SAARC (South Asian Association for Regional Cooperation) की स्थापना 8 दिसंबर 1985 को ढाका (Dhaka) में हुई थी और इसका मुख्यालय काठमांडू (Kathmandu, Nepal) में है। इसके 8 सदस्य देश हैं — अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका। दूसरी ओर, BIMSTEC (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) की स्थापना 6 जून 1997 को बैंकॉक (Bangkok) में हुई और इसका मुख्यालय ढाका में है, जिसमें 7 सदस्य हैं। 2016 के उरी हमले के बाद SAARC लगभग निष्क्रिय हो गया है और भारत ने अपना ध्यान BIMSTEC की ओर मोड़ा है — यही “SAARC से BIMSTEC pivot” की कहानी UPSC के लिए सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है।
परिचय (Introduction)

दक्षिण एशिया विश्व का सबसे कम एकीकृत क्षेत्र है। यहाँ की आपसी व्यापार हिस्सेदारी (intra-regional trade) मात्र 5% के आसपास है, जबकि यूरोपीय संघ (European Union, EU) में यह 60% और ASEAN में लगभग 25% है। इसी असमानता को पाटने के लिए दो क्षेत्रीय संगठन उभरे — SAARC और BIMSTEC।
SAARC जहाँ एक राजनीतिक-सांस्कृतिक मंच के रूप में बना, वहीं BIMSTEC आर्थिक और तकनीकी सहयोग पर केंद्रित है। पाकिस्तान-भारत संबंधों के तनाव और बार-बार ठप होती SAARC प्रक्रिया ने भारत को बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) पर केंद्रित BIMSTEC को प्राथमिकता देने के लिए बाध्य किया।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा में दोनों संगठनों के तथ्य (स्थापना वर्ष, मुख्यालय, सदस्य संख्या) सीधे पूछे जाते हैं, जबकि मुख्य परीक्षा GS पेपर-2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध) में इनकी तुलना और भारत की रणनीति पर विश्लेषणात्मक प्रश्न आते हैं।
मुख्य तथ्य एक नज़र में (Quick Facts at a Glance)
- SAARC की स्थापना: 8 दिसंबर 1985, प्रथम शिखर सम्मेलन ढाका में
- SAARC मुख्यालय: काठमांडू, नेपाल (Secretariat स्थापना 16 जनवरी 1987)
- SAARC सदस्य: 8 — अफगानिस्तान (2007 में जुड़ा), बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका
- SAARC प्रेक्षक (Observers): 9 — चीन, US, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, ईरान, म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस
- अंतिम SAARC शिखर: 18वाँ — काठमांडू, 2014; 19वाँ (इस्लामाबाद, 2016) रद्द
- SAFTA: South Asian Free Trade Area, लागू 1 जनवरी 2006
- BIMSTEC की स्थापना: 6 जून 1997, बैंकॉक घोषणापत्र (Bangkok Declaration) के तहत BIST-EC के रूप में
- BIMSTEC सदस्य: 7 — बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड
- BIMSTEC मुख्यालय: ढाका, बांग्लादेश (2014 से)
- BIMSTEC चार्टर: 2022 में 5वें शिखर सम्मेलन (कोलंबो) में स्वीकृत, मार्च 2024 में लागू
- 6वाँ BIMSTEC शिखर: बैंकॉक, अप्रैल 2025 — “Bay of Bengal: Stronger, Wealthier, Better”
- GDP कवरेज: BIMSTEC लगभग 4.5 ट्रिलियन डॉलर, जनसंख्या ~1.7 अरब (विश्व की लगभग 22%)
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
SAARC के बीज 1980 में बांग्लादेश के राष्ट्रपति जियाउर रहमान (Ziaur Rahman) के प्रस्ताव से पड़े। उन्होंने एक क्षेत्रीय मंच की कल्पना की थी जो दक्षिण एशियाई देशों को आपसी सहयोग की ओर ले जाए। 1981 से 1983 तक विदेश सचिव-स्तरीय बैठकें हुईं, और 7 दिसंबर से 8 दिसंबर 1985 तक ढाका में पहला शिखर सम्मेलन हुआ जहाँ SAARC चार्टर (Charter) पर हस्ताक्षर हुए।
