UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

भारत के GI टैग: यूपीएससी हेतु राज्य-वार पूर्ण सूची (2026 अद्यतन)

2026 तक भारत में 658+ पंजीकृत GI टैग हैं। तमिलनाडु शीर्ष पर; राज्य-वार पूर्ण सूची, श्रेणी-वार विभाजन, 2024-25 के हाल जोड़, TRIPS ढाँचा और भौगोलिक संकेतक प्रणाली का यूपीएससी विश्लेषण।

GI Tags of India — featured image

2026 की शुरुआत तक भारत में 658 पंजीकृत भौगोलिक संकेतक (GI) टैग हो चुके हैं — अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच 23 नए जुड़े। दार्जिलिंग चाय को 2004 में भारत का पहला GI मिले दो दशक बाद आज GI रजिस्ट्री तमिलनाडु के कांचीपुरम रेशम से लेकर मणिपुर के काले चावल तक को संरक्षण देती है, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में हज़ारों करोड़ रुपये मूल्य के पारंपरिक ज्ञान की रक्षा करती है।

उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु ने उत्तर प्रदेश को पीछे छोड़ते हुए सर्वाधिक GI टैग (56) वाले राज्य का स्थान ले लिया है; इसके बाद उत्तर प्रदेश (51) और महाराष्ट्र (41) हैं।

यूपीएससी की दृष्टि से GI टैग सामान्य अध्ययन पेपर I (कला एवं संस्कृति), पेपर III (अर्थव्यवस्था, कृषि) और पेपर IV (विरासत-नीतिशास्त्र) — तीनों में आते हैं। 2019 की प्रारंभिक परीक्षा में GI-टैग उत्पादों पर सीधा प्रश्न पूछा गया था। यह कोई गौण विषय नहीं है।

GI टैग क्या है?

भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication — GI) किसी उत्पाद पर प्रयुक्त ऐसा नाम या चिह्न है, जो उसे किसी विशिष्ट भौगोलिक स्थान से सम्बद्ध दर्शाता है — जहाँ उत्पाद की गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशेषता उसी मूल-स्थान पर निर्भर हो।

भारत में विधिक आधार: वस्तुओं का भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 — जो 15 सितंबर 2003 से प्रभावी हुआ। पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक के कार्यालय के अधीन चेन्नई स्थित GI रजिस्ट्री इसका संचालन करती है।

अंतर्राष्ट्रीय ढाँचा

वैश्विक स्तर पर GI संरक्षण के मुख्य आधार —

  • TRIPS समझौता (1994) — बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के व्यापार-सम्बद्ध पहलू; भारत WTO सदस्य (1995) के रूप में हस्ताक्षरकर्ता
  • पेरिस कन्वेंशन (1883) — औद्योगिक सम्पदा के संरक्षण हेतु
  • मैड्रिड समझौता (1891) — मिथ्या स्रोत-संकेतों के विरुद्ध
  • लिस्बन समझौता (1958) — मूल-स्थल नामकरण हेतु (भारत हस्ताक्षरकर्ता नहीं है)

पंजीकरण के दो विकल्प

  • वर्ग I — GI: किसी भौगोलिक संकेतक के प्रथम पंजीकरण हेतु
  • वर्ग II — अधिकृत उपयोगकर्ता: GI के उपयोग हेतु अधिकृत निर्माताओं/व्यापारियों के लिए

वैधता: GI पंजीकरण 10 वर्षों के लिए वैध, अनंत बार नवीकरणीय

शीर्ष GI-टैग राज्य (2026 क्रम)

भारत के शीर्ष 10 GI राज्य 2026 — तमिलनाडु 56, UP 51, महाराष्ट्र 41
2026 की GI रैंकिंग में तमिलनाडु शीर्ष पर, 56 पंजीकृत उत्पादों के साथ।
क्रमराज्य/केंद्रशासितGI संख्याउल्लेखनीय उत्पाद
1तमिलनाडु56कांचीपुरम रेशम, तंजावुर चित्रकला, मदुरै मल्ली, नीलगिरि चाय
2उत्तर प्रदेश51बनारसी साड़ी, लखनऊ चिकन, इलाहाबादी सुरखा, आगरा पेठा
3महाराष्ट्र41पैठणी, अल्फांसो आम, नागपुर संतरा, कोल्हापुरी चप्पल
4कर्नाटक40मैसूर रेशम, बिदरीवर्क, मैसूर पाक, कूर्ग संतरा
5ओडिशा28ओडिशा पट्टचित्र, कोणार्क पत्थर-उत्कीर्णन, ओडिशा रसगोला
6आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना27पोचमपल्ली इकत, तिरुपति लड्डू, बंजारा कढ़ाई
7पश्चिम बंगाल25दार्जिलिंग चाय, नक्शी कांथा, बंगाल रसगोला
8केरल22अरण्मुला कण्णादि, पालक्काड मट्टा चावल, वज़हकुलम अनानास
9राजस्थान20मोलेला मृदा-शिल्प, बीकानेरी भुजिया, राजस्थानी कठपुतली
10गुजरात18अजरख, पाटण पटोला, कच्छ कढ़ाई, गिर केसर आम

