UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

भारत में राष्ट्रीय कृषि बाज़ार (e-NAM) (यूपीएससी अर्थव्यवस्था)

e-NAM 2025: अखिल भारतीय APMC ई-व्यापार, FPO मॉड्यूल, गोदाम-आधारित व्यापार, डिजिटल कृषि मिशन, बजट 2025-26 — यूपीएससी-अनुकूल विश्लेषण।

National Agricultural Market (e-NAM) in India (UPSC Economy) — UPSC featured image

राष्ट्रीय कृषि बाज़ार, जो e-NAM के नाम से विख्यात है, भारत का अखिल-भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व्यापार प्लेटफ़ॉर्म है जो भौतिक APMC मंडियों को एक एकल आभासी बाज़ार में जोड़ता है। अप्रैल 2016 में शुरू किया गया और लघु कृषक कृषि-व्यवसाय संघ (Small Farmers’ Agribusiness Consortium, SFAC) द्वारा संचालित, e-NAM को “एक राष्ट्र, एक कृषि बाज़ार” के डिजिटल ढाँचे के रूप में परिकल्पित किया गया था। एक दशक बाद इसने 25 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की लगभग 1,400 मंडियों को एकीकृत किया है, और अब डिजिटल कृषि मिशन तथा बजट 2025-26 के तहत नए मॉड्यूलों के माध्यम से इसका विस्तार हो रहा है।

e-NAM क्या है?

e-NAM निम्नलिखित तरीक़ों से कृषि जिंसों के लिए एकीकृत ऑनलाइन बाज़ार बनाता है:

  • मौजूदा APMCs को एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म में एकीकृत करना।
  • पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी ऑनलाइन नीलामी सक्षम करना।
  • प्रति व्यापार एकल पंजीकरण, एकल व्यापार-लाइसेंस और एकल-बिंदु बाज़ार-शुल्क वसूली उपलब्ध कराना।
  • गुणवत्ता जाँच, धर्मकाँटा सेवाएँ और किसान के बैंक खाते में सीधे इलेक्ट्रॉनिक भुगतान देना।

इसका संचालन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन SFAC करता है।

प्रमुख मॉड्यूल और हाल के जोड़

FPO मॉड्यूल

कृषक उत्पादक संगठन (FPOs) मंडी में भौतिक रूप से आए बिना अपने संग्रह केंद्रों से सीधे उत्पाद के चित्र और विवरण अपलोड कर सकते हैं। खरीदार दूर से ही बोली लगा सकते हैं।

गोदाम-आधारित व्यापार मॉड्यूल

किसान गोदाम विकास एवं नियामक प्राधिकरण (WDRA) के साथ पंजीकृत गोदामों से उत्पाद बेच सकते हैं — जिससे e-परक्राम्य गोदाम रसीदें और स्थगित बिक्री सक्रिय होती है।

लॉजिस्टिक्स मॉड्यूल

बड़े लॉजिस्टिक्स एग्रीगेटरों को व्यापारियों से जोड़ता है ताकि मंडियों के बीच कृषि उत्पाद का निर्बाध परिवहन हो सके।

किसान रथ

किसानों और व्यापारियों के लिए एक मोबाइल ऐप जो उत्पाद की अंतर-राज्यीय और अंतःराज्यीय आवाजाही हेतु वाहन किराए पर लेने की सुविधा देता है।

प्लेटफ़ॉर्म अंतर-संचालनीयता

e-NAM ने कर्नाटक के ReMS (Rashtriya e-Market Services) जैसे राज्य-स्तरीय प्लेटफ़ॉर्मों के साथ एकीकरण किया है, जिससे अंतर-राज्यीय व्यापार संभव हुआ है।

कृषि-अवसंरचना निधि (AIF)