BIMSTEC का जन्म एक अलग संदर्भ में हुआ। शीत युद्ध (Cold War) के बाद 1990 के दशक में थाईलैंड की “Look West” नीति और भारत की “Look East” नीति (1991, P V Narasimha Rao सरकार के तहत शुरू) ने एक ऐसे मंच की आवश्यकता उत्पन्न की जो दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़े। 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणापत्र (Bangkok Declaration) के साथ BIST-EC (Bangladesh, India, Sri Lanka, Thailand Economic Cooperation) बना। दिसंबर 1997 में म्यांमार जुड़ा (BIMST-EC), और 2004 में नेपाल और भूटान के शामिल होने पर इसे BIMSTEC नाम मिला।
भारत की पड़ोसी नीति (Neighbourhood First Policy) के तहत दोनों संगठन प्रासंगिक रहे, परंतु 2016 के बाद कथानक बदल गया। यह विषय भारत की पड़ोसी नीति से सीधे जुड़ता है।
SAARC की संरचना और कार्य (Structure and Functions of SAARC)

SAARC की संरचना बहुस्तरीय है:
- शिखर सम्मेलन (Summit): सर्वोच्च निकाय, राष्ट्राध्यक्षों की बैठक, सर्वसम्मति (consensus) से निर्णय
- मंत्रिपरिषद (Council of Ministers): विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक
- स्थायी समिति (Standing Committee): विदेश सचिवों की समिति, क्रियान्वयन की निगरानी
- सचिवालय (Secretariat): काठमांडू में, महासचिव (Secretary General) तीन वर्ष के लिए, क्रमिक सदस्य देशों से
- विशेष निकाय (Specialised Bodies): SAARC Development Fund (SDF), South Asian University (SAU, दिल्ली), SAARC Arbitration Council, SAARC Regional Standards Organization (SARSO)
प्रमुख समझौते (Agreements) — SAFTA (2006), SAARC Convention on Suppression of Terrorism (1987), SAARC Food Bank, SAARC Disaster Management Centre।
BIMSTEC की संरचना और 7 प्राथमिकता क्षेत्र (BIMSTEC Structure and Priority Areas)
BIMSTEC ने 2022 में अपने सहयोग क्षेत्रों को 14 से घटाकर 7 कर दिया, जिसमें प्रत्येक देश एक नेतृत्व (lead country) की भूमिका में है:
| क्षेत्र | नेतृत्व करने वाला देश |
|---|---|
| व्यापार, निवेश और विकास | बांग्लादेश |
| पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन | भूटान |
| सुरक्षा (आतंकवाद-रोधी, समुद्री, मानव) | भारत |
| कृषि और खाद्य सुरक्षा | म्यांमार |
| जन-संपर्क (People-to-People Contact) | नेपाल |
| विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार | श्रीलंका |
| संपर्क (Connectivity) | थाईलैंड |
BIMSTEC चार्टर 2022 में स्वीकृत और मार्च 2024 में लागू हुआ — यह संगठन को क़ानूनी व्यक्तित्व (legal personality) और स्पष्ट संस्थागत ढाँचा देता है।
SAARC vs BIMSTEC — तुलनात्मक विश्लेषण (Comparative Analysis)
| आधार | SAARC | BIMSTEC |
|---|---|---|
| पूर्ण नाम | South Asian Association for Regional Cooperation | Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation |
| स्थापना | 8 दिसंबर 1985, ढाका | 6 जून 1997, बैंकॉक |
| मुख्यालय | काठमांडू (नेपाल) | ढाका (बांग्लादेश) |
| सदस्य संख्या | 8 | 7 |
| क्षेत्रीय दायरा | केवल दक्षिण एशिया | दक्षिण एशिया + दक्षिण-पूर्व एशिया (Bay of Bengal) |
| पाकिस्तान सदस्य? | हाँ | नहीं |
| चीन से प्रेक्षक संबंध | हाँ | नहीं |
| अंतिम शिखर | 2014 (काठमांडू) | अप्रैल 2025 (बैंकॉक, 6वाँ) |
| FTA | SAFTA (2006, लागू) | BIMSTEC FTA (2004 से वार्ता, अधूरी) |
| चार्टर | 1985 | 2022 (लागू 2024) |
| मुख्य फोकस | राजनीतिक + सांस्कृतिक | आर्थिक + तकनीकी + संपर्क |
भारत का SAARC से BIMSTEC pivot (India’s Strategic Shift)
2014 के काठमांडू शिखर के बाद SAARC प्रक्रिया ठप हो गई। 18 सितंबर 2016 को उरी (Uri) में सेना मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने नवंबर 2016 के इस्लामाबाद शिखर सम्मेलन का बहिष्कार किया। बांग्लादेश, भूटान, अफगानिस्तान और श्रीलंका ने भी सम्मेलन में भाग लेने से इनकार कर दिया, और शिखर रद्द हो गया।