ये शीर्ष 10 राज्य मिलकर भारत के कुल GI टैग का लगभग 328 (~50%) हिस्सा रखते हैं।

श्रेणी-वार विभाजन

GI टैग श्रेणी-वार विभाजन — हस्तशिल्प 52%, कृषि 30%, खाद्य 7%
अधिनियम के अंतर्गत पाँच GI श्रेणियाँ — हस्तशिल्प 52% के साथ शीर्ष पर।

भारत के GI टैग पाँच मुख्य श्रेणियों में फैले हैं —

1. हस्तशिल्प (342 टैग — 52%)

हस्तशिल्प GI भारत की सर्वाधिक संख्या वाली श्रेणी है। प्रमुख उप-वर्ग —

वस्त्र:

  • कांचीपुरम रेशम (तमिलनाडु) — शाही विवाह-साड़ी
  • बनारसी साड़ी (उत्तर प्रदेश) — मुग़ल-कालीन ब्रोकेड
  • मैसूर रेशम (कर्नाटक) — हथकरघा रेशम
  • पैठणी (महाराष्ट्र) — मोर आकृति
  • पाटण पटोला (गुजरात) — डबल इकत
  • पोचमपल्ली इकत (तेलंगाना) — बंधेज-रंगाई
  • चंदेरी साड़ी (मध्य प्रदेश) — महीन बुनाई
  • कानी शॉल (कश्मीर) — ताने-बाने की कलाकृति
  • पश्मीना (जम्मू-कश्मीर) — कश्मीरी ऊन

चित्रकला:

  • मधुबनी चित्रकला (बिहार)
  • तंजावुर चित्रकला (तमिलनाडु)
  • पट्टचित्र (ओडिशा, पश्चिम बंगाल)
  • कलमकारी (आंध्र प्रदेश)
  • वारली चित्रकला (महाराष्ट्र)
  • गोंड चित्रकला (मध्य प्रदेश)
  • चेरियल स्क्रॉल (तेलंगाना)

धातु एवं पत्थर:

  • बिदरीवर्क (कर्नाटक)
  • मुरादाबादी पीतल (उत्तर प्रदेश)
  • जयपुर ब्लू पॉटरी (राजस्थान)
  • खुर्जा पॉटरी (उत्तर प्रदेश)
  • ढोकरा धातु-ढलाई (छत्तीसगढ़)

2. कृषि उत्पाद (197 टैग — 30%)

चावल की किस्में:

  • बासमती चावल (7 उत्तरी राज्य)
  • पोक्काली चावल (केरल)
  • पालक्काड मट्टा चावल (केरल)
  • काला नमक चावल (उत्तर प्रदेश)
  • जीराफूल चावल (छत्तीसगढ़)

फल:

  • दार्जिलिंग चाय (पश्चिम बंगाल) — भारत का पहला GI
  • नीलगिरि चाय (तमिलनाडु)
  • अल्फांसो आम (महाराष्ट्र)
  • गिर केसर आम (गुजरात)
  • नागपुर संतरा (महाराष्ट्र)
  • कूर्ग संतरा (कर्नाटक)
  • वज़हकुलम अनानास (केरल)
  • कश्मीर केसर (जम्मू-कश्मीर, 2020)

मसाले एवं अन्य:

  • गुंटूर सन्नम मिर्च (आंध्र प्रदेश)
  • इथमोझी लम्बा नारियल (तमिलनाडु)
  • कूर्ग इलायची (कर्नाटक)

3. खाद्य उत्पाद (45 टैग — 7%)

  • तिरुपति लड्डू (आंध्र प्रदेश) — विवादास्पद GI
  • बीकानेरी भुजिया (राजस्थान)
  • आगरा पेठा (उत्तर प्रदेश)
  • हैदराबादी हलीम (तेलंगाना)
  • धारवाड़ पेड़ा (कर्नाटक)
  • बंगाल रसगोला एवं ओडिशा रसगोला (अलग-अलग GI!)
  • रतलामी सेव (मध्य प्रदेश)

4. विनिर्मित उत्पाद (18 टैग — 3%)

