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स्वाधार योजना महाराष्ट्र: कितना पैसा, कौन पात्र, आवेदन कैसे करें

भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्वाधार योजना में महाराष्ट्र के अनुसूचित जाति व नवबौद्ध छात्रों को खाने-रहने के लिए साल में ₹38,000 से ₹60,000 मिलते हैं। पात्रता, काग़ज़ और आवेदन की पूरी गाइड।

The four city-class annual rates

स्वाधार योजना — पूरा नाम भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्वाधार योजना — महाराष्ट्र सरकार की वह योजना है जिसमें अनुसूचित जाति और नवबौद्ध छात्रों को खाने, रहने और पढ़ाई के ख़र्च के लिए हर साल ₹38,000 से ₹60,000 तक मिलते हैं। यह पैसा उन्हें मिलता है जिन्हें सरकारी छात्रावास में जगह नहीं मिल पाई। रक़म इस बात से तय होती है कि आप पढ़ाई किस शहर में कर रहे हैं: मुंबई, पुणे, नागपुर और उनके आसपास के शहरों में ₹60,000, और तालुका स्तर पर घटकर ₹38,000। आवेदन hmas.mahait.org पोर्टल से होते हैं।

स्वाधार योजना क्या है?

महाराष्ट्र का सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग उन अनुसूचित जाति व नवबौद्ध छात्रों के लिए सरकारी छात्रावास चलाता है, जो दसवीं के बाद पढ़ने दूसरे शहर जाते हैं। पर छात्रावास में जगह गिनी-चुनी है, और हर साल कई पात्र छात्रों को जगह नहीं मिल पाती। 6 जनवरी 2017 के शासन निर्णय से शुरू हुई स्वाधार योजना इसी कमी को भरती है: छात्रावास की जगह छात्र को नक़द मिलता है — साल भर का ऐसा भत्ता जिससे खाना, किराया और पढ़ाई के दूसरे ख़र्च चल जाएँ — और वह अपने संस्थान के पास ख़ुद रहकर पढ़ता है।

योजना उन छात्रों के लिए है जो ग्यारहवीं या बारहवीं में दाख़िला लेते हैं, और उसके बाद व्यावसायिक या ग़ैर-व्यावसायिक डिग्री या डिप्लोमा में। सबसे बड़ी शर्त यह है कि छात्र घर से बाहर रहकर पढ़ रहा हो। जो छात्र पढ़ाई की जगह के ही रहने वाले हैं, वे पात्र नहीं हैं — यह योजना छात्रावास की जगह लेती है, जेबख़र्च की नहीं।

शहर के हिसाब से कितना पैसा

भत्ता इस बात से तय होता है कि संस्थान कहाँ है। सामाजिक न्याय विभाग के आधिकारिक पन्ने के मुताबिक़ दरें ये हैं:

पढ़ाई की जगहहर छात्र को सालाना
मुंबई शहर, मुंबई उपनगर, नवी मुंबई, ठाणे, पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, नागपुर₹60,000
बाक़ी राजस्व मंडल के शहर और बचे हुए ‘क’ वर्ग महानगरपालिका शहर₹51,000
बाक़ी ज़िला स्तर की जगहें₹43,000
तालुका स्तर की जगहें₹38,000

पैसा छात्र के उसी बैंक खाते में जाता है जो आधार से जुड़ा हो, और आम तौर पर पूरे शैक्षणिक साल में किश्तों में आता है। इसी एक रक़म में मेस/खाना, किराया और पढ़ाई के छोटे-मोटे ख़र्च — सब शामिल हैं। किराए की रसीद देकर अलग से पैसा वापस नहीं मिलता।

पात्र कौन है?