1 लाख करोड़ रुपये की वित्त-सुविधा (2020 में शुरू, 2024 में विस्तारित) PACS, FPOs, स्टार्ट-अप्स और APMCs को संग्रह केंद्र, शीत-श्रृंखलाएँ, गोदाम, गुणवत्ता जाँच, श्रेणीकरण और पैकेजिंग इकाइयाँ बनाने में सहायता देती है।

e-NAM के लाभ

  • बेहतर मूल्य प्राप्ति: मंडियों में प्रतिस्पर्धी बोली स्थानीय कार्टेलों के प्रभाव को कम करती है।
  • पारदर्शिता: इलेक्ट्रॉनिक नीलामी अपारदर्शी मूल्य-निर्धारण को समाप्त करती है।
  • सीधा भुगतान: बिक्री की राशि 24–48 घंटों के भीतर किसान के बैंक खाते में।
  • FPO सशक्तिकरण: FPOs अढ़तियों को छोड़कर थोक-खरीदारों से सीधे सौदा कर सकते हैं।
  • गुणवत्ता आश्वासन: 6–8 मापदंडों की जाँच दूरस्थ खरीदारों में विश्वास बढ़ाती है।
  • खाद्य प्रसंस्करण से कड़ी: प्रसंस्करणकर्ता और निर्यातक मानकीकृत कच्चा माल प्राप्त करते हैं।
  • आपूर्ति-श्रृंखला दक्षता: एकीकृत लॉजिस्टिक्स फ़सल-उत्तर हानि घटाते हैं।
  • मुद्रास्फीति नियंत्रण: व्यापक भौगोलिक मूल्य-खोज जिंस-मुद्रास्फीति को सहज बनाती है।

चुनौतियाँ

सीमित पहुँच

केवल लगभग 1,400 APMCs — देश की कुल APMCs का लगभग 20% — ही एकीकृत हैं, कई बड़ी मंडियाँ अब भी बाहर हैं।

राजनीतिक अर्थव्यवस्था

एकल-बिंदु बाज़ार शुल्क से राज्यों को मंडी राजस्व गिरने का भय है, और वे e-NAM की शर्तें पूरी करने हेतु APMC अधिनियमों में संशोधन में धीमे हैं। कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु समानांतर राज्य प्लेटफ़ॉर्म बनाए हुए हैं।

अवसंरचना की कमी

इलेक्ट्रॉनिक गेट पास, गुणवत्ता जाँच प्रयोगशालाएँ, इलेक्ट्रॉनिक धर्मकाँटे, विश्वसनीय इंटरनेट और आईटी-स्टाफ़ कई मंडियों में अनुपस्थित हैं।

किसान की भागीदारी

सर्वेक्षण बताते हैं कि लगभग एक-तिहाई किसान e-NAM से अनजान हैं। अनेक अब भी गाँव-स्तर पर स्थानीय व्यापारियों को बेचते हैं, क्योंकि:

  • तुरंत नक़दी की आवश्यकता होती है।
  • कमीशन एजेंटों से अनौपचारिक ऋण मिलता है।
  • APMC तक दूरी अधिक है।
  • डिजिटल साक्षरता कम है।

मध्यस्थों का प्रतिरोध

अढ़तिए और कमीशन एजेंट e-NAM का विरोध करते हैं, क्योंकि यह लेन-देन को पारदर्शी और कर-योग्य बना देता है।

सीमित जिंस-कवरेज

यद्यपि 200+ जिंसें अधिसूचित हैं, सक्रिय व्यापार कुछ ही फसलों तक केंद्रित है — गेहूँ, धान, मक्का, सोयाबीन, सरसों, तुअर, चना।

नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)

डिजिटल कृषि मिशन (2024-26): 2,817 करोड़ रुपये की योजना, जो एग्रीस्टैक (Agristack) नामक डिजिटल लोक-अवसंरचना — किसान ID, डिजिटल फ़सल सर्वेक्षण और मृदा स्वास्थ्य मानचित्र — तैयार कर रही है और यह सीधे e-NAM से जुड़कर उत्पाद और माँग का मिलान करेगी।

