2022-23 में PM-KISAN के सिस्टम ने 2.4 करोड़ किसानों को इसलिए बाहर कर दिया क्योंकि उनके भूमि रिकॉर्ड आधार के आंकड़ों से मेल नहीं खा रहे थे। यह फैसला न किसी मंत्री ने लिया, न किसी अफसर ने उस पर दस्तखत किए। न कोई इंसानी जांच हुई, न अपील का रास्ता मिला। यही एल्गोरिदमिक कार्यपालिका (algorithmic executive) की पहचान है: कार्यपालिका की ताकत अब कैबिनेट नोट और फाइल टिप्पणियों से नहीं, कोड, डैशबोर्ड और अपने-आप तय होने वाले फैसलों से चलती है।
हमें कैसे पता कि यह हो रहा है
PRAGATI. 2015 से प्रधानमंत्री हर महीने सचिवों और मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस करते हैं, जिसमें रियल-टाइम डेटा डैशबोर्ड सामने रहते हैं। इनके जरिए करीब 17 लाख करोड़ रुपये की 340 से ज्यादा परियोजनाओं पर नजर रखी जाती है। कैबिनेट कमेटी के पुराने रास्ते के साथ-साथ अब निगरानी एक डेटा प्लेटफॉर्म से भी होती है।
PM-KISAN. करीब 8.5 करोड़ किसानों को 2,000 रुपये की किस्त मिलेगी या नहीं, यह आधार से जुड़े भूमि रिकॉर्ड का एल्गोरिदम तय करता है। 2022-23 में करीब 2.4 करोड़ लाभार्थी सिर्फ डेटा के मेल न खाने पर अपने-आप बाहर हो गए, बिना किसी इंसानी समीक्षा और बिना अपील के।
CoWIN. टीके का स्लॉट किसे मिलेगा, यह एल्गोरिदम की कतार तय करती थी। इसी से 220 करोड़ डोज लगना मुमकिन हुआ, और इसी ने बिना स्मार्टफोन वाले बुजुर्गों और गांव के लोगों को शुरुआती दौर में पीछे छोड़ दिया।
CERT-In के निर्देश, अप्रैल 2022. साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग अनिवार्य करने वाले ये नियम संसद के किसी कानून से नहीं, कार्यपालिका के सर्कुलर से आए। VPN कंपनियों समेत तमाम प्लेटफॉर्म पर छह घंटे में रिपोर्ट करने की शर्त इसी रास्ते थोपी गई।
चेहरा पहचानने वाली पुलिस तकनीक. दिल्ली और उत्तर प्रदेश की पुलिस ने प्रदर्शनों में फेशियल रिकग्निशन का इस्तेमाल किया, जबकि इसके लिए न कोई कानून है और न डेटा सुरक्षा की कोई गारंटी। सुप्रीम कोर्ट यह रेखांकित कर चुका है कि ऐसे सिस्टम अनुच्छेद 12 के तहत राज्य की कार्रवाई हैं और अनुच्छेद 14 के तहत मनमानी के आधार पर इन्हें चुनौती दी जा सकती है।
DPDP कानून 2023. सरकार और उसकी संस्थाओं को डेटा सुरक्षा की ज्यादातर जिम्मेदारियों से बड़े पैमाने पर छूट मिली हुई है। नतीजा यह कि सरकारी एल्गोरिदम के खिलाफ नागरिक अपने डेटा अधिकार इस्तेमाल ही नहीं कर पाते।
इससे मिला क्या है
फायदे असली हैं और उन्हें छोटा करके नहीं देखना चाहिए।
| सिस्टम | दर्ज नतीजा |
|---|---|
| प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer) | 2013-2024 के बीच करीब 35 लाख करोड़ रुपये भेजे गए; JAM त्रिमूर्ति ने फर्जी लाभार्थी हटाए; बचत का अनुमान करीब 2.73 लाख करोड़ रुपये (NITI Aayog 2023) |
| PFMS | सभी मंत्रालयों में खर्च की रियल-टाइम निगरानी; पैसा बीच में अटकने और पड़े रहने में कमी |
| e-Courts और NJDG | 6 करोड़ से ज्यादा केस स्टेटस अपडेट डिजिटल हुए, जिससे मुकदमेबाजों के लिए जानकारी का अंतर घटा |
| CoWIN | दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान संभव हुआ; 2022 तक 94 प्रतिशत वयस्क कवरेज |
