UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

विकास, असमानता एवं जनसांख्यिकीय लाभांश (यूपीएससी अर्थव्यवस्था)

GDP वृद्धि बनाम असमानता, भारत का जनसांख्यिकीय संक्रमण, मध्यम-आय जाल एवं विलंबित अभिसारी ठहराव। 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लिए नीतिगत एजेंडा। यूपीएससी जीएस-III।

Growth, Inequality and the Demographic Dividend (UPSC Economy) — UPSC featured image

भारत की दीर्घकालिक विकास रणनीति के केंद्र में तीन बहसें हैं: GDP वृद्धि को असमानता में कमी पर प्राथमिकता दी जाए या नहीं, जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) को बंद होने से पहले कैसे भुनाया जाए, एवं मध्यम-आय जाल (Middle-Income Trap) से कैसे बचा जाए, जिसने कई विलंबित औद्योगीकरण वाली अर्थव्यवस्थाओं को फँसा लिया है। आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 ने तर्क दिया कि ये तीनों प्रश्न अलग नहीं हैं — ये एक ही प्रश्न को अलग-अलग कोणों से देखने जैसा हैं। यह मार्गदर्शिका उन्हें एक साथ प्रस्तुत करती है।

भाग 1: वृद्धि बनाम असमानता — भारत को क्या करना चाहिए?

विकसित-अर्थव्यवस्थाओं की बहस

2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती असमानता धीमी वृद्धि के साथ सह-अस्तित्व में आई। असमानता को पूँजीवाद की अंतर्निहित विशेषता के रूप में देखा जाने लगा — यह दृष्टिकोण Thomas Piketty एवं Kuznets वक्र के पुनर्जागरण से जुड़ा है।

भारतीय स्थिति

भारत की स्थिति संरचनात्मक रूप से भिन्न है।

  • विकसित अर्थव्यवस्थाएँ: कम पूर्ण निर्धनता, कम वृद्धि
  • भारत: उच्च पूर्ण निर्धनता, उच्च वृद्धि
  • गिनी गुणांक (Gini Coefficient) — भारत में लगभग 0.35 (उपभोग-आधारित), अमेरिका में लगभग 0.41। भारत उपभोग पर कम असमान है; वृद्धि की संभावना अधिक है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 का तर्क

  • भारत में वृद्धि एवं असमानता सामाजिक-आर्थिक संकेतकों (स्वास्थ्य, शिक्षा, उपभोग) पर अपने प्रभाव में अभिसरण करते हैं।
  • वृद्धि का निर्धनता उन्मूलन पर प्रभाव असमानता में कमी की तुलना में कहीं अधिक है।
  • अतः भारत के विकास चरण में, पाई (pie) को बड़ा करने हेतु वृद्धि को प्राथमिकता मिलती है; पुनर्वितरण तभी व्यवहार्य है जब पाई बढ़े।

यह वितरण का नकार नहीं है। यह अनुक्रम (sequencing) का तर्क है: पाई बढ़ाओ, DBT एवं सार्वजनिक सेवाओं के माध्यम से सबसे ग़रीब तक पहुँचो, एवं पुनर्वितरण को राजकोषीय क्षमता के साथ आने दो।

आलोचकों का प्रत्युत्तर

  • धन असमानता (उपभोग नहीं) तेज़ी से बढ़ी है — शीर्ष 1% के पास लगभग राष्ट्रीय धन का 40% है (Oxfam 2024 रिपोर्ट)।
  • नौकरीविहीन वृद्धि (Jobless Growth) की चिंताओं का अर्थ है कि पाई-वृद्धि स्वतः निर्धनता में कमी नहीं लाती।
  • मानव विकास सूचकांक (HDI) में भारत के लाभ समकक्ष देशों की तुलना में स्थिर हो गए हैं।

भाग 2: जनसांख्यिकीय संक्रमण को भुनाना

भारत की जनसांख्यिकीय प्रोफ़ाइल

भारत तेज़ जनसांख्यिकीय संक्रमण का साक्षी बनने वाला है। लाभांश के 2041 के आसपास शिखर पर पहुँचने की संभावना है। प्रमुख बदलाव:

जनसंख्या (आयु वर्ग)20112041 (अनुमानित)
0-1941%25%
20-5951%59%
60+8%16%

आवश्यक नीतिगत पुनर्दिशन

रोज़गार सृजन पर ध्यान: 2041 तक 60% आबादी कार्यशील आयु में होने का अनुमान है, फिर भी आज LFPR ~60% है (PLFS 2023-24)। भारत को 360-डिग्री दृष्टिकोण चाहिए — नौकरियाँ सृजित करें, नौकरी-सृजकों को तैयार करें, श्रम शक्ति को सशक्त करें।

