SEBI (Securities and Exchange Board of India) — हिंदी में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड — की स्थापना 12 अप्रैल 1988 को केंद्र सरकार के एक प्रस्ताव से गैर-सांविधिक (non-statutory) निकाय के रूप में हुई थी। पर इसे असली शक्ति SEBI Act 1992 से मिली, जिसके तहत 30 जनवरी 1992 से SEBI एक सांविधिक (statutory) निकाय बना। SEBI का मुख्यालय Bandra-Kurla Complex (BKC), Mumbai में है, और इसके चार क्षेत्रीय कार्यालय (New Delhi, Kolkata, Chennai, Ahmedabad) हैं। 2026 में SEBI के अध्यक्ष (Chairperson) तुहिन कांत पाण्डेय (Tuhin Kanta Pandey) हैं — उन्होंने मार्च 2025 में माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) के बाद कार्यभार ग्रहण किया। SEBI भारत के प्रतिभूति बाज़ार (शेयर, बॉन्ड, derivatives, mutual funds, REITs/InvITs, AIFs, FPIs) का प्रमुख नियामक है। इसके तीन उद्देश्य — निवेशक संरक्षण, बाज़ार-विकास और बाज़ार का विनियमन।
परिचय (Introduction)

प्रतिभूति बाज़ार किसी भी पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है — यहीं से कंपनियाँ पूँजी जुटाती हैं और निवेशक रिटर्न पाते हैं। पर 1980 के दशक तक भारत में यह बाज़ार लगभग बिना नियामक के था। Controller of Capital Issues (CCI) के तहत Capital Issues (Control) Act 1947 से नियंत्रण होता था, पर यह व्यवस्था पुरानी और अप्रासंगिक हो चुकी थी।
1980 के दशक के अंत में Bombay Stock Exchange (BSE) में अनेक भ्रामक IPO, अंतःस्थानिक व्यापार (insider trading) और मूल्य-हेरफेर (price manipulation) के मामले सामने आए। जी. एस. पाटिल समिति (G. S. Patel Committee, 1985) ने एक स्वतंत्र नियामक की सिफ़ारिश की। नतीजतन 12 अप्रैल 1988 को सरकार ने प्रशासनिक प्रस्ताव से SEBI की स्थापना की।
पर असली बदलाव 1992 के हर्षद मेहता घोटाले (Harshad Mehta scam) के बाद आया — संसद ने SEBI Act 1992 पारित किया और 30 जनवरी 1992 से SEBI को सांविधिक दर्जा मिला, साथ ही प्रतिभूति बाज़ार को विनियमित करने की पूरी शक्तियाँ।
मुख्य तथ्य एक नज़र में (Quick Facts at a Glance)
- पूर्ण नाम: Securities and Exchange Board of India
- हिंदी में: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड
- गैर-सांविधिक स्थापना: 12 अप्रैल 1988
- सांविधिक स्थापना: 30 जनवरी 1992 (SEBI Act 1992 के तहत)
- पूर्ववर्ती: Controller of Capital Issues (CCI), 1947 अधिनियम के तहत
- मुख्यालय: SEBI Bhavan, Bandra-Kurla Complex (BKC), Mumbai
- क्षेत्रीय कार्यालय: New Delhi (उत्तर), Kolkata (पूर्व), Chennai (दक्षिण), Ahmedabad (पश्चिम)
- अध्यक्ष (2026): तुहिन कांत पाण्डेय (Tuhin Kanta Pandey) — मार्च 2025 से
- पूर्व अध्यक्ष: माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch, 2022-25 — प्रथम महिला अध्यक्ष), अजय त्यागी (2017-22), यू. के. सिन्हा, सी. बी. भावे, एम. दामोदरन, जी. वी. रामकृष्ण (प्रथम)
- बोर्ड संरचना: Chairperson + 2 केंद्र सरकार-नामित + 1 RBI नामित + 5 अन्य = कुल 9
- अपीलीय निकाय: Securities Appellate Tribunal (SAT), Mumbai
- सर्वोच्च अपील: सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
1875 — बम्बई में Native Share & Stock Brokers Association बना — यही BSE का पूर्वज, एशिया का सबसे पुराना stock exchange। 1956 — Securities Contracts (Regulation) Act (SCRA) पारित; एक्सचेंज की मान्यता का ढाँचा बना।