| CPGRAMS | 2.5 करोड़ से ज्यादा शिकायतें ऑनलाइन दर्ज; औसत निपटारा करीब 60 दिन से घटकर 21 दिन |
जवाबदेही की कोई भी दलील इन उपलब्धियों को मामूली बताकर नहीं चल सकती। इतने बड़े पैमाने पर फर्जी लाभार्थी हटाना वह काम है जिसमें मैनुअल व्यवस्था दशकों तक नाकाम रही।
संवैधानिक दिक्कतें
जवाबदेही का खालीपन. जब कोई एल्गोरिदम राशन कार्ड देने से मना कर दे, तो जिम्मेदार कौन है? न कोई मंत्री, न कोई अफसर, और अक्सर शिकायत का कोई रास्ता भी नहीं। इससे audi alteram partem यानी सुने जाने का हक इस तरह खत्म होता है कि सुनवाई से इनकार नहीं किया जाता, बल्कि वह मंच ही हटा दिया जाता है जहां सुनवाई मांगी जा सके।
शक्ति का अवैध हस्तांतरण (non-delegation). संविधान के तहत कार्यपालिका बिना सक्षम कानून बनाए फैसला लेने की ताकत कोड को नहीं सौंप सकती। यह रोज हो रहा है, और यह हस्तांतरण इसलिए दिखता नहीं क्योंकि वह औपचारिक नहीं, तकनीकी है।
अनुच्छेद 21 का सवाल. कल्याणकारी योजना से अपने-आप बाहर कर दिया जाना आजीविका छिनने जैसा है। एल्गोरिदम के फैसलों के खिलाफ अदालती उपाय का कोई ढांचा है ही नहीं, इसलिए अधिकार तो कायम है, उस तक पहुंचने का रास्ता नहीं।
डेटा की गैर-बराबर ताकत. DPDP की छूट का मतलब यह है कि नागरिकों के बारे में सबसे भारी फैसले लेने वाले सिस्टम ही वे हैं जिनसे सवाल पूछने की गुंजाइश नागरिकों के पास सबसे कम है।
असली ढांचागत बात
आम बहस इसे दक्षता बनाम अधिकार बना देती है, जो बहुत सरल खाका है। एल्गोरिदम से चलने वाले प्रशासन की दिलचस्प बात यह है कि वह चुपचाप और बहुत बड़े पैमाने पर नाकाम होता है।
एक भ्रष्ट अफसर किसी का लाभ रोकता है तो एक शिकायत बनती है, एक नाम सामने आता है और आखिरकार एक मुकदमा खड़ा होता है। एक एल्गोरिदम 2.4 करोड़ लोगों का लाभ रोकता है तो सिर्फ डैशबोर्ड पर एक आंकड़ा बनता है। गलती कई गुना बड़ी है और शोर कहीं कम, क्योंकि शिकायत करने के लिए कोई है ही नहीं।
यह उस आम धारणा को उलट देता है कि पैमाना बढ़ने से चीजें ज्यादा दिखने लगती हैं। यहां पैमाना बढ़ने से चीजें छिप जाती हैं।
आगे का रास्ता
- जो फैसले किसी के ख़िलाफ़ जाते हैं, उनमें इंसान का होना अनिवार्य करें। पात्रता तय करना मशीन के जिम्मे रह सकता है, लेकिन किसी अधिकार पर असर डालने वाला इनकार ऐसा इंसानी फैसला होना चाहिए जिसकी समीक्षा हो सके।
- एल्गोरिदम के फैसलों के खिलाफ कानूनी अपील का रास्ता बनाएं, तय समयसीमा के साथ, ताकि अनुच्छेद 21 के साथ एक असली उपाय भी जुड़ा हो।
- पहले सक्षम कानून बनाना जरूरी करें, तभी कोई स्वचालित सिस्टम हकदारी से जुड़े फैसले ले। इससे शक्ति हस्तांतरण की दिक्कत सीधे हल होती है।
- बाहर किए गए लोगों के आंकड़े सार्वजनिक करें। हर कल्याणकारी एल्गोरिदम को बताना चाहिए कि उसने कितने लोगों को बाहर किया और क्यों, क्योंकि जो आंकड़ा कोई छापता नहीं, वह नाकामी कोई सुधारता भी नहीं।
- DPDP में सरकार को मिली छूट सीमित करें, कम से कम उन सिस्टम के लिए जो किसी एक नागरिक के बारे में फैसला लेते हैं।
राज्य ने सचमुच प्रभावशाली मशीनरी खड़ी की है। जो उसने नहीं बनाया, वह है वह कागजी रास्ता जिससे कोई नागरिक इस मशीनरी से बहस कर सके।
सामान्य प्रश्न
एल्गोरिदमिक कार्यपालिका का मतलब क्या है?
