अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund, IMF) की स्थापना औपचारिक रूप से 27 दिसंबर 1945 को हुई थी, जब 29 देशों ने ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (Bretton Woods Conference, जुलाई 1944) में तैयार किए गए IMF Articles of Agreement पर हस्ताक्षर किए। IMF ने वित्तीय परिचालन 1 मार्च 1947 से शुरू किए। इसका मुख्यालय वाशिंगटन डीसी (Washington DC), अमेरिका में है, और वर्तमान में इसके 191 सदस्य देश हैं (नवीनतम — अंडोरा, 2020)। IMF का मुख्य कार्य वैश्विक मौद्रिक स्थिरता, भुगतान-संतुलन (balance of payments) सहायता, और सदस्य देशों की समष्टि-आर्थिक नीतियों की निगरानी है। प्रबंध निदेशक (Managing Director) क्रिस्टालिना जॉर्जिएवा (Kristalina Georgieva, बुल्गारिया) हैं, जो अक्टूबर 2019 से इस पद पर हैं और जिन्हें 2024 में दूसरा कार्यकाल मिला।
परिचय (Introduction)

1929-30 की महामंदी और द्वितीय विश्व युद्ध के विनाश ने यह स्पष्ट कर दिया था कि बिना मौद्रिक सहयोग के वैश्विक अर्थव्यवस्था टिकाऊ नहीं हो सकती। 1944 में अमेरिका के न्यू हैम्पशायर राज्य के ब्रेटन वुड्स कस्बे में 44 देशों के 730 प्रतिनिधि एकत्र हुए — जिसमें ब्रिटिश अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स (John Maynard Keynes) और अमेरिकी ट्रेज़री अधिकारी हैरी डेक्सटर व्हाइट (Harry Dexter White) के बीच ऐतिहासिक वार्ताएँ हुईं। उन्हीं वार्ताओं से तीन संस्थाओं की रूपरेखा तय हुई — IMF, IBRD (अब World Bank Group का हिस्सा), और प्रस्तावित ITO।
UPSC अभ्यर्थियों के लिए IMF GS Paper II (अंतरराष्ट्रीय संगठन) और GS Paper III (अर्थव्यवस्था — विनिमय दर, BoP, बाह्य ऋण) — दोनों का अनिवार्य विषय है।
मुख्य तथ्य एक नज़र में (Quick Facts at a Glance)
- औपचारिक स्थापना: 27 दिसंबर 1945
- ब्रेटन वुड्स सम्मेलन: 1–22 जुलाई 1944
- परिचालन प्रारंभ: 1 मार्च 1947
- मुख्यालय: Washington DC, अमेरिका (19th Street NW)
- सदस्य संख्या: 191
- प्रबंध निदेशक: क्रिस्टालिना जॉर्जिएवा (अक्टूबर 2019–वर्तमान)
- प्रथम उप-प्रबंध निदेशक: गीता गोपीनाथ (Gita Gopinath) — भारतीय मूल की अमेरिकी अर्थशास्त्री (जनवरी 2022–वर्तमान)
- भारत का सदस्यता-वर्ष: 27 दिसंबर 1945 (संस्थापक सदस्य)
- भारत का कोटा अंश: ~2.75% (8वाँ सबसे बड़ा)
- SDR मुद्रा-टोकरी: USD, EUR, GBP, JPY, CNY (अक्टूबर 2016 से)
- पारंपरिक नियम: MD यूरोपीय, World Bank President अमेरिकी
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (Mount Washington Hotel, न्यू हैम्पशायर) में दो प्रतिस्पर्धी योजनाएँ टकराईं — कीन्स की “International Clearing Union” योजना (एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय मुद्रा “बैंकर” के साथ) और व्हाइट की अमेरिकी योजना (अमेरिकी डॉलर-केंद्रित, स्थिर विनिमय दर)। अंततः व्हाइट योजना के निकट एक समझौता हुआ — डॉलर सोने से बँधा (Gold-Dollar Standard, $35 = 1 ounce gold) और सदस्य मुद्राएँ डॉलर से बँधीं।
27 दिसंबर 1945 को 29 देशों ने Articles of Agreement पर हस्ताक्षर किए। 1971 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने डॉलर-स्वर्ण परिवर्तनीयता निलंबित की (“Nixon Shock”); इसके बाद 1976 के Jamaica Accord ने अस्थिर विनिमय दर (floating exchange rate) को वैधता दी और सोने का आधिकारिक भूमिका समाप्त की।
IMF के मुख्य कार्य (Core Functions)

IMF के तीन मूल आदेश (mandates) हैं:
- निगरानी (Surveillance): सदस्यों की समष्टि-आर्थिक नीतियों की वार्षिक समीक्षा (Article IV consultations); वैश्विक रिपोर्टें — World Economic Outlook (WEO), Global Financial Stability Report (GFSR), Fiscal Monitor।
- ऋण/उधार (Lending): भुगतान-संतुलन संकट में सदस्यों को सशर्त (conditional) वित्तीय सहायता।
- क्षमता निर्माण (Capacity Development): सदस्यों को कर प्रशासन, मौद्रिक नीति, सांख्यिकी पर तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण।
ऋण सुविधाएँ (Lending Facilities)
| सुविधा | पूरा नाम | उपयोग |
|---|---|---|
| SBA | Stand-By Arrangement | अल्पकालिक BoP कठिनाई — 12–36 माह |
| EFF | Extended Fund Facility | संरचनात्मक समायोजन (structural adjustment) — 3 वर्ष तक |
| FCL | Flexible Credit Line | मज़बूत बुनियादी ढाँचे वाले देशों के लिए “बीमा” |
| PLL | Precautionary and Liquidity Line | मध्यम-कमज़ोर देशों के लिए सावधानी ऋण |
| RFI | Rapid Financing Instrument | संकट-समय (झटके) त्वरित सहायता |
| RST | Resilience and Sustainability Trust | जलवायु और महामारी-तैयारी (2022 से) |
| PRGT | Poverty Reduction and Growth Trust | LIC के लिए रियायती ऋण |
हाल ही: पाकिस्तान को सितंबर 2024 में $7 अरब का 37-माह EFF स्वीकृत किया गया — पाकिस्तान का 25वाँ IMF कार्यक्रम। मिस्र, अर्जेंटीना, और श्रीलंका भी हाल के बड़े कार्यक्रम हैं।
विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights, SDR)
SDR एक अंतरराष्ट्रीय आरक्षित परिसंपत्ति है, जो IMF द्वारा 1969 में सृजित की गई। यह मुद्रा नहीं — यह सदस्य देशों के विदेशी मुद्रा भंडार पर एक “दावा” है। SDR का मूल्य पाँच मुद्राओं की भारित टोकरी पर आधारित है:
- USD (अमेरिकी डॉलर) — ~43%
- EUR (यूरो) — ~29%
- CNY (चीनी रॅन्मिन्बी) — ~12% (अक्टूबर 2016 से जोड़ी गई — एक ऐतिहासिक मील का पत्थर)
- JPY (जापानी येन) — ~8%
- GBP (ब्रिटिश पाउंड) — ~7%
टोकरी समीक्षा हर 5 वर्ष पर होती है। अगस्त 2021 में IMF ने ऐतिहासिक $650 अरब का सामान्य SDR आबंटन किया — कोविड-राहत के लिए सबसे बड़ा।
कोटा प्रणाली (Quota System)
प्रत्येक सदस्य का कोटा (quota) उसके सापेक्ष आर्थिक आकार पर आधारित होता है। कोटा निर्धारित करता है:
- वोटिंग शक्ति (बेसिक वोट + कोटा-आधारित वोट)
- वित्तीय अंशदान की अधिकतम राशि
- उधार लेने की क्षमता (आम तौर पर कोटा का गुणक)
- SDR आबंटन का हिस्सा
प्रमुख कोटा अंश (2026):
| देश | कोटा अंश (%) | वोटिंग शक्ति (%) |
|---|---|---|
| अमेरिका | ~17.4 | ~16.5 |
| जापान | ~6.5 | ~6.1 |
| चीन | ~6.4 | ~6.1 |
| जर्मनी | ~5.6 | ~5.3 |
| फ़्रांस/UK | ~4.2 प्रत्येक | ~4.0 प्रत्येक |
| भारत | ~2.75 | ~2.65 |
अमेरिका के पास 15% से अधिक वोट होने के कारण उसे प्रभावी वीटो प्राप्त है (मुख्य निर्णयों के लिए 85% बहुमत आवश्यक)। 16वीं सामान्य कोटा समीक्षा (2023) ने कुल कोटा 50% बढ़ाने का निर्णय लिया, परंतु अंशों के पुनर्निर्धारण को 17वीं समीक्षा (2025–2026) तक स्थगित किया गया।
संगठनात्मक संरचना (Organisational Structure)
- Board of Governors: सर्वोच्च निकाय; प्रत्येक सदस्य का एक गवर्नर (आम तौर पर वित्त मंत्री या केंद्रीय बैंक प्रमुख)। भारत के लिए वर्तमान गवर्नर वित्त मंत्री हैं।
- Executive Board: दैनिक संचालन; 24 कार्यकारी निदेशक — 5 सबसे बड़े कोटा-धारक नियुक्त करते हैं, शेष चुने जाते हैं।
- IMFC (International Monetary and Financial Committee): वर्ष में दो बार बैठक; नीति-सलाहकार निकाय।