इसके बाद भारत ने BIMSTEC को रणनीतिक प्राथमिकता दी:
- अक्टूबर 2016 — BIMSTEC नेताओं को BRICS-Goa शिखर के Outreach Summit में आमंत्रित किया गया
- मई 2019 — प्रधानमंत्री Narendra Modi के दूसरे शपथ-ग्रहण समारोह में BIMSTEC नेताओं को बुलाया गया (पहले कार्यकाल में SAARC नेताओं को बुलाया गया था — यह संकेत स्पष्ट था)
- 2018 — काठमांडू में 4th BIMSTEC शिखर, 2022 में 5th कोलंबो शिखर (वर्चुअल), 2025 में 6th बैंकॉक शिखर
यह कूटनीतिक बदलाव “Act East” नीति और “SAGAR” (Security and Growth for All in the Region) सिद्धांत के अनुरूप है। यह विषय भारत-नेपाल संबंध और भारत-श्रीलंका संबंध से भी जुड़ा है।
SAARC के समक्ष चुनौतियाँ (Challenges before SAARC)
- द्विपक्षीय विवाद (bilateral disputes): भारत-पाकिस्तान संबंधों ने मंच को बार-बार बंधक बनाया
- असममित आकार (asymmetric size): भारत SAARC GDP का 70%+ है — यह असंतुलन सहयोग में बाधा
- कमज़ोर क्रियान्वयन तंत्र: सर्वसम्मति आधारित निर्णय एक देश के वीटो जैसे हैं
- चीन का प्रवेश दबाव: पाकिस्तान-नेपाल चीन को पूर्ण सदस्य बनाने का समर्थन करते हैं — भारत इसका विरोधी
- SAARC Visa Exemption Scheme सीमित दायरे में
- आपसी व्यापार 5% से कम — SAFTA की संवेदनशील सूचियाँ बहुत बड़ी
BIMSTEC के समक्ष चुनौतियाँ (Challenges before BIMSTEC)
- म्यांमार संकट (2021 तख्तापलट के बाद): सैन्य जुंटा (military junta) के साथ कूटनीतिक उलझन
- BIMSTEC FTA अधूरा: 2004 से वार्ता चल रही है, टैरिफ़ रियायत अंगीकरण लंबित
- संसाधन कमी: सचिवालय में सीमित कर्मचारी और बजट
- जन-जागरूकता का अभाव: SAARC की तुलना में मीडिया-नागरिक स्तर पर पहचान कम
- कनेक्टिविटी अंतराल: Kaladan Multi-Modal Transit Project, India-Myanmar-Thailand Trilateral Highway जैसी परियोजनाएँ देरी से चल रही हैं
महत्व और प्रभाव (Significance and Impact)
BIMSTEC भारत के लिए “Look East से Act East” तक की पूरी यात्रा को पूर्ण करता है। यह बंगाल की खाड़ी को रणनीतिक केंद्र (strategic centre of gravity) में बदलता है — जहाँ चीन की समुद्री विस्तारवादी नीति का सामना किया जा सकता है। BIMSTEC के माध्यम से भारत का पूर्वोत्तर (North-East India) दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ता है, जो “Northeast as gateway” के दृष्टिकोण को बल देता है।
SAARC आज भले ही ठंडे बस्ते में हो, परंतु यह दक्षिण एशिया की सांस्कृतिक एकता का मंच बना हुआ है। SAARC University, SAARC Disaster Management Centre, और SAFTA जैसी संस्थाएँ चल रही हैं। भारत की रणनीति है — SAARC को पूरी तरह त्यागना नहीं, बल्कि BIMSTEC को प्राथमिकता देना।
UPSC के लिए प्रासंगिकता (UPSC Relevance)
- Prelims: SAARC स्थापना वर्ष (1985), मुख्यालय (काठमांडू), अंतिम शिखर वर्ष (2014); BIMSTEC स्थापना (1997 बैंकॉक), मुख्यालय (ढाका), 7 क्षेत्र और lead countries; SAFTA लागू वर्ष (2006); BIMSTEC में पाकिस्तान/अफगानिस्तान नहीं हैं — यह अंतर
- Mains GS-2: क्षेत्रीय सहयोग, पड़ोसी नीति (Neighbourhood First), Act East, SAGAR सिद्धांत; SAARC की निष्क्रियता और BIMSTEC pivot का विश्लेषण; भारत-पाकिस्तान संबंधों का क्षेत्रीय संगठनों पर प्रभाव
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Mains Practice Questions)
- “SAARC एक सपना है जो टूट गया, BIMSTEC एक संभावना है जो उभर रही है।” इस कथन की समीक्षा भारत की क्षेत्रीय कूटनीति के संदर्भ में कीजिए। (150 शब्द)
- SAARC और BIMSTEC के तुलनात्मक मूल्यांकन के माध्यम से भारत की Neighbourhood First नीति की प्रभावशीलता का परीक्षण कीजिए। बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में चीन की उपस्थिति इस नीति के लिए क्या चुनौतियाँ प्रस्तुत करती है? (250 शब्द)
