21वीं सदी के युद्ध का चेहरा बदल रहा है। पारंपरिक हथियारों के स्थान पर तकनीकी रूप से उन्नत प्रणालियाँ केंद्र में आ रही हैं। नई उभरती रक्षा प्रौद्योगिकियाँ (Emerging Defence Technologies) न केवल युद्ध की क्षमता बदल रही हैं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर रही हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रक्षा
- स्वायत्त हथियार प्रणालियाँ (AWS) — बिना मानव हस्तक्षेप के निर्णय लेने वाले हथियार।
- ड्रोन झुंड (Drone Swarms) — एक साथ सैकड़ों ड्रोन।
- साइबर युद्ध — AI-सक्षम साइबर हमले।
- खुफिया विश्लेषण — AI से बड़े डेटा का त्वरित विश्लेषण।
- भारत — DRDO की AI-सक्षम परियोजनाएँ; राष्ट्रीय AI मिशन।
क्वांटम प्रौद्योगिकी
- क्वांटम कंप्यूटिंग — पारंपरिक एन्क्रिप्शन तोड़ने में सक्षम।
- क्वांटम क्रिप्टोग्राफी — अभेद्य संचार।
- क्वांटम सेंसर — उन्नत निगरानी।
- भारत — राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) 2023; 6,003 करोड़ रुपये।
हाइपरसोनिक हथियार
हाइपरसोनिक हथियार वे हैं जो ध्वनि की गति से 5 गुना (Mach 5) या अधिक तेज़ चलते हैं। इन्हें वर्तमान मिसाइल-रोधी प्रणालियाँ रोक नहीं सकतीं।
- रूस — Avangard, Kinzhal।
- चीन — DF-17 हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल।
- भारत — DRDO का Shourya मिसाइल; HSTDV (Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle) का परीक्षण।
निर्देशित ऊर्जा हथियार (DEW)
DEW लेज़र, माइक्रोवेव या कण किरण का उपयोग कर लक्ष्य को नष्ट करते हैं। प्रकाश की गति से काम करने के कारण ये बेहद प्रभावशाली हैं।
- लेज़र हथियार — अमेरिकी नौसेना का LAWS।
- माइक्रोवेव हथियार — ड्रोन नष्ट करने में उपयोगी।
- भारत — DRDO का DURGA-II (Directionally Unrestricted Ray-Gun Array)।
साइबर और अंतरिक्ष युद्ध
- साइबर युद्ध — बुनियादी ढाँचे पर हमले।
- अंतरिक्ष युद्ध — उपग्रह नष्ट करने की क्षमता (ASAT हथियार)।
- भारत — 2019 में मिशन शक्ति — ASAT परीक्षण सफल।
यूपीएससी प्रासंगिकता
GS III में रक्षा प्रौद्योगिकी, AI, क्वांटम, हाइपरसोनिक और DEW पर प्रश्न पूछे जाते हैं। भारत की पहलें और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखें।