पीएम गति शक्ति — औपचारिक रूप से बहु-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान (National Master Plan for Multi-modal Connectivity) — को अक्टूबर 2021 में भारतीय अवसंरचना की एक पुरानी समस्या के समाधान के लिए लाया गया: अलग-अलग मंत्रालय एकाकी रूप से परियोजनाएँ बनाते थे, एक-दूसरे के किए हुए काम को खोदते थे, और इससे समय एवं लागत की भारी बर्बादी होती थी। “गति” का अर्थ है तेज़ी और “शक्ति” का अर्थ है बल — यह योजना दोनों को जोड़कर हर प्रमुख मंत्रालय को एक साझा भौगोलिक नियोजन परत (geospatial planning layer) पर लाती है। यूपीएससी GS III के लिए गति शक्ति अवसंरचना वितरण, लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धात्मकता और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने पर हर चर्चा का केंद्र बिंदु है।
गति शक्ति जिन समस्याओं को हल करने के लिए बनी
- एकाकी कार्यशैली (Silo working)। शिकायत पुरानी है: कोई सड़क नई बनी, फिर गैस कंपनी ने उसे खोदा, फिर टेलीकॉम वालों ने। हर मंत्रालय दूसरों को देखे बिना योजना बनाता था।
- समय और लागत में बढ़ोतरी। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की फ्लैश रिपोर्टें बार-बार बताती हैं कि हर पाँच में से एक अवसंरचना परियोजना पाँच साल से अधिक पिछड़ती है, और कुल लागत वृद्धि लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच चुकी है — जो कुछ वर्षों में संघीय पूँजीगत व्यय (Union capex) का लगभग 80% है।
- वृहत-सूक्ष्म असंगति। अक्सर मंत्रालयों को यह भी पता नहीं होता था कि दूसरा कौन-सी परियोजना बना रहा है। निजी क्षेत्र को आने वाली अवसंरचना की दृश्यता नहीं थी, जिससे प्रत्याशित निजी पूँजीगत निवेश रुक जाता था।
पीएम गति शक्ति वास्तव में क्या है
- बहु-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए एक राष्ट्रीय मास्टर प्लान, जो BISAG-N (भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशंस एंड जियोइन्फॉर्मेटिक्स) द्वारा विकसित साझा GIS प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूदा एवं प्रस्तावित अवसंरचना की 1,600 से अधिक डेटा परतें रखता है।
- 16 केंद्रीय मंत्रालयों का एकीकरण — सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, विद्युत, दूरसंचार, पेट्रोलियम, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा पूँजीगत व्यय वाले अन्य लाइन मंत्रालय।
- 100+ लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का दायरा NIP के तहत, जिनमें भारतमाला, सागरमाला, उड़ान (UDAN), समर्पित माल गलियारे (Dedicated Freight Corridors) और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी प्रमुख योजनाएँ शामिल हैं।
- आर्थिक क्षेत्र। विनिर्माण क्लस्टर, रक्षा गलियारे, इलेक्ट्रॉनिक पार्क, औद्योगिक गलियारे, मत्स्यन क्लस्टर और कृषि क्षेत्र बेहतर अंतिम-छोर कनेक्टिविटी के लिए स्पष्ट रूप से मानचित्रित किए गए हैं।
- निर्णय-निर्माण की परतें। शीर्ष पर अधिकार-प्राप्त सचिव समूह (Empowered Group of Secretaries, EGoS), मध्य में नेटवर्क नियोजन समूह (Network Planning Group) और दैनिक समन्वय हेतु एक तकनीकी सहायता इकाई (Technical Support Unit)।
गति शक्ति बनाम राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन
- NIP 2025 तक निष्पादित होने वाली 111+ लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का पोर्टफोलियो है।
- NMP (राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन) ब्राउनफील्ड परिसंपत्तियों के पुनर्चक्रण की व्यवस्था है।
- गति शक्ति समन्वय एवं नियोजन की वह परत है जो एकाकी कार्यशैली तोड़कर और स्वीकृति चक्रों को संकुचित करके NIP को साकार योग्य बनाती है।
गति शक्ति के छह स्तंभ
व्यापकता, प्राथमिकता, अनुकूलन, समकालिकता, विश्लेषणात्मक क्षमता और गतिशीलता। व्यवहार में इसका अर्थ है कि हर मंत्रालय एक ही भौगोलिक मंच पर योजना बनाता है, परियोजनाओं का क्रम टकराव से बचने के लिए तय किया जाता है और डेटा लगातार अद्यतन होता रहता है।
