भारत प्रतिवर्ष लगभग 330 मिलियन टन (MT) खाद्यान्न का उत्पादन करता है, पर वैज्ञानिक भंडारण क्षमता उसकी 50% से भी कम है, और यह क्षमता क्षेत्रीय रूप से बहुत असमान है। फसल-उपरांत हानि उत्पादन का 10–16% तक पहुँच जाती है, संकटकालीन बिक्री (distress sales) से किसानों की आय गिरती है, और सहकारिता मंत्रालय (जुलाई 2021 में गठित) के अंतर्गत भारत की सहकारी संघवाद की दृष्टि ने इसी अंतर को अपने प्रमुख हस्तक्षेप के रूप में चिह्नित किया। मई 2023 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना (World’s Largest Grain Storage Plan) को स्वीकृति दी, जिसका आधार प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS) हैं। 2024-25 तक पायलट चरण के गोदाम चालू हो चुके हैं, और बजट 2025-26 ने इस कार्यक्रम का राष्ट्रव्यापी विस्तार कर दिया है।
भारत को विकेन्द्रीकृत अनाज भंडारण क्यों चाहिए?
- क्षमता की कमी: 330 MT उत्पादन के मुक़ाबले वैज्ञानिक भंडारण लगभग 47% खाद्यान्न को कवर करता है।
- क्षेत्रीय असमानता: दक्षिणी राज्यों में भंडारण पर्याप्तता 90%+ है; उत्तर प्रदेश और बिहार 50% से नीचे हैं।
- FCI स्तर पर केंद्रीकरण: मौजूदा क्षमता अधिशेष वाले राज्यों में बड़े FCI गोदामों की ओर झुकी है, जो ग्रामीण उत्पादकों से दूर हैं।
- संकटकालीन बिक्री: गाँव-स्तरीय भंडारण न होने से किसान कटाई के तुरंत बाद, अक्सर MSP से नीचे, बेचने को मजबूर होते हैं।
- उच्च परिवहन लागत: अनाज खेतों से दूर FCI गोदामों और फिर FPS दुकानों तक आता-जाता रहता है।
- नाशवान उत्पादों की उपेक्षा: देश में केवल लगभग 7,000 कोल्ड स्टोरेज हैं, जिनमें से 60% अकेले आलू के लिए उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में केंद्रित हैं।
योजना की संरचना
अंतर-मंत्रालयी समिति (IMC)
केंद्रीय सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में गठित IMC तीन मंत्रालयों की मौजूदा कृषि भंडारण योजनाओं के दिशानिर्देशों में संशोधन कर क्रियान्वयन का समन्वय करती है:
- कृषि एवं किसान कल्याण: MIDH, कृषि अवसंरचना कोष (AIF), ग्रामीण भंडारण योजना।
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग: PM किसान संपदा योजना, PM सूक्ष्म खाद्य उद्यम औपचारिकरण योजना (PMFME)।
- उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण: FCI खरीद ढाँचा, MSP, PDS लॉजिस्टिक्स।
वित्तपोषण मॉडल
कोई नया परिव्यय नहीं — यह योजना मौजूदा कोषों का अभिसरण करती है (AIF 1 लाख करोड़ रुपये; PM किसान संपदा 6,000 करोड़ रुपये; PMFME 10,000 करोड़ रुपये; MIDH आवंटन), ताकि PACS स्तर पर गोदाम, कस्टम हायरिंग केंद्र और प्रसंस्करण इकाइयाँ बनाई जा सकें।
पैमाना
देश भर की लगभग 63,000 PACS संभावित आधार बनाती हैं। प्रारंभिक रोलआउट का लक्ष्य चरण-1 में 2,000 PACS है, जो चरण-2 में 10,000 PACS तक बढ़ेगा; प्रत्येक PACS पर आम तौर पर 500 MT का गोदाम। यह वैश्विक स्तर पर सहकारी क्षेत्र का सबसे बड़ा भंडारण कार्यक्रम है।
अभिसरण लक्ष्य
प्रत्येक PACS में होगा:
- भंडारगृह (गोदाम)
- कृषि यंत्रों के लिए कस्टम हायरिंग केंद्र
- उचित मूल्य दुकान (FPS)
- सामान्य प्रसंस्करण इकाई (छँटाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग)
- FCI/राज्य एजेंसियों के लिए खरीद केंद्र
योजना के लाभ
खाद्य अपव्यय में कमी
- खेत के पास विकेन्द्रीकृत भंडारण फसलोपरांत हानि घटाता है।
- खुले/कवर-एंड-प्लिंथ भंडारण में होने वाली बर्बादी रुकती है।
बेहतर किसान आय
- किसान PACS को MSP पर अग्रिम भुगतान के साथ बेच सकते हैं, और बाज़ार-विक्रय के बाद शेष राशि पा सकते हैं।
- उपज भंडारित कर गोदाम रसीद (warehouse receipt) पर वित्त प्राप्त करने का विकल्प।
- संकटकालीन बिक्री समाप्त होती है।
PACS का सशक्तीकरण
- PACS एकल-कार्य वाली ऋण समितियों से बहु-कार्यात्मक ग्रामीण केंद्रों में विकसित होती हैं।
- खरीद केंद्र, FPS, कस्टम हायरिंग केंद्र और प्रसंस्करण इकाई के रूप में काम कर सकती हैं।
- ग्रामीण रोज़गार को बल मिलता है।
क्रेडिट चक्र में सुधार