  • फेनी (गोवा) — अल्कोहलिक पेय
  • मैसूर सैंडल साबुन (कर्नाटक)
  • कानी शॉल (कश्मीर, यहाँ भी वर्गीकृत)
  • बालाघाट चिन्नौर चावल (मध्य प्रदेश)

5. प्राकृतिक उत्पाद (3 टैग)

  • भलिया गेहूँ (गुजरात)
  • कांगड़ा चाय (हिमाचल प्रदेश)
  • दार्जिलिंग चाय (यहाँ भी सूचीबद्ध)

हाल के उल्लेखनीय जोड़ (2024-2025)

अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच 23 नए उत्पादों को GI दर्जा मिला। प्रमुख —

उत्पादराज्यश्रेणी
माजुली मुखौटेअसमहस्तशिल्प (दुनिया का सबसे बड़ा नदी-द्वीप)
काजी नेमूअसमकृषि (विशिष्ट असमी नींबू)
बोडो पारंपरिक वस्त्रअसमहस्तशिल्प
पिठोरा चित्रकलागुजरातहस्तशिल्प
बंदरबन बुनाईपूर्वोत्तर राज्यहस्तशिल्प
बोका चावलअसमकृषि (पारंपरिक चावल)
लांजिया सौरा चित्रकलाओडिशाहस्तशिल्प
कोरापुट काला जीरा चावलओडिशाकृषि

इस अवधि में असम एवं पूर्वोत्तर भारत का सुदृढ़ प्रतिनिधित्व रहा — इनके देशज शिल्पों और उत्पादों को औपचारिक रूप देने की सोची-समझी नीतिगत पहल।

प्रमुख प्रसिद्ध GI उत्पाद (यूपीएससी हेतु अनिवार्य)

यूपीएससी अभ्यर्थी हेतु 16 प्रतिष्ठित GI उत्पाद
यूपीएससी प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा में बार-बार लौटने वाले 16 प्रतिष्ठित GI उत्पाद।

विवादित भौगोलिक संकेतक

बासमती चावल:

  • पंजीकृत: 2008 (7 राज्यों के लिए संयुक्त रूप से: पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली)
  • विवाद: पाकिस्तान का प्रतिस्पर्धी दावा; अमेरिका द्वारा सामान्य (generic) उपयोग के प्रयास; EU पंजीकरण
  • निर्यात मूल्य: भारत प्रति वर्ष लगभग $5 अरब मूल्य का बासमती निर्यात करता है — सबसे बड़ा कृषि-निर्यात

दार्जिलिंग चाय:

  • भारत का पहला GI (2004)
  • निर्यात: ~80% EU, ब्रिटेन, जापान को जाता है
  • विवाद: नेपाल की इलम चाय स्वयं को दार्जिलिंग बताने का प्रयास करती है

कश्मीर केसर:

  • 2020 में प्राप्त
  • विशिष्टता: उच्च ऊँचाई (1,600–1,800 मी.) पर उगाया जाने वाला एकमात्र केसर
  • मात्रा: भारत प्रति वर्ष मात्र 6–7 टन, जबकि ईरान ~430 टन

तिरुपति लड्डू:

  • 2009 में प्राप्त — तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को
  • विवाद: 2024 में गुणवत्ता एवं सामग्री सम्बन्धी विवाद
  • वार्षिक बिक्री: प्रतिदिन 30 लाख से अधिक लड्डू

सांस्कृतिक महत्व वाले प्रमुख शिल्प

उत्पादराज्यमहत्व
मधुबनी चित्रकलाबिहारपारंपरिक मैथिली कला; स्त्री-प्रधान
कांचीपुरम रेशमतमिलनाडुविवाह-साड़ी का मानक
मैसूर रेशमकर्नाटकराजसी संरक्षण की विरासत
पश्मीनाजम्मू-कश्मीरचांगथांगी बकरी की ऊन से निर्मित
अजरखगुजरात500 वर्ष पुरानी ब्लॉक-प्रिंटिंग परंपरा
वारली चित्रकलामहाराष्ट्रजनजातीय कला, ज्यामितीय आकृतियाँ

GI पंजीकरण की प्रक्रिया

चेन्नई रजिस्ट्री में 7-चरणीय GI पंजीकरण प्रक्रिया — आवेदन से प्रमाण-पत्र तक
चेन्नई रजिस्ट्री में 7-चरणीय GI पंजीकरण प्रक्रिया।

पंजीकरण की प्रक्रिया कठोर है —

चरण-दर-चरण प्रक्रिया

चरणकार्यसामान्य अवधि
1GI रजिस्ट्री, चेन्नई में आवेदन प्रस्तुतिदिन 0
2प्रारंभिक परीक्षण — औपचारिकता जाँच~3 माह
3रजिस्ट्रार द्वारा विषय-वस्तु परीक्षण~6–12 माह
4विशेषज्ञ समूह से परामर्श (यदि आवश्यक हो)
5GI जर्नल में प्रकाशन
6विरोध की अवधि (3 माह)3 माह
7सुनवाई (यदि विरोध प्राप्त हुआ)आवश्यकतानुसार
8पंजीकरण प्रमाण-पत्र जारी
कुलप्रायः 2–4 वर्ष

कौन आवेदन कर सकता है?