1980 के दशक में पूँजी बाज़ार तेज़ी से बढ़ा पर निगरानी कमज़ोर। 1985 की G. S. Patel Committee और 1986 की Pherwani Committee ने एक स्वतंत्र नियामक की ज़रूरत बताई। 12 अप्रैल 1988 को सरकार ने प्रशासनिक प्रस्ताव से SEBI बनाया, पर शुरू में यह गैर-सांविधिक निकाय था — कानूनी शक्तियाँ कम।
1992 का हर्षद मेहता घोटाला (₹4,000 करोड़ का scam, “Big Bull” प्रकरण) निर्णायक मोड़ साबित हुआ। संसद ने तेज़ी से SEBI Act 1992 पारित किया, और 30 जनवरी 1992 से SEBI सांविधिक हो गया। CCI Act 1947 को 1992 में निरस्त किया गया — और प्रतिभूति बाज़ार का प्रवेश-नियंत्रण (“merit-based”) से disclosure-based ढाँचे की ओर बदला।
संदर्भ — भारत में स्वतंत्र नियामक संस्थाएँ — RBI, SEBI, TRAI।
SEBI Act 1992 — प्रमुख प्रावधान

- धारा 3: SEBI की स्थापना
- धारा 4: बोर्ड की संरचना — Chairperson + 8 अन्य
- धारा 11: SEBI के कर्तव्य — निवेशकों के हितों की सुरक्षा, बाज़ार-विकास, विनियमन
- धारा 11A: प्रतिभूतियों के मामले में नियम बनाने की शक्ति
- धारा 11B: निर्देश जारी करने की शक्ति (cease and desist orders)
- धारा 11C: जाँच और निरीक्षण
- धारा 15A-15HB: आर्थिक दंड
- धारा 15T: SAT में अपील का अधिकार
SEBI की संरचना (Structure)
SEBI Board में 9 सदस्य होते हैं:
| पद | संख्या | विवरण |
|---|---|---|
| Chairperson | 1 | केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त |
| केंद्र सरकार-नामित (Whole-time) | 2 | वित्त मंत्रालय / कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय से |
| RBI-नामित | 1 | RBI से |
| केंद्र सरकार-नामित (Part-time) | 5 | विशेषज्ञ बाहरी सदस्य |
Chairperson का कार्यकाल आमतौर पर 5 साल या 65 वर्ष की आयु तक — जो पहले हो। इसके अलावा SEBI के अंदर Investor Education and Protection Department (IEPD), Department of Economic and Policy Analysis (DEPA), Department of Debt and Hybrid Securities (DDHS) आदि कई कार्यात्मक विभाग हैं।
SEBI की शक्तियाँ — तीन त्रि-स्तरीय भूमिकाएँ
SEBI एक “quasi-trinity” शक्तियों वाला निकाय है — यानी इसके पास तीन क्वासी (अर्ध-) भूमिकाएँ हैं:
- Quasi-Legislative (अर्ध-विधायी): नियम-विनियम बनाने की शक्ति — जैसे LODR Regulations 2015, ICDR Regulations 2018, Insider Trading Regulations 2015, Mutual Funds Regulations 1996, Takeover Code 2011, Foreign Portfolio Investors Regulations 2019, AIF Regulations 2012, REIT Regulations 2014।
- Quasi-Executive (अर्ध-कार्यकारी): पंजीकरण, निरीक्षण, जाँच, छापे — Stock Exchanges, brokers, merchant bankers, registrars, mutual fund houses, AIFs, FPIs के पंजीकरण और निगरानी।
- Quasi-Judicial (अर्ध-न्यायिक): सुनवाई और दंड — आर्थिक जुर्माना (penalties), debarment orders, disgorgement orders। SEBI के निर्णय के विरुद्ध Securities Appellate Tribunal (SAT, Mumbai) में अपील; SAT से आगे सर्वोच्च न्यायालय।
SEBI के मुख्य कार्य (Key Functions)
- निवेशक संरक्षण (Investor Protection): निवेशक शिक्षा (IEPF), शिकायत निवारण (SCORES portal), KYC मानक
- बाज़ार विकास (Market Development): Demat (NSDL/CDSL), T+1 settlement (Jan 2023 से), T+0 का विकास (2024 से शुरू), इलेक्ट्रॉनिक trading
- बाज़ार विनियमन (Market Regulation): Stock Exchanges (BSE, NSE), Clearing Corporations, Depositories
- उत्पादों का विनियमन: Equity, Debt, Derivatives (F&O), Mutual Funds, ETFs, AIFs (Cat-I/II/III), REITs, InvITs, ESG Funds
- मध्यस्थों का विनियमन: Brokers, Sub-brokers, Merchant Bankers, Investment Advisers, Research Analysts, Custodians, Registrars, Credit Rating Agencies
