अभिवृत्ति (Attitude) एक मनोवैज्ञानिक लेंस है। यह वह वस्तु नहीं जो दिखती है, बल्कि देखने का ढंग है। एक सिविल सेवक की हाशिये पर पड़े नागरिकों के प्रति, राजनीतिक निर्देशों के प्रति, अधीनस्थों के प्रति, और विफलता के प्रति अभिवृत्ति यह तय करती है कि वह दिन भर की हर परिस्थिति को किस प्रकार पढ़ेगी। UPSC GS-IV पाठ्यक्रम में “अभिवृत्ति — सामग्री, संरचना, कार्य; इसका विचार और व्यवहार से प्रभाव और संबंध” इसलिए है क्योंकि अभिवृत्तियाँ प्रशासन में व्यवहार की मौन भविष्यवक्ता होती हैं।
यह मार्गदर्शिका अभिवृत्ति की परिभाषा, उसकी विशेषताएँ, ABC मॉडल के घटक, कैट्ज़ के चार कार्य और एक-आयामी बनाम द्वि-आयामी दृष्टिकोण को संगठित करती है।
अभिवृत्ति क्या है?
अभिवृत्ति लोगों, वस्तुओं, स्थानों, घटनाओं या विचारों के प्रति विशिष्ट तरीक़े से कार्य, विचार और अनुभव करने की सीखी हुई प्रवृत्ति है। सरल शब्दों में, यह किसी वस्तु के प्रति पक्ष या विपक्ष की अभिव्यक्ति है। अभिवृत्ति व्यक्ति द्वारा वस्तुनिष्ठ संसार की व्यक्तिनिष्ठ व्याख्या है — मानो वह चश्मा जिससे व्यक्ति देखता है।
परिभाषा से कुछ स्पष्ट विशेषताएँ निकलती हैं।
- अभिवृत्ति सीखी हुई है, जन्मजात नहीं। यह अनुभव, सामाजिक परिवेश और अनुकूलन से अर्जित होती है।
- अभिवृत्ति एक मूल्यांकनात्मक कथन है — पक्ष या विपक्ष में।
- अभिवृत्ति वस्तु-विशिष्ट है। एक ही व्यक्ति महिला-शिक्षा के प्रति उदार और पहनावे-संबंधी संहिता के प्रति रूढ़िवादी अभिवृत्ति रख सकता है।
- अभिवृत्ति में क्रिया-प्रवृत्ति है — यह व्यवहार की भविष्यवाणी करती है (पूरी तरह निर्धारित नहीं करती)।
अभिवृत्ति की विशेषताएँ / प्रकृति
- अभिवृत्तियाँ प्रायः व्यवहार में परिणत होती हैं। भ्रष्टाचार के प्रति नकारात्मक अभिवृत्ति वाला व्यक्ति रिश्वत लेने से इनकार करता है।
- अभिवृत्तियाँ धीरे-धीरे अर्जित होती हैं — परिवार, स्कूल, साथी, मीडिया और अनुभव के माध्यम से।
- अभिवृत्तियाँ मूल्यांकनात्मक कथन हैं — पक्ष या विपक्ष।
- सभी लोग अभिवृत्तियाँ रखते हैं — चाहे उनकी स्थिति या बुद्धि कुछ भी हो।
- अभिवृत्ति अचेत रूप से धारित हो सकती है — व्यक्ति को इसका भान न हो।
ABC मॉडल — अभिवृत्ति के घटक
मनोवैज्ञानिक डेनियल कैट्ज़ (Daniel Katz) और अन्य ने व्यापक रूप से प्रयुक्त ABC मॉडल स्थापित किया, जो अभिवृत्ति को तीन परस्पर-क्रियाशील घटकों में विभाजित करता है।
A — आत्मानुभूतिक घटक (Affective / Feel)
वस्तु के प्रति भावनात्मक प्रतिक्रिया। “भ्रष्टाचार मुझे क्रोधित करता है।”
B — व्यवहारिक घटक (Behavioural / Do)
वस्तु के प्रति क्रिया-प्रवृत्ति। “मैं रिश्वत देने से इनकार करता हूँ, चाहे काम विलंबित हो।”
C — संज्ञानात्मक घटक (Cognitive / Think)
वस्तु के बारे में विश्वास और ज्ञान। “भ्रष्टाचार लोकतंत्र को कमज़ोर करता है और असमानता गहरी करता है।”