लाभ
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी। भारत की लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी का 13-14% रही है, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह 8-10% है। गति शक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (2022) के साथ मिलकर, अगले दशक में इसे एकल-अंक तक लाने का लक्ष्य रखती है — जो विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता एवं निर्यात के लिए सीधा प्रोत्साहन है।
- कृषि आय में वृद्धि। ग्रामीण भारत तक बहु-मॉडल कनेक्टिविटी फसल-उपरांत हानि कम करती है, कृषि आपूर्ति शृंखला सुधारती है, e-NAM को गति देती है और कृषि निर्यात को खोलती है।
- औद्योगिक विकास। आर्थिक क्षेत्रों को नियोजित अंतिम-छोर कनेक्टिविटी मिलती है, जिससे एंकर निवेशकों की प्रवेश लागत घटती है और लॉजिस्टिक्स हानि कम होती है।
- गुणक प्रभाव। पूँजीगत व्यय का गुणक 2.45 होने के कारण बेहतर निष्पादित अवसंरचना अपना वृद्धि-लाभ और बढ़ाती है।
- परियोजनाओं का तेज़ निष्पादन। समन्वय को अग्रभार में लाकर गति शक्ति मंज़ूरी चक्र छोटे करती है और खोद-पुनः खोद के दुष्चक्र को घटाती है।
- व्यवसाय की सुगमता (Ease of Doing Business)। निवेशक पूँजी लगाने से पहले एक ही मंच पर आगामी अवसंरचना देख सकते हैं।
चुनौतियाँ
- डेटा की गुणवत्ता। GIS परतें उतनी ही अच्छी हैं जितना अंतर्निहित भू-अभिलेख, उपयोगिता एवं परिसंपत्ति डेटा। राज्य-स्तरीय डेटासेट की कमियाँ एकीकृत योजना को कमज़ोर कर सकती हैं।
- केंद्र-राज्य समन्वय। कई अवसंरचना तंत्र — भूमि, विद्युत वितरण, शहरी परिवहन — राज्य-सूची के विषय हैं। राज्यों को अपनी स्वयं की गति शक्ति व्यवस्था बनानी होगी।
- नगर-निगम स्तर पर क्षमता। अंतिम-छोर एकीकरण ULB (शहरी स्थानीय निकायों) की नियोजन क्षमता पर निर्भर करता है, जो असमान है।
- साइबर सुरक्षा। महत्वपूर्ण अवसंरचना का साझा GIS मंच एक रणनीतिक परिसंपत्ति है और इसे मज़बूत सुरक्षा की आवश्यकता है।
- संस्थागत जड़ता। मंत्रालयों की एकाकी संस्कृति रातोंरात नहीं बदलती; EGoS ढाँचे को लगातार मध्यस्थता करनी होगी।
हालिया घटनाक्रम (2024-26)
- 2025 तक सभी केंद्रीय मंत्रालय और 36 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश गति शक्ति पोर्टल पर ऑनबोर्ड हैं; 200 से अधिक मास्टर प्लान और 8 लाख से अधिक डेटा परतें एकीकृत की जा चुकी हैं।
- राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के कार्यान्वयन ने भारत की लॉजिस्टिक्स लागत का अंतर कम किया है; NCAER के अनुमान के अनुसार वर्तमान लागत जीडीपी का लगभग 9-10% है, जो पहले 13-14% थी।
- बजट 2025-26 में रिकॉर्ड पूँजीगत व्यय के साथ गति शक्ति-संरेखित क्रम जारी है, और गति शक्ति सुधारों से जुड़ा राज्यों को 50-वर्षीय ब्याज-मुक्त ऋण भी बढ़ाया गया है।
- PLI औद्योगिक क्लस्टरों को समन्वित निकासी अवसंरचना के लिए गति शक्ति में मानचित्रित किया जा रहा है।
- तटीय और अंतर्देशीय जलमार्गों का नियोजन अब सागरमाला 2.0 के अंतर्गत बंदरगाह-हिंटरलैंड अंतराल पहचानने हेतु गति शक्ति की GIS परतों का उपयोग कर रहा है।
यूपीएससी प्रासंगिकता
गति शक्ति प्रारंभिक परीक्षा (मंत्रालयों का दायरा, BISAG-N, स्तंभ), मेन्स GS III (अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धात्मकता, समन्वय) और निबंध (शासन नवाचार के रूप में एकीकृत नियोजन) में आती है। मज़बूत उत्तरों में गति शक्ति, NIP और NMP का अंतर स्पष्ट करना, योजना को लॉजिस्टिक्स लागत में कमी एवं मेक इन इंडिया से जोड़ना, और शासन-लाभ एवं डेटा-गुणवत्ता जोखिम दोनों का उल्लेख करना चाहिए। अभ्यर्थियों को 16 मंत्रालयों का आँकड़ा, BISAG-N, 100+ लाख करोड़ रुपये का परियोजना दायरा उद्धृत करना चाहिए, तथा राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के लक्ष्यों और भारत की लॉजिस्टिक्स लागत में हो रही कमी जैसे परिणामों का समावेश करना चाहिए।