प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) भारत सरकार की प्रमुख योजना है जो भारतीय कृषि का सौरीकरण करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है — बिजली सब्सिडी का राजकोषीय बोझ घटाने, भूजल के अत्यधिक दोहन में कटौती करने और डीजल पंपों को स्वच्छ सौर ऊर्जा से बदलने के लिए।
PM-KUSUM की पृष्ठभूमि
भारत में लगभग 3 करोड़ कृषि पंप हैं, जिनमें से अधिकांश डीजल या सब्सिडीयुक्त बिजली पर चलते हैं। यह व्यवस्था किसानों, राजकोष और पर्यावरण तीनों पर भारी पड़ती है। PM-KUSUM इस समस्या का समाधान तीन घटकों के माध्यम से करती है।
तीन घटक
| घटक | विवरण |
|---|---|
| घटक A | 2 MW तक की विकेंद्रीकृत ग्राउंड-माउंटेड ग्रिड-कनेक्टेड सौर ऊर्जा संयंत्र। किसान बंजर/अनुपयोगी भूमि पर संयंत्र लगाकर DISCOM को बिजली बेच सकते हैं। |
| घटक B | स्टैंड-अलोन सौर कृषि पंप। डीजल पंपों को सौर पंपों से प्रतिस्थापित करना। |
| घटक C | ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों का सौरीकरण। किसान अतिरिक्त सौर ऊर्जा ग्रिड को बेच सकते हैं। |
योजना के उद्देश्य और लाभ
- किसानों की आय वृद्धि: अतिरिक्त सौर ऊर्जा ग्रिड को बेचकर किसान नियमित आय अर्जित कर सकते हैं।
- सिंचाई में ऊर्जा सुरक्षा: डीजल और बिजली कटौती पर निर्भरता खत्म होती है।
- भूजल संरक्षण: मीटर्ड सौर पंप अत्यधिक सिंचाई को हतोत्साहित करते हैं।
- राजकोषीय राहत: कृषि बिजली सब्सिडी का बोझ कम होता है।
- नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य: 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य में योगदान।
वित्तीय संरचना
PM-KUSUM में सब्सिडी का ढाँचा इस प्रकार है: केंद्र सरकार 30%, राज्य सरकार 30%, और किसान शेष 40% का वहन करता है (जिसमें से 30% बैंक ऋण से लिया जा सकता है)।
चुनौतियाँ
- भूजल विरोधाभास: सस्ते सौर पंप भूजल के और अधिक दोहन को प्रोत्साहित कर सकते हैं।
- ग्रिड स्थिरता: बड़े पैमाने पर कृषि सौर ऊर्जा का एकीकरण ग्रिड प्रबंधन को जटिल बनाता है।
- कम कार्यान्वयन गति: लक्ष्य के सापेक्ष स्थापनाएँ पिछड़ी हुई हैं।
- भूमि स्वामित्व विवाद: घटक A के लिए उपयुक्त भूमि की उपलब्धता।
- रखरखाव क्षमता: ग्रामीण क्षेत्रों में सौर उपकरणों के रखरखाव की सुविधाओं का अभाव।
UPSC के लिए प्रासंगिकता
PM-KUSUM GS III (कृषि, अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा) और GS II (सरकारी योजनाएँ, किसान कल्याण) दोनों के लिए प्रासंगिक है। यह कृषि-सौर सहजीविता (Agri-solar symbiosis) का उत्कृष्ट उदाहरण है जो किसानों को ऊर्जा उत्पादक बनाता है।