विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (World Press Freedom Day) हर साल 3 मई को मनाया जाता है। 2026 में यह दिवस रविवार, 3 मई 2026 को पड़ रहा है। UNESCO द्वारा घोषित 2026 की वैश्विक थीम है — “Shaping a Future of Peace” (शांतिपूर्ण भविष्य का निर्माण), और मुख्य आयोजन लुसाका (Lusaka, ज़ाम्बिया) में 4 मई 2026 को हाइब्रिड रूप में हो रहा है। भारत के लिए सबसे बड़ी ख़बर — Reporters Without Borders (RSF) द्वारा 30 अप्रैल 2026 को जारी विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक (World Press Freedom Index) 2026 में भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर आ गया है — 2025 के 151वें स्थान से छह स्थान नीचे, “बहुत गंभीर” (very serious) श्रेणी में, पाकिस्तान (153) और बांग्लादेश (152) से भी पीछे। यह दिवस 3 मई 1991 की विंडहोक घोषणा (Windhoek Declaration) की वर्षगांठ है, जिसे दिसंबर 1993 में UN महासभा (UN General Assembly) ने संकल्प 48/432 (Resolution 48/432) के माध्यम से आधिकारिक मान्यता दी।
परिचय (Introduction)

प्रेस की स्वतंत्रता किसी भी लोकतंत्र की रीढ़ है। एक स्वतंत्र, बहुलवादी (pluralistic) और निर्भीक प्रेस ही सरकार से प्रश्न पूछ सकता है, सत्ता के दुरुपयोग को उजागर कर सकता है, और नागरिकों तक प्रामाणिक सूचना पहुँचा सकता है। इसी मूल्य की रक्षा के लिए UNESCO और UN ने मिलकर 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया।
UPSC के दृष्टिकोण से यह विषय GS पेपर-2 (शासन, मूल अधिकार) और GS पेपर-3 (आंतरिक सुरक्षा) — दोनों में आता है। 2026 की रैंकिंग और 2024 के Kunal Kamra निर्णय ने इसे current affairs का सबसे महत्वपूर्ण विषय बना दिया है।
मुख्य तथ्य एक नज़र में (Quick Facts at a Glance)
- तिथि: हर वर्ष 3 मई, 2026 में रविवार
- घोषणा करने वाला: UNESCO General Conference (26वाँ सत्र, 1991) → UN General Assembly संकल्प 48/432, दिसंबर 1993
- पहली बार मनाया गया: 3 मई 1994
- 3 मई क्यों: विंडहोक घोषणा (Windhoek Declaration) की वर्षगांठ, जो 3 मई 1991 को विंडहोक (Windhoek, Namibia) में अपनाई गई थी
- 2026 UNESCO थीम: “Shaping a Future of Peace” (शांतिपूर्ण भविष्य का निर्माण)
- 2026 मेज़बान कार्यक्रम: लुसाका (Lusaka, Zambia), 4 मई — हाइब्रिड
- RSF Index 2026 में भारत: 157 / 180 (2025 में 151 से छह स्थान नीचे)
- 2026 Index शीर्ष देश: नॉर्वे (Norway), एस्टोनिया (Estonia), फिनलैंड (Finland), नीदरलैंड्स (Netherlands), स्वीडन (Sweden)
- Index की सबसे निचली पायदान: एरिट्रिया (Eritrea), उत्तर कोरिया (North Korea), चीन (China)
- वैश्विक स्थिति: RSF के अनुसार 25 वर्षों में पहली बार आधे से अधिक देश “कठिन” या “बहुत गंभीर” श्रेणी में
- UNESCO/Guillermo Cano पुरस्कार: 1997 से दिया जाने वाला वार्षिक पुरस्कार, कोलंबियाई संपादक Guillermo Cano Isaza (1986 में हत्या) की स्मृति में
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background) — विंडहोक से संकल्प 48/432 तक
