बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) लंबे समय से कम-कर वाले क्षेत्रों — मॉरीशस, सिंगापुर, केमैन द्वीप, बरमूडा, पनामा एवं आयरलैंड — में कानूनी संरचनाओं का उपयोग उच्च-कर वाले देशों से लाभ स्थानांतरित करने हेतु करती रही हैं, जबकि मूल्य का सृजन वहीं होता है। इस प्रथा को आधार क्षरण एवं लाभ स्थानांतरण (Base Erosion and Profit Shifting — BEPS) कहा जाता है, जो Tax Justice Network के अनुसार सरकारों को प्रतिवर्ष 480 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का राजस्व नुकसान पहुँचाती है। भारत का अकेले निगम कर दुरुपयोग से वार्षिक कर-हानि 10 अरब डॉलर से अधिक आँकी गई है। OECD/G20 समावेशी ढाँचा (Inclusive Framework), जिसमें भारत मूल सदस्य है, एक दो-स्तंभ (Two-Pillar) प्रतिक्रिया तैयार कर रहा है जो एक शताब्दी का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय कर सुधार करने का वादा करती है।
BEPS चुनौती
परंपरागत कर नियम ईंट-और-पत्थर वाले व्यवसायों को मानते हैं जिनका प्रत्येक परिचालन देश में स्थायी प्रतिष्ठान — कारखाना या कार्यालय — हो। Google, Meta एवं Amazon जैसी डिजिटल MNCs ऐसे भौतिक संबंध के बिना ही भारत में महत्वपूर्ण राजस्व कमाती हैं। परंपरागत नियम इन मुनाफों पर कर लगाने का अधिकार भारत को आवंटित नहीं करते। वैध कर-नियोजन ने समस्या को और बढ़ाया है — मुनाफा कम-कर वाले क्षेत्रों की सहायक कंपनियों में पार्क किया जाता है, जबकि राजस्व-सृजक गतिविधि कहीं और होती है।
Pillar One: कर अधिकारों का पुनर्वितरण
Pillar One नेक्सस (कर कहाँ दिया जाए) एवं लाभ आवंटन (बाज़ार क्षेत्रों के बीच मुनाफा कैसे बाँटा जाए) दोनों को संबोधित करता है।
दायरा
- 20 अरब यूरो से अधिक वैश्विक कारोबार एवं 10 प्रतिशत से अधिक लाभ मार्जिन वाली MNCs (समीक्षा के बाद सीमा 10 अरब यूरो तक घटेगी)।
- निष्कर्षण उद्योग एवं विनियमित वित्तीय सेवाएँ बाहर।
Amount A
- अवशिष्ट लाभ का 25 प्रतिशत (10 प्रतिशत मार्जिन से ऊपर का लाभ) बाज़ार क्षेत्रों को पुनर्वितरित।
- आवंटन देश में अर्जित MNC राजस्व के हिस्से के अनुपात में, 10 लाख यूरो की राजस्व नेक्सस सीमा (छोटे क्षेत्रों के लिए 2,50,000 यूरो) के अधीन।
उदाहरण गणना
मान लीजिए एक MNC का राजस्व 100 अरब डॉलर है एवं लाभ मार्जिन 15 प्रतिशत — यानी लाभ 15 अरब डॉलर। अवशिष्ट लाभ राजस्व का 5 प्रतिशत, अर्थात् 5 अरब डॉलर होगा। इसका 25 प्रतिशत (1.25 अरब डॉलर) राजस्व हिस्से के अनुसार पुनर्वितरित होगा। जिस देश में MNC का 10 प्रतिशत राजस्व है, वह 125 मिलियन डॉलर का कर योग्य लाभ प्राप्त करेगा।
Pillar Two: वैश्विक न्यूनतम निगम कर
Pillar Two 750 मिलियन यूरो से अधिक समेकित राजस्व वाली MNCs पर 15 प्रतिशत की वैश्विक न्यूनतम प्रभावी कर दर लागू करता है।
कार्यप्रणाली
- यदि कोई MNC किसी क्षेत्राधिकार में 15 प्रतिशत से कम कर देती है, तो आय समावेशन नियम (Income Inclusion Rule — IIR) मूल कंपनी के देश को शेष कर वसूलने की अनुमति देता है।