नीचे लिखी सारी शर्तें पूरी होनी चाहिए:

  • छात्र अनुसूचित जाति या नवबौद्ध वर्ग का हो और उसके पास जाति प्रमाणपत्र हो।
  • छात्र महाराष्ट्र का निवासी हो।
  • छात्र सरकारी छात्रावास में दाख़िले का हक़दार था, पर उसे जगह नहीं मिली (या वह छात्रावास में रह नहीं रहा)। स्वाधार साफ़ तौर पर छात्रावास की जगह देने वाला फ़ायदा है।
  • छात्र उस शहर या तालुका का स्थानीय निवासी न हो जहाँ उसका संस्थान है।
  • पिछली परीक्षा में कम से कम 50% अंक हों।
  • परिवार की सालाना आय ₹2.50 लाख तक हो।
  • दाख़िला ग्यारहवीं/बारहवीं में हो, या दसवीं/बारहवीं के बाद किसी मान्यता प्राप्त संस्थान के व्यावसायिक या ग़ैर-व्यावसायिक कोर्स में।

कोर्स के अगले सालों में पैसा तभी चलता रहेगा जब पढ़ाई ठीक चल रही हो — इसलिए परीक्षाएँ पास करते रहिए, क्योंकि हर साल का नवीनीकरण पिछले साल का नतीजा देखकर होता है।

कौन-कौन से काग़ज़ चाहिए

  • छात्र का जाति प्रमाणपत्र (SC/नवबौद्ध)
  • परिवार का आय प्रमाणपत्र (तहसीलदार का जारी किया), जिसमें आय ₹2.5 लाख के भीतर दिखे
  • महाराष्ट्र का अधिवास/निवास प्रमाण
  • पिछली परीक्षा की मार्कशीट (50% या उससे ज़्यादा)
  • मौजूदा संस्थान का बोनाफ़ाइड प्रमाणपत्र / दाख़िले का सबूत
  • आधार कार्ड, जो छात्र के बैंक खाते से जुड़ा हो
  • बैंक पासबुक की कॉपी
  • पढ़ाई की जगह से बाहर के स्थानीय निवास का सबूत (और संस्थान माँगे तो किराए का करार)

आवेदन कैसे करें और स्थिति कैसे देखें

  1. आधिकारिक पोर्टल hmas.mahait.org खोलिए (यह सामाजिक न्याय विभाग का छात्रावास और स्वाधार आवेदन सिस्टम है)।
  2. अपने मोबाइल नंबर और ईमेल से नए आवेदक के तौर पर रजिस्टर कीजिए, फिर लॉगिन कीजिए।
  3. स्वाधार योजना का फ़ॉर्म भरिए: अपना ब्योरा, जाति और आय का ब्योरा, संस्थान और कोर्स की जानकारी, और बैंक खाते की जानकारी।
  4. ऊपर गिनाए काग़ज़ अपलोड कीजिए और उस शैक्षणिक साल के लिए बताई गई आख़िरी तारीख़ से पहले फ़ॉर्म जमा कर दीजिए।
  5. जमा किए हुए आवेदन का प्रिंट निकाल लीजिए। कुछ सहायक आयुक्त (समाज कल्याण) दफ़्तर काग़ज़ों के साथ हार्ड कॉपी भी माँगते हैं — पोर्टल पर या अपने संस्थान के छात्रवृत्ति विभाग में जो लिखा हो, वही कीजिए।
  6. पोर्टल पर दोबारा लॉगिन करके आवेदन का हाल देखते रहिए; पैसा आने से पहले आवेदन संस्थान की जाँच और समाज कल्याण दफ़्तर की मंज़ूरी से गुज़रता है। कहीं अटक जाए तो आपके कॉलेज का छात्रवृत्ति विभाग और ज़िले का समाज कल्याण दफ़्तर — ये दो जगहें पूछने की हैं।

एक नज़र में पूरी योजना

क्याब्योरा
पूरा नामभारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्वाधार योजना
कौन चलाता हैसामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग, महाराष्ट्र सरकार
कब शुरू हुई6 जनवरी 2017 के शासन निर्णय से
किसे मिलती हैदसवीं के बाद घर से बाहर पढ़ने वाले अनुसूचित जाति व नवबौद्ध छात्र
कितना पैसाखाने, रहने और पढ़ाई के ख़र्च के लिए साल में ₹38,000–₹60,000
आय की सीमासाल में ₹2.5 लाख
अंकों की शर्तपिछली परीक्षा में कम से कम 50%
आवेदन शुल्ककुछ नहीं
पोर्टलhmas.mahait.org