कार्यपालिका की शक्ति का इस्तेमाल कैबिनेट नोट और फाइल टिप्पणियों के बजाय कोड, डैशबोर्ड और स्वचालित फैसलों के जरिए करना। जो फैसले पहले एक पहचाने जा सकने वाले अफसर के विवेक से होते थे, वे अब सॉफ्टवेयर आंकड़ों पर नियम लगाकर करता है, और इतने बड़े पैमाने पर करता है जितना कोई अफसर कभी नहीं कर सकता।
PRAGATI प्लेटफॉर्म क्या है?
2015 से चल रहा एक प्लेटफॉर्म, जिस पर प्रधानमंत्री हर महीने सचिवों और मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस करते हैं और रियल-टाइम डेटा डैशबोर्ड के जरिए करीब 17 लाख करोड़ रुपये की 340 से ज्यादा परियोजनाओं पर नजर रखी जाती है। यह कैबिनेट कमेटी के ढांचे के साथ-साथ चलने वाली एक डेटा आधारित समीक्षा प्रक्रिया में निगरानी को केंद्रित कर देता है।
PM-KISAN के एल्गोरिदम में गड़बड़ी क्या हुई?
करीब 8.5 करोड़ किसानों को 2,000 रुपये की किस्त आधार से जुड़े भूमि रिकॉर्ड के एल्गोरिदम से तय होती है। 2022-23 में करीब 2.4 करोड़ लाभार्थी डेटा के मेल न खाने की वजह से अपने-आप बाहर हो गए, न कोई इंसानी समीक्षा हुई और न अपील की कोई व्यवस्था थी। यह बहिष्करण किसी के लिए गए फैसले से नहीं, डेटा की एक तकनीकी खामी से हुआ।
एल्गोरिदम आधारित प्रशासन के दर्ज फायदे क्या हैं?
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए 2013 से 2024 के बीच करीब 35 लाख करोड़ रुपये भेजे गए, JAM त्रिमूर्ति ने फर्जी लाभार्थी हटाए और NITI Aayog के अनुमान के मुताबिक करीब 2.73 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई। PFMS से खर्च की रियल-टाइम निगरानी संभव हुई। e-Courts और National Judicial Data Grid ने 6 करोड़ से ज्यादा केस स्टेटस अपडेट डिजिटल किए। CoWIN से दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला। CPGRAMS ने शिकायत निपटारे का औसत समय करीब 60 दिन से घटाकर 21 दिन कर दिया।
जवाबदेही का खालीपन किसे कहते हैं?
जब कोई एल्गोरिदम राशन कार्ड या कोई लाभ देने से मना करता है, तो न कोई मंत्री होता है जिसने फैसला लिया हो, न कोई अफसर जिसने दस्तखत किए हों, और अक्सर शिकायत का कोई रास्ता भी नहीं होता। इससे प्राकृतिक न्याय के audi alteram partem यानी सुने जाने के सिद्धांत का उल्लंघन होता है, क्योंकि सुनवाई के लिए कोई मंच ही मौजूद नहीं है।
शक्ति के अवैध हस्तांतरण की समस्या क्या है?
संविधान के तहत कार्यपालिका बिना सक्षम कानून बनाए फैसला लेने की ताकत निजी कोड को नहीं सौंप सकती, फिर भी स्वचालित सिस्टम रोजाना ऐसे फैसले लेते हैं जो अधिकारों पर असर डालते हैं और जिनके पीछे इस हस्तांतरण का कोई कानूनी आधार नहीं होता।
DPDP कानून 2023 का इस पर क्या असर है?