- कम-कर वाले मुनाफा नियम (Undertaxed Profits Rule — UTPR) अन्य क्षेत्राधिकारों को कर वसूलने की अनुमति देता है यदि मूल देश कार्रवाई न करे।
- योग्य घरेलू न्यूनतम टॉप-अप कर (Qualified Domestic Minimum Top-up Tax — QDMTT) स्रोत देश को स्वयं टॉप-अप वसूलने देता है।
तर्क
- नीचे की दौड़ (Race to the Bottom) पर रोक: वैश्विक औसत निगम कर दर 2000 के 32 प्रतिशत से घटकर 2024 में लगभग 21 प्रतिशत रह गई है।
- कर पनाहगाहों पर सीमा: बरमूडा एवं केमैन जैसे देश, जहाँ शून्य निगम कर है, या तो दरें बढ़ाएँगे या राजस्व मूल क्षेत्राधिकारों को छोड़ देंगे।
- व्यापक राजकोषीय लाभ: OECD अनुमान के अनुसार Pillar Two से विश्वभर में वार्षिक 220 अरब डॉलर अतिरिक्त राजस्व।
चुनौतियाँ
- अमेरिकी राजनीति: अमेरिका ने मुद्रास्फीति न्यूनीकरण अधिनियम (Inflation Reduction Act) के तहत 15 प्रतिशत निगम वैकल्पिक न्यूनतम कर लागू किया, किंतु पूर्ण Pillar Two ढाँचे को अनुसमर्थित नहीं किया। 2025 में प्रशासन बदलाव ने नई अनिश्चितता उत्पन्न की है।
- विकासशील देशों की चिंताएँ: कम-कर प्रोत्साहन FDI आकर्षित करने का प्रमुख साधन रहे हैं।
- प्रभुसत्ता: आलोचक इसे कर नीति के कार्टेलीकरण के रूप में देखते हैं।
- क्रियान्वयन जटिलता: एकाधिक रिपोर्टिंग एवं टॉप-अप व्यवस्थाएँ अनुपालन बोझ पैदा करती हैं।
भारत की हिस्सेदारी
राजस्व निहितार्थ
अपने विशाल डिजिटल उपभोक्ता आधार के कारण भारत Pillar One का प्रमुख लाभार्थी है। Google, Meta एवं Amazon के अवशिष्ट मुनाफों का बड़ा हिस्सा भारतीय कर जाल में आएगा। लाभ का सटीक मात्राकरण कठिन है, किंतु अधिकांश अनुमान वार्षिक लाभ को 1 से 2 अरब डॉलर के बीच रखते हैं।
समानीकरण लेवी (Equalisation Levy)
भारत ने 2020 में अनिवासियों द्वारा ई-कॉमर्स आपूर्ति पर 2 प्रतिशत समानीकरण लेवी एकपक्षीय रूप से लगाई, जो 2016 में शुरू की गई ऑनलाइन विज्ञापन पर 6 प्रतिशत लेवी के अतिरिक्त है। Pillar One समझौते के तहत, भागीदारी की शर्त के रूप में भारत को यह लेवी समाप्त करनी होगी। यदि नई व्यवस्था अपेक्षा से कम देती है, तो इस समाप्ति से कुछ Pillar One लाभ की भरपाई हो सकती है।
दायरे का विस्तार
भारत ने Pillar One की कारोबार सीमा कम करने एवं अधिक MNCs को दायरे में लाने का दबाव डाला है। इसने 30 प्रतिशत के निकट उच्च आवंटन दर की भी वकालत की है।
भारतीय IT MNCs
TCS, Infosys, Wipro एवं HCL Pillar Two की सीमा पार करती हैं और इन्हें ट्रांसफर प्राइसिंग एवं कर प्रावधान अनुकूलित करने होंगे। भारतीय परिचालन पर प्रभावी दरें पहले से 15 प्रतिशत से अधिक हैं, अतः QDMTT जोखिम सीमित है, किंतु वैश्विक अनुपालन लागत होगी।
न्यूनतम निगम कर