इस दिवस की जड़ें 29 अप्रैल से 3 मई 1991 तक विंडहोक (Windhoek, Namibia) में आयोजित UNESCO के एक सेमिनार में हैं, जहाँ अफ़्रीकी पत्रकारों ने “विंडहोक घोषणा — स्वतंत्र और बहुलवादी अफ़्रीकी प्रेस को बढ़ावा देने पर” (Windhoek Declaration on Promoting an Independent and Pluralistic African Press) को अपनाया। इस घोषणा में स्पष्ट कहा गया कि “एक स्वतंत्र, बहुलवादी और निर्भीक प्रेस लोकतंत्र के विकास और बने रहने के लिए अनिवार्य है”।
इसी आधार पर UNESCO सम्मेलन के 26वें सत्र (1991) ने सिफ़ारिश की कि UN इस दिवस को आधिकारिक रूप से मान्यता दे। UN महासभा ने दिसंबर 1993 में संकल्प 48/432 (Resolution 48/432) के माध्यम से 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया। पहली बार इसे 1994 में मनाया गया।
संस्थागत इतिहास में तीन नाम बार-बार आते हैं — क्रिस्टोफ डेलोयर (Christophe Deloire), RSF के महासचिव (2012–2024), जिन्होंने आधुनिक Index की पद्धति विकसित की; गिलर्मो कानो इसाज़ा (Guillermo Cano Isaza), जिनकी 1986 में अपने अख़बार El Espectador के दफ़्तर के बाहर हत्या कर दी गई थी और जिनकी स्मृति में 1997 से UNESCO/Guillermo Cano World Press Freedom Prize दिया जाता है; और UNESCO के तत्कालीन Director-General, जो हर वर्ष आधिकारिक संदेश जारी करते हैं।
3 मई ही क्यों — विंडहोक घोषणा का महत्व

विंडहोक घोषणा (Windhoek Declaration) आधुनिक वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता आंदोलन का संस्थापक दस्तावेज़ माना जाता है। इसने तीन मूल सिद्धांत स्थापित किए, जो आज भी अंतरराष्ट्रीय प्रेस-नीति के केंद्र में हैं:
- स्वतंत्रता (Independence): राज्य और बड़े पूँजीगत हितों से संपादकीय और आर्थिक स्वतंत्रता।
- बहुलवाद (Pluralism): प्रिंट, प्रसारण और डिजिटल — सभी माध्यमों में अनेक प्रतिस्पर्धी आवाज़ें।
- विविधता (Diversity): लिंग, क्षेत्रीय और भाषाई विविधता — स्वामित्व और न्यूज़रूम दोनों स्तरों पर।
विंडहोक के बाद इसी तर्ज़ पर क्षेत्रीय घोषणाएँ अपनाई गईं — अल्मा-अता (Alma-Ata, 1992) एशिया के लिए, सैंटियागो (Santiago, 1994) लैटिन अमेरिका के लिए, साना (Sana’a, 1996) अरब देशों के लिए, और सोफिया (Sofia, 1997) यूरोप के लिए।
2026 की थीम — “Shaping a Future of Peace”
2026 की UNESCO थीम “Shaping a Future of Peace” (शांतिपूर्ण भविष्य का निर्माण) पत्रकारिता को शांति-निर्माण के बुनियादी ढाँचे के रूप में देखती है — संघर्ष का दस्तावेज़ीकरण, ग़लत सूचना (disinformation) का प्रतिकार, और ध्रुवीकरण को कम करने वाली रिपोर्टिंग। 2026 का वैश्विक सम्मेलन मुख्यतः ऑनलाइन है, और लुसाका (Lusaka, Zambia) में 4 मई 2026 को हाइब्रिड कार्यक्रम होगा। UNESCO/Guillermo Cano Press Freedom Prize का वितरण समारोह बाद में पेरिस स्थित UNESCO मुख्यालय में होगा।
पिछले छह वर्षों की थीम का सारांश:
| वर्ष | थीम | मेज़बान शहर |
|---|---|---|
| 2026 | Shaping a Future of Peace | लुसाका (Zambia) |
| 2025 | Reporting in the Brave New World — AI and Press Freedom | ब्रसेल्स (Brussels, Belgium) |
| 2024 | A Press for the Planet — Environmental Crisis | सैंटियागो (Santiago, Chile) |
| 2023 | Shaping a Future of Rights — Freedom of Expression | न्यू यॉर्क (New York, USA) |
| 2022 | Journalism Under Digital Siege | पुंता डेल एस्टे (Punta del Este, Uruguay) |
| 2021 | Information as a Public Good | विंडहोक (Windhoek, Namibia) |
