UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

भारत में चुनावों का राजकीय वित्त पोषण — तर्क, समितियाँ एवं यूपीएससी नोट्स

चुनावों को सरकारी धन से वित्तपोषित करने का विचार काले धन और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए प्रस्तावित है। इंद्रजीत गुप्त समिति ने आंशिक राजकीय वित्तपोषण की सिफारिश की थी।

State Funding of Elections in India — Arguments, Committees & UPSC Notes — UPSC featured image

भारत में चुनाव बेहद महँगे होते हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में अनुमानित 60,000 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिससे यह दुनिया का सबसे महँगा चुनाव बन गया। इस भारी खर्च को पूरा करने के लिए उम्मीदवार और पार्टियाँ प्रायः अवैध धन पर निर्भर होती हैं, जो भ्रष्टाचार का एक प्रमुख कारण है। इसी पृष्ठभूमि में चुनावों के राजकीय वित्त पोषण (State Funding of Elections) की अवधारणा उभरी है।

राजकीय वित्त पोषण का अर्थ

राजकीय वित्त पोषण का अर्थ है सरकारी खजाने से राजनीतिक दलों और/या उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए धन प्रदान करना। यह दो प्रकार का हो सकता है:

  • प्रत्यक्ष वित्त पोषण — सरकार सीधे नकद या चेक देती है।
  • अप्रत्यक्ष वित्त पोषण — मुफ्त मीडिया समय, प्रिंटिंग सुविधाएँ, आधिकारिक वाहन आदि।

इंद्रजीत गुप्त समिति (1998)

चुनाव सुधार पर गठित इंद्रजीत गुप्त समिति ने आंशिक राजकीय वित्त पोषण की सिफारिश की। समिति के प्रमुख सुझाव:

  • केवल मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पार्टियों को वित्त पोषण।
  • वित्त पोषण पिछले चुनाव में मिले मतों के आधार पर।
  • वित्त पोषण नकद में नहीं बल्कि वस्तु-रूप (in-kind) में।
  • इसे सम्पूर्ण समाधान नहीं माना जाए।

विधि आयोग की सिफारिशें

विधि आयोग ने भी राजकीय वित्त पोषण का समर्थन किया, लेकिन साथ में कड़ी शर्तें भी सुझाईं:

  • पार्टियों के खातों की कड़ी ऑडिटिंग।
  • उम्मीदवारों द्वारा संपत्ति का पूर्ण प्रकटीकरण।
  • आपराधिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करना।

पक्ष में तर्क

  • काले धन पर निर्भरता कम होगी।
  • गरीब लेकिन योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर।
  • राजनीतिक दलों की कॉर्पोरेट और धनाढ्य वर्ग पर निर्भरता घटेगी।
  • चुनावी भ्रष्टाचार में कमी।

विपक्ष में तर्क

  • करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग।
  • मौजूदा पार्टियों को लाभ, नई पार्टियों के लिए बाधा।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना कठिन।
  • खर्च की सीमा लागू करना मुश्किल।

वर्तमान स्थिति

भारत में अभी तक पूर्ण राजकीय वित्त पोषण लागू नहीं हुआ है। 2018 में चुनावी बॉन्ड (Electoral Bond) योजना शुरू की गई, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने 2024 में इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया।

यूपीएससी प्रासंगिकता

यूपीएससी GS II में चुनाव सुधार, भ्रष्टाचार और राजनीतिक वित्त पारदर्शिता के प्रश्नों में यह विषय महत्त्वपूर्ण है।

सामान्य प्रश्न

राजकीय वित्त पोषण क्या है?

राजकीय वित्त पोषण वह व्यवस्था है जिसमें सरकार राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए सरकारी धन देती है। यह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार का हो सकता है।

इंद्रजीत गुप्त समिति की सिफारिशें क्या थीं?

1998 की इंद्रजीत गुप्त समिति ने आंशिक राजकीय वित्त पोषण की सिफारिश की थी — केवल मान्यता प्राप्त पार्टियों को, पिछले चुनाव में मिले मतों के आधार पर, वस्तु-रूप में।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

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