H-CNG (Hydrogen Compressed Natural Gas — हाइड्रोजन संपीडित प्राकृतिक गैस) CNG में 18% हाइड्रोजन मिलाकर बनाया जाता है। यह एक स्वच्छ ईंधन है जो पारंपरिक CNG की तुलना में कम प्रदूषण करता है।
H-CNG क्या है?
H-CNG में 18% H₂ और 82% CNG होता है। इस अनुपात में इंजन में बिना किसी बड़े बदलाव के उपयोग किया जा सकता है। वाहन निर्माताओं के अनुसार यह अनुपात इष्टतम (optimal) है।
H-CNG के लाभ
- कम उत्सर्जन — HC (हाइड्रोकार्बन) में 70% तक कमी।
- CO₂ उत्सर्जन में कमी।
- बेहतर दहन — हाइड्रोजन की उच्च ज्वलनशीलता।
- मौजूदा इंजन में न्यूनतम बदलाव।
- ईंधन दक्षता में सुधार।
दिल्ली पायलट परियोजना
CSIR-Indian Institute of Petroleum (IIP) देहरादून ने H-CNG बनाने की तकनीक विकसित की। दिल्ली में IGL (Indraprastha Gas Limited) के सहयोग से पायलट परियोजना चलाई गई। DTC (Delhi Transport Corporation) की बसों में H-CNG का परीक्षण सफल रहा।
उत्पादन विधि
H-CNG बनाने की दो प्रमुख विधियाँ हैं:
- SMR + PSA (Steam Methane Reforming + Pressure Swing Adsorption) — CNG से हाइड्रोजन निकालकर मिलाना।
- इलेक्ट्रोलिसिस — हरित हाइड्रोजन उत्पादन।
चुनौतियाँ
- हाइड्रोजन भंडारण और परिवहन जटिल है।
- उत्पादन लागत अधिक है।
- वितरण नेटवर्क का अभाव।
यूपीएससी प्रासंगिकता
GS III में स्वच्छ ऊर्जा, वाहन उत्सर्जन और हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था पर प्रश्नों में H-CNG प्रासंगिक है। राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन से भी जोड़ें।