निष्कर्ष (Conclusion)
SAARC और BIMSTEC दोनों भारत की क्षेत्रीय कूटनीति के दो स्तंभ हैं — एक स्मृति का, दूसरा भविष्य का। 1985 में जन्मे SAARC ने दक्षिण एशिया को एक मंच पर लाने का सपना दिखाया, परंतु पाकिस्तान-केंद्रित गतिरोध ने इसे लगभग ठहरा दिया। 1997 में जन्मा BIMSTEC आज बंगाल की खाड़ी के 1.7 अरब लोगों के लिए आर्थिक एकीकरण का वास्तविक मंच बन रहा है। 2024 में BIMSTEC चार्टर के लागू होने और 2025 के बैंकॉक शिखर ने इसे संस्थागत परिपक्वता दी है। UPSC अभ्यर्थी के लिए संदेश स्पष्ट है — दोनों संगठनों के तथ्यों के साथ-साथ भारत की रणनीतिक pivot की तर्कसंगति को समझना अनिवार्य है। वर्ष 2026 में जब भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) का नेतृत्व कर रहा है, BIMSTEC उसकी क्षेत्रीय विश्वसनीयता का सबसे बड़ा परीक्षण है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
SAARC की स्थापना कब और कहाँ हुई थी?
SAARC की स्थापना 8 दिसंबर 1985 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में पहले शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। इस अवसर पर सात संस्थापक देशों ने SAARC चार्टर पर हस्ताक्षर किए। अफगानिस्तान बाद में 2007 में 14वें शिखर सम्मेलन के दौरान आठवें सदस्य के रूप में जुड़ा।
SAARC का मुख्यालय कहाँ है?
SAARC का स्थायी सचिवालय काठमांडू, नेपाल में है, जिसकी औपचारिक स्थापना 16 जनवरी 1987 को हुई थी। महासचिव का कार्यकाल तीन वर्षों का होता है और यह पद सदस्य देशों के बीच वर्णानुक्रम (alphabetical order) से क्रमित होता है।
BIMSTEC में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
BIMSTEC के 7 सदस्य देश हैं — बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड। इनमें से 5 दक्षिण एशिया से और 2 दक्षिण-पूर्व एशिया से हैं। इसका मुख्यालय ढाका में है।
SAARC और BIMSTEC में मुख्य अंतर क्या है?
SAARC केवल दक्षिण एशिया तक सीमित है और इसमें पाकिस्तान शामिल है, जबकि BIMSTEC दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ता है तथा इसमें पाकिस्तान नहीं है। SAARC 2014 के बाद से लगभग निष्क्रिय है, जबकि BIMSTEC में नियमित शिखर सम्मेलन और 2022 में चार्टर अपनाया गया है।
भारत SAARC के बजाय BIMSTEC पर ज़ोर क्यों दे रहा है?
2016 के उरी आतंकी हमले के बाद SAARC प्रक्रिया ठप हो गई और इस्लामाबाद शिखर सम्मेलन रद्द कर दिया गया। पाकिस्तान-केंद्रित गतिरोध से बचने और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक एकीकरण को बढ़ाने के लिए भारत ने BIMSTEC को प्राथमिकता दी है।
क्या चीन SAARC या BIMSTEC का सदस्य है?
चीन SAARC का प्रेक्षक देश (observer) है (2005 से), परंतु पूर्ण सदस्य नहीं। पाकिस्तान और नेपाल चीन को पूर्ण सदस्य बनाने का समर्थन करते हैं, जबकि भारत इसका विरोध करता है। BIMSTEC में चीन की कोई भूमिका नहीं है।
SAFTA क्या है और यह कब लागू हुआ?
SAFTA (South Asian Free Trade Area) दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र है, जिस पर 2004 इस्लामाबाद शिखर में हस्ताक्षर हुए और यह 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच टैरिफ़ कम करके आपसी व्यापार बढ़ाना है, परंतु संवेदनशील सूचियों के कारण इसका प्रभाव सीमित रहा है।
अंतिम SAARC शिखर सम्मेलन कब हुआ था?
अंतिम SAARC शिखर सम्मेलन 18वाँ, नवंबर 2014 में काठमांडू में हुआ था। 19वाँ शिखर नवंबर 2016 में इस्लामाबाद में होना था परंतु उरी हमले के बाद भारत और कई अन्य देशों के बहिष्कार के कारण रद्द कर दिया गया। तब से कोई शिखर नहीं हुआ है।