  • वस्तुओं के उत्पादकों का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्तियों, उत्पादकों या संगठनों के संघ
  • सरकारी विभाग
  • संवैधानिक/सांविधिक प्राधिकरण

ध्यान दें: व्यक्तिगत आवेदक सामान्यतः आवेदन नहीं कर सकते — ताकि सामुदायिक सामूहिक लाभ सुनिश्चित हो।

आर्थिक प्रभाव

भारतीय GI द्वारा मूल्य-सृजन

GI उत्पादआर्थिक प्रभाव
बासमती चावलवार्षिक ~$5 अरब निर्यात
दार्जिलिंग चाय~85 लाख किग्रा/वर्ष; प्रीमियम क़ीमतें
पश्मीनाप्रति शॉल ~₹5,000–50,000; कश्मीर अर्थव्यवस्था
कश्मीर केसर~₹1–2 लाख प्रति किग्रा; सबसे महँगा मसाला
अल्फांसो आमप्रीमियम निर्यात फ़सल; ~₹500–1,500/दर्जन
कुल हस्तशिल्प GIकरोड़ों कारीगरों को रोज़गार

ग्रामीण आजीविका

GI टैग पूरे भारत में लगभग 3–4 करोड़ ग्रामीण कारीगरों एवं उत्पादकों को सीधे लाभान्वित करते हैं — विशेषकर —

  • वस्त्र-उत्पादक क्षेत्र
  • कृषि-प्रधान क्षेत्र
  • जनजातीय एवं देशज समुदाय
  • पारंपरिक शिल्प-समूह

भारत की GI यात्रा: समयरेखा (1999–2026)

भारत की GI कथा 27 वर्षों में फैली है — 1999 में TRIPS दायित्वों को पूरा करने के लिए पारित एक IP अधिनियम से लेकर 2026 में 658 संरक्षित उत्पादों की रजिस्ट्री तक। आठ पड़ाव इस यात्रा को परिभाषित करते हैं।

भारत की GI यात्रा 1999–2026 — 8 पड़ावों में, अधिनियम से 658 टैग तक
1999 के अधिनियम से 2026 तक भारत की GI यात्रा के 8 पड़ाव।

अब यह गति नीति-आधारित है — एक जिला एक उत्पाद (ODOP) पहल, वाणिज्य मंत्रालय द्वारा प्रारंभ GI एटलस, और उद्योग विभाग का 2030 तक 10,000 GI टैग का लक्ष्य — ये सब मिलकर शिल्प-समूहों को, विशेषकर पूर्वोत्तर के, रजिस्ट्री की ओर ले जा रहे हैं।

GI बनाम ट्रेडमार्क बनाम पेटेंट बनाम कॉपीराइट

GI अक्सर अन्य प्रकार की बौद्धिक सम्पदा से घुलमिल जाता है। यूपीएससी अक्सर इनमें भेद करने को कहता है। तुलनात्मक तालिका —

विशेषताभौगोलिक संकेतक (GI)ट्रेडमार्कपेटेंटकॉपीराइट
क्या परिभाषित करता हैमूल-स्थल आधारित गुणवत्ताब्रांड पहचानआविष्कार/प्रौद्योगिकीसृजनात्मक अभिव्यक्ति
स्वामीउत्पादकों का समुदायव्यक्ति/कम्पनीआविष्कारक/समनुदेशितीलेखक/सृजनकर्ता
वैधता10 वर्ष, सदा नवीकरणीय10 वर्ष, सदा नवीकरणीय20 वर्ष, अ-नवीकरणीयजीवनकाल + 60 वर्ष
हस्तांतरणीयनहीं (सामूहिक अधिकार)हाँहाँहाँ
भारत में विधिGI Act, 1999Trade Marks Act, 1999Patents Act, 1970Copyright Act, 1957
भारतीय उदाहरणदार्जिलिंग चायअमूलCSIR हल्दी प्रकरणटैगोर की रचनाएँ

