अनिवार्य धार्मिक आचरण (Essential Religious Practices — ERP) सिद्धांत भारतीय संवैधानिक विधि में एक महत्त्वपूर्ण और विवादास्पद न्यायिक परीक्षण है। यह निर्धारित करता है कि कोई धार्मिक आचरण धर्म का ‘अनिवार्य’ हिस्सा है या नहीं — और इसी आधार पर तय होता है कि उसे अनुच्छेद 25 और 26 के तहत संवैधानिक संरक्षण मिलेगा या नहीं।
अनुच्छेद 25 और 26
- अनुच्छेद 25: अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार। यह सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और नैतिकता के अधीन है।
- अनुच्छेद 26: धार्मिक समुदायों को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने, धार्मिक संस्थाएँ स्थापित करने का अधिकार।
ERP सिद्धांत की उत्पत्ति
श्रीरामचंद्र दास बनाम पुरी जगन्नाथ मंदिर (1954) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने पहली बार कहा कि केवल वे धार्मिक आचरण जो धर्म के ‘अनिवार्य अंग’ हैं, संवैधानिक संरक्षण के पात्र हैं। जो आचरण धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं, उन पर राज्य नियंत्रण कर सकता है।
प्रमुख न्यायिक निर्णय
- शिर्डी साईं बाबा संस्थान मामला: मंदिर प्रबंधन पर राज्य नियंत्रण वैध।
- सबरीमाला मामला (2018): 10–50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध ERP है या नहीं — बहुमत ने कहा यह अनिवार्य नहीं; अल्पमत ने असहमति जताई। 9 न्यायाधीशों की पीठ को संदर्भित।
- तीन तलाक मामला (2017): तलाक-ए-बिद्दत (तीन तलाक) ERP नहीं — असंवैधानिक।
- दाऊदी बोहरा मामला (2022): समुदाय बहिष्कार ERP का हिस्सा नहीं।
ERP सिद्धांत की आलोचनाएँ
- न्यायपालिका धर्मशास्त्र की व्याख्या करने की उचित स्थिति में नहीं।
- ‘अनिवार्यता’ का निर्धारण धर्म के अनुयायियों को नहीं, न्यायाधीशों को करने देना समस्याजनक।
- विभिन्न सम्प्रदायों में एक ही धर्म की ‘अनिवार्यता’ भिन्न हो सकती है।
- ERP परीक्षण अल्पसंख्यक धर्मों पर असमान रूप से लागू।
ERP और धर्मनिरपेक्षता
ERP सिद्धांत भारतीय धर्मनिरपेक्षता की ‘सकारात्मक तटस्थता’ की विशेषता को दर्शाता है — राज्य धर्म से पूरी तरह अलग नहीं, बल्कि सामाजिक बुराइयों को दूर करने में हस्तक्षेप करता है।
यूपीएससी के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु
- ERP = केवल ‘अनिवार्य’ धार्मिक आचरण को संवैधानिक संरक्षण।
- अनुच्छेद 25 और 26।
- उत्पत्ति: रामचंद्र दास 1954।
- सबरीमाला 2018 और तीन तलाक 2017 — प्रमुख निर्णय।
- आलोचना: न्यायिक धर्मशास्त्र, असमान अनुप्रयोग।
सामान्य प्रश्न
ERP सिद्धांत क्या है?
ERP (Essential Religious Practices) सिद्धांत के अनुसार केवल वे धार्मिक आचरण जो धर्म का अनिवार्य अंग हैं, अनुच्छेद 25-26 के तहत संवैधानिक संरक्षण पाते हैं।
सबरीमाला मामले में ERP सिद्धांत कैसे लागू हुआ?
2018 में सर्वोच्च न्यायालय के बहुमत ने कहा कि 10-50 वर्ष की महिलाओं पर प्रतिबंध ERP नहीं है, इसलिए असंवैधानिक। परंतु 9 न्यायाधीशों की पीठ को ERP सिद्धांत की पुनर्समीक्षा के लिए संदर्भित किया गया।