- इलेक्ट्रॉनिक गोदाम रसीदें (e-NWR) अगली फसल के ऋण के लिए संपार्श्विक (collateral) बन जाती हैं।
- आढ़तियों और साहूकारों पर निर्भरता घटती है।
लॉजिस्टिक और राजकोषीय दक्षता
- दूर स्थित FCI गोदामों तक और वापस अनाज ले जाने की परिवहन लागत घटती है।
- FCI के भंडारण पर अतिरिक्त दबाव कम होता है।
खाद्य सुरक्षा और मुद्रास्फीति नियंत्रण
- विकेन्द्रीकृत बफर स्टॉक कम-आपूर्ति के मौसमों में स्थानीय आपूर्ति स्थिर रखते हैं।
- PDS का उठान अधिक सुचारू होता है।
सहकारी संघवाद
- सहकारिता मंत्रालय की ‘सहकार से समृद्धि’ की दृष्टि को साकार करती है।
- सहकारी अवसंरचना में राज्यों की सीधी भूमिका बनती है।
हाल के घटनाक्रम (2024-26)
बजट 2025-26:
- PACS कम्प्यूटरीकरण का लक्ष्य तेज़ किया गया — 2,516 करोड़ रुपये के परिव्यय से 67,000 PACS का डिजिटलीकरण।
- बहु-राज्यीय सहकारी बीज एवं जैविक (organic) समितियाँ शुरू की गईं।
- भंडारण निर्माण की रफ़्तार बढ़ाने के लिए कृषि अवसंरचना कोष का विस्तार।
- 100 कम-उत्पादकता वाले ज़िलों के लिए PM धन-धान्य कृषि योजना स्पष्ट रूप से PACS-आधारित भंडारण का उपयोग करती है।
डिजिटल कृषि मिशन: Agristack डिजिटल e-NWR जारी करने और PACS में संग्रहित अनाज की वास्तविक-समय ट्रैकिंग को सक्षम बनाता है, जो किसानों को UPI-आधारित भुगतान से जुड़ा है।
FPS के रूप में PACS: लगभग 20,000 PACS को FPS लाइसेंस आवंटित हुए हैं और 4,000+ FPS आउटलेट चला रही हैं, जिससे भंडारण और वितरण का चक्र पूरा होता है।
पायलट परिणाम: गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक में 2023-24 में 11 पायलट PACS गोदाम चालू हो गए, जो व्यवहार्यता प्रदर्शित करते हैं।
16वाँ वित्त आयोग: राज्यों के प्रतिवेदन ग्रामीण भंडारण अवसंरचना के लिए सशर्त अनुदान (tied grants) की माँग करते हैं।
MPI 2024: बिहार और उत्तर प्रदेश में पोषण संकेतक तब सुधरते हैं जब PDS उठान स्थिर होता है — यह विकेन्द्रीकृत भंडारण का समर्थन करता है।
GST परिषद 2024: भंडारण एवं गोदाम सेवाओं पर GST के व्यवहार को स्पष्ट किया, जिससे विवाद घटे।
चुनौतियाँ और जोखिम
- PACS स्तर पर भूमि की उपलब्धता: हर PACS के पास 500 MT के गोदाम के लिए 1–2 एकड़ भूमि नहीं है।
- PACS की वित्तीय स्थिति: कई घाटे में चल रही हैं; पूँजीगत व्यय के लिए मज़बूत सहयोग चाहिए।
- योजनाओं का अभिसरण जटिल है: AIF, PMFME, MIDH जैसे कोषों को एक-दूसरे से जोड़ना कुशल प्रशासन माँगता है।
- गुणवत्ता नियंत्रण: परीक्षण, ग्रेडिंग और कीट-नियंत्रण ढाँचा उन्नत करना होगा।
- राज्य-स्तरीय भिन्नताएँ: राज्यों के सहकारी क़ानून अलग-अलग हैं, जिससे समान रोलआउट धीमा पड़ता है।
- निगरानी: सहकारिता मंत्रालय नया है; मूल्यांकन तंत्र अभी विकसित हो रहे हैं।
आगे का रास्ता
- पहले PACS का कम्प्यूटरीकरण: इससे पारदर्शी लेखांकन और योजनाओं तक पहुँच सुनिश्चित होगी।
- PACS के लिए भूमि बैंक: राज्य सरकारी भूमि चिह्नित कर नाममात्र पट्टे पर दें।
- राजस्व विविधीकरण: भंडारण शुल्क + कस्टम हायरिंग + FPS मार्जिन + प्रसंस्करण राजस्व।
- तृतीय-पक्ष ऑडिट: भंडारण स्थिति और अनाज गुणवत्ता का स्वतंत्र मूल्यांकन।
- बीमा से जोड़ाव: PMFBY ढाँचे के तहत भंडारित अनाज का बीमा।
- निजी क्षेत्र के BOT साझेदारी: PACS स्तर पर विशेषीकृत कोल्ड स्टोरेज के लिए।
- विस्तार सेवाएँ: आधुनिक गोदाम प्रबंधन में PACS प्रबंधकों का प्रशिक्षण।
यूपीएससी प्रासंगिकता
- GS III (अर्थव्यवस्था/कृषि): खाद्यान्न प्रबंधन, FCI सुधार, सहकारी क्षेत्र, PACS, फसलोपरांत अवसंरचना।
- GS II (शासन): सहकारिता मंत्रालय, सहकारी संघवाद।
- प्रारंभिक परीक्षा के संकेत: सहकारिता मंत्रालय (जुलाई 2021), सहकार से समृद्धि, PACS (~63,000), कृषि अवसंरचना कोष, PM किसान संपदा योजना, PMFME, प्रति PACS 500 MT गोदाम, e-NWR।
संभावित प्रश्न: “सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना भारत की फसलोपरांत भंडारण की कमी दूर करने के लिए बनाई गई है। बजट 2025-26 के संदर्भ में इसकी डिज़ाइन, लाभ और चुनौतियों की विवेचना कीजिए।” (GS III, 250 शब्द)