मुख्य अंतर: ट्रेडमार्क बताता है कि उत्पाद किसने बनाया; GI बताता है कि वह कहाँ बना और वहाँ की किस पारंपरिक गुणवत्ता से जुड़ा है। GI बेचा या लाइसेंस के रूप में हस्तांतरित नहीं किया जा सकता — वह परिभाषित क्षेत्र के उत्पादक-समुदाय का है।

वैश्विक GI मानक

भारत के 658 GI यूरोप के सामने साधारण लगते हैं, जहाँ GI कृषि-निर्यात नीति का स्तम्भ है। यूपीएससी मुख्य परीक्षा के उत्तरों में बार-बार उद्धृत होने वाले वैश्विक GI प्रतीक —

उत्पाददेश/क्षेत्रश्रेणीसंरक्षण कब से
शैम्पेनफ्रांस (शैम्पेन क्षेत्र)स्पार्कलिंग वाइन1936 (AOC)
रॉकफ़ोर्टफ्रांस (एवेरॉं)ब्लू चीज़1925 — विश्व का पहला PDO
पर्मा हैमइटलीसूखा मांस1963
परमिज़ियानो-रेज्जानोइटलीहार्ड चीज़1955
स्कॉच व्हिस्कीस्कॉटलैंड, ब्रिटेनमदिरा1933 / 2008 (PGI)
टकीलामेक्सिको (हालिस्को)मदिरा1974 (लिस्बन)
दार्जिलिंग चायभारत (पश्चिम बंगाल)चाय2004
कोबे बीफ़जापान (ह्योगो)गौमांस2007
Café de Colombiaकोलम्बियाकॉफ़ी2007 (EU PGI)

अकेले EU के पास 3,500 से अधिक GI-संरक्षित उत्पाद हैं, जिनका कुल वार्षिक मूल्य €75+ अरब है। भारत की GI अर्थव्यवस्था अभी इसकी एक अंश मात्र है।

मील के पत्थर IP प्रकरण, जिन्होंने भारत के GI क़ानून को आकार दिया

1990 के दशक की जैव-चोरी (biopiracy) विवादों की एक शृंखला ने भारत के GI तंत्र को तराशा — जब अमेरिकी कम्पनियों ने भारतीय पारंपरिक ज्ञान से व्युत्पन्न उत्पादों पर पेटेंट ले लिए। इन्हीं प्रकरणों ने संसद को GI अधिनियम, 1999 लागू करने की ओर प्रेरित किया।

1. हल्दी पेटेंट प्रकरण (1995–1997)

अमेरिकी पेटेंट एवं ट्रेडमार्क कार्यालय ने मिसिसिपी विश्वविद्यालय चिकित्सा केंद्र के शोधकर्ताओं को “घाव भरने में हल्दी का उपयोग” हेतु Patent No. 5,401,504 दिया — एक ऐसा ज्ञान, जो भारतीय घरों में सहस्राब्दियों से प्रचलित था। डॉ. आर. ए. माशेलकर के नेतृत्व में CSIR ने प्राचीन संस्कृत ग्रंथों से 32 संदर्भों सहित पुनर्परीक्षण याचिका दायर की। पेटेंट 1997 में निरस्त कर दिया गया — पारंपरिक ज्ञान पर अमेरिकी पेटेंट को किसी विकासशील देश द्वारा दी गई पहली सफल चुनौती।

2. नीम पेटेंट प्रकरण (1995–2005)

अमेरिकी कंपनी W.R. Grace और USDA ने नीम के तेल से व्युत्पन्न एक फफूंदनाशक पर पेटेंट ले लिया। भारत ने यूरोपीय पेटेंट कार्यालय में इसे चुनौती दी, यह तर्क देते हुए कि नीम के फफूंद-रोधी गुण प्राचीन पारंपरिक ज्ञान हैं। 10 वर्षों की लड़ाई के बाद EPO ने 2005 में पेटेंट निरस्त किया।

3. बासमती चावल प्रकरण (1997–2001)

टेक्सास की RiceTec Inc. ने “Basmati rice lines and grains” हेतु अमेरिकी पेटेंट (5,663,484) प्राप्त कर लिया — अर्थात् अमेरिका में उगाए गए चावल को ‘बासमती’ कहने का अधिकार। भारत की आपत्ति से 2001 तक 20 में से 15 दावे निरस्त हो गए। यही प्रकरण भारत को GI अधिनियम लागू करने और बासमती को GI के रूप में (2016 में 7 उत्तरी राज्यों के लिए) पंजीकृत कराने का निर्णायक कारण बना।

4. दार्जिलिंग चाय बनाम फ्रांस (2003)

