सहकारी समितियाँ स्वायत्त, सदस्य-स्वामित्व वाले उद्यम हैं जो संयुक्त स्वामित्व और लोकतांत्रिक नियंत्रण के माध्यम से आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जरूरतें पूरी करते हैं। “सहकार से समृद्धि” — सहयोग से समृद्धि — की परिकल्पना भारत सरकार ने सहकारिता आंदोलन को पुनर्जीवित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दी है।
सहकारिता मंत्रालय का गठन (2021)
जुलाई 2021 में भारत सरकार ने एक अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन किया — जो इस बात का संकेत है कि सरकार सहकारिता आंदोलन को अलग नीतिगत ध्यान देना चाहती है। इससे पहले सहकारिता कृषि मंत्रालय के अधीन थी।
प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का कम्प्यूटरीकरण
सरकार ने 63,000 से अधिक PACS का कम्प्यूटरीकरण करने की योजना बनाई है। PACS ग्रामीण ऋण वितरण का आधार हैं — ये किसानों को अल्पकालिक ऋण, उर्वरक, बीज और अन्य इनपुट उपलब्ध कराती हैं। कम्प्यूटरीकरण से:
- पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
- ऋण प्रक्रिया तेज होगी।
- डुप्लीकेशन और भ्रष्टाचार कम होगा।
- डिजिटल भुगतान एकीकृत होगा।
बहु-राज्य सहकारी समितियाँ (MSCS) संशोधन
बहु-राज्य सहकारी समितियाँ (संशोधन) अधिनियम, 2023 ने MSCS अधिनियम, 2002 में महत्त्वपूर्ण बदलाव किए: सहकारी चुनाव प्राधिकरण की स्थापना, सहकारी सूचना अधिकारी की नियुक्ति, और सदस्यों की शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना।
प्रमुख सहकारी क्षेत्र
| क्षेत्र | प्रमुख संस्था |
|---|---|
| डेयरी | AMUL (GCMMF) |
| चीनी | महाराष्ट्र और UP की सहकारी चीनी मिलें |
| ऋण | PACS, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक, NABARD |
| उर्वरक | IFFCO, KRIBHCO |
| आवास | सहकारी आवास समितियाँ |
चुनौतियाँ
- राजनीतिक हस्तक्षेप: चुनाव और प्रबंधन में राजनीतिक दखल।
- NPA समस्या: PACS का उच्च अनर्जक आस्ति (NPA) अनुपात।
- भौगोलिक असमानता: महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक में मजबूत; बिहार, उत्तर प्रदेश में कमजोर।
- पेशेवर प्रबंधन का अभाव: सहकारी समितियों में तकनीकी और प्रबंधकीय कौशल की कमी।
UPSC के लिए प्रासंगिकता
GS III में सहकारिता कृषि, ग्रामीण विकास और समावेशी विकास के अंतर्गत आती है। AMUL को भारतीय विकास मॉडल के रूप में और PACS को ग्रामीण वित्त के आधार के रूप में समझना आवश्यक है। 97वाँ संवैधानिक संशोधन (2011) जो सहकारिता को मौलिक अधिकार और नीति-निर्देशक सिद्धांत में स्थान देता है — भी UPSC के लिए महत्त्वपूर्ण है।