मुख्य परीक्षा में नौ प्रश्नपत्र होते हैं, पर उनमें से केवल सात मेरिट में गिने जाते हैं। यह पहली बात है जो कई अभ्यर्थी देर से समझते हैं।
संरचना और अंक
| प्रश्नपत्र | विषय | अंक | मेरिट में? |
|---|---|---|---|
| पेपर A | अनिवार्य भारतीय भाषा | 300 | नहीं (क्वालिफाइंग) |
| पेपर B | अंग्रेज़ी | 300 | नहीं (क्वालिफाइंग) |
| पेपर I | निबंध | 250 | हाँ |
| पेपर II | सामान्य अध्ययन 1 | 250 | हाँ |
| पेपर III | सामान्य अध्ययन 2 | 250 | हाँ |
| पेपर IV | सामान्य अध्ययन 3 | 250 | हाँ |
| पेपर V | सामान्य अध्ययन 4 | 250 | हाँ |
| पेपर VI-VII | वैकल्पिक विषय | 500 | हाँ |
कुल गणनीय अंक 1750, साक्षात्कार 275 — यानी अंतिम मेरिट 2025 अंकों की।
दोनों क्वालिफाइंग पेपर मैट्रिक स्तर के हैं और 25% अंक चाहिए। इन्हें हल्के में लेना हर वर्ष कुछ अभ्यर्थियों को बाहर करता है।
GS पेपर 1 — विरासत, इतिहास, भूगोल, समाज
पाठ्यक्रम में: भारतीय संस्कृति, आधुनिक भारतीय इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम, स्वतंत्रता के बाद का समेकन, विश्व इतिहास, भारतीय समाज, महिलाओं की भूमिका, जनसंख्या, शहरीकरण, वैश्वीकरण, सामाजिक सशक्तीकरण, तथा विश्व एवं भारत का भौतिक भूगोल, संसाधन वितरण, उद्योगों की अवस्थिति, भूभौतिकीय घटनाएँ।
पर वास्तविक भारांश अलग तस्वीर दिखाता है। 2013 से 2025 तक के 270 GS-1 प्रश्नों में:
- भूगोल अपने तीनों रूपों में 31.9% — पेपर का सबसे बड़ा हिस्सा
- भारतीय समाज 19.3% — अकेला सबसे बड़ा विषय
- कला एवं संस्कृति 14.1%
- आधुनिक भारतीय इतिहास केवल 11.9%
अर्थात GS-1 भूगोल का पेपर है, इतिहास का नहीं — जबकि अधिकांश अभ्यर्थी इसे उल्टा तैयार करते हैं। विवरण Mains PYQ विश्लेषण में।
GS पेपर 2 — शासन, संविधान, न्याय, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
पाठ्यक्रम में: भारतीय संविधान, संघीय ढाँचा, शक्तियों का पृथक्करण, संसद और राज्य विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका, जन प्रतिनिधित्व, संवैधानिक निकाय, शासन के पहलू, पारदर्शिता और जवाबदेही, कल्याणकारी योजनाएँ, स्वास्थ्य-शिक्षा, तथा भारत के अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
वास्तविक भारांश (265 प्रश्न): अंतर्राष्ट्रीय संबंध 20.8% — सबसे बड़ा विषय, और पूरी परीक्षा का सबसे स्थिर विषय भी (2014 से हर वर्ष 3 से 5 प्रश्न)। संविधान एवं राजव्यवस्था 17.7%, शासन 14.7%।
GS पेपर 3 — अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, विज्ञान, सुरक्षा
पाठ्यक्रम में: भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, भूमि सुधार, उदारीकरण, अवसंरचना, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा।
वास्तविक भारांश (265 प्रश्न): आंतरिक सुरक्षा 16.6% — अर्थव्यवस्था (14.0%) से भी अधिक। कृषि 15.1%, विज्ञान-प्रौद्योगिकी 12.8%। और लोक वित्त एवं बैंकिंग सबसे छोटा है — केवल 6.0%, जबकि तैयारी में सबसे अधिक समय लेता है।
GS पेपर 4 — नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि
पाठ्यक्रम में: नैतिकता और मानवीय अंतरापृष्ठ, अभिवृत्ति, अभिरुचि, भावनात्मक बुद्धि, नैतिक विचारक, लोक प्रशासन में मूल्य, शासन में सत्यनिष्ठा — और केस स्टडी।
166 प्रश्नों में 47% केस स्टडी हैं। यानी लगभग आधा पेपर ज्ञान की नहीं, कौशल की परीक्षा है। सिद्धांत भाग में लोक सेवा मूल्य और प्रोबिटी सबसे बड़ा (19.9%), जबकि नैतिक विचारक केवल 7.8%।
निबंध
दो निबंध, प्रत्येक 125 अंक, चार-चार विकल्पों में से एक-एक। 2013 से 2025 तक के 100 विषय हमारे बैंक में हैं।
इसका तैयारी पर अर्थ
समय पाठ्यक्रम की पंक्तियों के अनुपात में नहीं, प्रश्नों के अनुपात में बाँटें। और उत्तर लेखन जल्दी शुरू करें — विवरण मेन्स उत्तर लेखन हिंदी में में। प्रीलिम्स पाठ्यक्रम के लिए UPSC प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
UPSC मुख्य परीक्षा में कितने पेपर होते हैं? नौ, जिनमें से सात मेरिट में गिने जाते हैं। दो भाषा पेपर केवल क्वालिफाइंग हैं और उनमें 25% अंक चाहिए।
मुख्य परीक्षा के कुल अंक कितने हैं? गणनीय 1750 अंक, साक्षात्कार 275 — अंतिम मेरिट 2025 अंकों की।
GS-1 में किस विषय का भारांश सबसे ज़्यादा है? भूगोल, अपने तीनों रूपों में मिलाकर 31.9% — पूरे इतिहास (20.4%) से अधिक। अकेला सबसे बड़ा विषय भारतीय समाज है, 19.3%।
GS-3 में सबसे ज़्यादा क्या पूछा जाता है? आंतरिक सुरक्षा (16.6%) और कृषि (15.1%) — दोनों अर्थव्यवस्था (14.0%) से आगे। लोक वित्त एवं बैंकिंग सबसे छोटा है, 6.0%।
GS-4 में केस स्टडी कितनी होती हैं? 2013 से 2025 तक के 166 प्रश्नों में 78 केस स्टडी थीं — यानी 47%, लगभग आधा पेपर।
क्या भाषा के पेपर गंभीरता से लेने चाहिए? हाँ। वे मेरिट में नहीं जुड़ते पर उनमें 25% अंक अनिवार्य हैं, और हर वर्ष कुछ अभ्यर्थी इन्हीं पर बाहर होते हैं।