अवैतनिक देखभाल कार्य (Unpaid Care Work) — बच्चों की परवरिश, बुजुर्गों की देखभाल, घर का प्रबंधन — भारत में मुख्यतः महिलाओं द्वारा किया जाता है। यह लैंगिक असमानता (Gender Gap) का एक प्रमुख कारण है और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बाधित करता है।
अवैतनिक देखभाल कार्य: तथ्य और आँकड़े
- ILO के अनुसार, भारत में महिलाएँ देखभाल कार्य पर पुरुषों की तुलना में 3-10 गुना अधिक समय व्यतीत करती हैं।
- भारत में महिला श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) ~37% (2023-24), पुरुष ~79%।
- ग्रामीण महिलाएँ शहरी से अधिक अवैतनिक कार्य करती हैं।
- McKinsey: भारत की GDP में महिलाओं का योगदान ~18% — वैश्विक औसत (~40%) से कम।
लैंगिक अंतर के कारण
- सामाजिक-सांस्कृतिक मानदंड: देखभाल = महिला का काम।
- सस्ती क्रेच/शिशु देखभाल का अभाव।
- पितृसत्तात्मक परिवार संरचना।
- शिक्षा और कौशल की कमी।
- कार्यस्थल पर लचीलेपन की कमी।
लैंगिक अंतर के परिणाम
- आर्थिक नुकसान — GDP में महिलाओं का कम योगदान।
- वित्तीय निर्भरता — महिलाओं की संपत्ति और आय सुरक्षा कम।
- स्वास्थ्य पर प्रभाव — अत्यधिक काम से तनाव।
- राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कमी।
सरकारी नीतियाँ और योजनाएँ
- मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (2017 संशोधन) — 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश।
- PM Matru Vandana Yojana — ₹5,000 नकद लाभ।
- Poshan Abhiyan — महिला और शिशु पोषण।
- Beti Bachao Beti Padhao।
- SHG-NRLM — 90 लाख+ SHG; महिला आर्थिक सशक्तिकरण।
अवैतनिक कार्य को मान्यता: 5R ढाँचा
- Recognise — GDP गणना में शामिल करना।
- Reduce — श्रम-बचत तकनीक, बुनियादी ढाँचा।
- Redistribute — पुरुषों का अधिक योगदान।
- Reward — नीतिगत समर्थन।
- Represent — नीति-निर्माण में महिलाओं का प्रतिनिधित्व।
नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)
- WEF Global Gender Gap Report 2024: भारत 146 देशों में 129वें स्थान पर।
- महिला LFPR में धीमा सुधार — PLFS 2023-24: ~37%।
- बजट 2025-26 में महिला-नेतृत्व विकास पर जोर।
यूपीएससी प्रासंगिकता
- GS-I: भारतीय समाज, महिला भूमिका, सामाजिक सशक्तिकरण।
- GS-II: कल्याण योजनाएँ, SDG 5 (लैंगिक समानता)।
- मुख्य: “अवैतनिक देखभाल कार्य महिलाओं की आर्थिक भागीदारी की बाधा है। समाधान सुझाएं।”
अवैतनिक देखभाल कार्य की मान्यता, पुनर्वितरण और पारिश्रमिक के बिना महिला आर्थिक सशक्तिकरण और SDG 5 अधूरे रहेंगे। इसके लिए सांस्कृतिक परिवर्तन और समन्वित नीतियाँ दोनों जरूरी हैं।