- Managing Director: 5-वर्षीय कार्यकाल; पारंपरिक रूप से यूरोपीय।
- First Deputy MD: पारंपरिक रूप से अमेरिकी।
IMF और भारत (IMF and India)
भारत 27 दिसंबर 1945 का संस्थापक सदस्य है। प्रमुख प्रसंग:
- 1966: रुपये का अवमूल्यन (devaluation) IMF दबाव में।
- 1981: ₹5,000 करोड़ का EFF (तब का सबसे बड़ा)।
- 1991: भुगतान-संतुलन संकट; 47-टन सोना गिरवी; SBA + Compensatory Financing — आर्थिक उदारीकरण का तत्काल कारण।
- 2016 के बाद: भारत IMF का “ऋण-दाता” — Financial Transactions Plan (FTP) में।
- 2024: भारत ने MDB सुधार और कोटा-पुनर्निर्धारण की मुखर वकालत की — “Voice and Quota” की मांग।
विस्तृत संदर्भ के लिए रुपये का अंतरराष्ट्रीयकरण और बहुपक्षीय विकास बैंक सुधार — NDB, AIIB पढ़ें। केंद्रीय बैंक अंतर के लिए केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) और भारतीय अर्थव्यवस्था में स्वतंत्र नियामकों के लिए भारत में स्वतंत्र नियामक संस्थाएँ — RBI, SEBI, TRAI देखें।
चुनौतियाँ और आलोचना (Challenges and Criticism)
- पश्चिमी प्रभुत्व: कोटा-आधारित वोटिंग वैश्विक GDP-अंशों के पीछे है — चीन, भारत, ब्राज़ील का प्रतिनिधित्व कम।
- MD पर यूरोपीय एकाधिकार: “Gentlemen’s Agreement” अब आलोचना का विषय।
- सशर्तता (conditionality): “Washington Consensus” — संरचनात्मक समायोजन कार्यक्रमों ने 1980-90 के दशक में लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में सामाजिक खर्च-कटौती और गरीबी बढ़ाई।
- जलवायु और असमानता: RST के बावजूद, जलवायु-वित्त IMF के पारंपरिक आदेश के बाहर माना जाता रहा।
- डिजिटल मुद्राओं और cryptocurrency पर नीति-स्पष्टता का अभाव।
UPSC के लिए प्रासंगिकता (UPSC Relevance)
- Prelims: स्थापना तिथि (27 दिसंबर 1945); ब्रेटन वुड्स (जुलाई 1944); परिचालन प्रारंभ (1 मार्च 1947); मुख्यालय Washington DC; 191 सदस्य; MD क्रिस्टालिना जॉर्जिएवा; SDR टोकरी (USD-EUR-CNY-JPY-GBP, 2016); भारत का कोटा ~2.75% (8वाँ); ऋण सुविधाएँ (SBA, EFF, FCL, RFI, RST)।
- Mains GS-II: IMF कोटा सुधार और वैश्विक शासन-लोकतांत्रीकरण; पश्चिमी प्रभुत्व बनाम Global South।
- Mains GS-III: 1991 के संकट और LPG सुधारों में IMF की भूमिका; जलवायु-वित्त RST का मूल्यांकन।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Mains Practice Questions)
- ब्रेटन वुड्स प्रणाली के पतन (1971) से लेकर 2026 तक IMF की भूमिका के विकास का परीक्षण कीजिए। (150 शब्द)
- “IMF की कोटा प्रणाली एक 21वीं सदी के बहुध्रुवीय विश्व में अनुपयुक्त हो चली है” — इस कथन के आलोक में 16वीं/17वीं कोटा समीक्षा और भारत की स्थिति का मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द)
निष्कर्ष (Conclusion)
27 दिसंबर 1945 को जिस संगठन की नींव रखी गई थी, वह आज वैश्विक मौद्रिक स्थिरता का मुख्य रक्षक है। 1991 में जिस IMF ने भारत को संकट से उबारा, वही भारत आज IMF का ऋण-दाता और सुधार-आवाज़ बन चुका है। 2026 के बहुध्रुवीय युग में — जब चीन, BRICS NDB, AIIB, और cryptocurrency पारंपरिक IMF संरचना को चुनौती दे रहे हैं — संगठन के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या वह अपनी कोटा प्रणाली, MD-नियुक्ति परंपरा, और सशर्तता ढांचे को आधुनिक बना पाएगा। UPSC अभ्यर्थी के लिए IMF केवल एक संगठन नहीं — यह वैश्विक आर्थिक शासन के संक्रमण की सबसे जीवंत केस-स्टडी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
IMF की स्थापना कब हुई थी?
