भारत में राज्य विधानमंडल एकसदनीय (Unicameral) या द्विसदनीय (Bicameral) हो सकता है। जिन राज्यों में द्विसदनीय विधानमंडल है वहाँ विधान सभा (निम्न सदन) और विधान परिषद (उच्च सदन) दोनों होते हैं।
संवैधानिक प्रावधान
अनुच्छेद 168
अनुच्छेद 168 प्रत्येक राज्य के लिए एक विधानमंडल का प्रावधान करता है जिसमें राज्यपाल और एक या दो सदन शामिल हों।
अनुच्छेद 169
अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद विधान परिषद का सृजन या समाप्ति कर सकती है यदि संबंधित राज्य की विधान सभा इस प्रभाव का संकल्प पास करे।
अनुच्छेद 171
अनुच्छेद 171 विधान परिषद की सदस्य संख्या निर्धारित करता है। विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या विधान सभा की कुल सदस्य संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं होगी और 40 से कम नहीं होगी।
विधान परिषद की संरचना
विधान परिषद के सदस्य पाँच श्रेणियों से आते हैं:
- 1/3 सदस्य — विधान सभा सदस्यों द्वारा निर्वाचित।
- 1/3 सदस्य — स्थानीय निकायों द्वारा निर्वाचित।
- 1/12 सदस्य — स्नातक क्षेत्र से।
- 1/12 सदस्य — शिक्षक क्षेत्र से।
- 1/6 सदस्य — राज्यपाल द्वारा मनोनीत (साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता, समाज सेवा)।
विधान परिषद की विशेषताएँ
- कार्यकाल — 6 वर्ष; प्रत्येक 2 वर्ष में 1/3 सदस्य सेवानिवृत्त।
- स्थायी सदन — इसे भंग नहीं किया जा सकता।
- विधायी शक्ति — साधारण विधेयकों में विधान सभा से कमज़ोर।
- धन विधेयक — विधान परिषद में पेश नहीं हो सकता।
वर्तमान विधान परिषद वाले राज्य
वर्तमान में 6 राज्यों में विधान परिषद है: उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना।
यूपीएससी प्रासंगिकता
GS II में विधान परिषद, संसदीय प्रणाली और राज्य विधानमंडल पर प्रश्न पूछे जाते हैं। राज्यसभा से तुलना करके उत्तर दें।