भारत की शीर्ष निगम कर दर 22 प्रतिशत (नए विनिर्माण के लिए 15 प्रतिशत) है, जो 15 प्रतिशत फ्लोर से आराम से ऊपर है। अतः Pillar Two कर पनाहगाहों की तुलनात्मक आकर्षकता घटाता है, बिना भारत को घरेलू प्रोत्साहन समायोजित करने को बाध्य किए — यह FDI प्रवाह के लिए शुद्ध सकारात्मक है।
नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)
- Pillar Two लागू: यूरोपीय संघ सदस्यों, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया एवं कनाडा सहित 50 से अधिक क्षेत्राधिकारों ने 1 जनवरी 2024 से Pillar Two नियम लागू करना शुरू किया। कनाडा, जापान एवं ऑस्ट्रेलिया ने 2025 में QDMTT संग्रह शुरू किया।
- Pillar One में देरी: Amount A के लिए बहुपक्षीय सम्मेलन जून 2024 की हस्ताक्षर समयसीमा से चूक गया। वार्ताएँ जारी हैं; अधिकांश पर्यवेक्षक अब 2026-27 को लक्ष्य मानते हैं।
- भारत की समानीकरण लेवी: आंशिक रूप से चरणबद्ध समाप्ति; विश्वास-निर्माण के रूप में 2 प्रतिशत ई-कॉमर्स लेवी अगस्त 2024 से समाप्त। 6 प्रतिशत विज्ञापन लेवी अंतिम Pillar One अंगीकरण तक लंबित है।
- बजट 2025-26: भारतीय मुख्यालय वाली 750 मिलियन यूरो से अधिक वैश्विक समेकित राजस्व वाली MNCs हेतु Pillar Two-अनुरूप घरेलू कानून प्रस्तुत, अप्रैल 2026 से प्रभावी।
- Global South का जोर: भारत, ब्राज़ील एवं अफ्रीकी संघ ने OECD-नेतृत्व वाली प्रक्रिया के विकल्प के रूप में UN Tax Convention पर दबाव डाला, जिस पर अब वार्ता चल रही है।
- G20 समन्वय: ब्राज़ील की G20 अध्यक्षता (2024) एवं दक्षिण अफ्रीका (2025) के अंतर्गत कर सहयोग एवं अति-धनी वर्ग के कराधान केंद्र में रहे; भारत ने व्यापक Global South एजेंडे का समर्थन किया।
- राजस्व प्राप्ति: 2024 में यूरोपीय संघ में Pillar Two के प्रारंभिक संग्रह लगभग 40 अरब यूरो रहे, जो अनुमान से अधिक हैं।
भारत के लिए आगे की राह
- उच्च Amount A हिस्सेदारी एवं कम सीमाओं पर वार्ता कर राजस्व हितों की रक्षा।
- Pillar One क्रियान्वयन प्रगति के अनुसार समानीकरण लेवी की समाप्ति को अंशांकित करना।
- जटिल व्यवस्था संचालित करने हेतु CBDT के अंतर्राष्ट्रीय कर प्रभाग की क्षमता सृजन।
- OECD प्रक्रिया में संलग्न रहते हुए UN Tax Convention ट्रैक का समर्थन।
- Pillar Two अनुपालन को आयकर विधेयक 2025 (Income Tax Bill 2025) के साथ एकीकृत करना।
यूपीएससी प्रासंगिकता
OECD के कर प्रस्ताव अंतर्राष्ट्रीय कराधान, द्विपक्षीय संधि नेटवर्क एवं वैश्वीकरण पर एक प्रमुख जीएस-III विषय हैं। मुख्य परीक्षा में BEPS, Pillar One/Two एवं भारत के लिए उनके समझौतों का विश्लेषण नियमित रूप से पूछा जाता है। प्रारंभिक परीक्षा 15 प्रतिशत दर, 20 अरब यूरो एवं 750 मिलियन यूरो की सीमाओं, समानीकरण लेवी के इतिहास एवं UN Tax Convention के घटनाक्रम पर प्रश्न कर सकती है। निबंध एवं जीएस-II प्रश्न इस विषय को बहुपक्षीयता, प्रभुसत्ता एवं Global South कूटनीति से जोड़ सकते हैं। अभ्यर्थियों को दो-स्तंभ ढाँचा, उदाहरण गणना का तर्क एवं भारत की वार्ता मुद्रा याद रखनी चाहिए।