बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights — IPR) नवाचार और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने का एक कानूनी तंत्र है। यह निर्माताओं, लेखकों और उद्यमियों को उनके मानसिक श्रम के फल का एकाधिकार देता है। भारत के लिए IPR एक जटिल विषय है — एक ओर वैश्विक TRIPS दायित्व, दूसरी ओर किफायती दवाओं तक पहुँच की आवश्यकता।
IPR के प्रकार
पेटेंट (Patent)
नई खोज या आविष्कार के लिए एकाधिकार अधिकार। भारत में पेटेंट 20 वर्ष के लिए होता है। भारतीय पेटेंट अधिनियम, 1970 में धारा 3(d) दवाओं के एवरग्रीनिंग को रोकती है — यह विकासशील देशों के लिए एक महत्त्वपूर्ण प्रावधान है।
कॉपीराइट (Copyright)
साहित्यिक, कलात्मक, संगीत रचनाओं के लिए। लेखक के जीवनकाल + 60 वर्ष।
ट्रेडमार्क (Trademark)
व्यापारिक चिह्न और ब्रांड नाम के लिए। 10 वर्ष, नवीकरणीय।
भौगोलिक संकेतक (GI Tag)
किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से जुड़े उत्पादों के लिए। दार्जिलिंग चाय, बनारसी साड़ी, तिरुपति लड्डू इसके उदाहरण हैं।
भारत की राष्ट्रीय IPR नीति, 2016
2016 में भारत ने पहली राष्ट्रीय IPR नीति जारी की। इसके सात उद्देश्य हैं:
- IPR जागरूकता बढ़ाना
- IPR उत्पादन को प्रोत्साहित करना
- कानूनी ढाँचे को मजबूत करना
- प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना
- व्यावसायीकरण को बढ़ावा देना
- प्रवर्तन और न्यायनिर्णयन को बेहतर बनाना
- मानव पूँजी विकास
TRIPS समझौता और भारत
TRIPS (Trade-Related Aspects of Intellectual Property Rights) WTO का एक अनिवार्य समझौता है। भारत TRIPS का सदस्य है। तनाव के बिंदु:
- किफायती जेनेरिक दवाओं का उत्पादन बनाम पेटेंट सुरक्षा
- TRIPS-Plus प्रावधानों का दबाव
- COVID-19 वैक्सीन पेटेंट छूट पर भारत-दक्षिण अफ्रीका का संयुक्त प्रस्ताव
भारत का नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र
- Startup India: स्टार्टअप पंजीकरण, कर छूट, फंड
- Atal Innovation Mission: ATL (Atal Tinkering Labs)
- CSIR, DRDO, IITs: अनुसंधान संस्थान
- Global Innovation Index में भारत की बेहतर रैंकिंग
यूपीएससी की दृष्टि से
IPR GS-III (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार) और GS-II (अंतर्राष्ट्रीय संबंध — WTO) दोनों के लिए प्रासंगिक है। GI टैग, पेटेंट धारा 3(d) और TRIPS विवाद महत्त्वपूर्ण परीक्षा-बिंदु हैं।