भारत में भाषायी राज्यों के पुनर्गठन के बाद से कई राज्यों के बीच सीमा विवाद चले आ रहे हैं। ये विवाद कभी-कभी हिंसक भी हो जाते हैं। यूपीएससी में यह विषय GS II (शासन) और GS I (भारतीय समाज) दोनों में प्रासंगिक है।
सीमा विवादों के कारण
- भाषायी पुनर्गठन — 1956 के राज्य पुनर्गठन आयोग ने भाषा को आधार बनाया; कई क्षेत्रों में भाषायी मिश्रण था।
- ऐतिहासिक दावे — औपनिवेशिक काल की सीमाएँ अस्पष्ट थीं।
- संसाधन विवाद — नदी जल, खनिज, वन।
- जनजातीय पहचान — आदिवासी समुदायों की सीमा-पार उपस्थिति।
- राजनीतिक कारण — चुनावी लाभ के लिए क्षेत्रीय दावे।
प्रमुख विवाद
कर्नाटक-महाराष्ट्र (बेलगावी)
बेलगावी (बेलगाम) शहर को लेकर दोनों राज्यों में विवाद है। महाराष्ट्र का दावा है कि यहाँ मराठी भाषी बहुमत है। सर्वोच्च न्यायालय में मामला लंबित है।
असम-मिज़ोरम
2021 में दोनों राज्यों की पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई जिसमें असम के 6 पुलिसकर्मी शहीद हुए। यह भारत की सबसे गंभीर अंतर-राज्यीय हिंसाओं में से एक थी।
हरियाणा-हिमाचल प्रदेश
परवाणू और कालका क्षेत्र को लेकर विवाद।
उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड
उत्तराखंड बनने के बाद से कई क्षेत्रों में विवाद।
निपटारे के तंत्र
- अनुच्छेद 263 — अंतर-राज्यीय परिषद।
- अनुच्छेद 131 — सर्वोच्च न्यायालय का मूल अधिकारिता।
- बातचीत — दोनों राज्यों के बीच सीधी बातचीत।
- केंद्रीय मध्यस्थता — गृह मंत्रालय की भूमिका।
यूपीएससी प्रासंगिकता
GS II में अंतर-राज्यीय सम्बन्ध, सहकारी संघवाद और विवाद निपटारे पर प्रश्न पूछे जाते हैं।