RSF विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 — भारत 157/180
Reporters Without Borders (RSF) द्वारा प्रकाशित विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक (World Press Freedom Index) 2026 30 अप्रैल 2026 को जारी हुआ। यह सूचकांक 180 देशों का मूल्यांकन पाँच आयामों पर करता है — राजनीतिक, आर्थिक, विधायी (legislative), सामाजिक, और सुरक्षा — साथ ही पत्रकारों पर हुए हमलों का मात्रात्मक सर्वेक्षण।
भारत की 2026 स्थिति — रैंक 157/180, “बहुत गंभीर” (very serious) लाल क्षेत्र में। यह 2025 के 151वें स्थान से छह स्थान की गिरावट है (2024 में 159, 2023 में 161)। RSF ने इसके पीछे चार मुख्य कारण गिनाए:
- पत्रकारों — विशेषकर महिला और मुस्लिम रिपोर्टरों — पर शारीरिक हिंसा और ऑनलाइन उत्पीड़न में वृद्धि।
- अत्यधिक केंद्रित मीडिया स्वामित्व (concentrated media ownership) — कुछ बड़े व्यावसायिक घराने प्रसारण और डिजिटल समाचार क्षेत्र पर हावी।
- मुख्यधारा के मीडिया का खुले तौर पर राजनीतिक झुकाव।
- न्यायिक उत्पीड़न (judicial harassment) — आपराधिक मानहानि (criminal defamation), राजद्रोह (अब BNS s.152), Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA), और Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत मामले।
दक्षिण एशिया में तुलना: भारत 2026 में अपने पड़ोसियों — पाकिस्तान (153), बांग्लादेश (152), भूटान (150), श्रीलंका (134) — से नीचे है। नेपाल (87) दक्षिण एशिया का एकमात्र देश है जो ऊपरी आधे में आता है।
वैश्विक स्तर पर RSF का कहना है कि 25 वर्षों में पहली बार सभी 180 देशों का औसत स्कोर सबसे निचले स्तर पर है, और पहली बार आधे से अधिक देश “कठिन” या “बहुत गंभीर” क्षेत्र में आ गए हैं। नॉर्वे, एस्टोनिया, फिनलैंड शीर्ष पर हैं और एरिट्रिया, उत्तर कोरिया, चीन सबसे नीचे।
भारत में संवैधानिक ढाँचा — Article 19(1)(a) और 19(2)
भारतीय संविधान में “प्रेस की स्वतंत्रता” (Freedom of the Press) का अलग अनुच्छेद नहीं है। यह Article 19(1)(a) — अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech & Expression) — के अंतर्गत निहित मानी जाती है, जो हर नागरिक का मूल अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट (SC) ने इसे कई निर्णयों में स्थापित किया है — रोमेश थापर बनाम मद्रास राज्य (Romesh Thappar v State of Madras, 1950), साकल पेपर्स बनाम भारत संघ (Sakal Papers v UoI, 1962), और बेनेट कोलमैन बनाम भारत संघ (Bennett Coleman v UoI, 1973)।
Article 19(2) राज्य को आठ आधारों पर उचित प्रतिबंध (reasonable restrictions) लगाने की अनुमति देता है:
- भारत की संप्रभुता और अखंडता
- राज्य की सुरक्षा
- विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध
- लोक व्यवस्था (public order)
- शालीनता या नैतिकता
- न्यायालय की अवमानना (contempt of court)
- मानहानि (defamation)
- अपराध को उकसाना (incitement to an offence)
प्रत्येक प्रतिबंध की उचितता (reasonableness) की न्यायिक जाँच होती है — प्रक्रियात्मक और सारवान — और इसमें आनुपातिकता (proportionality test) लागू होती है।
वैधानिक और नियामक ढाँचा (Statutory and Regulatory Architecture)