बजट 2025-26: नाशवान जिंसों की क़ीमत की अस्थिरता घटाने हेतु e-NAM का एग्रीस्टैक और राष्ट्रीय सब्ज़ी एवं फल मिशन के साथ एकीकरण घोषित। बजट ने e-NAM लेन-देन के माध्यम से एकीकृत ऋण इंटरफ़ेस (Unified Lending Interface) से जुड़े कृषि-ऋण का भी वादा किया।

Unified Market Platform 2.0: e-NAM को राज्य प्लेटफ़ॉर्मों (कर्नाटक का ReMS 2.0, तेलंगाना Agri-Market) से जोड़ने का कार्य जारी है ताकि निर्बाध अंतर-राज्यीय व्यापार हो सके।

PACS का एकीकरण: सहकारिता मंत्रालय के अंतर्गत लगभग 10,000 PACS डिजिटलीकृत किए जा रहे हैं; बड़ा हिस्सा अनाज खरीद के लिए e-NAM से जुड़ेगा।

PLI खाद्य प्रसंस्करण: लाभार्थी ट्रेसबिलिटी के लिए कच्चा माल तेज़ी से e-NAM के माध्यम से ले रहे हैं।

16वाँ वित्त आयोग: e-NAM Phase 2 के तहत मंडी अवसंरचना — गेट पास, जाँच प्रयोगशालाएँ, धर्मकाँटे — बनाने हेतु राज्य-स्तर से बाध्य अनुदानों (tied grants) की माँग।

GST परिषद: 2024 में e-NAM सेवाओं पर GST लागू होने संबंधी स्पष्टीकरणों से विवाद घटे हैं।

MPI 2024: ग्रामीण बाज़ार-पहुँच और पोषण परिणामों के बीच की कड़ी को उजागर करता है, जो दूरस्थ ज़िलों में e-NAM के विस्तार के पक्ष को मज़बूत करता है।

आगे का रास्ता

  • APMC एकीकरण को गति दें: राज्य प्रोत्साहनों के साथ 2027 तक 3,000+ मंडियाँ जोड़ने का लक्ष्य।
  • मंडी अवसंरचना का वित्तपोषण: प्रति मंडी अनुदान 75 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये करें ताकि अवसंरचना अंतराल भरे।
  • जागरूकता एवं प्रशिक्षण: KVKs, FPOs और SHGs के साथ संस्थागत साझेदारियाँ।
  • किसान का सीधा पंजीकरण: किसानों को मंडी की मध्यस्थता के बिना उत्पाद सूचीबद्ध करने की सुविधा।
  • PACS-FPO-e-NAM त्रयी: 1 लाख PACS को ‘अंतिम छोर’ पर एग्रीगेटर के रूप में प्रयोग।
  • अंतर-राज्यीय व्यापार को बल: कृषि विपणन परिषद प्रस्ताव (SC-नियुक्त समिति की सिफ़ारिश की अनुगूँज) के माध्यम से APMC अधिनियमों में सामंजस्य।
  • शीर्ष नियामक: e-NAM शासन एवं शिकायत-निवारण के लिए शीर्ष निकाय की स्थापना।

यूपीएससी प्रासंगिकता

  • जीएस III (कृषि): कृषि विपणन सुधार, APMC, e-NAM, FPOs।
  • जीएस III (अर्थव्यवस्था): डिजिटल लोक-अवसंरचना, मूल्य खोज, आपूर्ति श्रृंखलाएँ।
  • जीएस II (शासन): कृषि बाज़ारों में सहकारी संघवाद।
  • प्रारंभिक-बिंदु: SFAC (संचालक), 2016 में शुभारंभ, 1,400+ मंडियाँ, FPO मॉड्यूल, गोदाम मॉड्यूल, किसान रथ, कृषि-अवसंरचना निधि, WDRA।

संभावित प्रश्न: “‘एक राष्ट्र, एक कृषि बाज़ार’ बनाने में e-NAM की प्रगति का आकलन कीजिए। इसकी पहुँच गहरी करने में डिजिटल कृषि मिशन की क्या भूमिका है?” (जीएस III, 250 शब्द)

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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