तीनों घटक प्रायः एक साथ काम करते हैं। पूर्ण अभिवृत्ति वही है जिसमें सोच, भावना और कार्य संरेखित हों। जब ये तीनों संरेखित नहीं हो पाते, तो परिणाम होता है संज्ञानात्मक असंगति (Cognitive Dissonance) — यह अवधारणा लियोन फ़ेस्टिंगर ने 1957 में प्रस्तुत की थी, जो परस्पर-विरोधी विश्वासों, मूल्यों या अभिवृत्ति-व्यवहार जोड़ियों से उत्पन्न मनोवैज्ञानिक असुविधा का वर्णन करती है। लोग असंगति को विश्वास, व्यवहार या वस्तु-धारणा बदलकर सुलझाते हैं।
“उद्दीपन और प्रतिक्रिया के बीच एक स्थान है। उस स्थान में हमारी प्रतिक्रिया चुनने की शक्ति निवास करती है।” — विक्टर फ़्रैंकल
यही कारण है कि सिविल सेवा का प्रशिक्षण अंशतः अभिवृत्ति-संरेखण (attitude alignment) का प्रशिक्षण है — कार्यालय में जो सोचा, महसूस किया और किया जाए, वे एक हों।
घटकों की त्वरित तालिका
| घटक | अंग्रेज़ी नाम | क्या दर्शाता है | सिविल-सेवा उदाहरण |
|---|---|---|---|
| A | Affective | भावना/अनुभूति | अन्याय पर क्रोध |
| B | Behavioural | क्रिया-प्रवृत्ति | रिश्वत-इनकार, RTI को सहयोग |
| C | Cognitive | विश्वास/ज्ञान | पारदर्शिता पर सिद्धांत |
कैट्ज़ के अभिवृत्ति के कार्य
कैट्ज़ का क्रियात्मक सिद्धांत (Functional Theory of Attitudes) चार प्रमुख कार्य पहचानता है — हर एक यह बताता है कि हम अभिवृत्तियाँ क्यों रखते हैं।
1. ज्ञान-कार्य (Knowledge Function)
अभिवृत्तियाँ संसार को संगठित और सरल बनाती हैं। ये एक मानसिक मानचित्र देती हैं, जिससे जटिल वास्तविकता समझने योग्य बनती है। एक सिविल सेवक की लिखित अभिलेखों के प्रति “सत्य के स्रोत” वाली अभिवृत्ति इसी कार्य का उदाहरण है।
2. उपयोगितावादी / समायोजन कार्य
अभिवृत्तियाँ हमें पुरस्कार अधिकतम और दंड न्यूनतम करने में मदद करती हैं। शिक्षा के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति इसलिए विकसित होती है क्योंकि शिक्षा बेहतर अवसरों से सहसंबंधित है।
3. अहं-रक्षा / अभिव्यक्ति कार्य
अभिवृत्तियाँ आत्म-सम्मान की रक्षा करती हैं और अहं को असुविधाजनक सत्य से बचाती हैं। मनोवैज्ञानिक तंत्रों में इनकार, दमन, प्रक्षेपण और तर्कसंगतीकरण शामिल हैं। पूर्वाग्रह प्रायः अहं-रक्षा कार्य करता है।
4. मूल्य-अभिव्यक्ति / सामाजिक स्वीकृति कार्य
अभिवृत्तियाँ मूल मूल्यों को व्यक्त करती हैं या सामाजिक स्वीकृति सक्षम करती हैं। एक पर्यावरणवादी की संरक्षण-अभिवृत्ति में स्थिरता का गहरा मूल्य व्यक्त होता है।
पूरक कार्य
- शॉर्टकट / ह्यूरिस्टिक — समस्याओं का त्वरित समाधान। मुखबिर-संरक्षण पर सामान्य अभिवृत्ति वाले अधिकारी को हर बार पुनः तर्क नहीं करना पड़ता।
- नकारात्मकता को सकारात्मक में बदलना — एडिसन का कथन — “मैं 1000 बार विफल नहीं हुआ; मैंने 1000 ऐसे तरीक़े खोजे जो काम नहीं करते।”
अभिवृत्ति-निर्माण के कारक
- परिवार — प्राथमिक समाजीकरण।
- मित्र-समूह — क्षैतिज प्रभाव।