- Press Council of India (PCI): Press Council Act 1978 के तहत स्थापित अर्ध-न्यायिक निकाय (पूर्व 1965 का अधिनियम प्रतिस्थापित)। अध्यक्ष — सेवानिवृत्त SC न्यायाधीश; कुल 28 सदस्य। केवल प्रिंट क्षेत्र पर अधिकार, और इसके आदेश सिफ़ारिशी (recommendatory) हैं।
- News Broadcasting & Digital Standards Authority (NBDSA): News Broadcasters & Digital Association (NBDA, पूर्व NBA) का स्व-नियामक (self-regulatory) निकाय। अध्यक्ष — सेवानिवृत्त SC न्यायाधीश। निजी सैटेलाइट समाचार चैनलों पर लागू।
- Cable Television Networks (Regulation) Act, 1995 और इसके अंतर्गत Programme Code — प्रसारण सामग्री का नियमन।
- Information Technology Act, 2000 — Section 69A सरकार को ऑनलाइन सामग्री ब्लॉक करने का अधिकार देता है।
- IT (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 — डिजिटल समाचार प्रकाशकों पर त्रि-स्तरीय शिकायत निवारण ढाँचा।
- Press and Registration of Periodicals Act, 2023 — औपनिवेशिक 1867 अधिनियम का प्रतिस्थापन।
- Foreign Contribution (Regulation) Act (FCRA), 2010 — स्वतंत्र न्यूज़रूम पर बढ़ता प्रयोग।
ऐतिहासिक न्यायिक निर्णय (Landmark Judgments)
- Romesh Thappar v State of Madras (1950): पत्रिका पर पूर्व-सेंसरशिप असंवैधानिक; प्रेस स्वतंत्रता को Article 19(1)(a) में स्थान।
- Sakal Papers v UoI (1962): न्यूज़प्रिंट मूल्य-पृष्ठ आदेश रद्द — परोक्ष रूप से प्रेस स्वतंत्रता पर हमला।
- Bennett Coleman v UoI (1973): “प्रेस की स्वतंत्रता का अर्थ है प्रसार (circulation) की स्वतंत्रता।”
- Indian Express Newspapers v UoI (1985): न्यूज़प्रिंट पर सीमा शुल्क — परोक्ष प्रतिबंध मानकर रद्द।
- श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (Shreya Singhal v UoI, 2015): IT Act 2000 की Section 66A असंवैधानिक घोषित; ऑनलाइन मध्यस्थ दायित्व (intermediary liability) पर मानक स्थापित।
- Anuradha Bhasin v UoI (2020): इंटरनेट शटडाउन को आनुपातिकता परीक्षण पास करना होगा; अनिश्चितकालीन शटडाउन असंवैधानिक।
- कुणाल कामरा बनाम भारत संघ (Kunal Kamra v UoI, 2024): Bombay High Court (3-न्यायाधीश पीठ, 26 सितंबर 2024) ने IT Rules 2021 संशोधन के Fact Check Unit (FCU) प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया। इससे पहले 8 मार्च 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने FCU अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाई थी। न्यायालय ने माना कि नियम अस्पष्ट, अनुपातहीन और Articles 14, 19(1)(a), 19(1)(g) का उल्लंघन है।
राजद्रोह, BNS और प्रेस (Sedition, BNS and the Press)
Indian Penal Code (IPC) की Section 124A — राजद्रोह (sedition) — पत्रकारों के विरुद्ध सबसे विवादास्पद प्रावधान था। S G Vombatkere v UoI (2022) में सुप्रीम कोर्ट ने इसके प्रवर्तन पर रोक लगा दी।
Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 ने 1 जुलाई 2024 से IPC का स्थान लिया। राजद्रोह को अब BNS Section 152 में पुनः गठित किया गया है — “भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को ख़तरा पहुँचाने वाले कृत्य”। आलोचकों का कहना है कि नया प्रावधान पुराने से अधिक व्यापक है।
प्रेस को UAPA के तहत भी निशाना बनाया गया है — सिद्दीक़ कप्पन (Siddique Kappan), NewsClick न्यूज़रूम जैसे मामले। मोहम्मद ज़ुबैर (Mohammed Zubair) के प्रकरण ने एक तथ्य-जाँचक के विरुद्ध कई FIR का चलन उजागर किया।