इस कानून के तहत सरकार और उसकी संस्थाओं को डेटा सुरक्षा की ज्यादातर जिम्मेदारियों से बड़े पैमाने पर छूट है। इससे गैर-बराबरी बनती है: नागरिक उन सरकारी एल्गोरिदम के खिलाफ अपने डेटा अधिकार इस्तेमाल नहीं कर पाते, जो ठीक उनकी हकदारी के बारे में फैसले ले रहे होते हैं।
अनुच्छेद 21 से जुड़े निहितार्थ क्या हैं?
कल्याणकारी योजना से स्वचालित बहिष्करण आजीविका छिनने जैसा हो सकता है, जो अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जुड़ जाता है। एल्गोरिदम के फैसलों के खिलाफ अभी अदालती उपाय का कोई ढांचा मौजूद नहीं है, इसलिए अधिकार तो है पर उसे लागू कराने का रास्ता नहीं।
अभ्यास प्रश्न
प्रीलिम्स MCQ
- PRAGATI प्लेटफॉर्म पर लगभग कितनी परियोजनाओं पर नजर रखी जाती है?
(a) करीब 90
(b) 340 से ज्यादा
(c) 1,200 से ज्यादा
(d) करीब 40
उत्तर: (b) रियल-टाइम डैशबोर्ड के जरिए करीब 17 लाख करोड़ रुपये की 340 से ज्यादा परियोजनाओं पर नजर रखी जाती है। - 2022-23 में डेटा के मेल न खाने पर अपने-आप बाहर हुए PM-KISAN लाभार्थियों की संख्या लगभग थी
(a) 24 लाख
(b) 1.2 करोड़
(c) 2.4 करोड़
(d) 8.5 करोड़
उत्तर: (c) करीब 2.4 करोड़ लोग बाहर हुए, बिना किसी इंसानी समीक्षा और बिना अपील की व्यवस्था के। - NITI Aayog के अनुसार प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से अनुमानित बचत लगभग है
(a) 27,300 करोड़ रुपये
(b) 1.2 लाख करोड़ रुपये
(c) 2.73 लाख करोड़ रुपये
(d) 35 लाख करोड़ रुपये
उत्तर: (c) अनुमानित बचत 2.73 लाख करोड़ रुपये है, जबकि 2013 से 2024 के बीच करीब 35 लाख करोड़ रुपये भेजे गए। - जब कोई एल्गोरिदम बिना सुनवाई के लाभ देने से मना कर देता है, तो किस सिद्धांत का उल्लंघन होता है?
(a) Nemo judex in causa sua
(b) Audi alteram partem
(c) Res judicata
(d) Stare decisis
उत्तर: (b) Audi alteram partem यानी सुने जाने के हक के लिए एक मंच चाहिए, और स्वचालित इनकार में अक्सर कोई मंच होता ही नहीं। - DPDP कानून 2023 के तहत सरकारी संस्थाएं हैं
(a) निजी संस्थाओं से ज्यादा सख्त जिम्मेदारियों के दायरे में
(b) डेटा सुरक्षा की ज्यादातर जिम्मेदारियों से बड़े पैमाने पर मुक्त
(c) डेटा प्रोसेसिंग के लिए अदालती मंजूरी लेने को बाध्य
(d) स्वचालित फैसले लेने से पूरी तरह प्रतिबंधित
उत्तर: (b) इस व्यापक छूट से नागरिकों की उस क्षमता में गैर-बराबरी आ जाती है जिससे वे सरकारी सिस्टम के खिलाफ डेटा अधिकार इस्तेमाल कर सकें।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
- कार्यपालिका की शक्ति अब फाइलों के बजाय कोड के जरिए बढ़ती जा रही है। इसके संवैधानिक निहितार्थों की जांच कीजिए। (250 शब्द)
- एल्गोरिदम आधारित प्रशासन ने मापी जा सकने वाली दक्षता भी दी है और जवाबदेही का खालीपन भी पैदा किया है। आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द)
- कल्याणकारी योजनाओं से स्वचालित बहिष्करण अनुच्छेद 21 से जुड़ता है। जरूरी उपायों पर चर्चा कीजिए। (150 शब्द)
- सरकार द्वारा स्वचालित निर्णय प्रणालियों के इस्तेमाल से खड़ी होने वाली शक्ति-हस्तांतरण की समस्या पर चर्चा कीजिए। (150 शब्द)
- भारतीय लोक प्रशासन में एल्गोरिदमिक जवाबदेही के लिए एक ढांचा सुझाइए। (250 शब्द)