- समाज — सांस्कृतिक ढाँचे और मानदंड।
- मीडिया — आधुनिक बड़े पैमाने का समाजीकरण।
- सरकार — कानून, अभियान, योजनाएँ।
- संगठन — कार्यस्थल-संस्कृति, जो अधिकारी की अभिवृत्ति को आकार देती है।
एक सिविल सेवक के लिए ये छहों कारक जीवन-भर सक्रिय रहते हैं। सजग सिविल सेवक नियमित रूप से ऑडिट करता है — कौन-सी अभिवृत्तियाँ उसने विरासत में पाईं और कौन-सी सचेत रूप से चुनी हैं।
अभिवृत्ति की एक- बनाम द्वि-आयामी संरचना
एक-आयामी दृष्टिकोण
सकारात्मक और नकारात्मक तत्व एक ही आयाम के विपरीत छोरों पर रखे जाते हैं। व्यक्ति या तो सकारात्मक है, या नकारात्मक, या बीच में — परंतु एक ही वस्तु के प्रति एक साथ तीव्र सकारात्मक और तीव्र नकारात्मक नहीं हो सकता।
द्वि-आयामी दृष्टिकोण
सकारात्मक और नकारात्मक तत्व दो स्वतंत्र आयामों पर रखे जाते हैं। व्यक्ति किसी भी संयोजन में सकारात्मकता और नकारात्मकता एक साथ रख सकता है।
यह क्यों मायने रखता है। समकालीन शोध द्वि-आयामी दृष्टिकोण का पक्ष लेता है, क्योंकि यह द्वैधभाव (ambivalence) की व्याख्या करता है — एक ही चीज़ की ओर खिंचाव और साथ ही उससे विकर्षण। एक सिविल सेवक कार्यालय की सत्ता से एक साथ आकर्षित हो सकती है और उससे उत्पन्न एकाकीपन से असुविधा भी अनुभव कर सकती है। दोनों अभिवृत्तियाँ वास्तविक हैं; दोनों सहअस्तित्व में हैं; और भिन्न परिस्थितियों में भिन्न ढंग से व्यवहार को प्रभावित करती हैं।
अभिवृत्ति और सिविल सेवक
लोक प्रशासन के लिए अभिवृत्ति-सिद्धांत के तीन विशिष्ट अनुप्रयोग।
नागरिकों के प्रति अभिवृत्ति
आत्मानुभूतिक घटक मायने रखता है। एक क्लर्क, जिसका भावनात्मक घटक तिरस्कार से भरा है, तकनीकी रूप से नियम-सम्मत होते हुए भी कठोर सेवा देगा। केवल व्यवहारिक घटक बदलने वाला प्रशिक्षण अपर्याप्त है — भावनात्मक रजिस्टर बदलना ज़रूरी है।
सहकर्मियों और अधीनस्थों के प्रति अभिवृत्ति
कैट्ज़ का अहं-रक्षा कार्य समझाता है कि क्यों कुछ अधिकारी आलोचना स्वीकार नहीं कर पाते — त्रुटि स्वीकारना आत्म-सम्मान को ख़तरा प्रतीत होता है। इस कार्य की जागरूकता ऐसे फीडबैक-संस्कृति बनाने में सहायक है जो गरिमा बचाते हुए विकास संभव करे।
परिवर्तन के प्रति अभिवृत्ति
ज्ञान-कार्य अधिकारियों को परिचित मानसिक मानचित्रों पर निर्भर बनाए रखता है। नई नीति, नई तकनीक और नए शासन-मॉडलों के लिए स्पष्ट रूप से पुनर्मानचित्रण आवश्यक है। यही कारण है कि वरिष्ठ अधिकारियों की सबाटिकल, एक्सपोज़र विज़िट और संरचित पुनर्प्रशिक्षण संस्थागत आवश्यकताएँ हैं।
केस स्टडी प्रॉम्प्ट
केस 1: काउंटर पर क्लर्क
आपके विभाग में नागरिक-संतुष्टि सर्वेक्षण दिखाते हैं कि प्रक्रियात्मक अनुपालन उच्च है, परंतु नागरिक-अनुभव ख़राब। साक्षात्कार बताते हैं कि काउंटर-कर्मचारी रूखे, उपेक्षापूर्ण हैं और नागरिकों को बाधा मानते हैं।
समाधान-ढाँचा — अभिवृत्ति-आधारित सुधार