UNESCO/Guillermo Cano पुरस्कार
UNESCO द्वारा 1997 में स्थापित यह पुरस्कार कोलंबियाई संपादक गिलर्मो कानो इसाज़ा (Guillermo Cano Isaza) के नाम पर है, जिनकी 1986 में उनके अख़बार El Espectador के दफ़्तर के बाहर हत्या कर दी गई थी। यह पुरस्कार उस व्यक्ति, संगठन या संस्था को दिया जाता है जिसने प्रेस स्वतंत्रता के लिए — विशेषकर ख़तरे के बीच — उत्कृष्ट योगदान किया हो। प्राप्तकर्ताओं में अन्ना पोलितकोव्स्काया (Anna Politkovskaya, 2007 — मरणोपरांत), मौरी कोनिग (Mauri König, 2012) और बेलारूस के क़ैद पत्रकार (2022) शामिल हैं।
UPSC के लिए प्रासंगिकता
- Prelims: 3 मई, विंडहोक 1991, UN संकल्प 48/432 (दिसंबर 1993), पहली बार 1994, 2026 थीम “Shaping a Future of Peace”, मेज़बान लुसाका, RSF 2026 भारत 157/180, Press Council Act 1978, IT Rules 2021, BNS s.152.
- GS-II (राजव्यवस्था और शासन): Article 19(1)(a) और 19(2) की व्याख्या; प्रेस नियमन ढाँचा; Shreya Singhal, Anuradha Bhasin, Kunal Kamra निर्णय; FCU और intermediary liability पर बहस।
- GS-III (आंतरिक सुरक्षा): UAPA / PMLA का पत्रकारों पर प्रयोग; राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रेस स्वतंत्रता का संतुलन; AI और disinformation।
- GS-IV (नैतिकता): पत्रकारिता की नैतिकता, हितों का टकराव (conflict of interest), जनहित पत्रकारिता।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Mains Practice Questions)
- “भारत में प्रेस की स्वतंत्रता Article 19(1)(a) में निहित है, परंतु Article 19(2) के क्रियान्वयन में यह खोखली होती जा रही है।” हाल के न्यायिक हस्तक्षेपों के आलोक में आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)
- RSF Index 2026 में भारत की 157/180 रैंकिंग के संरचनात्मक कारणों पर चर्चा कीजिए और ऐसे सुधार सुझाइए जो राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किए बिना भारतीय मीडिया की विश्वसनीयता बहाल कर सकें। (250 शब्द)
निष्कर्ष (Conclusion)
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस 2026 केवल कैलेंडर का दिन नहीं है। यह भारत के लोकतांत्रिक स्वास्थ्य की वार्षिक जाँच है। 2026 की 157वीं रैंक केवल कूटनीतिक असुविधा नहीं — यह एक मापनीय संकेत है कि स्वतंत्रता की कड़ियाँ — संपादकीय, आर्थिक, न्यायिक, तकनीकी — कमज़ोर पड़ रही हैं। संवैधानिक ढाँचा मज़बूत है — Article 19(1)(a), Shreya Singhal की निर्णय-शृंखला, 2024 का Kunal Kamra फ़ैसला — परंतु वैधानिक और राजनीतिक वातावरण पत्रकारों को बार-बार कटघरे में खड़ा कर रहा है। 2026 की थीम “Shaping a Future of Peace” पत्रकारिता को शांति-निर्माण के बुनियादी ढाँचे के रूप में पुनर्परिभाषित करती है। भारत के लिए संदेश सीधा है — स्वतंत्र, बहुलवादी, और आर्थिक रूप से सक्षम प्रेस विलासिता नहीं, बल्कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की पूर्व-चेतावनी प्रणाली है।
संबंधित विषय आप यहाँ देख सकते हैं — भारतीय संविधान के मूल अधिकार, भारत की पड़ोसी नीति और नीति आयोग की संरचना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस 3 मई को ही क्यों मनाया जाता है?
