भारत का संघवाद (Federalism) एक अनूठा और लचीला मॉडल है। Granville Austin ने इसे “सहकारी संघवाद” कहा, जबकि K.C. Wheare इसे “अर्ध-संघीय” मानते थे। आज इसे “होल्डिंग टुगेदर” (Holding Together) मॉडल के रूप में वर्णित किया जाता है।
भारतीय संघवाद की विशेषताएँ
- लिखित संविधान: केंद्र-राज्य शक्तियाँ परिभाषित।
- सशक्त केंद्र: अनुच्छेद 356, अखिल भारतीय सेवाएँ।
- एकल नागरिकता।
- राज्यसभा — राज्यों का प्रतिनिधित्व।
- स्वतंत्र न्यायपालिका।
होल्डिंग टुगेदर बनाम कमिंग टुगेदर
- कमिंग टुगेदर: स्वतंत्र राज्य एकजुट होकर संघ बनाते हैं (अमेरिका)।
- होल्डिंग टुगेदर: एक बड़ा देश विविधता बनाए रखने के लिए शक्तियाँ बाँटता है (भारत, स्पेन)।
अनुच्छेद 3 — राज्यों का पुनर्गठन
- संसद कानून द्वारा नए राज्य बना सकती है, सीमाएँ बदल सकती है।
- राज्य विधानमंडल की सिफारिश जरूरी, परंतु बाध्यकारी नहीं।
- उदाहरण: तेलंगाना (2014), जम्मू-कश्मीर का विभाजन (2019)।
राज्य पुनर्गठन आयोग (1955)
- भाषायी आधार पर राज्य पुनर्गठन — 1956 का राज्य पुनर्गठन अधिनियम।
- 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों का गठन।
सहकारी संघवाद की संस्थाएँ
- NITI Aayog — सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद।
- अंतरराज्यीय परिषद — अनुच्छेद 263।
- वित्त आयोग — राजस्व वितरण।
- GST परिषद — कर नीति समन्वय।
केंद्र-राज्य तनाव
- राज्यपाल की भूमिका (अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग)।
- वित्तीय असमानता — राजस्व बनाम व्यय जिम्मेदारियाँ।
- समवर्ती सूची के विषयों पर संघर्ष।
यूपीएससी प्रासंगिकता
- GS-II: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, संविधान।
- प्रारंभिक: होल्डिंग टुगेदर, अनुच्छेद 3, 356।
- मुख्य: “भारत में संघवाद के समक्ष चुनौतियाँ और GST परिषद की भूमिका।”
भारत का संघवाद एकता में विविधता का संवैधानिक अभिव्यक्ति है। NITI Aayog, GST परिषद और अंतरराज्यीय परिषद के माध्यम से सहकारी संघवाद को मजबूत करना — 21वीं सदी के भारत की शासन चुनौती है।