फ्रांसीसी सौंदर्य-प्रसाधन कंपनी Jean-Claude Dupuis ने महिलाओं के अंतर्वस्त्र एवं पोशाकों पर “Darjeeling” को ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत करवाने का प्रयास किया। भारत के चाय बोर्ड ने सफलतापूर्वक आपत्ति की और पंजीकरण रोका — यह दर्शाता हुआ कि जब प्रतिष्ठा का प्रभाव फैलता है, तो GI संरक्षण खाद्य श्रेणी के परे भी जाता है।

5. रसगोला विवाद — ओडिशा बनाम पश्चिम बंगाल (2017–2018)

एक दुर्लभ अंतर-भारतीय GI विवाद। 2017 में पश्चिम बंगाल को “बंगलार रसगुल्ला” के लिए GI मिला; 2018 में ओडिशा को “ओडिशा रसगोला” के लिए। रजिस्ट्री ने स्वीकारा कि दोनों राज्यों के व्यंजन एवं परंपराएँ अलग हैं — और यह पूर्व-उदाहरण स्थापित हुआ कि दो समानांतर GI सह-अस्तित्व में रह सकते हैं, जब मूल परंपराएँ स्पष्ट रूप से भिन्न हों।

राज्य-वार त्वरित सूचकांक

किसी भी GI-टैग उत्पाद को उसके राज्य से जोड़ने हेतु यह संक्षिप्त संदर्भ उपयोग करें — प्रारंभिक परीक्षा के ‘मिलान करें’ प्रश्नों के लिए आवश्यक —

राज्यविशिष्ट GI (प्रारंभिक परीक्षा में प्रिय)
तमिलनाडुकांचीपुरम रेशम, तंजावुर चित्रकला, मदुरै मल्ली, नीलगिरि चाय, इथमोझी नारियल
उत्तर प्रदेशबनारसी साड़ी, लखनऊ चिकन, आगरा पेठा, मुरादाबादी पीतल, खुर्जा पॉटरी, काला नमक चावल
महाराष्ट्रपैठणी, अल्फांसो आम, नागपुर संतरा, कोल्हापुरी चप्पल, वारली चित्रकला
कर्नाटकमैसूर रेशम, बिदरीवर्क, मैसूर सैंडल साबुन, कूर्ग संतरा, धारवाड़ पेड़ा
ओडिशापट्टचित्र, कोणार्क पत्थर-उत्कीर्णन, ओडिशा रसगोला, लांजिया सौरा चित्रकला
आंध्र प्रदेश एवं तेलंगानापोचमपल्ली इकत, तिरुपति लड्डू, हैदराबादी हलीम, कलमकारी, चेरियल स्क्रॉल
पश्चिम बंगालदार्जिलिंग चाय, नक्शी कांथा, बंगाल रसगोला
केरलअरण्मुला कण्णादि, पालक्काड मट्टा चावल, वज़हकुलम अनानास, पोक्काली चावल
राजस्थानमोलेला मृदा-शिल्प, बीकानेरी भुजिया, ब्लू पॉटरी, कठपुतली
गुजरातअजरख, पाटण पटोला, कच्छ कढ़ाई, गिर केसर, भलिया गेहूँ, पिठोरा चित्रकला
बिहारमधुबनी चित्रकला, शाही लीची, कतरनी चावल, भागलपुरी रेशम
जम्मू एवं कश्मीरकश्मीर केसर, पश्मीना, कानी शॉल, अखरोट-लकड़ी की नक्काशी
मध्य प्रदेशचंदेरी साड़ी, गोंड चित्रकला, रतलामी सेव, बालाघाट चिन्नौर चावल
असममूगा रेशम, माजुली मुखौटे, काजी नेमू, बोका चावल, बोडो वस्त्र
हिमाचल प्रदेशकांगड़ा चाय, कुल्लू शॉल, चंबा रुमाल
गोवाफेनी, खाजा
छत्तीसगढ़ढोकरा धातु-ढलाई, जीराफूल चावल, बस्तर लौह-शिल्प

चुनौतियाँ एवं मुद्दे

क्रियान्वयन में कमियाँ

कम जागरूकता:

  • अनेक उत्पादक GI के लाभ से अनभिज्ञ
  • ख़रीदार अक्सर नहीं जानते कि “GI” लेबल संरक्षित है
  • सामान्य बाज़ार-प्रतिस्पर्धा GI उत्पादों को प्रभावित करती है

कमज़ोर प्रवर्तन:

  • नक़ली उत्पाद बाज़ार में बहुतायत में
  • स्थानीय स्तर पर सीमित विधिक अवसंरचना
  • नक़ली निर्यातों के विरुद्ध सीमा-शुल्क प्रवर्तन कमज़ोर

लाभ का वितरण:

  • प्रायः मध्यस्थ (बिचौलिए) अधिकांश GI प्रीमियम हड़प लेते हैं
  • उत्पादकों की बाज़ार तक सीधी पहुँच सीमित
  • अंतर-राज्यीय विवाद (जैसे बंगाल बनाम ओडिशा रसगोला)

अंतर्राष्ट्रीय विवाद

पाकिस्तान का बासमती दावा:

  • पाकिस्तान ने EU में बासमती के GI मान्यता हेतु आवेदन किया
  • साझा विरासत पर भारत के साथ विवाद
  • WTO-स्तर की चल रही जटिलताएँ

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य उपयोग:

  • कुछ देशों में “दार्जिलिंग” सामान्य शब्द के रूप में बिक रहा है
  • EU में GI संरक्षण अपेक्षाकृत मज़बूत; अमेरिका में कमज़ोर
  • विदेशी अधिकार-क्षेत्रों में विधिक लड़ाइयाँ महँगी

विधिक रिक्तियाँ

अंतर-राज्य GI:

  • रसगोला विवाद: बंगाल रसगोला (2017) बनाम ओडिशा रसगोला (2019) — दोनों प्रदान किए गए
  • साझा विरासत के संरक्षण हेतु पूर्व-उदाहरण
  • संकेत देता है कि रजिस्ट्री समानांतर क्षेत्रीय GI स्वीकार करती है

सरकारी पहल

GI उत्पादों हेतु सहायक योजनाएँ

योजनाकेंद्र-बिंदु
GI पंजीकरण शुल्क छूटकारीगर-समूहों के लिए
एक जिला एक उत्पाद (ODOP)स्थानीय GI-पात्र उत्पादों को प्रोत्साहन
MSME GI प्रोत्साहनब्रांडिंग हेतु वित्तीय सहायता
GeM (सरकारी ई-बाज़ार)GI उत्पादों को प्राथमिकता
डिजिटल इंडियाGI हेतु ऑनलाइन बाज़ार
निर्यात हेतु व्यापार अवसंरचना योजना (TIES)GI निर्यात प्रोत्साहन

2030 तक 10,000 GI टैग का लक्ष्य

वाणिज्य मंत्रालय ने महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है —

  • वर्तमान: 658 (2026)
  • लक्ष्य: 2030 तक 10,000
  • आवश्यकता: प्रति वर्ष ~2,300 नए GI पंजीकरण

इस लक्ष्य की आलोचना अव्यावहारिक के रूप में हुई है, पर यह GI संरक्षण के नाटकीय विस्तार की सरकारी मंशा को दर्शाता है।

TRIPS समझौता एवं GI संरक्षण

TRIPS क्या प्रदान करता है

TRIPS समझौता (1994) बौद्धिक सम्पदा संरक्षण हेतु वैश्विक न्यूनतम मानक निर्धारित करता है —

  • अनुच्छेद 22: मूल GI संरक्षण
  • अनुच्छेद 23: वाइन एवं मदिरा हेतु उन्नत संरक्षण
  • अनुच्छेद 24: सामान्य (generic) शब्दों हेतु अपवाद

आलोचना: TRIPS वाइन एवं मदिरा (जैसे शैम्पेन, कोन्याक) को उच्चतर संरक्षण देता है, अन्य GI को नहीं। भारत ने “समान व्यवहार” की माँग की है — ताकि बासमती, दार्जिलिंग और हस्तशिल्पों को भी वाइन-स्तर का संरक्षण मिल सके।

भारत का पक्ष

WTO में भारत ने लगातार निम्नलिखित की वकालत की है —

  • अनुच्छेद 23 संरक्षण का विस्तार — सभी GI तक (केवल वाइन नहीं)
  • सभी उत्पादों हेतु बहुपक्षीय GI रजिस्टर
  • जैव-चोरी रोकने हेतु प्रकटीकरण आवश्यकताएँ
  • पेटेंटों पर भौगोलिक-मूल लेबलिंग

ये माँगें व्यापक दोहा विकास दौर (Doha Development Round) की चर्चाओं का हिस्सा हैं।

यूपीएससी तैयारी मार्गदर्शिका

प्रारंभिक परीक्षा — अनिवार्य तथ्य

श्रेणीमुख्य तथ्य
कुल GI टैग658 (2026)
पहला GI टैगदार्जिलिंग चाय (2004)
अग्रणी राज्यतमिलनाडु (56)
GI रजिस्ट्री का स्थानचेन्नई
मुख्य अधिनियमभौगोलिक संकेतक (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999
प्रभावी तिथि15 सितंबर, 2003
वैधता10 वर्ष, अनंत बार नवीकरणीय
अंतर्राष्ट्रीय ढाँचाTRIPS समझौता, 1994 (WTO)