कौशल एवं पुनर्कौशल: उद्योग 4.0 एवं AI के साथ कौशल का अल्प-काल (shelf-life) छोटा है। नीति को शिक्षा को सतत कौशल विकास से जोड़ना होगा। Skill India Mission, PMKVY 4.0 एवं बजट 2025-26 की इंटर्नशिप योजना (शीर्ष 500 फ़र्मों में 1 करोड़ इंटर्नशिप) इसी ढाँचे में हैं।

विद्यालयों का समेकन: युवा हिस्सेदारी घटने से छोटे विद्यालयों को बिना पहुँच बाधित किए समेकित करना होगा। PM SHRI विद्यालय ढाँचा गुणवत्ता को संबोधित करता है; राज्यों में विद्यालय समेकन की बहस राजनीतिक रूप से संवेदनशील है।

स्वास्थ्य सुविधाओं का उन्नयन: भारत में प्रति 1,000 आबादी पर अस्पताल बिस्तर लगभग 0.7 हैं (WHO मानक 3 है)। उम्रदराज़ी के साथ असंचारी एवं जीवनशैली रोग बढ़ेंगे। आयुष्मान भारत PMJAY, HWCs (अब AAM) एवं मेडिकल कॉलेज विस्तार प्रतिक्रिया की रीढ़ हैं।

सेवानिवृत्ति आयु: स्वस्थ जीवन प्रत्याशा अब 60 से काफ़ी आगे तक जाती है। भारत को कई विकसित देशों की तर्ज़ पर सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 65 करने की आवश्यकता हो सकती है।

भाग 3: मध्यम-आय जाल एवं विलंबित अभिसारी ठहराव

अवधारणा

विलंबित अभिसारी ठहराव (Late Convergence Stall) एक ऐसी मध्यम-आय अर्थव्यवस्था का वर्णन करता है जो उच्च-आय देश में विकसित होने में विफल रहकर मध्यम-आय स्थिति में फँस जाती है। यह शब्द भारतीय नीति में आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 द्वारा लोकप्रिय हुआ।

भारत की स्थिति

भारत 2008 में निम्न आय से निम्न-मध्यम आय में आया (विश्व बैंक वर्गीकरण) एवं अब उच्च-मध्यम आय स्थिति के निकट है (वित्त वर्ष 2024-25 की सीमा लगभग USD 4,516 GNI प्रति व्यक्ति; भारत लगभग USD 2,700-2,850 है)।

चार चुनौतियाँ (आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19)

  • वैश्वीकरण के विरुद्ध प्रतिक्रिया — प्रारंभिक अभिसारी (जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान) निर्यात-नेतृत्व वाली वृद्धि पर सवार थे। GFC-पश्चात संरक्षणवाद (Trump टैरिफ़, US-चीन व्यापार युद्ध, reshoring) वही राह कठिन बनाते हैं।
  • बाधित संरचनात्मक रूपांतरण — 1991 से GDP में विनिर्माण हिस्सा लगभग 15-17% पर अटका है। औपचारिक क्षेत्र का श्रम-अवशोषण कमज़ोर है; 90%+ श्रमिक अनौपचारिक रोज़गार में हैं।
  • मानव पूँजी प्रतिगमन — शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर कम व्यय उद्योग 4.0 एवं AI के आधार को कमज़ोर करता है। भारत शिक्षा पर लगभग GDP का 2.9% खर्च करता है (लक्ष्य 6%) एवं स्वास्थ्य पर ~2% (लक्ष्य 2.5%)।
  • जलवायु-प्रेरित तनाव — सफल रूपांतरण के लिए श्रम के खेत से बाहर जाने से पहले कृषि में उत्पादकता लाभ आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन कृषि उत्पादकता को और कम कर सकता है, जिससे श्रम कम-उत्पादकता वाले क्षेत्रों में फँस जाए

जाल से बचने की रणनीतियाँ

  • विनिर्माण हिस्सेदारी को GDP का 25% तक बढ़ाना — PLI योजनाएँ, राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (बजट 2025-26)।
  • चार श्रम संहिताओं एवं EPFO विस्तार के माध्यम से श्रम का औपचारीकरण।
  • शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यय को दोगुना करना।
  • जलवायु-अनुकूल कृषि का निर्माण — मिलेट्स को बढ़ावा, प्राकृतिक खेती, सिंचाई।
  • महिला LFPR को गहरा करना — आधी श्रम शक्ति क्षमता को खोलना।