- अंतःस्थानिक व्यापार (Insider Trading) रोकथाम: Prohibition of Insider Trading Regulations 2015 (PIT Regulations)
- टेकओवर कोड: SEBI (Substantial Acquisition of Shares and Takeovers) Regulations 2011
SEBI के अध्यक्ष — चयनित सूची (Chairpersons)
| क्रम | अध्यक्ष | कार्यकाल | विशेष पहचान |
|---|---|---|---|
| 1 | जी. वी. रामकृष्ण | 1992-1994 | प्रथम सांविधिक अध्यक्ष |
| 5 | डी. आर. मेहता | 1995-2002 | UTI संकट के दौर में |
| 7 | एम. दामोदरन | 2005-2008 | Listing Agreement reforms |
| 8 | सी. बी. भावे | 2008-2011 | Mutual Fund Entry Load बंद |
| 9 | यू. के. सिन्हा | 2011-2017 | RGESS, AIF Regulations |
| 10 | अजय त्यागी | 2017-2022 | NSE को-लोकेशन प्रकरण |
| 11 | माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) | 2022-2025 | प्रथम महिला अध्यक्ष; T+1, F&O reforms |
| 12 | तुहिन कांत पाण्डेय (Tuhin Kanta Pandey) | March 2025-वर्तमान | पूर्व DIPAM सचिव; LIC IPO के मुख्य |
हाल की प्रमुख घटनाएँ (Recent Developments — 2024-26)
- हिंडनबर्ग-अडानी प्रकरण (Hindenburg-Adani): जनवरी 2023 की रिपोर्ट के बाद SEBI जाँच; सर्वोच्च न्यायालय की समिति, 2024 की SC टिप्पणियाँ; Madhabi Puri Buch पर हितों के टकराव के आरोप (अगस्त 2024 Hindenburg-2 रिपोर्ट)
- F&O reforms 2024 (अक्टूबर 2024): Index derivatives पर lot size बढ़ाना, weekly expiry तर्कसंगत करना, Extreme Loss Margin (ELM) में वृद्धि — खुदरा निवेशकों के derivatives losses पर रोक
- SME IPO scrutiny: SME platform पर manipulation की शिकायतें — additional disclosures और surveillance
- T+0 Settlement (2024): Beta launch, चयनित scrips पर
- एसेट मैनेजमेंट कंपनियों पर निगरानी: Front-running, MF Lite Regulations 2024
- AI-based surveillance system: बाज़ार-निगरानी के लिए AI-tools का उपयोग
संबंधित — रुपए में व्यापार निपटान — RBI की रूपरेखा और भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) का निजीकरण।
चुनौतियाँ और आलोचना (Challenges and Criticism)
- regulatory capture का जोखिम: बड़े कॉर्पोरेट और मध्यस्थों के साथ संतुलन
- खुदरा निवेशक F&O losses: SEBI के 2024 अध्ययन के अनुसार 90%+ retail F&O traders शुद्ध हानि में
- algo-trading, हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग: स्तर-समानता का सवाल
- हितों के टकराव: Madhabi Puri Buch प्रकरण ने प्रश्न खड़े किए
- जाँच की धीमी गति: बड़े मामलों में अंतिम आदेश में वर्षों
- क्रिप्टो/digital assets: कोई स्पष्ट नियामक ढाँचा नहीं — अधिकार-सीमा अस्पष्ट
- छोटे निवेशकों की शिक्षा: SCORES के बावजूद रक़म-वसूली की धीमी रफ़्तार
UPSC के लिए प्रासंगिकता (UPSC Relevance)
- Prelims: SEBI की स्थापना (12 अप्रैल 1988 गैर-सांविधिक, 30 जनवरी 1992 सांविधिक), SEBI Act 1992, मुख्यालय BKC Mumbai, अध्यक्ष Tuhin Kanta Pandey, प्रथम महिला अध्यक्ष Madhabi Puri Buch, Bord 9 सदस्य, SAT Mumbai में, हिंडनबर्ग-अडानी।
- Mains GS-2: स्वतंत्र नियामक संस्थाएँ, quasi-judicial शक्तियाँ, सरकार-नियामक संबंध।
- Mains GS-3: पूँजी बाज़ार सुधार, F&O reforms, खुदरा निवेशक संरक्षण, FPI विनियमन, आर्थिक अपराध और corporate governance।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Mains Practice Questions)
- SEBI के तीन क्वासी-कार्यों — विधायी, कार्यकारी, न्यायिक — की चर्चा कीजिए और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के संदर्भ में मूल्यांकन कीजिए। (150 शब्द)
