भारत का मुर्गीपालन क्षेत्र (Poultry Sector) पशुपालन के भीतर सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है, जो वार्षिक 8-10% की दर से विस्तार कर रहा है। भारत विश्व में तीसरा सबसे बड़ा अंडा उत्पादक और पाँचवाँ सबसे बड़ा ब्रॉयलर (चिकन मांस) उत्पादक है। मुर्गीपालन सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 1.3% योगदान देता है और 3 करोड़ से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है, जिनमें छोटे और सीमांत किसान, महिलाएँ और घरेलू पालक शामिल हैं।
पृष्ठभूमि: भारत में मुर्गीपालन का उदय
मुर्गीपालन पिछले तीन दशकों में पिछवाड़े की गतिविधि से एक वैज्ञानिक, वाणिज्यिक और ऊर्ध्वाधर एकीकृत (Vertically-integrated) उद्योग में बदल गया है। प्रति व्यक्ति अंडे की खपत 2010 में 30 से भी कम से बढ़कर 2023-24 में 103 अंडे प्रति वर्ष हो गई, जबकि मुर्गी मांस की प्रति व्यक्ति खपत लगभग 4.4 किग्रा पहुँची। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और हरियाणा वाणिज्यिक मुर्गीपालन में अग्रणी हैं।
प्रमुख संकेतक:
- अंडा उत्पादन: 2022-23 में लगभग 1,380 करोड़ अंडे।
- ब्रॉयलर उत्पादन: लगभग 45 लाख मीट्रिक टन।
मुर्गीपालन क्षेत्र की संरचना
| प्रकार | विशेषताएँ |
|---|---|
| बैकयार्ड मुर्गीपालन | छोटे किसान, देसी नस्लें, कम लागत, खाद्य सुरक्षा और महिला सशक्तीकरण |
| अर्ध-वाणिज्यिक | मध्यम पैमाने, स्थानीय बाजार को आपूर्ति |
| वाणिज्यिक/एकीकृत | बड़े उद्यम, अनुबंध खेती, ऊर्ध्वाधर एकीकरण, निर्यात-उन्मुख |
सरकारी योजनाएँ और नीतियाँ
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन: मुर्गीपालन सहित सभी पशुधन क्षेत्रों का विकास।
- मुर्गी पालन विकास की केंद्रीय प्रायोजित योजना: किसानों को वित्तीय सहायता।
- NABARD ऋण: मुर्गीपालन इकाइयों के लिए किफायती ऋण।
- पशु किसान क्रेडिट कार्ड: मुर्गीपालकों को कार्यशील पूँजी ऋण।
प्रमुख चुनौतियाँ
- बर्ड फ्लू (H5N1, H5N8): महामारी का खतरा और पक्षियों की बड़े पैमाने पर हत्या से किसानों को भारी नुकसान।
- फ़ीड लागत में उतार-चढ़ाव: मक्का और सोयाबीन जैसे पोल्ट्री फ़ीड की कीमतें मुनाफे को प्रभावित करती हैं।
- एंटीबायोटिक प्रतिरोध: अत्यधिक एंटीबायोटिक उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम।
- कोल्ड चेन अवसंरचना का अभाव: उत्पादन केंद्रों से उपभोग केंद्रों तक आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरी।
- बाजार उतार-चढ़ाव: मौसमी और त्योहारी मूल्य अस्थिरता।
UPSC के लिए प्रासंगिकता
GS III में मुर्गीपालन क्षेत्र पशुपालन, कृषि आजीविका, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के अंतर्गत प्रासंगिक है। बर्ड फ्लू जूनोटिक रोग और आपदा प्रबंधन के कोण से भी महत्त्वपूर्ण है। अंडे उत्पादन के आँकड़े और राज्यवार वितरण प्रारंभिक परीक्षा में पूछे जाते हैं।