प्रारंभिक परीक्षा हेतु प्रसिद्ध जोड़े

उत्पादराज्यश्रेणी
दार्जिलिंग चायपश्चिम बंगालकृषि
बासमती चावलअनेक उत्तरी राज्यकृषि
कांचीपुरम रेशमतमिलनाडुहस्तशिल्प
बनारसी साड़ीउत्तर प्रदेशहस्तशिल्प
मैसूर रेशमकर्नाटकहस्तशिल्प
अल्फांसो आममहाराष्ट्रकृषि
कश्मीर केसरजम्मू-कश्मीरकृषि (2020)
पश्मीनाजम्मू-कश्मीरहस्तशिल्प
पट्टचित्रओडिशा, पश्चिम बंगालहस्तशिल्प
मधुबनी चित्रकलाबिहारहस्तशिल्प
फेनीगोवाविनिर्मित
नागपुर संतरामहाराष्ट्रकृषि
कूर्ग इलायचीकर्नाटककृषि
पैठणीमहाराष्ट्रहस्तशिल्प
तंजावुर चित्रकलातमिलनाडुहस्तशिल्प

मुख्य परीक्षा — संभावित विषय

  • GI टैग एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तीकरण
  • पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण
  • GI बनाम ब्रांडेड/ट्रेडमार्क उत्पाद
  • अंतर-राज्यीय GI विवाद
  • अंतर्राष्ट्रीय GI वार्ताएँ (TRIPS)
  • GI एवं सांस्कृतिक विरासत
  • GI प्रवर्तन की चुनौतियाँ

निबंध के लिए विषय

  • “बौद्धिक सम्पदा एवं सांस्कृतिक विरासत: एक नाज़ुक संतुलन”
  • “वैश्वीकृत बाज़ार में पारंपरिक ज्ञान”
  • “GI टैग — ग्रामीण आर्थिक सशक्तीकरण का उपकरण”

GI टैग पर हाल के यूपीएससी प्रश्न

यूपीएससी प्रारंभिक 2019: निम्नलिखित में से कौन-से GI टैग से प्रसिद्ध रूप से जुड़े हैं? (विकल्पों में — कांगड़ा चाय, फुलकारी इत्यादि।)

यूपीएससी प्रारंभिक 2017: निम्नलिखित में से कौन-से संरक्षित क्षेत्र कावेरी बेसिन में स्थित हैं? (GI-सम्बन्धी प्रश्नों की विविधताएँ)

यूपीएससी मुख्य — GS3: “ग्रामीण भारत में आर्थिक सशक्तीकरण के उपकरण के रूप में बौद्धिक सम्पदा अधिकार।”

सामान्य प्रश्न

GI और ट्रेडमार्क में क्या अंतर है?

ट्रेडमार्क किसी विशिष्ट व्यवसाय/कंपनी की पहचान करता है। GI किसी विशिष्ट भौगोलिक मूल-स्थल के उत्पादों की पहचान करता है, और उस क्षेत्र के अनेक उत्पादक — जो मानकों पर खरे उतरें — उसका उपयोग कर सकते हैं।

क्या GI संरक्षण वापस लिया जा सकता है?

हाँ — यदि उत्पाद अपनी विशिष्टता खो दे या मूल-स्थल की शर्तें क़ायम न रहें, तो उचित प्रक्रिया के बाद पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।

क्या GI एकाधिकार देता है?

नहीं। यह उस भौगोलिक क्षेत्र के उत्पादकों को नाम के उपयोग का अनन्य अधिकार देता है, जो गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरें। उस क्षेत्र में मानकों पर खरा उतरने वाला कोई भी व्यक्ति अधिकृत उपयोगकर्ता के रूप में पंजीकरण करा सकता है।

जब दो राज्य एक ही GI पर दावा करें, तो क्या होता है?

GI रजिस्ट्री ऐतिहासिक मूल-स्थल के प्रमाणों की जाँच करती है। रसगोला प्रकरण में बंगाल एवं ओडिशा — दोनों को अलग-अलग GI मिले, जो समानांतर परंपराओं की पहचान है।

कितने देशों के पास GI प्रणाली है?

170 से अधिक WTO सदस्य देशों के पास किसी-न-किसी रूप में GI संरक्षण है। EU की प्रणाली सबसे मज़बूत है। अमेरिका इसके बदले ट्रेडमार्क/प्रमाणन चिह्नों का उपयोग करता है।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

Recognized as one of India’s best content marketers, Gaurav Tiwari is an SEO strategist, WordPress developer, and founder of Gatilab. He builds websites that load in under a second, creates content that ranks on Google’s first page, and develops WordPress plugins and tools used on thousands of live sites.

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