तीनों बहसों का पारस्परिक संबंध

  • नौकरियों के माध्यम से जनसांख्यिकीय लाभांश की प्राप्ति के बिना, निर्धनता से लोगों को बाहर निकालने वाली वृद्धि दर टिकाऊ नहीं हो सकती।
  • मध्यम-आय जाल से बाहर निकले बिना, भारत उस राजकोषीय पैमाने तक नहीं पहुँच सकता जो गंभीर पुनर्वितरण को वित्त पोषित करे।
  • अतः वृद्धि-बनाम-असमानता का अनुक्रम तर्क जनसांख्यिकी एवं रूपांतरण को सफलतापूर्वक नेविगेट करने पर निर्भर करता है।

नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)

  • भारत की GDP वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग USD 4 ट्रिलियन अनुमानित, अमेरिका एवं चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी (नाममात्र); 5 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य लगभग FY 2027-28 तक।
  • प्रति-व्यक्ति आय वित्त वर्ष 24 में USD 2,700 पार; उच्च-मध्यम आय संक्रमण 2028 के आसपास अपेक्षित।
  • एकीकृत पेंशन योजना (UPS) 2024 में आरंभ, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों हेतु अप्रैल 2025 से NPS की स्थानापन्न — उम्रदराज़ी की जनसांख्यिकीय-लाभांश-काल प्रतिक्रिया।
  • बजट 2025-26 की रोज़गार-संबद्ध प्रोत्साहन (Employment-Linked Incentive) योजना लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की, एवं शीर्ष 500 फ़र्मों में इंटर्नशिप योजना — जनसांख्यिकीय लाभांश के मूल उत्तोलक।
  • Oxfam India 2024 — शीर्ष 1% के पास ~40% धन; निचले 50% के पास ~3%।
  • PLFS 2023-24 — महिला LFPR 41.7% तक पहुँची, लाभांश प्राप्ति में सहायक।
  • भारत का बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (NITI Aayog MPI 2023) — 2013-14 एवं 2022-23 के बीच 24.8 करोड़ लोग बहुआयामी निर्धनता से बाहर निकले।
  • NITI Aayog 2024 रिपोर्टविकसित भारत 2047 पर 25-वर्षीय रूपरेखा, जो वृद्धि, नौकरियाँ, स्वास्थ्य एवं शिक्षा को कवर करती है।

यूपीएससी प्रासंगिकता

जीएस-III मैपिंग

  • भारतीय अर्थव्यवस्था — वृद्धि, समावेशी विकास, रोज़गार।
  • निर्धनता एवं असमानता — नीतिगत विकल्प, मापन।
  • जनसांख्यिकी — लाभांश, उम्रदराज़ी, श्रम बाज़ार।
  • अवसंरचना एवं उद्योग — विनिर्माण द्वारा मध्यम-आय जाल से निकलना।

प्रारंभिक परीक्षा बिंदु

  • गिनी गुणांक — आय/उपभोग असमानता मापक; भारत ~0.35 (उपभोग)।
  • जनसांख्यिकीय लाभांश शिखर — भारत में लगभग 2041 अपेक्षित।
  • Late Convergence Stallआर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 से शब्दावली।
  • PMKVY 4.0 — कौशल विकास प्रमुख योजना का नवीनतम संस्करण।
  • उच्च-मध्यम आय सीमा (विश्व बैंक FY 2024-25) — GNI प्रति व्यक्ति USD 4,516।
  • PM SHRI विद्यालय — NEP 2020 के अंतर्गत आदर्श विद्यालय।
  • विकसित भारत 2047 — स्वतंत्रता की शताब्दी हेतु नीतिगत दृष्टि।
  • MPI 2023 — 24.8 करोड़ बहुआयामी निर्धनता से बाहर (2013-14 से 2022-23)।

मुख्य परीक्षा के कोण

  • “भारत में वृद्धि एवं पुनर्वितरण पूरक हैं, विकल्प नहीं। चर्चा कीजिए।”
  • “भारत को ‘विलंबित अभिसारी ठहराव’ का जोखिम तब तक है जब तक वह तीन कमियों — विनिर्माण, मानव पूँजी एवं जलवायु अनुकूलन — को संबोधित नहीं करता।” परीक्षण कीजिए।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

Recognized as one of India’s best content marketers, Gaurav Tiwari is an SEO strategist, WordPress developer, and founder of Gatilab. He builds websites that load in under a second, creates content that ranks on Google’s first page, and develops WordPress plugins and tools used on thousands of live sites.

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