क्योंकि 3 मई 1991 को विंडहोक (Windhoek, Namibia) में आयोजित UNESCO सेमिनार में “विंडहोक घोषणा — स्वतंत्र और बहुलवादी अफ़्रीकी प्रेस को बढ़ावा देने पर” अपनाई गई थी। दिसंबर 1993 में UN महासभा ने संकल्प 48/432 के माध्यम से इसी तिथि को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया।
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस 2026 की थीम क्या है?
2026 की UNESCO थीम है “Shaping a Future of Peace” (शांतिपूर्ण भविष्य का निर्माण)। मुख्य आयोजन ऑनलाइन है, और लुसाका (Lusaka, Zambia) में 4 मई 2026 को हाइब्रिड कार्यक्रम होगा।
RSF World Press Freedom Index 2026 में भारत की रैंक क्या है?
Reporters Without Borders (RSF) द्वारा 30 अप्रैल 2026 को जारी सूचकांक में भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर है — 2025 के 151वें स्थान से छह स्थान नीचे। भारत “बहुत गंभीर” (very serious) श्रेणी में है।
2026 के Press Freedom Index में शीर्ष देश कौन से हैं?
नॉर्वे (Norway), एस्टोनिया (Estonia), फिनलैंड (Finland), नीदरलैंड्स और स्वीडन 2026 सूचकांक में शीर्ष पर हैं। एरिट्रिया, उत्तर कोरिया और चीन सबसे नीचे।
विंडहोक घोषणा (Windhoek Declaration) क्या है?
3 मई 1991 को विंडहोक, नामीबिया में अपनाई गई यह घोषणा आधुनिक प्रेस स्वतंत्रता आंदोलन का संस्थापक दस्तावेज़ है। यह स्वतंत्रता, बहुलवाद और विविधता के तीन सिद्धांत स्थापित करती है, जिन्हें बाद में Alma-Ata, Santiago, Sana’a और Sofia घोषणाओं के माध्यम से वैश्विक रूप दिया गया।
भारतीय संविधान में प्रेस स्वतंत्रता को कैसे संरक्षण मिला है?
भारतीय संविधान में प्रेस स्वतंत्रता का अलग अनुच्छेद नहीं है। यह Article 19(1)(a) — अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता — के अंतर्गत निहित मानी जाती है, और Article 19(2) के आठ उचित प्रतिबंधों के अधीन है (संप्रभुता, सुरक्षा, लोक व्यवस्था, शालीनता, अवमानना, मानहानि, उकसाना, मैत्रीपूर्ण संबंध)।
Press Council of India (PCI) क्या है?
Press Council of India एक अर्ध-न्यायिक वैधानिक निकाय है जो Press Council Act, 1978 के तहत स्थापित हुआ। इसका अध्यक्ष सेवानिवृत्त SC न्यायाधीश होता है और इसमें कुल 28 सदस्य होते हैं। इसका क्षेत्राधिकार केवल प्रिंट प्रेस पर है, और आदेश सिफ़ारिशी हैं।
कुणाल कामरा बनाम भारत संघ (2024) निर्णय क्या था?
26 सितंबर 2024 को Bombay High Court ने Kunal Kamra v UoI में IT Rules 2021 संशोधन के Fact Check Unit (FCU) प्रावधान को असंवैधानिक घोषित किया। इससे पहले 8 मार्च 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने FCU अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाई थी।
भारत में राजद्रोह (sedition) का स्थान अब कौन सी धारा ने लिया है?
Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 के लागू होने (1 जुलाई 2024) के साथ IPC की Section 124A का स्थान BNS की Section 152 ने ले लिया है — “भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को ख़तरा पहुँचाने वाले कृत्य”। आलोचकों के अनुसार यह पुराने से अधिक व्यापक है।
UNESCO/Guillermo Cano Press Freedom Prize क्या है?
1997 में UNESCO द्वारा स्थापित यह वार्षिक पुरस्कार कोलंबियाई संपादक गिलर्मो कानो इसाज़ा के नाम पर है, जिनकी 1986 में हत्या हुई थी। यह उस व्यक्ति, संगठन या संस्था को दिया जाता है जिसने ख़तरे के बीच प्रेस स्वतंत्रता के लिए उत्कृष्ट योगदान किया हो।