IMF की औपचारिक स्थापना 27 दिसंबर 1945 को हुई, जब 29 देशों ने ब्रेटन वुड्स में तय Articles of Agreement पर हस्ताक्षर किए। वित्तीय परिचालन 1 मार्च 1947 से शुरू हुए।
IMF का मुख्यालय कहाँ है?
IMF का मुख्यालय वाशिंगटन डीसी, अमेरिका में है (19th Street NW, World Bank के समीप)। एक यूरोपीय कार्यालय पेरिस में और एशिया कार्यालय टोक्यो में हैं।
ब्रेटन वुड्स सम्मेलन क्या था?
ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (1–22 जुलाई 1944) अमेरिका के न्यू हैम्पशायर राज्य में हुआ, जिसमें 44 देशों के 730 प्रतिनिधियों ने युद्धोत्तर वैश्विक मौद्रिक व्यवस्था की रूपरेखा बनाई। इसी से IMF और World Bank (IBRD) का जन्म हुआ।
IMF के कितने सदस्य हैं?
वर्तमान में 191 सदस्य देश हैं। नवीनतम सदस्य अंडोरा (2020) है। केवल कुछ देश — जैसे क्यूबा, उत्तर कोरिया, मोनाको — IMF के सदस्य नहीं हैं।
SDR क्या है?
विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights, SDR) एक अंतरराष्ट्रीय आरक्षित परिसंपत्ति है, जिसे IMF ने 1969 में बनाया। इसका मूल्य पाँच प्रमुख मुद्राओं — USD, EUR, CNY, JPY, GBP — की भारित टोकरी पर आधारित है (अक्टूबर 2016 से)।
IMF और World Bank में क्या अंतर है?
IMF अल्पकालिक भुगतान-संतुलन संकट और मौद्रिक स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करता है, जबकि World Bank दीर्घकालिक विकास परियोजनाओं और गरीबी-उन्मूलन के लिए ऋण देता है। दोनों संस्थाएँ ब्रेटन वुड्स (1944) से जन्मी हैं।
भारत का IMF में कोटा अंश क्या है?
भारत का कोटा अंश लगभग 2.75% है — यह उसे 8वाँ सबसे बड़ा सदस्य बनाता है। 16वीं कोटा समीक्षा (2023) में कुल कोटा 50% बढ़ा, परंतु अंशों का पुनर्निर्धारण 17वीं समीक्षा (2025–26) तक स्थगित है।
IMF के वर्तमान प्रबंध निदेशक कौन हैं?
वर्तमान प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जिएवा (Kristalina Georgieva) — बुल्गारिया की पूर्व यूरोपीय आयुक्त और World Bank की पूर्व CEO हैं। वे अक्टूबर 2019 से इस पद पर हैं और 2024 में दूसरा कार्यकाल मिला।
1991 के संकट में IMF की क्या भूमिका थी?
1991 में भारत के भुगतान-संतुलन संकट में IMF ने SBA और Compensatory Financing के रूप में लगभग $2.2 अरब की सहायता दी। शर्तों के तहत भारत को 47 टन सोना गिरवी रखना पड़ा। यही संकट LPG सुधारों (Liberalisation, Privatisation, Globalisation) का तत्काल कारण बना।