भारतीय संविधान की उद्देशिका (Preamble) संविधान का प्रारंभिक वक्तव्य है जो उसके लक्ष्यों, उद्देश्यों और मूल्यों को स्पष्ट करता है। सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में कहा कि उद्देशिका संविधान का एक भाग है, किंतु इसे सामान्य न्यायिक समीक्षा के माध्यम से संशोधित नहीं किया जा सकता।
उद्देशिका का पाठ
उद्देशिका का पाठ है:
“हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में, व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए, दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई. को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”
उद्देशिका के प्रमुख शब्दों का विश्लेषण
सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न (Sovereign)
भारत किसी बाहरी शक्ति के अधीन नहीं है। यह आंतरिक और बाहरी दोनों मामलों में स्वतंत्र है।
समाजवादी (Socialist)
42वें संशोधन (1976) द्वारा जोड़ा गया। इसका अर्थ है उत्पादन के साधनों पर समाज का नियंत्रण और आर्थिक असमानता में कमी। भारत का समाजवाद “डेमोक्रेटिक सोशलिज्म” है, न कि मार्क्सवादी।
पंथनिरपेक्ष (Secular)
42वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया। राज्य का कोई आधिकारिक धर्म नहीं है। सभी धर्मों को समान सम्मान।
लोकतंत्रात्मक (Democratic)
भारत प्रतिनिधि लोकतंत्र है जहाँ जनता वयस्क मताधिकार के माध्यम से अपने प्रतिनिधि चुनती है।
गणराज्य (Republic)
राज्य प्रमुख वंशानुगत नहीं, बल्कि निर्वाचित होता है। भारत के राष्ट्रपति निर्वाचित होते हैं।
न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता
- न्याय — सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक।
- स्वतंत्रता — विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की।
- समता — प्रतिष्ठा और अवसर की।
- बंधुता — व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता-अखंडता।
उद्देशिका की न्यायिक स्थिति
बेरुबारी मामले (1960) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि उद्देशिका संविधान का भाग नहीं है। किंतु केशवानंद भारती (1973) में यह माना गया कि उद्देशिका संविधान का भाग है और इसे संविधान की व्याख्या के लिए उपयोग किया जा सकता है।
42वाँ संशोधन, 1976
इंदिरा गांधी सरकार ने 1976 में 42वें संशोधन द्वारा उद्देशिका में तीन शब्द जोड़े: “समाजवादी”, “पंथनिरपेक्ष” और “अखंडता”।
यूपीएससी प्रासंगिकता
उद्देशिका यूपीएससी GS II में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसके प्रमुख पहलू: उद्देशिका के शब्दों का अर्थ, 42वाँ संशोधन, न्यायिक स्थिति और इसकी भूमिका संवैधानिक व्याख्या में।
सामान्य प्रश्न
उद्देशिका क्या है?
उद्देशिका (Preamble) संविधान का प्रारंभिक वक्तव्य है जो संविधान के उद्देश्यों और मूल्यों को स्पष्ट करता है। यह संविधान की व्याख्या का आधार है।
42वें संशोधन में उद्देशिका में क्या जोड़ा गया?
42वें संशोधन (1976) में ‘समाजवादी’, ‘पंथनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ शब्द जोड़े गए।
क्या उद्देशिका संविधान का भाग है?
हाँ। केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि उद्देशिका संविधान का एक भाग है।