोड़ प्रति प्रक्षेपण |
| शीघ्र एकीकरण | 72 घंटे बनाम सप्ताह |
| माँग पर प्रक्षेपण | तत्पर नक्षत्र परिनियोजन |
| छोटी टीम | प्रक्षेपण संचालन का लोकतंत्रीकरण |
| निर्यात क्षमता | प्रतिस्पर्धी मूल्य-निर्धारण |
| चुनौती | विवरण |
|---|---|
| पेलोड सीमा (500 किग्रा) | कुछ नक्षत्रों को अधिक भार चाहिए |
| प्रतिस्पर्धा | SpaceX राइडशेयर $5,000/किग्रा तक |
| उत्पादन विस्तार | निजी संघ को प्रति वर्ष 6-10 SSLV तक बढ़ाना होगा |
| ठोस मोटर गुणवत्ता | परिवर्तनशीलता नियंत्रण आवश्यक |
| कुलशेखरपट्टिनम स्पेसपोर्ट | 2027 तक तैयार |
नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)
- SSLV-D3 सफलता (अगस्त 2024) — EOS-08 को 475 किमी SSO में स्थापित; उड़ान पूरी तरह परिचालन-योग्य घोषित।
- IN-SPACe शॉर्टलिस्टिंग (2024) — SSLV उत्पादन हस्तांतरण के लिए संघ; 2025 में लीड इंटीग्रेटर चयनित।
- कुलशेखरपट्टिनम (तमिलनाडु) स्पेसपोर्ट निर्माण (2024-27) — समर्पित SSLV प्रक्षेपण स्थल।
- Pixxel की Firefly वाणिज्यिक हाइपरस्पेक्ट्रल नक्षत्र (2024-25) — SSLV पर बुक।
- Dhruva Space उपग्रह मंच SSLV के लिए।
- भारत सेमीकंडक्टर मिशन — LEO नक्षत्रों के लिए विकिरण-कठोर चिप्स।
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (2024) — उपग्रह QKD लघु-उपग्रहों पर (SSLV से प्रक्षेपित)।
UPSC प्रासंगिकता
GS प्रश्नपत्र III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: SSLV डिज़ाइन, चरण, वाणिज्यिक हस्तांतरण।
GS प्रश्नपत्र III — अर्थव्यवस्था: अंतरिक्ष स्टार्टअप अर्थव्यवस्था, FDI सुधार, PLI-समतुल्य तंत्र।
GS प्रश्नपत्र II — शासन: IN-SPACe, NSIL, अंतरिक्ष नीति 2023।
GS प्रश्नपत्र III — आंतरिक सुरक्षा: रक्षा लघु-उपग्रह; निगरानी नक्षत्र।
प्रीलिम्स पॉइंटर्स — SSLV पेलोड (500 किग्रा LEO), SSLV-D1 (2022 आंशिक विफलता), SSLV-D2 (2023 सफल), SSLV-D3 (अगस्त 2024 सफल), कुलशेखरपट्टिनम, IN-SPACe, Skyroot Vikram, Agnikul Agnibaan।
SSLV भारत के राज्य-संचालित अंतरिक्ष कार्यक्रम से निजी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के लिए प्लेटफ़ॉर्म राज्य बनने की दिशा में बदलाव का प्रतीक है।
सामान्य प्रश्न
SSLV और PSLV में मुख्य अंतर क्या है?
PSLV बड़े उपग्रहों (1,000-3,700 किग्रा) के लिए है जबकि SSLV लघु उपग्रहों (500 किग्रा तक) के लिए विशेष रूप से बना है। SSLV को 72 घंटे में और केवल 6-कर्मी टीम से तैयार किया जा सकता है, जबकि PSLV में हफ्तों और ~60 लोग लगते हैं।
SSLV को कब परिचालन-योग्य घोषित किया गया?
SSLV-D3 की अगस्त 2024 में सफल उड़ान के बाद ISRO ने SSLV को पूरी तरह परिचालन-योग्य घोषित किया।
IN-SPACe का SSLV में क्या भूमिका है?
IN-SPACe ने SSLV प्रौद्योगिकी को निजी उद्योग में हस्तांतरित करने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया चलाई। 2024 में तीन संघों को शॉर्टलिस्ट किया गया; चुनी गई कंपनी NSIL के ठेकों के तहत SSLV का उत्पादन करेगी।
कुलशेखरपट्टिनम स्पेसपोर्ट का महत्त्व क्या है?
तमिलनाडु में स्थित यह नया स्पेसपोर्ट SSLV के लिए समर्पित है और 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है। यह SSO मिशनों के लिए भौगोलिक रूप से अनुकूल स्थान है।