- निदान — स्टाफ़ का आत्मानुभूतिक घटक नकारात्मक; व्यवहारिक घटक प्रक्रियात्मक रूप से अनुपालक पर भावनात्मक रूप से शत्रुतापूर्ण।
- हस्तक्षेप — पुनर्निर्माण पर केंद्रित प्रशिक्षण: नागरिक कार्यालय के अस्तित्व का कारण हैं, बाधा नहीं। भूमिका-अभिनय, अच्छे काउंटरों का अवलोकन, सेवा-उत्कृष्टता वाले स्टाफ़ की पहचान।
- संरचनात्मक सहायता — पीक घंटों में कार्यभार कम; अवसंरचना सुधार; पर्यवेक्षक स्वयं अपेक्षित अभिवृत्ति का प्रदर्शन करें।
केस 2: प्रतिरोधी अधीनस्थ
एक वरिष्ठ अधीनस्थ नई डिजिटीकरण-पहल के प्रति तीव्र नकारात्मक अभिवृत्ति रखता है — इसे अपने पारंपरिक अधिकार पर ख़तरा मानता है। सार्वजनिक रूप से अनुपालन करता है, परंतु दैनिक व्यवहार में परियोजना को कमज़ोर करता है।
समाधान-ढाँचा
- निदान — अहं-रक्षा कार्य सक्रिय; डिजिटीकरण प्रक्रियात्मक विशेषज्ञता पर बने आत्म-सम्मान को ख़तरा।
- हस्तक्षेप — अधिकारी की भूमिका को नई व्यवस्था में पुनः परिभाषित करें — उसे डिजिटल वर्कफ़्लो में वरिष्ठ प्रशिक्षक या समीक्षा-प्राधिकारी के रूप में स्थापित करें।
- धैर्य — अभिवृत्ति-परिवर्तन क्रमिक होता है। छोटी सफलताएँ, सहकर्मी-मान्यता, और संरचित एक्सपोज़र टकराव से अधिक प्रभावी।
UPSC प्रासंगिकता
GS-IV मैपिंग। यह विषय पाठ्यक्रम में सीधे नामित है — “अभिवृत्ति: सामग्री, संरचना, कार्य; इसका विचार और व्यवहार से प्रभाव और संबंध।” पिछले मेन्स में परिभाषाएँ, घटक, कार्य और अनुप्रयोग पूछे जा चुके हैं।
उत्तर के मुख्य शब्द। ABC मॉडल, आत्मानुभूतिक, व्यवहारिक, संज्ञानात्मक, संज्ञानात्मक असंगति, कैट्ज़ के चार कार्य, ज्ञान-कार्य, उपयोगितावादी कार्य, अहं-रक्षा कार्य, मूल्य-अभिव्यक्ति कार्य, एक- बनाम द्वि-आयामी दृष्टिकोण, द्वैधभाव, अभिवृत्ति-निर्माण, लियोन फ़ेस्टिंगर।
वास्तविक उदाहरण।
- स्वच्छ भारत अभियान — स्वच्छता के प्रति नागरिक-अभिवृत्ति में बदलाव।
- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ — लिंग पर अभिवृत्ति-हस्तक्षेप।
- डिजिटल इंडिया — स्वीकरण में अभिवृत्ति निर्णायक।
- पुलिस सुधार-प्रतिरोध — वरिष्ठ अधिकारियों की अहं-रक्षा अभिवृत्तियाँ ऐतिहासिक रूप से सुधारों को धीमा करती रही हैं।
अभ्यास प्रश्न
“अभिवृत्ति, व्यवहार की उप-भाषा है।” ABC मॉडल और कैट्ज़ के चार कार्यों का उपयोग करते हुए सिविल सेवा में इसकी प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
अभिवृत्ति केवल मनोविज्ञान की त्रिविधता नहीं — यह एक ज़िम्मेदार सिविल सेवक का वह आत्म-ज्ञान है, जिससे वह राज्य पर अपने प्रभाव का संचालन करती है। हर फ़ाइल पर हस्ताक्षर, हर बैठक की अध्यक्षता, हर वार्तालाप — सब उसी अभिवृत्तिक रंग से रंगे होते हैं जिससे वह संसार देखती है। घटकों, कार्यों और अभिवृत्ति की द्वि-आयामी संरचना को जानना मनोविज्ञान-तथ्य नहीं — यह सिविल सेवा का व्यावहारिक उपकरण है।
सामान्य प्रश्न
अभिवृत्ति की परिभाषा क्या है?