- “F&O बाज़ार में retail निवेशकों की हानियाँ एक नीतिगत चुनौती हैं।” 2024 के SEBI सुधारों के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
निष्कर्ष (Conclusion)
SEBI की 38 वर्ष की यात्रा 1988 के एक सलाहकार बोर्ड से 2026 के दुनिया के सबसे जटिल पूँजी-बाज़ारों में से एक के संरक्षक तक पहुँची है। हर्षद मेहता, केतन पारेख, NSEL, NSE को-लोकेशन और हिंडनबर्ग-अडानी — हर बड़े संकट ने SEBI के नियमन-ढाँचे को कसा है। T+1/T+0 सेटलमेंट, F&O reforms, AIF/REIT/InvIT जैसे नए उत्पादों का स्पष्ट ढाँचा, और AI-संचालित बाज़ार-निगरानी SEBI की आधुनिक पहचान हैं। पर खुदरा निवेशक संरक्षण, F&O losses, क्रिप्टो/digital assets, और regulatory capture के जोखिम आगे की चुनौतियाँ हैं। UPSC उम्मीदवारों के लिए SEBI एक “बहु-पेपर” विषय है — अर्थव्यवस्था, राज्यव्यवस्था और नैतिकता तीनों में यह प्रासंगिक है, इसलिए स्थापना, संरचना, तीन क्वासी-शक्तियाँ, और 2024-26 के सुधारों — सबको तैयार रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
SEBI की स्थापना कब हुई थी?
SEBI की स्थापना 12 अप्रैल 1988 को केंद्र सरकार के प्रस्ताव से गैर-सांविधिक निकाय के रूप में हुई थी। बाद में SEBI Act 1992 के तहत 30 जनवरी 1992 से इसे सांविधिक दर्जा मिला।
SEBI का पूरा नाम क्या है?
SEBI का पूरा नाम Securities and Exchange Board of India है। हिंदी में इसे भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड कहते हैं।
SEBI के वर्तमान अध्यक्ष कौन हैं?
2026 में SEBI के अध्यक्ष तुहिन कांत पाण्डेय (Tuhin Kanta Pandey) हैं। उन्होंने मार्च 2025 में माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) के बाद कार्यभार ग्रहण किया। पहले वे केंद्र सरकार में DIPAM सचिव थे और LIC IPO के लिए जाने जाते हैं।
SEBI का मुख्यालय कहाँ है?
SEBI का मुख्यालय SEBI Bhavan, Bandra-Kurla Complex (BKC), Mumbai में है। इसके चार क्षेत्रीय कार्यालय New Delhi, Kolkata, Chennai और Ahmedabad में हैं।
SEBI Board में कितने सदस्य होते हैं?
SEBI Board में कुल 9 सदस्य होते हैं — Chairperson + 2 केंद्र सरकार-नामित + 1 RBI-नामित + 5 अन्य (जिनमें कम-से-कम 3 पूर्णकालिक)।
SEBI के निर्णय के विरुद्ध अपील कहाँ होती है?
SEBI के निर्णय के विरुद्ध अपील Securities Appellate Tribunal (SAT), Mumbai में होती है। SAT के निर्णय के विरुद्ध आगे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) में अपील की जा सकती है।
SEBI की प्रथम महिला अध्यक्ष कौन थीं?
SEBI की प्रथम महिला अध्यक्ष माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) थीं — उनका कार्यकाल मार्च 2022 से फरवरी 2025 तक रहा। उन्होंने T+1 settlement और F&O reforms की अगुवाई की।
क्या SEBI एक सांविधिक निकाय है?
हाँ। SEBI एक सांविधिक निकाय है। यद्यपि यह 12 अप्रैल 1988 को गैर-सांविधिक रूप में बना था, SEBI Act 1992 के तहत 30 जनवरी 1992 से यह सांविधिक हो गया।
SEBI और RBI में क्या अंतर है?
SEBI भारत के प्रतिभूति बाज़ार (शेयर, बॉन्ड, mutual funds, derivatives) का नियामक है, जबकि RBI बैंकिंग और मौद्रिक नीति का नियामक है। SEBI Act 1992 का है, RBI Act 1934 का। दोनों के मुख्यालय Mumbai में हैं।
SEBI के तीन क्वासी-कार्य कौन-से हैं?
SEBI के तीन क्वासी-कार्य हैं — (1) Quasi-Legislative — नियम/regulations बनाना; (2) Quasi-Executive — पंजीकरण, निरीक्षण, जाँच; (3) Quasi-Judicial — सुनवाई और दंड (इस पर अपील SAT में होती है)।