आवेदन आम तौर पर इन वजहों से अटकते हैं: आय प्रमाणपत्र मौजूदा वित्त वर्ष का न होना या तहसीलदार का जारी न होना, छात्रावास में जगह न मिलने वाला आधार ठीक से न भरना (योजना मानकर चलती है कि आप छात्रावास के हक़दार थे, इसलिए वे ख़ाने ध्यान से भरिए), बैंक खाते का आधार से न जुड़ा होना, और बोनाफ़ाइड प्रमाणपत्र पर संस्थान के पंजीकरण का ब्योरा न होना। नया आवेदन भरने के बजाय पोर्टल पर आई आपत्ति के हिसाब से काग़ज़ सुधारिए।

महाराष्ट्र में कल्याण की कई योजनाएँ साथ-साथ चलती हैं। जो छात्र घर की आर्थिक मदद भी कर रहे हैं, वे घर की महिलाओं के लिए लाड़की बहिण योजना की eKYC पढ़ सकते हैं, सस्ते अनाज के लिए अन्नपूर्णा योजना देख सकते हैं, और केंद्र की योजनाओं के लिए यह बड़ी सरकारी योजना सूची देख सकते हैं।

सामान्य प्रश्न

स्वाधार योजना में साल भर में कितना पैसा मिलता है?

पढ़ाई की जगह के हिसाब से साल में ₹38,000 से ₹60,000 तक: मुंबई क्षेत्र, पुणे, पिंपरी-चिंचवड़ और नागपुर में ₹60,000; बाक़ी मंडल शहरों और ‘क’ वर्ग महानगरपालिकाओं में ₹51,000; बाक़ी ज़िला स्तर की जगहों पर ₹43,000; और तालुका स्तर पर ₹38,000।

स्वाधार योजना के लिए कौन आवेदन कर सकता है?

महाराष्ट्र के वे अनुसूचित जाति और नवबौद्ध छात्र, जिन्हें पिछली परीक्षा में कम से कम 50% अंक मिले हों, जिनके परिवार की सालाना आय ₹2.5 लाख तक हो, जो दसवीं के बाद घर से बाहर रहकर पढ़ रहे हों, और जिन्हें सरकारी छात्रावास में जगह न मिली हो।

क्या स्वाधार योजना सिर्फ़ छात्रावास से बाहर रहने वालों के लिए है?

हाँ। यह सरकारी छात्रावास की जगह लेने के लिए ही बनी है। जो छात्र पहले से सरकारी छात्रावास में रह रहे हैं, या अपने ही शहर में पढ़ रहे हैं, वे पात्र नहीं हैं।

स्वाधार योजना का आवेदन किस वेबसाइट पर होता है?

आधिकारिक आवेदन पोर्टल hmas.mahait.org है, जो सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग के लिए चलता है। “यहाँ आवेदन करें” कहने वाली ग़ैर-सरकारी साइटों से बचिए; विभाग का अपना पन्ना सिर्फ़ इसी पोर्टल का लिंक देता है।

क्या इस योजना में OBC या VJNT छात्र भी आते हैं?

नहीं। स्वाधार योजना ख़ास तौर पर अनुसूचित जाति और नवबौद्ध छात्रों के लिए है। बाक़ी वर्गों के लिए महाराष्ट्र में इसी तरह की अलग योजनाएँ हैं, जो उनके अपने विभाग चलाते हैं (जैसे अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए स्वयं योजना)।

हर साल पैसा मिलते रहने के लिए अंकों की कोई शर्त है?

हाँ। योजना में आने के लिए पिछली परीक्षा में कम से कम 50% चाहिए, और हर साल का नवीनीकरण इस बात पर टिका है कि आपने कोर्स का पिछला साल पास किया या नहीं।

पैसा कब आता है?

संस्थान और समाज कल्याण दफ़्तर की जाँच के बाद रक़म छात्र के आधार से जुड़े बैंक खाते में शैक्षणिक साल के दौरान किश्तों में आती है। हर ज़िले में समय अलग-अलग लगता है, इसलिए पोर्टल पर हाल देखते रहिए और अपने कॉलेज के छात्रवृत्ति विभाग से पूछते रहिए।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

Recognized as one of India’s best content marketers, Gaurav Tiwari is an SEO strategist, WordPress developer, and founder of Gatilab. He builds websites that load in under a second, creates content that ranks on Google’s first page, and develops WordPress plugins and tools used on thousands of live sites.

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