अभिवृत्ति किसी वस्तु, व्यक्ति, घटना या विचार के प्रति विशिष्ट तरीक़े से कार्य, सोच और अनुभूति की सीखी हुई प्रवृत्ति है — एक मूल्यांकनात्मक मानसिक स्थिति।
ABC मॉडल के तीन घटक कौन से हैं?
आत्मानुभूतिक (Affective — भावना), व्यवहारिक (Behavioural — कार्य) और संज्ञानात्मक (Cognitive — विश्वास/ज्ञान)।
कैट्ज़ के चार कार्य क्या हैं?
ज्ञान-कार्य, उपयोगितावादी (समायोजन), अहं-रक्षा और मूल्य-अभिव्यक्ति कार्य। ये बताते हैं कि लोग अभिवृत्तियाँ क्यों धारण करते हैं।
संज्ञानात्मक असंगति (Cognitive Dissonance) क्या है?
लियोन फ़ेस्टिंगर (1957) की अवधारणा — जब विचार, भावना और कार्य आपस में नहीं मिलते तो उत्पन्न मनोवैज्ञानिक असुविधा। इसे विश्वास, व्यवहार या धारणा बदलकर सुलझाया जाता है।
एक-आयामी और द्वि-आयामी दृष्टिकोण में क्या अंतर है?
एक-आयामी में सकारात्मक और नकारात्मक एक ही धुरी के विपरीत छोर हैं; द्वि-आयामी में दोनों स्वतंत्र हैं — व्यक्ति एक ही वस्तु के प्रति एक साथ तीव्र पक्ष और विपक्ष रख सकता है।
अभिवृत्ति-निर्माण के मुख्य कारक कौन से हैं?
परिवार, मित्र-समूह, समाज, मीडिया, सरकार और कार्यस्थल-संगठन — ये छह जीवन-भर अभिवृत्तियों को आकार देते हैं।
सिविल सेवक के लिए ABC मॉडल क्यों उपयोगी है?
यह बताता है कि सेवा-गुणवत्ता तीनों घटकों के संरेखण पर निर्भर है — केवल नियम-पालन (B) पर्याप्त नहीं; भावनात्मक रजिस्टर (A) और सिद्धांत-समझ (C) भी ज़रूरी।
अहं-रक्षा कार्य प्रशासन में कैसे प्रकट होता है?
जब अधिकारी आलोचना स्वीकार नहीं कर पाते, सुधारों का विरोध करते हैं, या अपनी भूमिका को नई व्यवस्था से ख़तरा मानते हैं — तब अहं-रक्षा कार्य सक्रिय होता है।
क्या अभिवृत्ति सीखी जा सकती है?
हाँ — परिभाषा के अनुसार ही अभिवृत्ति सीखी हुई है। प्रशिक्षण, एक्सपोज़र, फीडबैक और सचेत पुनर्संरचना से इसे बदला जा सकता है।
UPSC उत्तर में कौन-से कीवर्ड शामिल करें?
ABC मॉडल, कैट्ज़ के चार कार्य, फ़ेस्टिंगर की संज्ञानात्मक असंगति, द्वैधभाव, द्वि-आयामी संरचना, अभिवृत्ति-संरेखण, और स्वच्छ भारत/BBBP जैसे ठोस उदाहरण।